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रिपोर्टर की डायरी

बक्सर(बिहार): जयमाल के दौरान दुल्हन को एक तरफा प्रेमी ने मारी गोली, हालत गंभीर

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  • बक्सर में जयमाल के दौरान दुल्हन पर गोली चली।
  • एक तरफा प्रेम करने वाले युवक ने स्टेज पर फायर किया।
  • युवती की हालत गंभीर, घटना का वीडियो वायरल।
(note – इस खबर को वीडियो में देखने के लिए इस लिंक पर जाएं।)
बक्सर | अमीषा कुमारी
बिहार के बक्सर में जयमाल की रस्म के दौरान स्टेज पर दुल्हन को एकतरफा प्रेमी ने गोली मार दी है। जयमाल के दौरान स्टेज पर खड़े लोगों का फायदा उठाकर आरोपी युवक ने दुल्हन के करीब जाकर गोली मारी जो उसके पेट पर जाकर लगी और वह तुरंत गिर पड़ी। वरमाला का वीडियो बनाने के लिए स्टेज पर इकट्ठे हुए लोग जब तक कुछ समझ पाते, दुल्हन के शरीर से खून बहने लगा। घटना का वीडियो रिकॉर्ड हो गया जो अब वायरल है। दुल्हन को पहले सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां हालत सीरियस होने पर उसे यूपी के वाराणसी हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया है।
यह घटना उस पितृसत्तात्मक सोच का एक और उदाहरण है, जब प्रेम में इनकार सुनने के बाद पुरुष इसे अपने स्वाभिमान से जोड़ लेता है और सोचता है कि ‘वह लड़की अगर मेरी नहीं तो किसी और की भी नहीं होगी।’
पुलिस ने शादी के पंडाल को सील कर दिया, वहां दुल्हन की परिजन से बात करते पुलिस अधिकारी।

पुलिस ने शादी के पंडाल को सील कर दिया, वहां दुल्हन की परिजन से बात करते पुलिस अधिकारी।

यह हैरान करने वाली घटना 24 फरवरी की रात चौसा नगर पंचायत इलाके में स्थित मल्लाह टोली में हुई। यहां शादी का पंडाल एक क्राइम सीन मेें बदल गया।  जयमाल की रस्म के दौरान चली इस गोली को लेकर घायल दुल्हन आरती कुमारी ने ही बताया कि उसे पड़ोसी दीनबुंध ने गोली मारी है। परिवार का कहना है कि दीनबंधु नाम का युवक उनकी बेटी से एकतरफा प्यार करता है। जबकि बेटी की शादी उसकी मर्जी से यूपी के बलिया से तय थी। दुल्हन के पिता का नाम पिता नन्द जी मल्लाह हैं।
फायर करते ही इतनी भीड़ के बीच से भी आरोपी दीनबंधु फरार होने में सफल रहा, जिसकी गिरफ्तारी के लिए मुफस्सिल थाना पुलिस खोजबीन कर रही है। मौके पर पहुंची पुलिस ने क्राइन सीन को सील करके वहां पड़े खाली कारतूस को बरामद किया है। फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया है।   दुल्हन बनी आरती कुमारी की स्थिति नाजुक है और उनका ऑपरेशन करके गोली निकाली गई है। यह घटना महिलाओं की पसंद और न कहने के उनके अधिकार पर हमले का एक उदाहरण भी है।
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ताड़ी से बदली किस्मत: बोधगया में मीठी ताड़ी के तिलकुट-चाय ने विदेशी पर्यटकों का दिल जीता

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  • शराबबंदी के बीच पारंपरागत पेय की मांग ने रोजगार का नया रास्ता खोला।

पटना/बोधगया |

बोधगया में महाबोधी मंदिर आने वाले दुनिया भर के पर्यटकों की अब एक नई पसंद बन गई है – मीठी ताड़ी (नीर) से बनी तिलकुट, अनरसा, लाई, लड्डू और चाय। ये पारंपरिक मिठाइयां और पेय न सिर्फ स्वाद में लाजवाब हैं, बल्कि सेहत के लिए भी अच्छे हैं। साथ ही, यह बिहार में दस साल से जारी शराबबंदी के चलते वैकल्पिक रोजगार का रास्ता खोल रहा है जिसे जीविका का खूब सहयोग मिला है।

सफलता की यह कहानी दरअसल बोधगया के इलरा गांव के निवासी डब्ल्यू कुमार की है। वे पहले दूसरे राज्यों में मजदूरी करते थे। दस साल पहले 2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद यहां के इलाकों में मीठी ताड़ी को बढ़ावा मिला जिसे स्थानीय लोग नीर भी कहते हैं । डब्ल्यू कुमार ने ताड़ी से गुड़ बनाना शुरू किया और उसी गुड़ से तिलकुट, अनरसा, लाई और लड्डू तैयार करने लगे। उनकी चर्चा इतनी फैली कि 2023 में खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आकर उनकी स्वादिष्ट मिठाइयों को चखा।  आज उनका स्टॉल महाबोधी मंदिर के पास आकर्षण का केंद्र बन गया है।

