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आज के अखबार

अमेरिकी विदेशमंत्री की यात्रा से पहले मस्क से मोदी की वार्ता

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फाइल फुटेज

1- अमेरिकी उपराष्ट्रपति की भारत यात्रा से पहले मोदी-मस्क की वार्ता 

इस ख़बर को द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने पहले पन्ने की लीड बनाया है, जिसमें बताया गया है कि मस्क व मोदी के बीच बातचीत ऐसे दौर में हो रही है जबकि ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर पारस्परिक ड्यूटी लगाई है और अगले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति वेन्स भारत आ रहे हैं। पारस्परिक कर ( रेसिप्रोकल टैरिफ़) से निपटने के लिए भारत अमेरिका के साथ व्यापार नीति बनाने पर तेजी से काम कर रहा है, ऐसे में मस्क से मोदी की फोनवार्ता महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वेन्स के आने पर भी इस कार्य को गति मिलने की संभावना है। ख़बर में बताया गया है कि मोदी ने एक्स पर ट्वीट किया कि फोनवार्ता में दोनों ने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। इस ख़बर को दैनिक भास्कर, टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी पहले पन्ने पर लिया। हालांकि दैनिक हिन्दुस्तान इसकी अहमियत नहीं समझ पाया और इसे विदेश पन्ने पर छापा है।  एक्सप्रेस व टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी-अपनी ख़बर में यह भी बताया है कि गुरूवार को मस्क की सेटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस कंपनी ‘स्टारलिंक’ के प्रतिनिधि ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाक़ात की, जिसमें उन्होंने भारत में कंपनी के भविष्य के निवेश व स्थानीय साझेदारी (पार्टनरशिप) पर चर्चा की।  अभी यह कंपनी भारत में काम शुरू करने के लिए सुरक्षा प्रमाणपत्र का इंतज़ार कर रही है। बता दें कि मस्क की स्टारलिंक ने पिछले साल रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के साथ साझेदारी की, इसके जरिए भारत में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की योजना है।

द इंडियन एक्सप्रेस, 19 अप्रैल

द इंडियन एक्सप्रेस, 19 अप्रैल

ख़बर की अहमियत – ये मोदी की मस्क से दूसरी वार्ता है जो मात्र दो महीने के भीतर हुई है। मस्क की ट्रंप सरकार में खासी अहमियत को देखते हुए उपराष्ट्रपति वेन्स के भारत दौरे से पहले मस्क से वार्ता अहम हो जाती है। इसके अलावा, मस्क के भारत में टेस्ला व स्टारलिंक के जरिए निवेश की योजनाओं के चलते यह महत्वपूर्ण है।

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2- नासिक की दरगाह ध्वस्त करने के नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई 

इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पन्ने पर एक और महत्वपूर्ण ख़बर लगाई कि नासिक के एक प्राचीन दरगाह के आसपास अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए नासिक नगर निगम के दिए गए ध्वस्तिकरण नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। साथ ही सर्वोच्च अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट से पूछा है कि हजरत सतपीर सैयद बाबा दरगाह की ओर से इस ध्वस्तिकरण के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका को सूचीबद्ध करने और सुनवाई करने से क्या इनकार कर दिया गया था? बता दें, 15 अप्रैल की रात में एनएमसी अधिकारियों ने जब निर्माण गिराने की कार्रवाई शुरू की तो भीड़ की पुलिस के साथ झड़प हो गई थी।

द इंडियन एक्सप्रेस, 19 अप्रैल

द इंडियन एक्सप्रेस, 19 अप्रैल

ख़बर की अहमियत – इस मामले में अंतरिम रोक लगाने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट की दो जजों वाली पीठ ने हाईकोर्ट से प्रश्न किया है कि तत्काल सुनवाई के लिए लिखित अनुरोध वाली याचिका को क्यों नहीं सुना गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जवाबदेही लेने से किसी मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने में पारदर्शिता आ सकती है।

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3- अगर तिहाड़ में बंद किया तो आरोपियों को भारत नहीं भेजेंगे : ब्रिटेन प्रत्यर्पण अथॉरिटी 

