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Breaking News : अमेरिका-इजरायल हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत, सरकारी मीडिया ने पुष्टि की

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अयातुल्ला अली ख़ामेनेई

नई दिल्ली |

अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान की मीडिया तसनीम और फार्स समाचार एजेंसियों ने रविवार सुबह (1 march) इसकी पुष्टि की है।

इस हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू के मारे जाने की भी खबर है।

आयतुल्लाह खामेनेई ने 1989 में इस्लामी गणराज्य के संस्थापक इमाम खुमैनी की मौत के बाद से 37 साल तक ईरान और मुस्लिम उम्मत का नेतृत्व किया, अब उनकी हत्या के बाद ईरान में यह स्थान खाली हो गया है, देखना होगा कि उनका उत्तराधिकारी किसे बनाया जाता है। 

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत का दावा किया था।

बता दें कि इजरायल-अमेरिका की ओर से शनिवार को शुरू किए गए हवाई हमलों में ईरान के 31 में से 24 प्रांतों को निशाना बनाया गया, जिसमें राजधानी तेहरान भी शामिल है।

ईरानी सेना ने खामेनेई की शहादत के बाद “खतरनाक अभियान” की शुरुआत की घोषणा की है। सेना ने कहा कि यह हमला कुछ ही देर में शुरू होगा और क्षेत्र में कब्जे वाले क्षेत्रों और अमेरिकी आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाएगा।

ईरान में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक

उधर, इस्लामिक रिवॉल्यूशन गार्ड्स कोर (IRGC) ने इस्लामिक क्रांति के नेता खामनेई की शहादत पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा – इससे ईरानी राष्ट्र उनकी राह पर चलने के लिए और अधिक दृढ़ होगा।

ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की गई है।

ईरान में अब तक 200 से ज्यादा मौतें

ईरान के एक गैर-सरकारी मानवतावादी संगठन ‘ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी’ का कहना है कि इन हमलों में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 740 से ज्यादा लोग घायल हैं। ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की मौत हो गई और 45 छात्राएं घायल हैं।

ईरान का पलटवार- 9 देशों पर हमले

अमेरिका और इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने इजराइल समेत मिडिल-ईस्ट के 9 देशों को निशाना बनाया। ईरान ने इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागीं।  कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब व UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। इतना ही नहीं, ईरान ने UAE के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया। ईरान ने दुबई के पाम होटल एंड रिसोर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमला किया। इसके अलावा बहरीन में कई रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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Critical Minerals Deal: भारत-ब्राजील के बीच हुआ समझौता, कितनी घटाएगा चीन पर निर्भरता?

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भारत दौरे पर आए ब्राजीली राष्ट्रपति लुला के साथ भारतीय पीएम मोदी। (Photo Credit - X/@narendramodi)
भारत दौरे पर आए ब्राजीली राष्ट्रपति लुला के साथ भारतीय पीएम मोदी। (Photo Credit - X/@narendramodi)
  • ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत दौरे पर महत्वपूर्ण समझौता किया।
  • महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा को लेकर हुआ एमओयू।
  • अभी इस क्षेत्र में भारत 95% खनिजों का आयात करता है।

नई दिल्ली |

भारत और ब्राजील ने महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals) और दुर्लभ मृदा (rare earths) को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है। इन प्राकृतिक संसाधनों की खरीद के लिए भारत की निर्भरता चीन पर बहुत ज्यादा है, ऐसे में इस समझौते (Memorandum of Understanding) के जरिए भारत को ब्राजील के रूप में नया आयातक मिलेगी जो उसकी चीन पर निर्भरता घटाने की रणनीति का हिस्सा है। यह समझौता ब्राजीली राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा के भारत दौरे के दौरान 21 फरवरी को हुआ।

आवश्यक खनिज से जुड़े MoU हस्ताक्षर से पहले हुई बैठक। (X/@narendramodi)

आवश्यक खनिज से जुड़े MoU हस्ताक्षर से पहले हुई बैठक। (X/@narendramodi)

इस समझौते से वैश्विक सप्लाई चेन (Global Supply Chain) को भी मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को विश्वास का प्रतिबिंब बताया है। जबकि राष्ट्रपति लुला (Lula da Silva) ने कहा कि इस समझौते से ब्राजील के खनिज भंडार के उपयोग में वृद्धि हो सकती है, जो अभी सिर्फ 30% ही उपयोग हो रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों का लक्ष्य अगले 5 साल में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का है।

