रिपोर्टर की डायरी
बिहार : झारखंड से भटककर नवादा पहुंचा हाथियों के झुंड ने मचाया उत्पाद
- झारखंड से हाथियों का झुंड सीमा पर बसे नवादा जिले में घुसा।
- तीन गांवों में गेहूं की फसल को हाथियों ने भारी नुकसान पहुंचाया।
- हाथियों को भगाने के लिए जंगल में आग लगाई गई, ग्रामीण परेशान रहे।
नवादा | अमन कुमार सिन्हा
झारखंड के जंगलों से भटककर हाथियों का एक झुंड भोजन की तलाश में बिहार के रिहायशी इलाके में घुस आया है। झारखंड से सटे नवादा जिले के जंगली इलाकों में इन हाथियों के झुंड ने 20 फरवरी की रात को खूब उत्पात मचाया।
करीब 12 हाथियों का झुंड नवादा जिले के कौआकोल ब्लॉक में जंगली इलाकों में पहुंच गया। झुंड ने गेहूं की करीब पांच एकड़ फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। दहशत के चलते 20 फरवरी की रात स्थानीय लोगों ने जागकर अपने इलाके की सुरक्षा की, वन विभाग की टीम ने मशाल और पटाखे जलाकर हाथियों को बस्ती वाले इलाके में आने से रोका है, हालांकि अभी भी खतरा बना हुआ है।
नवादा के नावाडीह जंगल से होते हुए हाथियों का झुंड सोखोदेवरा जंगल की ओर जा पहुंचा है। 10 से 12 हाथियों के झुंड ने नावाडीह, सोखोदेवरा और कृषि विज्ञान केंद्र सर्वोदय आश्रम की जमीन पर लगी गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। साथ ही जेपी आश्रम की दीवारों को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। दीवारों के टूटने से हाथियों के झुंड के घनी आबादी वाले इलाके में घुस आने की आशंका बढ़ गई है।
इस खतरे को देखते हुए वन विभाग ने बड़े पैमाने पर जंगल में निवाड़ी जलाकर आग लगाने का काम शुरू किया है। यह कार्रवाई 21 फरवरी की सुबह 4 बजे से शुरू हुई, ताकि झारखंड के जंगल से बिहार में प्रवेश करने वाले हाथियों को रोका जा सके।
काफी प्रयास के बाद हाथियों के झुंड को सोखोदेवरा जंगल से बाहर खदेड़ा गया। टीम ने रातभर मशक्कत करके स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखा है। वन कर्मियों ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। हालांकि इन हाथियों के दोबारा लौटने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है, इसलिए स्थानीय लोगों में खौफ है।
जनहित में जारी
बिहार की सड़कों पर सुरक्षित पैदल चल सकेंगे: सरकार ने दिए बड़े निर्देश, जानिए क्या बदलेगा?
- सड़क सुरक्षा को लेकर बिहार सरकार का बड़ा कदम पर योजना स्पष्ट नहीं।
पटना | हमारे संवाददाता
बिहार सरकार ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार सुबह अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा कि राज्य की सड़कों पर बढ़ते वाहनों के बीच पैदल चलने वालों को सम्मान और सुविधा मिलेगी। अपनी घोषणा में मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य की सड़कों पर फुटपाथ, जेब्रा क्रॉसिंग व ऐसी सुविधायें बढ़ाई जाएंगी जिससे पैदल चलने वालोे की सुरक्षा सुनिश्चित हो। गौरतलब है कि बिहार में सड़कों पर पैदल चलने के लिए या तो फुटपाथ है ही नहीं, या फिर वे जगह-जगह टूटे या अतिक्रमण से घिरे हैं, जिससे राहगीरों को सड़क पर चलने को विवश होना पड़ता है और वे दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में यह घोषणा काफी अहम मानी जा रही है।
सभी बड़ी सड़कों पर ये बदलाव होंगे
सरकार के ‘सात निश्चय-3’ (2025-2030) के सातवें निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ के तहत परिवहन विभाग को 5 बड़े निर्देश दिए गए हैं।
- भीड़-भाड़ वाले शहरी और ग्रामीण इलाकों में जल्द फुटपाथ बनाए जाएंगे।
- चिह्नित जगहों पर जेब्रा क्रॉसिंग मार्क की जाएगी।
- व्यस्त स्थानों पर फुट ओवर ब्रिज (एस्केलेटर सहित) और अंडरपास का निर्माण होगा।
