प्रदेश रिपोर्ट
आर्थिक अपराध इकाई की जांच के घेरे में लखीसराय के पूर्व DM मिथिलेश मिश्र, जानिए क्या है पूरा मामला?
- 7 अप्रैल को जिलाधिकारी मिथिलेश कुमार मिश्र का हुआ था तबादला।
लखीसराय | गोपाल प्रसाद आर्य
बिहार के लखीसराय के जिलाधिकारी मिथिलेश कुमार मिश्र का तबादला किए जाने के अगले दिन आर्थिक अपराध शाखा उनके कार्यालय पर पहुंची और उनके कार्यकाल की फाइलें खंगाली गईं।
प्रशासनिक सूत्रों से पता लगा है कि पटना मुख्यालय में मिली लिखित शिकायतों के बाद ईओयू ने यह बड़ी कार्रवाई शुरू की है। ईओयू की टीम बुधवार की शाम को लखीसराय पहुंची।
EOU की रडार पर 16 महीने का कार्यकाल
मिथिलेश मिश्र का लखीसराय में कार्यकाल लगभग एक साल चार महीने का रहा। वे 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। सूत्रों के अनुसार, ईओयू की टीम आज सुबह जिला कार्यालय पहुंचकर जांच आगे बढ़ाएगी। सूत्रों के मुताबिक, आर्थिक अपराध शाखा की जांच के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं-
शस्त्र लाइसेंस की जांच – पिछले एक साल में जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों की फाइलों की गहनता से पड़ताल की जाएगी। इसके लिए डिप्टी कलेक्टर शशि भूषण कुमार से रिकॉर्ड तलब किए जा सकते हैं।
कला-संस्कृति और खेल विभाग- खेल पदाधिकारी मृणाल रंजन के विभाग से जुड़े दस्तावेजों, सांस्कृतिक आयोजनों और खिलाड़ियों को दिए गए फंड की कार्यप्रणाली की जांच होगी।
धान अधिप्राप्ति- धान खरीद से जुड़े अहम दस्तावेजों और विकास कार्यों की फाइलों को भी बारीकी से देखा जाएगा।
यह जांच अभियान अगले दो से तीन दिनों तक चलने की संभावना है। इस दौरान वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
तबादले के पीछे की कूटनीति और विवाद
मिथिलेश मिश्र के तबादले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सरकार बनने के महज पांच महीने बाद ही उनका तबादला कर उन्हें पटना सचिवालय की सामान्य शाखा में तैनात कर दिया गया है। इसके पीछे दो प्रमुख कारण माने जा रहे हैं-
डिप्टी सीएम से टकराव: चर्चा है कि लखीसराय के डीएम का स्थानीय मंत्रियों और रसूखदारों के साथ तालमेल सही नहीं था। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने भी नवंबर-25 में वोटिंग के दौरान उन पर अनसुनी करने के आरोप लगाए थे।
नीतीश कुमार का दौरा: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लखीसराय आगमन के दौरान हुई कुछ तकनीकी चूकों को भी उनके तबादले की एक वजह माना जा रहा है।
जनता में लोकप्रिय, लेकिन विवादों ने घेरा
एक तरफ जहां उन पर जांच की तलवार लटकी है, वहीं लखीसराय की जनता के बीच उनकी छवि एक ‘काम करने वाले अधिकारी’ की रही है। उनके कार्यकाल में बालगुदर गांव का 30 साल पुराना हिंदू-मुस्लिम जल विवाद सुलझाया गया।
उनके कार्यकाल में लाल पहाड़ी के ऐतिहासिक धरोहर को पहचान दिलाई गई। केंद्रीय विद्यालय के पास बाईपास सड़क का निर्माण शुरू हुआ। शहर के सौंदर्यकरण और म्यूजियम को आधुनिक रूप देने में उनकी अहम भूमिका रही।
इसके अलावा उनके कार्यकाल में फिल्म फेस्टिवल, लखीसराय फेस्टिवल, महिला फुटबॉल खेल आदि उल्लेखनीय कार्यक्रम हुए। इसमें लखीसराय फेस्टिवल का नाम ‘लक्खीसराय फेस्टिवल’ किए जाने को लेकर भी विवाद उपजा था।
फिलहाल लखीसराय का प्रभार पड़ोसी जिले के जिलाधिकारी को सौंपे जाने की चर्चा है।
प्रदेश रिपोर्ट
अररिया में सरेआम युवक की गला काटकर हत्या; भीड़ ने आरोपी को पीट-पीटकर मार डाला
- बिहार के अररिया में सड़क पर गला काटकर युवक ने हत्या की।
- फिर आरोपी युवक को भीड़ ने घेरकर पीट-पीटकर मार डाला।
- गुस्साई भीड़ ने आगजनी भी की, मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात।
अररिया | हमारे संवाददाता
बिहार के अररिया जिले में गुरुवार सुबह एक व्यक्ति की सरेआम गला काटकर हत्या कर दी गई, जिसमें युवक का सिर व धड़ अलग-अलग हो गया। इस दृश्य को देखकर प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोपी को पकड़ लिया और पीट-पीटकर उसे मार डाला।
इस वीभत्स घटना के बाद गुस्साए लोगों ने फारबिसगंज के सुभाष चौक पर आगजनी भी की। मौके पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात है।