भारत की अदालतों विशेषकर तिहाड़ में बंद आरोपियों के साथ कथितरूप से होने वाले टॉर्चर का मुद्दा उठाते हुए ब्रिटेन की प्रत्यर्पण अथॉरिटी ने भारत के सामने शर्त रखी है कि अगर वह यह सुनिश्चित करेगा कि जो बड़े अपराध के आरोपी वह भारत में बुलाना चाहता है, उन्हें तिहाड़ में नहीं रखेगा.. तब ही वे (ब्रिटेन) भारत में प्रत्यर्पण की अपील पर सुनवाई करेंगे। द टाइम्स ऑफ इंडिया ने यह अहम ख़बर पहले पन्ने पर लगाई है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया, 19 अप्रैल

द टाइम्स ऑफ इंडिया, 19 अप्रैल

 

ख़बर की अहमियत – भारतीय जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं, ऐसे में ब्रिटेन का भारतीय सरकार से यह कहना है उनके देश से भारत भेजे जाने वालों से जेल में मानवीय व्यवहार किया जाए और तिहाड़ को ‘अमानवीय व्यवहार’ की एक उपमा बना देना महत्वपूर्ण है। अगर भारत सरकार ऐसा आश्वासन देती है तो यह ब्रिटेन से भारत प्रत्यर्पित होने वाले सभी मामलों पर लागू होगा, जिसका असर अन्य विदेशी प्रत्यर्पण के मामलों पर भी पड़ सकता है।

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अमेरिका में जिन विदेशी विद्यार्थियों का वीजा रद्दा हुआ, उसमें आधे भारतीय 

अमेरिका में वीजा कैंसिल होने वालों में से आधे विद्यार्थी भारत से हैं जबकि 14 प्रतिशत चीन से हैं। अमेरिकी दूतावास ने वीजा अपॉइंटमेंट रद्द कर दिए हैं। अमेरिका में जिन अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के वीजा हाल ही में रद्द कर दिए गए उनमें से लगभग 50 प्रतिशत भारत से थे। अमेरिकी इमिग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन (AILA) ने यह जानकारी दी। यह ख़बर द इंडियन एक्सप्रेस व टाइम्स ऑफ इंडिया ने पहले पन्ने पर दी है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया, 19 अप्रैल

द टाइम्स ऑफ इंडिया, 19 अप्रैल

ख़बर की अहमियत – कई भारतीय विद्यार्थियों को बहुत छोटे अपराध जैसे ट्रैफिक व पार्किंग नियम तोड़ना आदि के आधार पर अमेरिकी सरकार ने विदेशी विद्यार्थियों का वीजा रद्दा करना शुरू कर दिया है। इस मामले में अभी तक भारतीय सरकार की अमेरिका को कोई शिकायत दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने नहीं आई है, ऐसे में यह ख़बर और ज्यादा चिंताजनक है।

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4- श्रीलंका ने सैन्य अभ्यास के लिए पाक को कहा 

इस हेडलाइन के साथ दैनिक हिन्दुस्तान अख़बार ने यह ख़बर पहले पन्ने पर लीड लगाई है। जिसमें बताया गया है कि भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में पाकिस्तान की नौसेना के साथ एक संयुक्त सैन्य अभ्यास किया जाना था, जिसकी जानकारी होने पर भारत ने इसका विरोध जताया और इसके बाद श्रीलंका ने कदम पीछे खींच लिए हैं। अख़बार ने ख़बर में लिखा है कि इस मामले पर पाक व श्रीलंका दोनों ही ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है पर अभ्यास से श्रीलंका ने हाथ पीछे खींच लिए हैं, ऐसा सूत्रों ने बताया है। दैनिक हिन्दुस्तान ने यह ख़बर न्यूज़ एजेंसी के हवाले से लगाई है। ग़ौरतलब है कि इस मामले की ख़बर किसी अन्य प्रमुख अख़बार में नहीं छपी है।  अख़बार का कहना है कि यह अभ्यास त्रिंकोमाली में होना था, यह क्षेत्र भारत के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि त्रिंकोमाली के जरिए बंगाल की खाड़ी और पूर्वोत्तर हिंद महासागर के अधिकांश हिस्से पर दबदबा बनाया जा सकता है।  हाल में प्रधानमंत्री मोदी की कोलंबो यात्रा के दौरान भारत, श्रीलंका और यूएई ने त्रिंकोमाली को ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए महत्वाकांक्षी समझौते को अंतिम रूप दिया गया था। 