- वाहन चालकों को पैदल यात्रियों के अधिकारों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- ग्रामीण-शहरी ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना-प्रवण जगहें) चिह्नित कर फुटपाथ बनाए जाएंगे और CCTV कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि दुर्घटनाओं का आकलन हो और कमी लाई जा सके।
बिहार में पैदल यात्रियों की मौतें आम
बिहार में पैदल यात्री की स्थिति सबसे दयनीय और असुरक्षित है। सड़क परिवहन व राज्यमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की 2022 रिपोर्ट के अनुसार, बिाहर में हर सौ सड़क दुर्घटनाओं में मौत का प्रतिशत सबसे ज्यादा 82.4 फीसदी है। यानी रोड एक्सीडेंट के दस पीड़ित में से सिर्फ दो लोगों की जान ही बच पाती है।
पैदल यात्रियों की मौतों की बात करें तो राष्ट्रीय स्तर पर 19.5% हैं, लेकिन बिहार जैसे राज्यों में यह अनुपात ज्यादा है। 2019-2023 में भारत में 1.5 लाख पैदल यात्रियों की मौत हुई, जिसमें बिहार का बड़ा हिस्सा है।
बिहार की सड़कों पर फुटपाथ का हाल
कई सड़कों पर फुटपाथ या तो नहीं हैं या घुसपैठ से अवरुद्ध हैं। ब्लैक स्पॉट्स पर CCTV या सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी से दुर्घटनाएं बढ़ती हैं। पटना में कुछ जगहों पर फुटपाथ (जैसे बेली रोड, JP गंगा पथ) और अंडरपास (पटना जंक्शन से मल्टी-मॉडल हब) हैं, लेकिन अन्य शहरों में सुविधाएं सीमित या निर्माणाधीन हैं।
नए कदमों से क्या लाभ हो सकता है?
- सुरक्षित क्रॉसिंग और फुटपाथ से पैदल यात्रियों की दुर्घटनाएं 20-30% तक कम हो सकती हैं (राष्ट्रीय स्तर पर समान उपायों से देखा गया)।
- ब्लैक स्पॉट्स पर CCTV से मॉनिटरिंग और तेज कार्रवाई संभव होगी।
- वाहन चालकों का प्रशिक्षण संवेदनशीलता बढ़ाएगा, जिससे ओवर-स्पीडिंग और लेन अनुशासन में सुधार आएगा।
- कुल मिलाकर, दैनिक जीवन आसान होगा, बुजुर्गों/बच्चों की सुरक्षा बढ़ेगी और राज्य की सड़क सुरक्षा रैंकिंग सुधरेगी।
निर्देश तो सराहनीय पर बजट का पता नहीं
सरकार ने परिवहन विभाग को इसको लेकर तेजी से काम करने के निर्देश हैं, लेकिन स्पष्ट राशि का उल्लेख नहीं है। हालांकि राज्य बजट में सड़क विकास और सुरक्षा के लिए आवंटन बढ़ रहा है। पिछले वर्षों में राष्ट्रीय राज्यमार्ग व शहरी सड़कों पर हजारों करोड़ रुपये का खर्च हुआ है। माना जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट उसी से फंडेड होंगे। इसको लेकर विभाग जल्द ही कार्य योजना बनाएगा।
बता दें कि ये काम ‘सात निश्चय-3’ योजना के तहत होंगे, जिसे हाल ही में कैबिनेट ने मंजूरी दी है। योजना का फोकस ‘Ease of Living’ पर है, जिसमें सड़क सुरक्षा शामिल है।
रिपोर्टर की डायरी
बिहार सरकार का बड़ा ऐलान – अगले 15 दिनों में बैन होंगे अवैध डीजे
- परिवहन विभाग के सचिव ने सभी जिलों के डीटीओ व एमवीआई को दिए सख्त निर्देश
पटना |
बिहार में सहालग शुरू होते ही सरकार की ओर से एक बड़ा निर्देश जारी किया गया है जिसमें अगले 15 दिनों के अंदर विशेष अभियान चलाकर मॉडिफाइड डीजे बंद होंगे। शादियों के सीजन में तेज आवाज वाले अवैध डीजे के चलते आम लोग खासा परेशान रहते हैं, इसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार ने कहा कि 15 दिनों के भीतर बिना अनुमति के संशोधित डीजे गाड़ियों पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाएगा। अब इस दिशा में तेजी से कार्रवाई शुरू हो गई है। इसके लिए सभी जिलों के जिला परिवहन पदाधिकारियों (डीटीओ) एवं मोटर वाहन निरीक्षकों (एमवीआई) को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