मृतक अली हुसैन एक पिकअप चालक थे, जिनकी गला काटकर हत्या कर दी गई।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ठेले पर सत्तू बेचने वाले युवक ने चाकू से एक पिकअप चालक पर हमला किया। फिर उसका गला भी रेत दिया।
यह घटना फारबिसगंज मुख्यालय के मार्केट गेट नंबर-2 के पास की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि झगड़ा ठेले की जगह पर पिकअप लगाने को लेकर हुआ।

ठेले के पास हाथ में चाकू लिए खड़े इस युवक को हत्यारोपी बताया गया, जिसे भीड़ ने मार डाला।
घटना के समय प्रत्यक्षदर्शियों ने जो वीडियो शूट किए हैं, उसमें आरोपी युवक के हाथ में चाकू देखा जा सकता है। खास बात यह भी है कि आरोपी ने मौके से भागने की कोशिश नहीं की।
निर्मम हत्या को देखकर आसपास के लोगों ने आरोपी को घेरकर पीटा, उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया जहां पुलिस ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतक के सिर के पास खड़ा हत्यारोपी युवक।
मृतक पिकअप चालक की पहचान जोगबनी के अमोना निवासी अली हुसैन के रूप में हुई है। भीड़ की हिंसा में मारे गए हत्यारोपी युवक की पहचान रवि चौहान के रूप में हुई है। जो मटियारी के चौहान टोला का रहने वाला था।
सरेआम मर्डर में मारे गए अली हुसैन व भीड़ की हिंसा में मारे गए रवि चौहान के मामलों की पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इनके बीच पहले से कई झगड़ा तो नहीं था। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि भीड़ में किसने आरोपी युवक पर जानलेवा हमला किया। फिलहाल इस घटना की चर्चा पूरे बिहार में है।
प्रदेश रिपोर्ट
भागलपुर: स्कूल जा रहे तीन विद्यार्थियों को कार ने कुचला, हालत नाजुक; मायागंज रेफर
- भागलपुर में स्कूल जा रहे तीन बच्चों को कार ने टक्कर मारी।
- साइकिल से स्कूल जा रहे थे बच्चे, तीनों के सिर में गंभीर चोट।
- भागलपुर के सुल्तानगंज में महेशी चौक बाजार में एक्सीडेंट हुआ।
भागलपुर | अतिश दीपांकर
बिहार के भागलपुर जिले में एक कार ने साइकिल से स्कूल जा रहे तीन विद्यार्थियों को बुधवार सुबह टक्कर मार दी। तीनों को स्थानीय लोगों की मदद से रेफरल अस्पताल ले जाया गया। जहां से हालत गंभीर होने पर मायागंज अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया है।

इसी स्पॉट पर दुर्घटना हुई, सफेद रंग की (XL6) छोड़कर आरोपी कार चालक फरार हो गया।
यह दुर्घटना सुल्तानगंज के महेशी चौक बाजार के पास हुई। तेज रफ्तार से आ रही एक मारुति एक्स-एल सिक्स कार ने तीन स्कूली बच्चों को सामने से रौंदा दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि टक्कर इतनी तेज़ थी कि तीनों बच्चे सड़क पर उछलकर गिरे और उनकी साइकिल के कई हिस्से हो गए। चालक कार छोड़कर भागा लेकिन कहा जा रहा है कि स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया है। हालांकि इसकी पुष्टि पुलिस ने नहीं की है।