दरअसल मीठी ताड़ी से बने उत्पादों की खासियत यह है कि ये कम मीठे होते हैं। सामान्य तिलकुट में चीनी या पारंपरिक गुड़ का इस्तेमाल होता है, लेकिन ताड़ी का गुड़ नेचुरल और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला होता है। इसी वजह से डायबिटीज के मरीज भी इन्हें बेझिझक खा रहे हैं। जापान, थाईलैंड, श्रीलंका, यूरोप और अमेरिका से आने वाले विदेशी पर्यटक इसे खास तौर पर पसंद कर रहे हैं।

डब्ल्यू कुमार बताते हैं कि सीएम से प्रोत्साहन मिलने के बाद उन्हें हिम्मत मिली। अब उनकी पत्नी पुष्पा कुमारी समेत पूरा परिवार इसी काम में लगा है।  तिलकुट सीजन में रोजाना 150 किलो से ज्यादा बिक्री होती है। हालांकि इसकी कीमत सामान्य तिलकुट से थोड़ी ज्यादा करीब 400 रुपये प्रति किलो है, लेकिन स्वाद और सेहत के कारण पर्यटक खुशी-खुशी खरीदते हैं।

बिहार सरकार की जीविका (Jeevika) ने इस व्यवसाय को बढ़ावा दिया। बोधगया और गया में विशेष काउंटर दिए गए। पटना के गांधी मैदान में सरस मेले में भी स्टॉल मिला, जहां रोजाना 70-100 किलो तिलकुट बिका। इस साल एक लाख लीटर से ज्यादा मीठी ताड़ी से गुड़ तैयार किए जाने का दावा है, जिससे पेड़ा, लाई और ताड़ी की चाय भी बन रही है।

मीठी ताड़ी अब बिहार में रोजगार का नया मॉडल बन चुकी है। शराबबंदी के बाद ताड़ी टैपर्स को वैकल्पिक आजीविका मिली। गांवों में ताड़ी उत्पादन बढ़ा, परिवारों को घर पर काम मिला, और बोधगया जैसे पर्यटन स्थलों पर लोकल प्रोडक्ट ने विदेशी पर्यटकों का दिल जीता।

यह कहानी सिर्फ तिलकुट की नहीं, बल्कि बिहार में शराबबंदी के बाद सस्टेनेबल रोजगार और हेल्थी फूड इनोवेशन की है। बोधगया आने वाले हर तीर्थयात्री के लिए मीठी ताड़ी का तिलकुट अब एक जरूरी स्वाद बन चुका है।

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रोहतास का अदृश्य पुल: शेरशाह सूरी के GT Road की खास कड़ी, जानिए पूरा इतिहास

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रोहतास का अदृश्य पुल बिना संरक्षण के खराब हो रहा। (तस्वीर - रोहतास संवाददाता)
रोहतास का अदृश्य पुल बिना संरक्षण के खराब हो रहा। (तस्वीर - रोहतास संवाददाता)
  • रोहतास का अदृश्य पुल शेरशाह सूरी की इंजीनियरिंग का उदाहरण।
  • बरसात में डूब जाता और सूखे में उभर जाता है यह अदृश्य पुल।
  • शेरशाह सूरी ने GT Road के लिए इस पुल को बनवाया था।
(note – इस खबर को वीडियो में देखने के लिए इस लिंक पर जाएं।)
रोहतास | अविनाश श्रीवास्तव
बिहार के रोहतास जिले में एक अनोखा ऐतिहासिक पुल है, जो बरसात में पानी में समा जाता है और सूखे में उभर आता है। स्थानीय लोग इसे “अदृश्य पुल” कहते हैं। देहरी-ऑन-सोन (Dehri-on-Sone) के पास सोन नदी में छिपे इस पुल का महत्व इसलिए भी बहुत है क्योंकि इसे शेरशाह सूरी (1540-1545) ने बनवाया था।
जिन्होंने एशिया की सबसे लंबी व पुरानी सड़क कहे जाने वाले ग्रैंड ट्रंक रोड (GT Road या Sadak-e-Azam) को बनवाया। इस रोड का विस्तार करते हुए उन्होंने बंगाल से अफगानिस्तान तक रोड बनवाई, जिसके चलते यह अदृश्य पुल बना, जिसकी कहानी आज हम आपको बता रहे हैं। तब यह रोड व्यापार, सेना की आवाजाही और साम्राज्य नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण था। लेकिन इसके निर्माण में सोन नदी एक बड़ी बाधा थी क्योंकि बरसात में नदी उफान पर होती थी।

GT Road पर सोन नदी पार करना जरूरी था, इसलिए 4 किमी लंबा और 20 फीट चौड़ा पत्थर का causeway यानी उभरी सड़क या पुल बनवाया गया जो पारंपरिक पुल से एकदम अलग है। यह 10 फीट लंबे पत्थर से बना था। यह पुल submersible causeway था जो बरसात में डूब जाता, लेकिन सूखे में रोड बन जाता है। यह शेरशाह काल की  इंजीनियरिंग का कमाल है। 

