दुनिया गोल
राष्ट्रपति ट्रंप के देश के नाम संबोधन के बाद ईरानी राष्ट्रपति ने भी अमेरिकी जनता को लेकर खुला खत
नई दिल्ली | एक अप्रैल को राष्ट्रपति ट्रंप ने देश के नाम संबोधन देते हुए कहा कि अभी दो से तीन सप्ताह में अमेरिका ईरान से बाहर निकल सकता है। साथ ही कहा कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका आने वाले हफ़्तों में ईरान पर ‘बड़ा हमला’ करेगा और उसे ‘पाषाण युग में पहुंचा देगा’।
इस पर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिकी जनता को खुला पत्र लिखकर संबोधित किया है। जिसमें कहा गया है कि ईरानी जनता अमेरिकी लोगों के प्रति कोई दुश्मनी नहीं रखती है। खत में उन्होंने अमेरिकी प्रशासन पर ईरान के खिलाफ “इजरायल के प्रॉक्सी के रूप में लड़ने का आरोप लगाया है।
उधर, चीन ने भी ट्रंप के बयान पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों के आवाजाही में रुकावट का मुख्य कारण ‘ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इसराइल के अवैध सैन्य अभियान’ हैं।
युद्ध को लेकर इसे चीन का अब तक का सबसे सख्त बयान माना जा रहा है। गौरतलब है कि चीन ने हाल में पाक के साथ मिलकर पीस प्लान पेश किया है।
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ईरान युद्ध से अब तक 5000 से ज्यादा मौतें, 8 भारतीयों की भी जान गई
नई दिल्ली | ईरान युद्ध का पांचवां सप्ताह समाप्ति की ओर है और युद्ध ने अब तक पांच हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली है।
मौतों की यह संख्या कई एजेंसियों ने एकत्र की है, जिसे अमेरिकी समाचार एंजेसी रॉयटर्स ने प्रकाशित किया है।
खाड़ी में रहने वाले भारतीय भी युद्ध की जद में हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 8 भारतीयों की मौत हो चुकी है जबकि एक लापता है।
ईरान में अब तक सबसे ज्यादा कुल 3 हजार, पांच सौ, 19 मौते हुई हैं। और करीब 19 हजार लोग घायल हैं।
लेबनान में 1318 मौतें हुई हैं। इसमें ईरान समर्थित 400 हिजबुल्ला लड़ाकू शामिल हैं। साथ ही यहां तीन यूएन के शांति सैनिकों की भी मौत हुई हैं। जिसकी भारत समेत कई देशों ने निंदा की है।
अब तक इज़रायल के 19 लोगों की मौतें हुई हैं। इज़रायल ने दस सैनिकों की मौत की पुष्टि की है। उधर अमेरिका के अबतक 13 सैनिक मारे जा चुके हैं।
इसके अलावा खाड़ी के आठ देशों में आम लोग मारे गए हैं। यूएई में सबसे ज्यादा 11 लोग व कतर व कुवैत में 7-7 लोगों की मौत हो चुकी है। यह युद्ध बड़ी मानवीय तबाही में बदल गया है।
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ईरान युद्ध में समझौता कराने के लिए सामने पाक के साथ आया चीन, क्या है वजह?
नई दिल्ली | ईरान युद्ध पर अब तक सधी हुई प्रतिक्रिया देते रहे चीन ने शांति समझौते का प्रस्ताव पेश करके दुनिया को चौंका दिया है।
यह प्रस्ताव 31 मार्च की शाम को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है जो इस समय बीजिंग के दौरे पर हैं।
शांति प्रस्ताव चीन व पाकिस्तान की ओर से संयुक्त रूप से जारी हुआ है। इसमें पांच बिंदुओं में संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत समझौते की शर्तें रखी गई हैं।
इससे पहले 29 व 30 मार्च को पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने सऊदी अरब, तुर्किये व मिस्त्र के विदेश मंत्रियों के साथ मिलकर शांति समझौते की योजना को लेकर मंथन किया था।
हालांकि इस बैठक को लेकर ईरान ने कहा था कि उनसे समझौते पर कोई सीधी वार्ता नहीं की है।
क्या है चीन-पाक का पीस प्लान?
1- तत्काल युद्धविराम : सबसे पहली शर्त यह है कि दोनों पक्ष (अमेरिका/इजरायल और ईरान) तत्काल प्रभाव से सैन्य हमले रोकें ताकि मानवीय सहायता के लिए गलियारा (Corridor) बनाया जा सके।
2- संयुक्त राष्ट्र (UN) की निगरानी में वार्ता: शांति प्रक्रिया किसी एक देश के प्रभाव में न होकर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों के तहत हो। चीन ने प्रस्ताव दिया है कि एक निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय समिति इस समझौते की निगरानी करे।
3- संप्रभुता का सम्मान (Respect for Sovereignty): प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि ईरान की क्षेत्रीय अखंडता और उसकी संप्रभुता का सम्मान किया जाए। किसी भी बाहरी शक्ति को ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
4- आर्थिक प्रतिबंधों में ढील: चीन ने शर्त रखी है कि शांति वार्ता शुरू होने के साथ ही ईरान पर लगे उन कड़े प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाया जाए, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।
5- क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा: एक ऐसा साझा सुरक्षा तंत्र बनाया जाए जिसमें ईरान के पड़ोसी देश (जैसे पाक, सऊदी अरब, तुर्किये) शामिल हों, ताकि भविष्य में इस तरह के संघर्षों को बातचीत से सुलझाया जा सके।
समझौते की कितनी उम्मीद ?
ईरान ने भले इस्लामाबाद में हुई बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया हो लेकिन समझौते की कोशिशों में चीन के आगे आ जाने से उम्मीद बढ़ गई है। ईरान अपना सबसे ज्यादा तेल चीन को ही बेचता है।
पाक, ईरान का पड़ोसी देश है, उसके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हाल में करीबी रिश्ते देखे गए हैं। फिर भी उसने पड़ोसी देश ईरान में हुए हमले की आलोचना की थी।
दूसरी ओर पाक के चीन से भी बेहतर संबंध हैं जो ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीददार है।
माना जा रहा है कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ने से चीनी बाजार पर असर पड़ेगा इसलिए वह शांति समझौते में शामिल हुआ है।
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ईरानी रिपब्लिक डे पर जनता के बीच पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति व विदेश मंत्री
“मैं ज़मीनी स्तर पर चल रहे इस आंदोलन से ऊर्जा लेने आया हूं।”
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