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Climate Change Study : Trump के फैसलों से दुनियाभर में 13 लाख मौतें संभव, भारत पर सबसे ज्यादा खतरा
- ट्रंप के जलवायु परिवर्तन को लेकर लिए गए फैसलों का वैश्विक असर अगले दस साल में दिखने लगेगा।
- अमेरिका के फैसलों से 10 साल में अतिरिक्त ग्रीनहाउस गैसें निकलेंगी, उनसे धरती का तापमान बढ़ेगा।
नई दिल्ली |
अमेरिका (America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) नीति और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को लेकर उनके फैसलों का दुनिया भर में भयानक असर पड़ने वाला है।
एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों के कारण आने वाले दशकों में दुनिया भर में अतिरिक्त 13 लाख लोगों की मौत हो सकती है।
प्रोपब्लिका (ProPublica) और द गार्जियन (The Guardian) के विश्लेषण के मुताबिक, इन मौतों का सबसे ज्यादा असर अमेरिका पर नहीं, बल्कि भारत (India) और अफ्रीका के गरीब और गर्म देशों पर पड़ेगा।
2035 के बाद दिखेगा ‘खौफनाक’ मंजर
यह विश्लेषण स्वतंत्र शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किए गए डेटा मॉडल पर आधारित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप की नीतियों के कारण अगले एक दशक में जो अतिरिक्त ग्रीनहाउस गैसें (Greenhouse Gases) निकलेंगी, उनसे धरती का तापमान बढ़ेगा।
इसका नतीजा यह होगा कि 2035 के बाद के 80 सालों में गर्मी से होने वाली मौतों की संख्या में भारी इजाफा होगा। यह आंकड़ा ‘कार्बन की मृत्यु दर लागत’ (Mortality Cost of Carbon) मीट्रिक पर आधारित है, जो नोबेल पुरस्कार विजेता विज्ञान से जुड़ा है।
भारत पर मंडरा रहा सबसे बड़ा खतरा
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन मौतों का खामियाजा उन देशों को भुगतना पड़ेगा, जिन्होंने जलवायु संकट पैदा करने में बहुत कम प्रदूषण फैलाया है।
डेटा के अनुसार, नाइजर (Niger) और सोमालिया (Somalia) जैसे देशों में प्रति व्यक्ति मृत्यु दर सबसे अधिक होने की आशंका है।
वहीं, संख्या के हिसाब से भारत (India) को सबसे बड़ी मार झेलनी पड़ सकती है। अनुमान है कि दुनिया भर में तापमान से होने वाली कुल मौतों में से 16% से 22% मौतें अकेले भारत में हो सकती हैं।
पाकिस्तान (Pakistan) में भी यह आंकड़ा 6% से 7% के बीच हो सकता है, जबकि अमेरिका में यह केवल 0% से 1% के बीच रहेगा।
ट्रंप ने पलटे कई पर्यावरणीय फैसलों का होगा असर
जो बाइडेन (Joe Biden) के कार्यकाल में अमेरिका ने उत्सर्जन कम करने के लिए कई बड़े कदम उठाए थे, लेकिन ट्रंप ने सत्ता में आते ही उन्हें पलट दिया। उन्होंने अपने पहले ही दिन अमेरिका को फिर से पेरिस समझौते (Paris Agreement) से बाहर करने का आदेश दिया और इसे ‘घोटाला’ बताया। इसके अलावा, उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) और ईधन के लिए मिलने वाली टैक्स छूट में कटौती कर दी है और कोयले व तेल के उत्पादन को बढ़ावा दिया है।
गर्मी से ऐसे जाती है जान
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी शरीर की ठंडा होने की क्षमता को खत्म कर देती है। पसीना आना बंद हो जाता है, जिससे ऑर्गन फेलियर (Organ Failure) और दिल का दौरा पड़ने से मौत हो जाती है।
लॉस एंजिल्स (Los Angeles) में रहने वाली मूल रूप से पाकिस्तान से संबंध रखने वाली जलवायु कार्यकर्ता आयशा सिद्दीका (Ayisha Siddiqa) ने कहा कि इससे “मेरे समुदाय के लोग मर जाएंगे।”
उन्होंने बताया कि गर्मी के कारण उनके पिता बेहोश हो गए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगर उत्सर्जन बढ़ाने वाले काम किए जाएंगे तो लोगों की जान जाएगी।
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बिहार : गाेपालगंज में बेटे ने 100 रुपये के लिए मां का गला रेता
- नशे में आया था आरोपी, रुपये न देने पर कर दी हत्या
- वारदात के बाद गुस्साए लोगों ने जमकर पीटा, गिरफ्तार
- नशे का आदी है आरोपी और दो पत्नियां उसे छोड़ चुकीं
गोपालगंज | आलोक कुमार
बिहार में शराबबंदी लागू करते हुए सरकार का मानना था कि इससे महिला हिंसा में कमी आएगी पर राज्य में हर रोज होने वाली घटनाएं बताती हैं कि न तो शराब बंदी ठीक से लागू है और न ही शराबबंदी अकेले घरेलू हिंसा रोकने में मददगार है।
दरअसल गोपालगंज जिले में नशे में घर पहुंचे एक जवान बेटे ने केवल 100 रुपये के लिए अपनी मां की गला रेतकर हत्या कर दी है। अपनी मां को मार डालने वाला आरोपी पकड़ लिया गया है, वह पहले भी हिंसा करता रहा है। गांव वालो का कहना है कि उसके इस व्यवहार के चलते ही उसकी दो शादियां हुईं पर एक भी रिश्ता नहीं चल पाया। अब बीते 22 फरवरी को भी इस व्यक्ति ने अपनी मां को मार डाला।
