रिपोर्टर की डायरी
पटना हॉस्टल रेप-मर्डर केस: NEET छात्रा की मौत में अब तक क्या-क्या सामने आया, पुलिस की भूमिका पर सवाल क्यों उठे?
- 6 जनवरी को छात्रा हॉस्टल में बेहोश मिली, इलाज के दौरान 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई।
नई दिल्ली|
इन दिनों बिहार के अभिभावकों के बीच हॉस्टल में लड़कियों की सुरक्षा का मुद्दा छाया हुआ है। हर कोई जानना चाहता है कि पटना हॉस्टल में अचानक 17 साल की एक लड़की के साथ ऐसा क्या हुआ जिसे पटना पुलिस सुसाइड बताने लगे जबकि परिवार वालो का कहना है कि उनकी बेटी से रेप करके मर्डर कर दिया गया। आइए इस मामले के हर पहलू पर नजर डालें।
लड़की की तबीयत कहां बिगड़ी, मौत कैसे हुई?
जहानाबाद में अपने घर से नया साल मनाकर 5 जनवरी 2026 को छात्रा अपने हॉस्टल लौटी जिसका नाम शंभू गर्ल्स हॉस्टल है। परिवार का कहना है कि रात में सोने से पहले बेटी ने फोन पर बात की थी। छात्रा के मामा के मुताबिक, अगली शाम (6 जनवरी) हॉस्टल से बाहर के एक व्यक्ति ने फोन करके बताया कि वह बेहोश मिली है, उसे डॉक्टर सहजानंद के यहां लेकर जा रहे हैं। बाद में हॉस्टल की वार्डन ने फ़ोन किया कि बच्ची क्रिटिकल है। फिर पटना के ही प्रभात मेमोरियल हीरामती हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। वहां के इलाज से असंतुष्ट परिवार ने छात्रा को 10 जनवरी को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन 11 जनवरी की दोपहर छात्रा की मौत हो गई।
परिजनों ने क्यों रेप का केस फाइल कराया?
परिजनों ने लड़की के शरीर पर चोटें (सिर, गर्दन, प्राइवेट पार्ट्स) देखकर रेप का शक जाहिर किया। प्रभात खबर का दावा है कि एक डॉक्टर ने परिवार को बताया कि उनकी बेटी के साथ ‘कुछ गलत’ हुआ है। परिवार के मुताबिक, 8 जनवरी को लड़की करीब चार घंटे होश में रही और उसने इशारे में कहा कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है। हालांकि परिवार का यह भी कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें कोई बयान रिकॉर्ड नहीं करने दिया। परिवार हॉस्टल रूम चेक करने गए पर वहां सफाई की जा चुकी थी। शक के आधार पर परिवार ने रेप का केस 9 जनवरी को दर्ज हुआ।
पुलिस ने क्यों कहा- रेप नहीं सुसाइड है?
पटना पुलिस ने रेप की धाराओं में केस तो दर्ज कर लिया पर कहा कि प्राथमिक जांच में रेप की पुष्टि नहीं हुई है और लड़की के कमरे से नींद की दवा की शीशी मिली है। फिर पुलिस ने 13 जनवरी को एक प्रेस रिलीज़ जारी की, जिसमें कहा गया कि स्त्री रोग चिकित्सक की जांच में यौन हिंसा की पुष्टि नहीं हुई। यह भी कहा गया कि 8 जनवरी को छात्रा के यूरिन में नींद की गोलियों का डोज पाया गया। पुलिस ने छात्रा के मोबाइल की सर्च हिस्ट्री के हवाले से दावा किया कि 24 दिसंबर को सुसाइड और 5 जनवरी को नींद की दवा के संबंध में सर्च किया गया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट कब आई, रेप की पुष्टि पर SIT कब बनी?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट 15 जनवरी 2026 को पुलिस को मिली, जिसमें सेक्शुअल असॉल्ट की पुष्टि हुई। रिपोर्ट में “मार्क्स ऑफ वायलेंस” और 1.5-2 घंटे के प्रतिरोध के निशान बताए गए। जिसके आधार पर समझा गया कि मरने से पहले छात्रा ने अपने साथ हुई यौन हिंसा का विरोध किया। इस रिपोर्ट के बाद पुलिस की सुसाइड थ्योरी पर सवाल उठे तो 17 जनवरी को SIT बनने की घोषणा बिहार DGP ने की। तब IG जितेंद्र राना ने हॉस्टल का दौरा भी किया, तब जाकर 20 जनवरी को हॉस्टल सील किया गया।
पुलिस ने कितने लोगों को अब तक पकड़ा?