इस अभियान के तहत मोडिफाइड और बिना अनुमति वाले डीजे वाहनों की जांच, चालान काटने और जब्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आदेश के अनुसार, बिना पंजीकरण या अनुमति के डीजे सिस्टम लगाने, वाहनों में संरचनात्मक बदलाव करने या अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालो पर सख्त जुर्माना लगाया जा रहा है।
रद्द हो सकता है लाइसेंस
सचिव ने चेतावनी दी है कि यह कदम मुख्य रूप से ध्वनि सड़क सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और शादी-बारात में होने वाली अव्यवस्था को रोकने के लिए उठाया गया है। पटना और अन्य जिलों में सैकड़ों डीजे संशोधित वाहन पकड़े जा चुके हैं। जो लोग अपने वाहनों को कमर्शियल इस्तेमाल के लिए पंजीकृत कराते हैं और बाद में उसे मॉडिफाइड डीजे सिस्टम लगवा देते हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई होगी।
क्या है नियम
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 52 के तहत बिना अनुमति संरचना परिवर्तन प्रतिबंधित है। इसके अलावा धारा 55 (5) एवं 182 (ए) के अंतर्गत ऐसे वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दंड भी लगाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी तक की कार्रवाई हो सकती है। गाड़ी में किसी भी तरफ मोडिफाइड डीजे लगाने पर आर्थिक जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, ऐसे वाहनों के माध्यम से निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि या अन्य प्रकार का प्रदूषण फैलाए जाने पर प्रदूषण संबंधी प्रावधानों के तहत 2 हजार रुपये का चालान किया जाता है।
जनहित में जारी
बिहार : भाजपा विधायक ने अपनी सरकार के शिक्षा विभाग पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, बोले- ₹2425 करोड़ का घोटाला हुआ
- हिसुआ विधायक अनिल सिंह के आरोपों से सदन में हंगामा मचा।
- विधायक बोले- रखरखाव के नाम पर करोड़ो रुपये का घोटाला।
नवादा/पटना | अमन कुमार सिन्हा
बिहार के भाजपा विधायक ने विधानसभा में NDA सरकार के शिक्षा विभाग के ऊपर बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। नवादा जिले की हिसुआ विधानसभा से विधायक अनिल सिंह ने शिक्षा विभाग में 2425 करोड़ रुपये की अनियमितता का बड़ा आरोप लगाकर जांच की मांग की। गौरतलब है कि NDA सरकार में भाजपा प्रमुख सहयोगी है, ऐसे में भाजपा विधायक का सवाल उठाना मायने रखता है।
भाजपा विधायक के साथ अन्य सांसदों ने भी शिक्षा मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। फिर आखिर में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को कहना पड़ा कि वे इस मामले की जांच करवाएंगे।
भाजपा विधायक अनिल सिंह ने सदन में कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा रखरखाव और अन्य मदों पर खर्च किए गए 2425 करोड़ रुपये में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि यह राशि निविदा के माध्यम से खर्च की गई है। उन्होंने शिक्षा मंत्री को चुनौती देते हुए इस मामले की पूरी तरह जांच कराने की मांग की।
विधायक ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के डीओ, डीपीओ स्थापना और संबंधित इंजीनियरों द्वारा राशि का दुरुपयोग किया गया है। अनिल सिंह ने विधानसभा में इस मामले की विस्तृत जांच के लिए एक कमेटी गठित करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि भवन निर्माण के लिए शिक्षा विभाग को मिले 2425 करोड़ रुपये में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ है। इस मुद्दे पर सदन में खूब बहस हुई, जिसके बाद सभी विधायकों ने एक स्वर में शिक्षा विभाग के खिलाफ आवाज उठाई।
आखिर में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि जिलाधिकारी (DM) को जांच के आदेश दिए गए हैं और जांच से संबंधित सभी जानकारी विधायकों को भी उपलब्ध कराई जाएगी।
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