गांव वालो ने पीटकर पुलिस को सौंपा

आरोपी रामभरोसे रावत को जमकर हुई पिटाई के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया। (गाेपालगंज संवाददाता )
यह वारदात गाेपालगंज जिले की है, वहां के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र उसरी बिनटोली में रविवार शाम (22 Feb) को यह घटना हुई। हमले के बाद गुस्साए लोगों ने आरोपी को जमकर पीटा और पुलिस के हवाले किया। पुलिस ने आरोपी रामभरोसे रावत को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है। मृतका की पहचान सुमित्रा देवी (55) के रूप में हुई है।
वारदात के समय अकेली थी मां
मृतका के पति गणेश रावत ने बताया, उनका बेटा शराब पीकर घर आया था, उस समय घर पर उनकी पत्नी अकेली थी। जबकि वे घर के बाहर काम कर रहे थे। पिता का कहना है कि बेटा बार-बार सौ रूपये मांग रहा था जो उनकी पत्नी के पास नहीं थे। इस पर गुस्साए बेटे ने वहीं पर रखे धारदार हथियार से मां का गला रेत दिया। मौके पर पत्नी चीखीं तो आसपास के लोग जुटे। उनके बेटे ने मां को मारकर भागने की कोशिश की तब सबने पकड़कर उसको खूब पीटा और पुलिस को बुलाकर उन्हें सौंप दिया।
आरोपी से पूछताछ जारी, धारधार हथियार बरामद

घटना की जानकारी देते सदर एसडीपीओ 2 राजेश कुमार। (गाेपालगंज संवाददाता )
इस मामले में सदर एसडीपीओ-2 राजेश कुमार ने बताया कि आरोपी रामभरोसे रावत को गिरफ्तार करके महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए मॉडल अस्पताल भेज दिया है। आरोपी घायल है इसलिए उसे भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, उससे पूछताछ की जा रही है, आगे जेल भेजा जाएगा।
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बिहार की सड़कों पर सुरक्षित पैदल चल सकेंगे: सरकार ने दिए बड़े निर्देश, जानिए क्या बदलेगा?
- सड़क सुरक्षा को लेकर बिहार सरकार का बड़ा कदम पर योजना स्पष्ट नहीं।
पटना | हमारे संवाददाता
बिहार सरकार ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार सुबह अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा कि राज्य की सड़कों पर बढ़ते वाहनों के बीच पैदल चलने वालों को सम्मान और सुविधा मिलेगी। अपनी घोषणा में मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य की सड़कों पर फुटपाथ, जेब्रा क्रॉसिंग व ऐसी सुविधायें बढ़ाई जाएंगी जिससे पैदल चलने वालोे की सुरक्षा सुनिश्चित हो। गौरतलब है कि बिहार में सड़कों पर पैदल चलने के लिए या तो फुटपाथ है ही नहीं, या फिर वे जगह-जगह टूटे या अतिक्रमण से घिरे हैं, जिससे राहगीरों को सड़क पर चलने को विवश होना पड़ता है और वे दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में यह घोषणा काफी अहम मानी जा रही है।
सभी बड़ी सड़कों पर ये बदलाव होंगे
सरकार के ‘सात निश्चय-3’ (2025-2030) के सातवें निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ के तहत परिवहन विभाग को 5 बड़े निर्देश दिए गए हैं।
- भीड़-भाड़ वाले शहरी और ग्रामीण इलाकों में जल्द फुटपाथ बनाए जाएंगे।
- चिह्नित जगहों पर जेब्रा क्रॉसिंग मार्क की जाएगी।
- व्यस्त स्थानों पर फुट ओवर ब्रिज (एस्केलेटर सहित) और अंडरपास का निर्माण होगा।
- वाहन चालकों को पैदल यात्रियों के अधिकारों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- ग्रामीण-शहरी ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना-प्रवण जगहें) चिह्नित कर फुटपाथ बनाए जाएंगे और CCTV कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि दुर्घटनाओं का आकलन हो और कमी लाई जा सके।
बिहार में पैदल यात्रियों की मौतें आम
बिहार में पैदल यात्री की स्थिति सबसे दयनीय और असुरक्षित है। सड़क परिवहन व राज्यमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की 2022 रिपोर्ट के अनुसार, बिाहर में हर सौ सड़क दुर्घटनाओं में मौत का प्रतिशत सबसे ज्यादा 82.4 फीसदी है। यानी रोड एक्सीडेंट के दस पीड़ित में से सिर्फ दो लोगों की जान ही बच पाती है।
पैदल यात्रियों की मौतों की बात करें तो राष्ट्रीय स्तर पर 19.5% हैं, लेकिन बिहार जैसे राज्यों में यह अनुपात ज्यादा है। 2019-2023 में भारत में 1.5 लाख पैदल यात्रियों की मौत हुई, जिसमें बिहार का बड़ा हिस्सा है।
बिहार की सड़कों पर फुटपाथ का हाल
कई सड़कों पर फुटपाथ या तो नहीं हैं या घुसपैठ से अवरुद्ध हैं। ब्लैक स्पॉट्स पर CCTV या सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी से दुर्घटनाएं बढ़ती हैं। पटना में कुछ जगहों पर फुटपाथ (जैसे बेली रोड, JP गंगा पथ) और अंडरपास (पटना जंक्शन से मल्टी-मॉडल हब) हैं, लेकिन अन्य शहरों में सुविधाएं सीमित या निर्माणाधीन हैं।
नए कदमों से क्या लाभ हो सकता है?