इस बीच पटना व जहानाबाद में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होने लगे और पूछा जाने लगा कि पुलिस ने हॉस्टल मालिक को क्यों नहीं पकड़ा है। तब जाकर पुलिस ने हॉस्टल मालिक मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार किया। इसके अलावा हॉस्टल के दो कर्मियों समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है।
क्या है रेप-मौत की थ्योरी?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस मानकर चल रही है कि छात्रा के साथ रेप हुआ और फिर हत्या की गई। हॉस्टल में घटना को ढंकने की कोशिश हुई। उसने डेढ़ से दो घंटे तक प्रतिरोध किया। दूसरी ओर, परिवार का दावा है कि उनकी बेटी के साथ गैंग रेप हुआ और उसे सुसाइड का रूप दिया गया। गौरतलब है कि डॉक्टरों ने पुष्टि की कि पेनिट्रेटिव असॉल्ट नहीं, लेकिन सेक्शुअल वायलेंस हुआ।
न्याय की मांग लेकर कांग्रेस सड़क पर, तेजस्वी भी बोले
बीते 19 जनवरी को कांग्रेस ने इस मामले पर पटना में जोरदार प्रदर्शन किया। इससे पहले जहानाबाद जाकर सांसद पप्पू यादव और जनसुराज नेता प्रशांत किशोर पीड़ित परिवार से मिले और दोनों ने ही पुलिस के रवैये पर सवाल उठाए। साथ ही, लंबी चुप्पी के बाद ट्वीट करके तेजस्वी यादव ने भी इस घटना को लेकर नीतीश सरकार सवाल उठाए।
जीतनराम मांझी ने आखिर क्यों कहा- CBI जांच होगी?
केंद्रीयमंत्री जीतनराम मांझी ने 18 जनवरी को मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह जघन्य अपराध है, सरकार अपना काम कर रही है, SIT बनाई गई है और इस मामले को CBI ने टेकअप किया है। उन्होंने कहा कि जिसने भी यह अपराध किया है, वह सज़ा से बच नहीं पाएगा। मांझी के इस बयान से कंफ्यूजन पैदा हुआ कि क्या इस मामले को सीबीआई ने अपने हाथों में ले लिया है ? हालांकि पुलिस की ओर से ऐसी कोई जानकारी सामने नही्ं आई है।
जांच का क्या है स्टेटस?
मामले की जांच SIT कर रही है, जहानाबाद जाकर भी टीम ने परिवार से केस पर पूछताछ की है क्योंकि छात्रा एक दिन पहले ही घर से लौटी थी। इस मामले में हॉस्टल के CCTV और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है।
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खगड़िया में पकड़ौआ विवाह: युवक ने कहा- ‘जबरन शादी कराई’, महिला बोली- ‘हम पहले से प्रेमी थे’
- बिहार में आज भी जबरन कराये जा रहे पकड़ौआ विवाह।
- खगड़िया जिले में एक किसान को गाय खरीदने के बहाने पकड़ा।
- जबरन शादी कराए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
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मुंगेर (बिहार): पुलिस ने थाने में कराई प्रेमी जोड़े की शादी, परिवार ने लिखा दी थी अपहरण की रपट
- मुंगेर पुलिस ने बालिग प्रेमी जोड़े की शादी थाने में करायी।
- पुलिस और ग्रामीण बने बाराती, इलाके में चर्चा बनी शादी।
- प्रेमी जोड़े ने साबित किया वो बालिग, पुलिस ने शादी करायी।
(नोट – इस खबर को वीडियो पर देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)
मुंगेर (हवेली खड़गपुर) | प्रशांत कुमार सिंह
अक्सर पुलिस को प्रेमी जोड़े के ऊपर जोर-दबाव बनाते देखा जाता है, पर बिहार के मुंगेर जिले की पुलिस ने मिसाल कायम की है जिससे युवाओं का पुलिस पर भरोसा बढ़ेगा। एक प्रेमी जोड़े की पुलिस थाने में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में शादी कराई गई।