दैनिक हिन्दुस्तान, 19 अप्रैल

दैनिक हिन्दुस्तान, 19 अप्रैल

ख़बर की अहमियत – श्रीलंका में चीन के बढ़ते दवाब के बीच पाकिस्तान का वहां संयुक्त सैन्य अभ्यास करना भारत के लिए दोहरी चुनौती बन सकता था।  बता दें कि श्रीलंका के महत्वपूर्ण हंबनटोटा बंदरगाह को वहां की सरकार ने 99 साल के लिए चीन को पट्टे (लीज़) पर दे दिया है। यहां के कोलंबो बंदरगाह पर चीन ने अपना एक युद्धपोत दो साल पहले डॉक किया था, जिस पर भारत ने चिंता जतायी थी। 

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2- दैनिक भास्कर ने NTA को बताया – नेशनल तमाशा एजेंसी

इंजीनियरिंग व मेडिकल की प्रतिष्ठित परीक्षाएं कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTP) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दैनिक भास्कर ने पहले पन्ने पर एक बड़ी स्टोरी लगाई है। इसमें बताया गया है कि जेईई मेन की परीक्षा के तुरंत बाद प्रोविज़नल आंसर-की आ जानी चाहिए थी पर इसे एनटीपी ने चार दिन बाद जारी किया और इसके पाँच दिन के बाद फाइनल आंसर-की जारी की गई, पर उसे भी ढाई घंटे के अंदर वापस ले लिया गया। भास्कर के मुताबिक़, इसमें 11 सवालों के जबाव में सुधार की ज़रूरत है। इतनी बड़ी परीक्षा में इतनी अधिक संख्या में प्रश्नों के जवाब ठीक न होना, इसकी गंभीरता पर प्रश्न खड़े करता है। अख़बार लिखता है कि इसी तरह सीजूईटी-पीजी की परीक्षा हुए 18 दिन हो गए हैं पर अब तक फाइनल आंसर-की जारी नहीं हुई है, जबकि अब तक रिजल्ट आ जाना चाहिए था।

ख़बर की अहमियत – भास्कर ने विशेषज्ञ के हवाले से लिखा है कि आंसर-की देरी से जारी होने से अभ्यार्थियों को पेपर पर आपत्ति दर्ज कराने का पर्याप्त मौका नहीं मिल जाता, तब तक रिजल्ट आ जाता है। सवालों के जवाब में गलतियों के मामलों पर विशेषज्ञ के हवाले से कहा गया है कि ऐसा लगता है कि पेपर मशीन से बनाया जा रहा है, इंसानी दख़ल अगर हो तो इतनी गलतियां नहीं हो सकतीं।

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अगर रूस-यूक्रेन युद्ध पर सहमति नहीं बनी तो हम ख़ुद को अलग कर लेंगे : अमेरिकी विदेश मंत्री 

द हिन्दू ने पहली ख़बर लगाई है कि अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा है कि यूक्रेन में युद्ध रोकने के प्रयासों में अगर कुछ और देशों देशों ने  अच्छा प्रदर्शन नहीं हुआ तो अमेरिका इस प्रयास से खुद को अलग कर लेगा। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि हम इस कोशिश में महीनों तक नहीं जुटे रहेंगे, ृहमारे पास और भी कई काम हैं।

द हिन्दू, 19 अप्रैल

द हिन्दू, 19 अप्रैल

ख़बर की अहमियत – यूक्रेन इस युद्ध में अमेरिका सहायता के बूते इतने लंबे समय तक लड़ता आया है, ऐसे में अगर ट्रंप अमेरिका को इस युद्ध से अलग करते हैं तो यह यूक्रेन के लिए बहुत बड़ा झटका होगा।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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जेरुशलम पोस्ट : इजरायली दौरे पर पीएम मोदी को लेकर ऐसा क्या लिखा जो चर्चा बन गया?