गौरतलब है कि क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, नियोबियम, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ्स) का इस्तेमाल हरित ऊर्जा, EVs, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा के लिए जरूरी है। भारत अपनी खनिज जरूरत का 95% हिस्सा आयात करता है। दूसरी ओर, खनिज क्षेत्र में पूरी दुनिया के उत्पादन का 90 फीसदी से अधिक हिस्से का नियंत्रण चीन के पास है। ऐसे में इस MoU से भारत को वैकल्पिक स्रोत मिलेगा, जो भू-राजनीतिक जोखिम कम करेगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की खनिज खरीद में तत्काल बड़ी कमी नहीं आएगी लेकिन आने वाले 3 से 5 साल में चीन पर निर्भरता 20 से 30% तक घट सकती है।

भारत व ब्राजील के बीच हुआ समझौता।

MoU साइन होने के दौरान ब्राजीली राष्ट्रपति व भारतीय पीएम।

समझौते की डिटेल जानिए 

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी दस्तावेजों के अनुसार, ब्राजील के साथ हस्ताक्षर किया गया MoU, रेयर अर्थ मिनरल्स और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग पर केंद्रित है। इसकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं-

1- अनछुए खनिज खोजने में भारतीय कंपनियां मदद कर सकेंगी –   अनछुए खनिज भंडार का पता लगाने में (Exploration) भारतीय कंपनियां हिस्सा ले सकती हैं। लुला ने कहा कि भारत की तकनीकी विशेषज्ञता से ब्राजील के 70% अनछुए भंडारों का फायदा उठाया जा सकता है। ब्राजील के अभी तक उपयोग में नहीं लाए जा सके (Unused) खनिज भंडार – नीओबियम, लिथियम व आयरन (Iron Ore) से जुड़े हैं।

2- लौह अयस्क के लिए बनेगा स्पेशल इकोनॉमिक जोन – भारत-ब्राजील के संयुक्त उद्यम के जरिए लौह अयस्क का खनन बढ़ाया जाएगा। इसके लिए भारत में लौह अयस्क के सबसे बड़े उत्पादक NMDC (राष्ट्रीय खनिज विकास निगम), ब्राजील की Vale और अडानी गंगावरम पोर्ट के बीच एक त्रिपक्षीय MoU पर हस्ताक्षर हुए हैं, जो $500 मिलियन का है। इसके जरिए लौह अयस्क या आयरन ओर की ब्लेंडिंग फैसिलिटी के लिए स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाया जाएगा।

3- भारतीय कंपनियों को ब्राजील में खनन प्रोजेक्ट मिलेंगे – भारतीय निवेशकों को ब्राजील में खनन प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी मिलेगी। और ब्राजील को भारत में तकनीकी निवेश मिलेगा।


समझौते पर आगे की राह

भारत-ब्राजील के बीच का यह एक गैर-बाध्यकारी MoU है, जो व्यावहारिक सहयोग के लिए रोडमैप देता है। इससे आगे जॉइंट वर्किंग ग्रुप्स बनेंगे, जो मिनिस्ट्री ऑफ माइन्स और विदेश मंत्रालय के तहत काम करेंगे।

गौरतलब है कि 2023 में भारत ने ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिशन’ के तहत लक्ष्य रखा था कि वह साल 2030 तक इन आवश्यक खनिजों का 50% उत्पादन घरेलू स्तर पर करेगा।


By <a href="//commons.wikimedia.org/wiki/User:RCraig09" title="User:RCraig09">RCraig09</a> - <span class="int-own-work" lang="en">Own work</span>, <a href="https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0" title="Creative Commons Attribution-Share Alike 4.0">CC BY-SA 4.0</a>, <a href="https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=148115012">Link</a>

आवश्यक खनिज की जितनी ज्यादा आवश्यकता बढ़ती जा रही है, जलवायु परिवर्तन के चलते उतनी ही तेजी से इनके अस्तित्व पर भी संकट पैदा हो गया है। (साभार – विकिमीडिया)

भारत की चीन पर निर्भरता कितनी ?

  • भारत अपनी रेयर अर्थ्स की जरूरत का 95 से 100% हिस्सा चीन से खरीदता है, यानी पूरी तरह चीन पर निर्भर है।
  •  ग्रेफाइट का 80%, लिथियम का 60-70% हिस्सा चीन से खरीदा जाता है।
  • 2025 में भारत ने चीन से 1.5 अरब डॉलर के मिनरल्स आयात किए।

चीन के अलावा किससे होता है आयात

  • लिथियम का आयात ऑस्ट्रेलिया व चिली से।
  • कोबाल्ट का आयात कांगो व इंडोनेशिया से।
  • निकेल के लिए भारत चीन के अलावा इंडोनेशिया पर निर्भर।

भारत को इतने खनिज की आखिर क्या जरूरत?