Indrapuri Barrage से पानी छोड़नेे के चलते बरसात में सोन नदी का जलस्तर बढ़ता है इसलिए यह पुल पानी में डूब जाता है। पानी घटने पर पत्थरों की कतार फिर दिखती है। यह हर साल होने वाला दृश्य चमत्कार जैसा लगता है लेकिन अब संरक्षण की कमी से इसका वजूद मिट रहा है।  साथ ही  Nehru Setu जैसे आधुनिक पुल बनने से उपयोगिता खत्म हो गई। 

पुरातत्व विभाग (ASI) ने साल 2016 में इसकी खोज की थी, लेकिन पूर्ण संरक्षण नहीं हुआ। स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और रेत माफिया की गतिविधियों से पत्थर क्षरण का शिकार हो रहे हैं। ASI ने इसे प्रोटेक्टेड नहीं किया, इसलिए पर्यटन विकास नहीं हो पाया।
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पटना में चौकीदार-दफादारों पर पुलिसिया ऐक्शन, विधानसभा में उठा मुद्दा

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पटना में बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की गई, जिसके बाद उन पर लाठीचार्ज हुआ।
पटना में बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की गई, जिसके बाद उन पर लाठीचार्ज हुआ।
  • दफादार-चौकीदार पंचायत संघ ने पटना में किया प्रदर्शन।
  • पटना पुलिस ने लाठी चार्ज किया, एक का सिर फूटा।
  • पुलिस लाठीचार्ज का मुद्दा विधानसभा में भी उठाया गया।
(note – इस खबर को वीडियो में देखने के लिए इस लिंक पर जाएं।)
पटना | प्रीति
ग्रामीण सुरक्षा की मुख्य कड़ी चौकीदार व दफादारों को राजधानी पटना में अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन करना भारी पड़ गया। करीब एक हजार दफादार और चौकीदारों पर पटना पुलिस ने लाठियां भांजी, जिसमें एक बुजुर्ग चौकीदार का सिर फूट गया व कई प्रदर्शनकारी चोटिल हो गए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई की आलोचना सोशल मीडिया से लेकर विधानसभा तक में हो रही है। विधानसभा में 24 फरवरी को विपक्षी दलों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि बिहार में लाठी गोली की सरकार नहीं चलेगी। बता दें कि चौकीदारों के सुपरवाइजर को दफादार कहा जाता है।
विधानसभा में पुलिस के वर्वर रवैये का मुद्दा राजद विधायक सर्वजीत ने उठाया। उन्होंने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कहा कि
“बिहार के संपूर्ण चौकीदार-दफादार अपनी मांग के लिए सड़क पर आंदोलन कर रहे थे, उनको इतनी बर्बरता से पुलिस ने मारा है तो क्या लोकतंत्र में अपनी मांगों को मांगने का अधिकार नहीं है? साथ ही उन्होंने कहा कि ‘अगर माननीय न्यायलय ने कानून में संशोधन करने को कहा तो बिहार सरकार क्यों नहीं करना चाहती है?”
दूसरी ओर, बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता निखिल कुमार ने ट्वीट करके कहा है कि “पीएम मोदी और भाजपा की सरकारों को विरोध की आवाज बर्दाश्त नहीं है।”
दरअसल, बिहार का दफादार व चौकीदार संघ बीते कई महीनों से अपने मानदेय को बढ़ाने, सेवा शर्तों में बदलाव करने की मांग कर रहा है। प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से वंशानुगत नौकरियों की बहाली चाहते हैं, इस नियम के खिलाफ पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए सरकार को झटका दिया था। बता दें कि बिहार में दफादार व चौकीदारों के रिटायर होने पर उनके परिवार के सदस्य को आश्रित के तौर पर नौकरी मिल जाती है।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यह नियम गलत है और सरकार को इस नियम को बदलना चाहिए। पर वोट पॉलिटिक्स के चलते सरकार इस आदेश पर चुप्पी साधे हुए है, दूसरी ओर दफादार-चौकीदार पंचायत संघ ऐसी नियुक्तियों की बहाली चाहता है। इसके अलावा इस संघ की मांग है कि उनके मानदेय को बढ़ाया जाए और नियमित भुगतान हो। साथ ही, उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य लाभ मिलें। ड्यूटी के दौरान सुरक्षा और उपकरण जैसे हथियार व ट्रेनिंग भी दी जाए।
इन मांगों को लेकर बीते 23 फरवरी की सुबह पटना में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे।  दोपहर बाद प्रदर्शन उग्र हो गया। प्रदर्शनकारी पटना के जेपी गोलंबर पर लगाई गई पुलिस बैरिकेडिंग तोड़कर डाकबंगला चौराहा की ओर बढ़ने लगे। यहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर सबको खदेड़ दिया।
लाठीचार्ज के दौरान अफरा-तफरी मच गई। इससे आरा से आए चौकीदार प्रभु के सिर में चोट लग गई। उनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से अपना प्रदर्शन कर रहे थे, फिर आखिर क्यों पुलिस ने लाठियां भांजीं ?

 

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