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जेरुशलम पोस्ट (तस्वीर - X/@ZvikaKlein)
जेरुशलम पोस्ट (तस्वीर - X/@ZvikaKlein)
नई दिल्ली | 
पीएम नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा को लेकर जेरूसलम पोस्ट के पहले पन्ने की कवरेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। पीएम मोदी ने तक इसके ऊपर प्रतिक्रिया देते हुए अखबार के संपादक के पोस्ट को रीट्ववीट किया है। 
दरअसल 25 फरवरी को अखबार के फ्रंट पेज पर एक बड़ी हेडिंग लगाते हुए हिंदी में “नमस्ते” और हिब्रू में इसका अनुवाद छपा। इस हेडिंग के नीचे एक पंक्ति लिखी है- “दो प्राचीन राष्ट्रों ने खोला नया अध्याय”। कवरेज में पीएम मोदी की हाथ हिलाकर अभिवादन करती एक तस्वीर भी छापी है। 
अखबार के पहले पन्ने को ट्वीट करते हुए अखबार के प्रधान संपादक ज्विका क्लेन ने ट्वीट किया। जिसे रीट्वीट करते हुए पीएम मोदी ने जवाब दिया- “यह दौरा दोनों देशों की मित्रता को नई गति देगा।”
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भारत-EU संयुक्त बयान में ऐसा क्या, जिसे यूक्रेन पर भारत के बदले रुख की तरह देखा जा रहा?

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भारत-यूरोपीय संघ के संयुक्त बयान ने रूस पर भारत के चले आ रहे चार साल के स्टैंड को बदल दिया है।
भारत-यूरोपीय संघ के संयुक्त बयान ने रूस पर भारत के चले आ रहे चार साल के स्टैंड को बदल दिया है।
  • भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध पर संयुक्त बयान जारी हुआ जो नई दिल्ली के पुराने रूख से अलग।

नई दिल्ली|

भारत और यूरोपीय संघ के बीच 27 जनवरी को हुई शिखर वार्ता के दौरान FTA समझौते पर वार्ता पूरी होने के साथ एक और अहम घटना हुई। भारत-यूरोपीय संघ ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें इस युद्ध को लेकर भारत का बयान अपने पूर्व के बयानों से अलग है। संयुक्त बयान में भारत-यूरोपीय संघ ने कहा है कि “वे ऐसे प्रयासों का समर्थन करेंगे जो स्वतंत्रतासंप्रभु, क्षेत्रीय अखंडता पर आधारित हो।”

द इंडियन एक्सप्रेस ने इस बयान को लेकर लिखा है कि भारत का यह बयान यूक्रेन पर उसके पुराने रूख से बिल्कुल अलग है क्योंकि चार साल से जारी युद्ध को लेकर कभी भारत ने यूक्रेन पर रूसी आक्रामकता का खंडन नहीं किया था। भारत का यह रूख ही पिछले चार साल से यूरोपीय संघ और भारत के बीच बड़ा रोड़ा बना हुआ था। अखबार ने लिखा है कि भारत की नई पोजिशन रूस हित के विपरीत है क्योंकि 2022 में रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण करके उसकी स्वतंत्रता, संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित किया है। 

EU ने भारत से रूस पर दवाब डालने को कहा

द हिन्दू ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काज़ा कल्लास के हवाले से लिखा है कि शिखर सम्मेलन के दौरान यूरोपीय संघ ने भारत से कहा कि वह रूस पर यूक्रेन युद्ध को लेकर दवाब बनाए। कल्लास ने शिखर सम्मेलन के तुरंत बाद हुए थिंक टैंक इवेंट में कहा कि रूस ने यूक्रेन के साथ संघर्ष विराम पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है और आम नागरिकों पर बमबारी कर रहा है। इस मामले में हमने अपने भारतीय सहयोगी से कहा है कि वे रूस पर शांति के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए दवाब बनाएं।

बोर्ड ऑफ पीस पर क्या रूख ?