क्रिटिकल मिनिरल या आवश्यक खनिज का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण, सोलर विंड एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा (मिसाइल्स) व फार्मा के क्षेत्र में होता है। बैटरी बनाने में 70% आवश्यक खनिज इस्तेमाल होता है।

1- इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण : 

भारत में बढ़ती बाइक-कारों की मांग, मंहगे होते पेट्रोल-डीजल व बढ़ते प्रदूषण के चलते सरकार ने 2030 तक कुल वाहनों का 30% इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए ज्यादा आवश्यक खनिज चाहिए। 

2- सोलर और विंड एनर्जी :

कोयले पर भारत की निर्भरता घटाने के लिए सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाना होगा। 2030 तक 500 गीगावाट (GW) नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता बनाने का लक्ष्य है। अभी इसकी दक्षता लगभग 200 GW है। 

3- इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र :

स्मार्टफोन, कंप्यूटर, LED लाइट, सेमीकंडक्टर चिप्स में रेयर अर्थ लगते हैं। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को $300 बिलियन तक ले जाना चाहता है। डिजिटल इंडिया, AI व 5G जैसे क्षेत्र बिना क्रिटिकल मिनरल्स के नहीं चल सकते। 

4- रक्षा (मिसाइल्स, एयरोस्पेस):

टाइटेनियम, टंगस्टन व रेयर अर्थ्स के जरिए मिसाइल, फाइटर जेट, रडार व सैटेलाइट बनते हैं। आत्मनिर्भर भारत और रक्षा उत्पादन बढ़ाने के लिए इन मिनरल्स की आवश्यकता है वरना विदेशी निर्भरता कम नहीं होगी।  

5- फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां):

भारत दुनिया का बड़ा जेनेरिक दवा उत्पादक है। कुछ रेयर अर्थ और मिनरल कैटेलिस्ट के रूप में दवा बनाने में मदद करते हैं। इससे प्रोसेसिंग स्पीड बढ़ती है और शुद्धिकरण में इस्तेमाल होते हैं। ये मिनरल सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण हैं।

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Global Tariff : अब राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्लोबल टैरिफ को 10% से बढ़ाकर किया 15%

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप
  • 20 फरवरी को ट्रंप ने 10% वैश्विक टैरिफ की घोषणा की, जिसे एक दिन में ही बढ़ा दिया।

नई दिल्ली |

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अनिश्चित व्यवहार को एक बार फिर से दोहराते हुए 24 घंटों के भीतर ही अपने ग्लोबल टैरिफ को 5 फीसदी बढ़ाकर 15% कर दिया है।

ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर 21 फरवरी को एक पोस्ट करके लिखा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की विस्तार में समीक्षा करने के बाद वे ग्लोबल टैरिफ को बढ़ाने का निर्णय ले रहे हैं।

बता दें कि 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के लगाए टैरिफ को अवैध बताकर रद्द कर दिया, जिसके कुछ घंटे बाद ही ट्रंप ने 10% नए ग्लोबल टैरिफ की घोषणा कर दी थी।

साभार – ट्रूथ सोशल

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा,

“कल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ़ पर जो फ़ैसला दिया है, वह बेकार और बेहद अमेरिका विरोधी है. इस बयान के ज़रिए मैं बताना चाहता हूं कि मैं अमेरिका का राष्ट्रपति होने के नाते, 10 फ़ीसदी वर्ल्डवाइड टैरिफ़ को बढ़ाकर 15 फ़ीसदी कर रहा हूं।”

ट्रंप ने आगे लिखा, “कई देश वर्षों से अमेरिका को नुक़सान पहुंचा रहे थे और कोई जवाब नहीं मिल रहा था (जब तक मैं नहीं आया)। लेकिन अब इसे पूरी तरह से क़ानूनी तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। आने वाले कुछ महीनों में ट्रंप प्रशासन नए और क़ानूनी तौर पर सही टैरिफ़ तय करेगा, जिससे हमारा ‘अमेरिका को फिर से महान बनाने’ का काम और भी ज़्यादा सफल होगा।”

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अमेरिकी टैरिफ: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, ट्रंप का नया कदम और भारत पर असर

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मोदी-ट्रंप मुलाकात
(सांकेतिक तस्वीर)
  • भारत पर फिलहाल 18% अमेरिकी टैरिफ लागू है, ट्रंप टैरिफ का सबसे ज्यादा असर भारत पर रहा है।

नई दिल्ली |

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक दिन पहले आए ऐतिहासिक फैसले ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को बड़ा झटका दिया है। हालांकि टैरिफ नीति को रद्द करने के फैसले के कुछ घंटे बाद ही राष्ट्रपति ट्रंप ने पूरी दुनिया पर 10% नए टैरिफ लगा दिए हैं। लंबे समय तक भारत पर दुनिया में सबसे ज्यादा अमेरिकी टैरिफ लागू रहा हाल में 50% से घटाकर 18% कर दिया गया। अब अमेरिकी सर्वोच्च अदालत के फैसले और ट्रंप के नए टैरिफ से भारत की स्थिति को लेकर फिर से आशंकाएं पैदा हो गई हैं।