- सुरक्षित क्रॉसिंग और फुटपाथ से पैदल यात्रियों की दुर्घटनाएं 20-30% तक कम हो सकती हैं (राष्ट्रीय स्तर पर समान उपायों से देखा गया)।
- ब्लैक स्पॉट्स पर CCTV से मॉनिटरिंग और तेज कार्रवाई संभव होगी।
- वाहन चालकों का प्रशिक्षण संवेदनशीलता बढ़ाएगा, जिससे ओवर-स्पीडिंग और लेन अनुशासन में सुधार आएगा।
- कुल मिलाकर, दैनिक जीवन आसान होगा, बुजुर्गों/बच्चों की सुरक्षा बढ़ेगी और राज्य की सड़क सुरक्षा रैंकिंग सुधरेगी।
निर्देश तो सराहनीय पर बजट का पता नहीं
सरकार ने परिवहन विभाग को इसको लेकर तेजी से काम करने के निर्देश हैं, लेकिन स्पष्ट राशि का उल्लेख नहीं है। हालांकि राज्य बजट में सड़क विकास और सुरक्षा के लिए आवंटन बढ़ रहा है। पिछले वर्षों में राष्ट्रीय राज्यमार्ग व शहरी सड़कों पर हजारों करोड़ रुपये का खर्च हुआ है। माना जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट उसी से फंडेड होंगे। इसको लेकर विभाग जल्द ही कार्य योजना बनाएगा।
बता दें कि ये काम ‘सात निश्चय-3’ योजना के तहत होंगे, जिसे हाल ही में कैबिनेट ने मंजूरी दी है। योजना का फोकस ‘Ease of Living’ पर है, जिसमें सड़क सुरक्षा शामिल है।
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बिहार : भाजपा विधायक ने अपनी सरकार के शिक्षा विभाग पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, बोले- ₹2425 करोड़ का घोटाला हुआ
- हिसुआ विधायक अनिल सिंह के आरोपों से सदन में हंगामा मचा।
- विधायक बोले- रखरखाव के नाम पर करोड़ो रुपये का घोटाला।
नवादा/पटना | अमन कुमार सिन्हा
बिहार के भाजपा विधायक ने विधानसभा में NDA सरकार के शिक्षा विभाग के ऊपर बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। नवादा जिले की हिसुआ विधानसभा से विधायक अनिल सिंह ने शिक्षा विभाग में 2425 करोड़ रुपये की अनियमितता का बड़ा आरोप लगाकर जांच की मांग की। गौरतलब है कि NDA सरकार में भाजपा प्रमुख सहयोगी है, ऐसे में भाजपा विधायक का सवाल उठाना मायने रखता है।
भाजपा विधायक के साथ अन्य सांसदों ने भी शिक्षा मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। फिर आखिर में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को कहना पड़ा कि वे इस मामले की जांच करवाएंगे।
भाजपा विधायक अनिल सिंह ने सदन में कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा रखरखाव और अन्य मदों पर खर्च किए गए 2425 करोड़ रुपये में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि यह राशि निविदा के माध्यम से खर्च की गई है। उन्होंने शिक्षा मंत्री को चुनौती देते हुए इस मामले की पूरी तरह जांच कराने की मांग की।
विधायक ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के डीओ, डीपीओ स्थापना और संबंधित इंजीनियरों द्वारा राशि का दुरुपयोग किया गया है। अनिल सिंह ने विधानसभा में इस मामले की विस्तृत जांच के लिए एक कमेटी गठित करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि भवन निर्माण के लिए शिक्षा विभाग को मिले 2425 करोड़ रुपये में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ है। इस मुद्दे पर सदन में खूब बहस हुई, जिसके बाद सभी विधायकों ने एक स्वर में शिक्षा विभाग के खिलाफ आवाज उठाई।
आखिर में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि जिलाधिकारी (DM) को जांच के आदेश दिए गए हैं और जांच से संबंधित सभी जानकारी विधायकों को भी उपलब्ध कराई जाएगी।
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