यह मामला मुंगेर के हवेली खड़गपुर पुलिस थाने का है, जहां स्थित शिव मंदिर में प्रेमी जोड़े ने सात फेरे लिए। प्रेम विवाह करने वाली युवती का नाम पायल है जो तेघड़ा गांव की रहने वाली है जबकि युवक बृजेश भागलपुर जिले का रहने वाला है। बीती 23 जनवरी को दोनों एक साथ लापता हो गए थे। पायल के पिता अजय शाह का आरोप था कि बृजेश उनकी बेटी का अपहरण करके ले गया है और उन्होंने 28 फरवरी को इस मामले की FIR भी दर्ज करवा दी। उनका आरोप था कि उनकी बेटी नाबालिग है। इसके बाद खड़गपुर पुलिस लड़की का पता लगाने के लिए लगातार दबिश दे रही थी।
इसी बीच 2 फरवरी को प्रेमी युगल पुलिस थाने पहुंचा और पुलिस को बताया कि वे बालिग हैं और शादी करना चाहते हैं। पायल ने बताया कि वह अपनी मर्जी से बृजेश के साथ चली गई थी। इस मामले में पुलिस थाना प्रभारी राजेश कुमार ने दोनों परिवारों व कुछ जनप्रतिनिधियों को बुलाकर बात करवाई। फिर आपसी बातचीत और रजामंदी के बाद थाना परिसर के ही मंदिर में दोनों की शादी कराई गई, जिसे देखने के लिए आसपास के लोग भी जुट गए। इस मौके पर पंचायत समिति सदस्य भी मौजूद रहे।
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बिहार में भोजपुरी रीलों का खतरनाक ट्रेंड: एक हफ्ते में दो महिलाओं की हत्या, परिवार वालो ने रील बनाने के चलते मार डाला
- दरभंगा में रील बनाने वाली पूनम का शव उनके घर पर पड़ा। बेगूसराय में रील क्रिएटर के उसके पति ने मार डाला।
(नोट – इस खबर को वीडियो पर देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)
बेगूसराय | धनंजय झा
बिहार में भोजपुरी गानों पर रील बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल होने का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन अब यह ट्रेंड महिलाओं की जान लेने लगा है। पिछले एक सप्ताह में राज्य में रील बनाने वाली दो महिलाओं की हत्या हो चुकी है। दोनों मामलों में परिवार और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप है। यह घटनाएं भोजपुरी रीलों से जुड़े झगड़े और सामाजिक विरोध को उजागर कर रही हैं।
दरभंगा –
26 जनवरी को दरभंगा जिले में पूनम नाम की महिला की हत्या हुई। उसका शव ससुराल (सिंघवाड़ा) में मिला। पूनम भोजपुरी गानों पर रील बनाती थी। पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया है। आरोपियों में पूनम के पति संतोष सहनी, देवर अशोक सहनी, सास सुकुमारी देवी, ननद फुलो देवी और आशा देवी शामिल हैं। परिवार का कहना है कि रील बनाने को लेकर झगड़ा हुआ था।
बेगूसराय –
बेगूसराय में एक महिला की हत्या उसके पति ने गोली मारकर की। आरोपी पति ने पहले पुलिस को बताया कि दुश्मनी के कारण किसी ने पत्नी को गोली मारी। लेकिन सख्त पूछताछ में उसने कबूल लिया कि उसने खुद हत्या की। उसका आरोप है कि पत्नी रील बनाती थी और इंस्टाग्राम पर गुजरात के एक युवक से उसका अफेयर था। बार-बार मना करने पर भी वह मिलने जाती थी, इसलिए उसने हत्या कर दी। पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
बढ़ता खतरा और सवाल
भोजपुरी गानों पर डांस करके रील बनाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इससे परिवार और समाज में झगड़े, विरोध और अब हत्याएं होने लगी हैं। इन मामलों को महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ-साथ उनके शरीर को कमोडिटी की तरह पेश करने के बढ़ते ट्रेंड के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार को ऐसे कंटेंट पर रोक लगानी चाहिए और सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलानी चाहिए।
जेंडर एंगल –
यह घटनाएं बिहार में महिलाओं की सुरक्षा और सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। अब देखना यह है कि सरकार और पुलिस इस पर क्या कदम उठाती है।
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