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ईरान का बड़ा दावा- “200 किलो यूरेनियम चुराने के लिए अमेरिका ने रची रेस्क्यू की साजिश”

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नई दिल्ली | ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका की रेस्क्यू की साजिश के पीछे का मकसद “ईरान से यूरेनियम चुराना” भी हो सकता है।

जबकि अमेरिका ने ईरान के इस्फ़हान प्रांत के दक्षिण में हुई कार्रवाई को अपने लापता एयरमैन को बचाने का मिशन बताया था।

यह एयरमैन अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान का क्रू मेंबर था जो ईरानी हमले में विमान के नष्ट होने के बाद वहीं लापता हो गया था।

गौरतलब है कि इस्फ़हान प्रांत में ईरान का एक प्रमुख परमाणु संयंत्र व अनुसंधान केंद्र है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने कहा है कि अमेरिका की इस्फ़हान में हुई कार्रवाई का मक़सद “ईरान से यूरेनियम चुराना” भी हो सकता है।

दरअसल, ईरान की यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर जारी उन चर्चाओं के बाद आई है, जिसमें कहा जा रहा है कि अमेरिका इतनी बड़ा ऑपरेशन अपने एयरमैन को बचाने के लिए नहीं, बल्कि इस्फ़हान से 200 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम ट्रांसफ़र करने के मकसद से था।

इस मामले में अमेरिका की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि अमेरिका को इस मिशन में काफ़ी नुक़सान का सामना करना पड़ा है।

बता दें कि सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पेंटागन ने इस कार्रवाई को “अपनी जीत” बताया था।

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ट्रंप की कड़ी चेतावनी – “आज रात एक सभ्यता नष्ट होगी”; जानिए इस धमकी पर ईरान की प्रतिक्रिया

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नई दिल्ली | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार की ईरान के ऊपर ‘बड़े हमले’ की चेतावनी जारी की है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा है कि “मंगलवार रात पूरी एक सभ्यता की मौत होने वाली है।”

राष्ट्रपति ट्रंप की यह चेतावनी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने होर्मुज़ खोलने के लिए मंगलवार की शाम आठ बजे (EST) तक की डेडलाइन दी है।

ट्रंप ने लिखा, –

“एक पूरी सभ्यता की आज रात मौत हो जाएगी और फिर कभी वापस नहीं आएगी। मैं ऐसा नहीं चाहता लेकिन शायद ऐसा हो सकता है। हालांकि, अब जब पूरी तरह शासन बदल चुका है। वहां अलग, ज़्यादा समझदार और कम कट्टर सोच वाले लोग आगे आए हैं, शायद कुछ क्रांतिकारी रूप से अच्छा हो सकता है, कौन जानता है?”

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का पोस्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का पोस्ट

राष्ट्रपति ट्रंप की इस धमकी के बाद दुनियाभर के लोग सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर चिंता जाहिर कर रहे हैं।

दूसरी ओर, युद्ध रोकने व होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर ईरान की ओर से अभी तक किसी समझौते पर सहमति नहीं बनी है।

हालांकि ईरान की ओर से 6 अप्रैल को कहा गया था कि उसे पाकिस्तान की ओर से इसको लेकर एक संघर्ष विराम का प्रस्ताव मिला है लेकिन वह किसी “डेडलाइन के दवाब” में आकर निर्णय नहीं लेगा।

अमेरिका ने हद पार की तो हम भी संयम नहीं दिखाएंगे – IRGC

अब मंगलवार को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने ट्रंप की चेतावनी पर प्रतिक्रिया जारी की है। सरकारी मीडिया ने IRGC के हवाले से कहा गया है कि अगर अमेरिकी सेना “अपनी हदें पार करती है” तो वे भी “संयम” नहीं दिखाएंगे। ईरान, अमेरिका और उसके सहयोगियों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा और वर्षों तक क्षेत्र में तेल और गैस की आपूर्ति को बाधित करेगा।

बयान में कहा गया है कि –

“अभी तक अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के ख़िलाफ़ काफ़ी संयम दिखाया है और अपने बदले के लिए लक्ष्य चुनने में सावधानी बरती है। लेकिन अब से इन चीज़ों का ध्यान नहीं रखा जाएगा। अगर अमेरिकी सेना अपनी हदें पार करती है, तो हमारी प्रतिक्रिया इस क्षेत्र से भी आगे तक जाएगी।”

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ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने से पहले ही अमेरिका ने ईरान के खर्ग द्वीप पर किये हमले

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नई दिल्ली | अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के परमाणु संयंत्रों व तेल संयंत्रों पर हमले की डेडलाइन मंगलवार रात तक बढ़ा दी थी, लेकिन इससे पहले मंगलवार की सुबह ईरान के खर्ग द्वीप के सैन्य ठिकानों पर हमलों का दावा किया गया है।

रॉयटर्स ने बताया है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ये ताज़ा हमले अमेरिकी रणनीति में किसी बदलाव का संकेत नहीं हैं।

एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से इस समाचार एजेंसी ने कहा है कि खर्ग द्वीप के सैन्य ठिकानों पर किए गए इन हमलों से तेल के बुनियादी ढांचे (Oil Infrastructure) पर कोई असर नहीं पड़ा है।

अधिकारी का यह भी कहना है कि ये वही सैन्य ठिकाने हैं जिनके ऊपर पहले भी हमला किया जा चुका है।

बता दें कि खर्ग द्वीप, फारस की खाड़ी में स्थित ईरान का एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप है। यह मेन लैंड से लगभग 25 किमी दूर है। इसे ईरान की ‘आर्थिक जीवनरेखा’ कहा जाता है क्योंकि यहां से देश के 90-95% कच्चे तेल का निर्यात होता है।

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पाक ने US-ईरान को भेजा नया शांति प्रस्ताव: ’45 दिनों का संघर्ष विराम और फिर युद्ध का स्थायी अंत’

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प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली | अमेरिका और ईरान एक नए शांति समझौते के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं जिसमें  45 दिनों के लिए संघर्ष विराम और फिर युद्ध के स्थायी अंत की शर्तें हैं। यह प्रस्ताव पाकिस्तान की ओर से भेजा गया है। अगर यह पास होता है कि संघर्ष विराम के साथ ही होर्मुज स्ट्रेट खोल दिया जाएगा।

होर्मुज स्ट्रेट

अमेरिकी समाचार वेबसाइट एक्सियोस (Axios) ने यह खबर इस मामले की जानकारी रखने वाले चार अधिकारियों के हवाले से दी है जो अमेरिका, इज़राय व मध्यस्थता करा रहे क्षेत्रीय देशों से जुड़े हैं।  उधर रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान को पाक से प्रस्ताव मिला है लेकिन वह अस्थायी संघर्ष विराम के बदले होर्मुज़ नहीं खोंलेगे।

दो चरणों वाले समझौते पर चर्चा जारी

  • पहला चरण: 45 दिनों का संभावित संघर्षविराम, जिसके दौरान युद्ध के स्थायी अंत पर बातचीत की जाएगी। जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है।

  • दूसरा चरण: युद्ध समाप्त करने पर अंतिम समझौता।

ट्रंप ने होर्मुज़ खोलने की डेडलाइन तीसरी बार बढ़ाई

ट्रंप ने पोस्ट के जरिए ईरान को चेतावनी दी है, जिसकी भाषा की काफी आलोचना हो रही है।

ट्रंप ने पोस्ट के जरिए ईरान को चेतावनी दी है, जिसकी भाषा की काफी आलोचना हो रही है।

उधर राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज़ खोलने की डेडलाइन को तीसरी बार बढ़ाकर मंगलवार की शाम आठ बजे तक कर दिया है। ट्रंप की चेतावनी है कि “अगर होर्मुज़ नहीं खोला गया तो वे ईरान में सब कुछ तहस-नहस कर देंगे।”

इस बारे में राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को ‘एक्सियोस’ (Axios) से कहा कि अमेरिका, ईरान के साथ ‘गहन बातचीत’ कर रहा है और मंगलवार को समय सीमा समाप्त होने से पहले समझौता हो सकता है।

‘पाक से मिला संघर्ष विराम का समझौता’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई मौकों पर पाक के सेना प्रमुख फील्‍ड मार्शल असीम मुनीर की तारीफ कर चुके हैं।

उधर, एक ईरानी शीर्ष अधिकारी के हवाले से रॉयटर्स ने पुष्टि की है कि ईरान को पाकिस्तान का संघर्ष विराम से जुड़ा एक प्रस्ताव मिला है, जिसकी वह समीक्षा कर रहा है।

साथ ही अधिकारी के हवासे से रॉयटर्स ने यह भी रिपोर्ट किया है कि ‘ईरान किसी अस्थायी संघर्ष विराम के बदले होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलेगा।’

अमेरिकी समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने शीर्ष अधिकारी के हवाले से यह भी बताया है कि ईरान को नहीं लगता कि अमेरिका एक स्थायी समझौते के लिए तैयार है।

अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि ईरान किसी डेडलाइन के खत्म होने के दवाब में आकर कोई फैसला नहीं लेगा।

टेक्स्ट मैसेज से हो ही युद्ध विराम पर चर्चा

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस

एक्सियोस ने अपनी खबर में राजनयिक प्रयासों की जानकारी रखने वाले चार स्रोतों के आधार पर दावा किया है कि यह बातचीत पाकिस्तानी, मिस्र और तुर्की के मध्यस्थों के जरिए हो रही है। साथ ही, ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच टेक्स्ट मैसेज से भी संवाद हो रहा है।

उधर, इसी मामले में रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पाक के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर रविवार की रात को उपराष्ट्रपति जेडी वांस, विशेष राजदूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ संपर्क में थे।

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