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चुनावी डायरी

बिहार कांग्रेस में 11 साल बाद बड़ा बदलाव, लेकिन ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर क्यों नहीं बन रही सहमति?

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पटना स्थित कार्यालय में बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम (फाइल फोटो - X/@INCBihar)
पटना स्थित कार्यालय में बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम (फाइल फोटो - X/@INCBihar)

पटना | बिहार में कांग्रेस का आधार तेज़ी से घटा है, हाल में हुए विधानसभा चुनाव में इसने मात्र छह सीटें जीतीं।  ऐसे में 11 साल के बाद बिहार के ब्लॉक व जिला स्तर के नेतृत्व में 11 साल के बाद बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। पर कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने नए जिलाध्यक्षों की जो सूची जारी की है, इसको लेकर बिहार कांग्रेस में गहरी असहमति है।

बिहार कांग्रेस ने मांग की है कि नए जिलाध्यक्ष का चुनाव करते समय सामाजिक संतुलन को ध्यान रखा जाना चाहिए। बिहार के नेताओं ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि केंद्रीय कांग्रेस की ओर से बिहार के नए नेतृत्व की जो सूची जारी की गई है उसमें 45 फीसदी नेता ऊंची जाति से हैं। ऐसे में बिहार कांग्रेस के नेताओं की मांग है कि उनकी ओर से जो लिस्ट प्रस्तावित थी, उस पर पुनर्विचार किया जाए।

53 में से 24 जिलाध्यक्ष अगड़ी जाति के

बता दें कि बिहार में 38 प्रशासनिक जिले हैं लेकिन कांग्रेस ने इसे 53 संगठनात्मक जिलों में बांटा है। बीती 30 मार्च को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणु गोपाल ने बिहार के नए जिलाध्यक्षों की एक सूची जारी की थी। इस सूची में 24 जिलाध्यक्ष उच्च जाति से संबंध हैं। 12 जिलाध्यक्ष ओबीसी से हैं जिसमें आठ यादव हैं। पांच जिलाध्यक्ष पिछड़ी जाति से, तीन अति पिछड़ी जाति से संबंधित हैं। इसके अलावा, आठ मुस्लिम व एक सिख धर्म से हैं।

‘नई सूची राहुल गांधी के संदेश के विपरीत’

बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि सही सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए हम केंद्रीय नेतृत्व से सूची में संशोधन की मांग कर रहे हैं। साथ ही हम ब्लॉक जिलाध्यक्षों की भी एक अनुमानित लिस्ट बना रहे हैं।

गौरतलब है कि राहुल गांधी ने 2025 में बिहार में संविधान बचाओ यात्रा निकाली थी, इस दौरान स्थानीय नेताओं ने उनसे पार्टी में बड़े बदलावों की मांग की थी जो सोशल जस्टिस को दर्शाते हों।

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