ट्रंप के बनाए Board of Peace को लेकर भी संयुक्त बयान में जिक्र है, अखबार के मुताबिक दोनों ने इसके गज़ा में शांति व पुर्ननिर्माण के उद्देश्य से समर्थन जताया है, हालांकि दोनों ही इसके उद्देश्य को गज़ा तक ही सीमित रखने का संकेत दे रहे हैं। दोनों ने ही अब तक ट्रंप के बनाए इस बोर्ड को ज्वाइन नहीं किया है।

ईरान पर क्या रुख ?

ईरान में हुए प्रदर्शन को लेकर संयुक्त बयान में कहा गया है कि वे चाहते हैं कि इस स्थिति को डिप्लोमेसी व वार्ता के जरिए सुलझाया जाए। अखबार का कहना है कि इस तरह भारत व ईयू ब्लॉक संदेश दे रहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका व यूरोपीय संघ की आक्रामकता के वे पक्षधर नहीं हैं।

 

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भारत के ये राज्य 10 साल बाद हो जाएंगे बूढ़े, Aging आबादी पर सरकारी रुख से क्यों चिंतित The Hindu?

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भारत में बूढ़ी होती आबादी बढ़ने से सामाजिक सुरक्षा का सवाल और गंभीर हो जाएगा। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
भारत में बूढ़ी होती आबादी बढ़ने से सामाजिक सुरक्षा का सवाल और गंभीर हो जाएगा। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
  • RBI के मुताबिक, भारत के राज्यों में असमान रूप से सांख्यिकी बदलेगी।
नई दिल्ली |
भारत में अगले दस साल में जनसांख्यिकी (Demography) में असमान बदलाव दिखने वाले हैं। आरबीआई की नई रिपोर्ट से पता लगा है कि 2036 तक केरल (22%) और तमिलनाडु (20%) बूढ़ी होती आबादी वाले यानी Aging States बन जाएंगे। कर्नाटक और महाराष्ट्र में संतुलित वृद्धि होगी लेकिन एजिंग का दबाव बढ़ेगा। 
दूसरी ओर, हिन्दी भाषी राज्य यूपी, बिहार और झारखंड में युवा आबादी (Working Age Population) 2031 तक बढ़ती रहेगी। यानी जो देश अब तक अपनी युवा आबादी के ऊपर गर्व करता आया है, उसके लिए अगले दशक में चिंता की स्थिति बन सकती है। इस अनुमान के आधार पर आरबीआई की सलाह है कि एजिंग राज्यों को पेंशन पर होने वाले खर्च को वैलेंस करने के लिए अभी अपनी सब्सिडी योजनाओं को संतुलित कर लेना चाहिए। दूसरी ओर, जिन राज्यों में अभी युवा आबादी बढ़ती रहेगी, वहां शिक्षा और मानव पूंजी पर निवेश किया जाना चाहिए। 

क्या है द हिन्दू की चिंता

इस रिपोर्ट को लेकर द हिन्दू ने 27 जनवरी को संपादकीय लिखा है कि आरबीआई की इस राजकोषीय सलाह को लागू करना दक्षिणी राज्यों के लिए चुनौतीपूर्ण है। अखबार का कहना है कि जनसंख्या वृद्धि को काबू करने से इन राज्यों को केंद्रीय टैक्स का कम हिस्सा मिल रहा है, दूसरी ओर आगामी परिसीमन में आशंका जतायी जा रही है कि जनसंख्या के आधार पर ही उनका संसदीय प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
द हिन्दू, 27 जनवरी

द हिन्दू, 27 जनवरी

साथ ही अखबार ने आरबीआई की रिपोर्ट को लेकर कहा है कि इसमें बुजुर्ग महिलाओं की चिंता शामिल नहीं की गई है। अखबार का कहना है कि कि रिसर्च के मुताबिक वे ज्यादा लंबा जीती हैं और उनके पास कोई पारिवारिक संपत्ति नहीं होती, साथ ही एकल परिवार के चलन के चलते सरकार को ऐसी नीति बनानी होगी कि बुजुर्ग होती आबादी सम्मानपूर्वक अपना जीवन जी सके।
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