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पाक : भारत से गए ‘शरणार्थियों’ के आरक्षण के खिलाफ POK में हिंसक प्रदर्शन

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भारत-पाक सीमा पर तैनात सिक्योरिटी फोर्स (प्रतीकात्मक तस्वीर)
भारत-पाक सीमा पर तैनात सिक्योरिटी फोर्स (प्रतीकात्मक तस्वीर)
  • 1947 में भारत से पाकिस्तान गए शरणार्थियों की विधानसभा में 12 सीटों को कम करने की मांग
  • तीन दिन पहले शुरू हुआ आंदोलन हिंसक हुआ, तीन पुलिसकर्मियों की मौत, 150 घायल
 नई दिल्ली |
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में स्थानीय लोगों ने भारत से पाकिस्तान गए शरणार्थियों की विधानसभा में 12 सीटों को कम करने की मांग को लेकर  शुरू हुआ, बुधवार को हिंसक हो गया।
इस दौरान 3 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई और 150 से अधिक घायल हुए, जिसमें 8 की हालत गंभीर है।
UN मानवाधिकार कार्यालय और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 अक्टूबर को चम्याती में झड़पों में 3 पुलिसकर्मियों की मौत और 150 से अधिक घायल हुए, जिसमें आठ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
रॉयटर्स के मुताबिक, यह आंदोलन शरणार्थियों के सीधे विरोध में नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक भागीदारी को लेकर स्थानीय असंतोष का परिणाम है।

पाकिस्तानी मीडिया हाउस ‘द डॉन’ के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने 1 अक्टूबर को टेलीविजन संबोधन में प्रदर्शनों पर चिंता जताई और शांति बहाल करने का आह्वान किया

29 सितंबर को  ‘जम्मू कश्मीर पब्लिक एक्शन कमेटी’ (PAC) ने प्रदर्शन शुरू किया, प्रदर्शनकारियों की मांग है कि 1974 के POK संविधान के तहत शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को खत्म किया जाए।
बता दें कि ये सीटें भारत से 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान गए शरणार्थियों के लिए आरक्षित की गई हैं।

तीन दिनों के चल रहा था आंदोलन

POK में रह रहे शरणार्थियों ने अपनी मांगों को लेकर तीन दिन पहले 29 सितंबर को आंदोलन शुरू किया था।

आंदोलन चला रहे ‘जम्मू कश्मीर पब्लिक एक्शन कमेटी’ (पीएसी) ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं।

जिसमें शरणार्थियों के लिए 12 विधानसभा सीटों का प्रावधान करने की मांग प्रमुख है। साथ ही, प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं के विशेषाधिकार समाप्त करने की मांग रखी गई है।

इसके अलावा न्यायिक प्रणाली में सुधार की भी मांग है।

प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि उन्हें फ्री मेडिकल सुविधा मिले, कोटा सिस्टम खत्म किया जाए व निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान हो।

 

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