रेफरल अस्पताल की इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार के दौरान घायल छात्र।
स्थानीय लोगोें ने घटना की सूचना पुलिस को दी, तब प्रशिक्षु एएसपी सईम रज़ा व इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार अपनी टीम के साथ पहुंचे। फिर सभी अस्पताल जाकर घायल बच्चों से मिले। बच्चों के अभिभावक भी अस्पताल पहुंच गए हैं।
सुल्तानगंज रेफरल अस्पताल के प्रभारी ने बताया कि
“स्कूल जाने के दौरान तीनों सड़क हादसे का शिकार हो गए। तीनों को सिर में गंभीर चोट (हेड इंजरी) आई है इसलिए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें मायागंज अस्पताल रेफर किया गया है।”
भागलपुर रेफरल अस्पताल प्रभारी
घटना में घायल तीन विद्यार्थियों में एक छात्रा व दो छात्र हैं। घायल छात्रा 16 साल की करुणा कुमारी हैं, उनके पिता का नाम मिथलेश साह है। दो घायल छात्रों में एक का नाम अंश कुमार है जो 12 साल के हैं। उनके पिता का नाम मदन पासवान है। जबकि दूसरे छात्र 15 साल के दिव्यांशु कुमार हैं जिनके पिता का नाम रंजीत कुमार है।
तीनों विद्यार्थी सुल्तानगंज के महेशी गांव के रहने वाले हैं और एक साथ स्कूल जा रहे थे।
प्रशिक्षु एएसपी सायम रजा
प्रशिक्षु एएसपी सायम रजा ने बताया कि “घटनास्थल की जांच की जा रही है और जल्द ही वाहन को जब्त कर लिया जाएगा।”
प्रदेश रिपोर्ट
नवादा में हाथी के कुचलने से महिला किसान की मौत, 12 दिनों में दूसरी घटना से दहशत
- नवादा में बीते 12 दिनों मेें हाथी के कुचलने से दो मौतें।
- गोविंदपुर प्रखंड में गेहूं काट रही महिला की कुचलने से मौत।
- झारखंड से नवादा के जंगलों में आ गए हाथियों से भय व्याप्त।
नवादा | अमन सिन्हा
नवादा में हाथियों व स्थानीय लोगों के बीच का संघर्ष बढ़ता जा रहा है। 8 अप्रैल (बुधवार) की सुबह हाथियों का झुंड गोविंदपुर प्रखंड के गांव में जा पहुंचा। इस दौरान खेत में काम कर रही एक बुजुर्ग महिला किसान की कुचलने से मौत हो गई, जबकि उनका बेटा हाथियों के झुंड से खुद को बचाने में सफल रहा।

नवादा में हाथियों के झुंड के चलते स्थानीय लोगों में भय है।
बीते 12 दिनों में यह नवादा में हाथी-मानव संघर्ष के चलते दूसरी मौत है। इससे पहले 25 मार्च को रजौली प्रखंड में एक युवक की मौत हुई थी। गौरतलब है कि सीमावर्ती झारखंड के जंगलों से करीब 26 हाथियों का झुंड नवादा के जंगलों में विचरण कर रहा है। घटते वनक्षेत्र के चलते ये हाथी भोजन की तलाश में गांवों की तरफ बढ़ आते हैं जिससे घटनाएं हो रही हैं।

अस्पताल ले जाने पर महिला किसान को मृत घोषित कर दिया गया। खेत में कटाई करते समय कुचलने से हुई मौत।
हाथियों के झुंड का बुधवार को शिकार हुई महिला की पहचान मुन्ना देवी (55) के रूप में हुई है। वह गोविंदपुर प्रखंड के माधोपुर गांव की रहने वाली थीं।
ड्रोन से निगरानी फिर अलर्ट क्यों नहीं भेजा?
हालिया घटना पर वन विभाग की ओर से इस बारे में कोई बयान सामने नहीं आया है। लेकिन 25 मार्च को हुई मौत के बाद जिला वन विभाग की ओर से कहा गया था कि ड्रोन के जरिए हाथियों के मूवमेंट पर नज़र रखी जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर वाकई वन विभाग सक्रिय है तो उसकी ओर से ग्रामीणों को अलर्ट क्यों नहीं भेजा गया?
खेत में आ गए हाथियों के झुंड से मौत

मृतका के बेटे रतन प्रसाद यादव
मृतका के बेटे शिव रतन प्रसाद यादव ने पोस्टमार्टम हाउस पर बताया कि खेत में उनकी मां कटाई कर रही थीं, तभी अचानक करीब 26 हाथियों का झुंड खेत की ओर आ गया। उन्होंने बताया कि आसपास के लोगों ने उन्हें तुरंत बुलाया, वे मां को बचाने के लिए दौड़े तो हाथी उनकी ओर बढ़ने लगा। उन्होंने बताया कि हाथी ने उनकी मां को सूड़ से उठाकर फेंका, उनकी नज़रों के सामने मां की मौत हो गई। पीड़ित शिव रतन ने वन विभाग से मुआवज़े की मांग की है।

पोस्टमार्टम हाउस पर खड़े परिजन।
बता दें, इसी तरह 25 मार्च को हाथियों के झुंड के कुचलने से रजौली प्रखंड के सूअरलेटी गांव में सनोज भुइया (30) की मौत हो गई थी। साथ ही, हाथियों के झुंड के हमले में इसी गांव की तीन भैंसों की भी मौत हो गई थी।
बचाव के लिए इसका ध्यान रखें
वन विभाग के मुताबिक, अगर हाथी या हाथियों का झुंड आसपास दिखे तो फोन से वीडियो न बनाएं, उन्हें पत्थर न मारें और शोर न मचाएं। इससे जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है।
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