ट्रंप ने अपनी प्रेसवार्ता में स्पष्ट किया कि भारत के साथ व्यापार समझौते (FTA) में कोई बदलाव नहीं आएगा। इन दोनों ही घटनाक्रमों पर भारत की पहली प्रतिक्रिया आई है, शनिवार (21 feb) शाम को एक प्रेस रिलीज के जरिए भारत सरकार ने कहा है कि वह इन घटनाक्रमों का अध्ययन कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत की प्रतिक्रिया उसके पूर्व के रूख के हिसाब से ही सधी हुई और अस्पष्ट है। विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से भले टैरिफ को अवैध बता दिया गया हो पर भारतीय निर्यातकों पर कुछ अमेरिकी टैरिफ का बोझ बरकरार रहेगा।

24 फरवरी से नया टैरिफ लागू होगा

सुप्रीम कोर्ट का फैसला 20 फरवरी 2026 को आया, जिसमें 6-3 के बहुमत से ट्रंप के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ्स को अवैध घोषित किया गया। ट्रंप ने फैसले को शर्मनाक बताते हुए तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्रेड एक्ट 1974 की सेक्शन 122 के तहत 10% का वैश्विक टैरिफ लगाया, जो 150 दिनों के लिए लागू हो सकता है। इसके बाद इसे लागू करने के लिए अमेरिकी संसद की अनुमति जरूरी है। यह टैरिफ सभी देशों पर 24 फरवरी 2026 से लागू हो जाएगा। लेकिन कुछ छूट जैसे महत्वपूर्ण मिनरल्स और फूड पर दी गई हैं।

भारत का टैरिफ 18% से 10% रह जाएगा

ट्रंप ने नए टैरिफ की घोषणा करते हुए कहा है कि यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए जरूरी है। व्हाइट हाउस के अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारत पर यह अस्थायी टैरिफ लागू होगा, लेकिन ट्रेड डील जारी रहेगी। यानी भारत के ऊपर हाल में लागू 18% टैरिफ की जगह 10% टैरिफ लागू होगा जो अमेरिकी कानून के मुताबिक अधिकतम 3 महीने तक लागू रह सकता है। बता दें कि ट्रंप ने भारत पर 25% पारस्परिक टैरिफ के अलावा 25% दंडनीय टैरिफ लगाया था, जिसको लेकर उन्होंने कहा था कि रूस से तेल खरीद बंद करने पर इसे हटा लिया जाएगा। ये टैरिफ फरवरी के शुरूआती सप्ताह में हटा दिया गया था। इसके बाद मोदी व ट्रंप की फोन पर वार्ता के बाद पारस्परिक टैरिफ भी 25% से घटाकर 18% कर दिया गया था।

भारत पर इसका क्या असर?

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले से रेसिप्रोकल टैरिफ हटने से भारतीय निर्यातकों को राहत मिली है, लेकिन अन्य टैरिफ लागू रहेंगे।
  • सेक्शन 232 के तहत स्टील और एल्युमिनियम पर 50% ड्यूटी जारी है, जिससे दिसंबर 2025 में इन निर्यातों में 66% की गिरावट आई।
  • इसके अलावा, $800 से कम वैल्यू के आइटम्स पर डी मिनिमिस एक्जेम्प्शन सस्पेंड होने से टेक्सटाइल, खिलौने, कॉस्मेटिक और इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज प्रभावित होंगे।
  • इससे इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टरों को छूट रहेगी।
  • आर्थिक रूप से स्टील-एल्युमिनियम भारत का चौथा सबसे बड़ा निर्यात समूह है, और ये टैरिफ छोटे निर्यातकों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
  • हालांकि 10% टैरिफ वियतनाम, बांग्लादेश, चीन जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारत को अपेक्षाकृत फायदा दे सकता है, क्योंकि पहले भारत पर 50% टैरिफ थे।

FTA या इंटरिम ट्रेड डील पर असर ?

ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि व्यापार समझौते मेें कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा, “भारत के साथ डील में कुछ नहीं बदलता। वे टैरिफ देंगे, हम नहीं।”

गौरतलब है कि हाल में जारी हुए भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान में भारत-US इंटरिम एग्रीमेंट का जिक्र किया गया, जिसमें मेंशन था कि अमेरिका भारत से 18% टैरिफ लेगा, जबकि भारत US से 0%। बयान में यह भी बताया गया था कि यह डील MSMEs, किसानों और मछुआरों को फायदा पहुंचाएगी। और भारतीय निर्यातकों को $30 ट्रिलियन अमेरिकी बाजार तक पहुंच मिलेगी।

अगले सप्ताह डील फाइनल होने का संभावना

इस डील को फाइनल करने के लिए एक भारतीय डेलिगेशन अगले हफ्ते अमेरिका जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अब भारत को इस डील की समीक्षा करनी चाहिए ताकि निर्यात बढ़े और अर्थव्यवस्था मजबूत हो।

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