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रिपोर्टर की डायरी

रोहतास में जहरीली शराब से 3 मौतों की आशंका; आबकारी अफसर बोले- कुत्ता काटने से मरे

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  • रोहतास जिले में तिलक में शामिल हुए तीन लोगों की मौत से हड़कंप।
  • तीनों युवकों के शराब पीने से मौत की आशंका, प्रशासन का इनकार।
  • पटना से पांच डीएसपी की टीम ने गांव पहुंचकर शुरू कर दी जांच।

(note – इस खबर को वीडियो में देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

सासाराम | अविनाश कुमार श्रीवास्तव

बिहार के रोहतास जिले में एक तिलक कार्यक्रम में शामिल हुए कम से कम तीन लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत होने की खबर है। इन मौतों के पीछे का कारण जहरीली शराब होने की संभावना को देखते हुए पटना से पांच डीएसपी की विशेष जांच टीम मौके पर पहुंची है। 14 फरवरी को हुए कार्यक्रम के दो दिन के भीतर तीन मौतें होने के बाद स्थानीय सोशल मीडिया पर इसको लेकर चर्चा शुरू हुई, जिसके बाद प्रशासन सतर्क हुआ।

आबकारी अफसर बोले- कुत्ता काटने से मौत हुई, शराब से नहीं

सोशल मीडिया पर मौतों की संख्या तीन से ज्यादा बताई जा रही है, हालांकि प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है। इस बीच चौंकाने वाली बात यह है कि जांच करने पहुंचे जिला आबकारी असिस्टेंट कमिश्नर ने एक मौत के पीछे का कारण डॉग बाइट बताया। अधिकारी तारिक महमूद का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद मौत हुई है।

जिला उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त तारिक महमूद

जिला उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त तारिक महमूद

बिहार DGP क्या बोले?

कुल मौतों की संख्या और मौत के कारण को लेकर जिला SP कुछ भी बताने से इनकार कर रहे हैं। इस बारे में संवाददाता ने जब बिहार डीजीपी विनय कुमार को फोन लगाकर पूछा कि क्या पांच लोगों की मौत शराब पीने से हुई है तो उन्होंने बताया कि अभी इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं हुआ है। अगर ऐसा कोई कारण निकलकर आता है तो एफआईआर करके कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल इस घटना ने एक बार फिर से बिहार में जारी शराब बंदी की सफलता पर सवाल खड़ा कर दिया है। बिहार में दस साल से जारी शराबबंदी के बीच कच्ची व विदेशी शराब की तस्करी आम है। शादी समारोह व अन्य छोटे-बड़े कार्यक्रमों में शराब बांटे जाने की खबरें भी सामने आती रहती हैं।

तिलक कार्यक्रम के बाद तबीयत बिगड़ी

रोहतास जिले में बीते 14 फरवरी को बिक्रमगंज प्रखंड के मठिया गांव में एक तिलक चढ़ा। इस तिलक कार्यक्रम से लौटने के बाद अलग-अलग गांव के तीन लोगों की मौत की पुष्टि परिवार व प्रशासन ने की है। मरने वालो में दूल्हे का भाई भी शामिल है।

पिता बोले- कुत्ता काटने से तुरंत मौत कैसे?

इस घटना को लेकर दूल्हे के पिता पूरन सिंह ने कहा कि उनके बेटे लल्लू को कुत्ते ने काटा था, पर वह शराब भी पीता था। उन्हें आशंका है कि तिलक के बाद उनके बेटे व अन्य लोगों ने शराब पी होगी, जिससे उनकी मौत हो गई क्योंकि कुत्ते के काटने के कुछ घंटों बाद ही मौत कैसे हो सकती है?

16 फरवरी को लल्लू की मौत के बाद उनके रिश्तेदार सबदला गांव निवासी अभिजीत सिंह की मौत की भी खबर आई। मरने वालो में तीसरा नाम भोजपुर जिले के राहुल का है।

दो और युवकों की मौत की चर्चा

इसके अलावा, दो अन्य युवकों की भी मौत की खबर है जो अकोढ़ीगोला निवासी व पेशे से बावर्ची बताए जा रहे हैं, हालांकि इसकी पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं की जा सकी है।

उत्पाद टीम ने गांव जाकर जांच की

इन मौतों के बाद स्थानीय सोशल मीडिया पर चर्चा बढ़ी तो 17 फरवरी को उत्पाद विभाग की टीम ने जाकर सभी गांव में जांच की। इस दौरान  जिला आबकारी असिस्टेंट कमिश्नर ने मीडिया से कहा था कि

“परिवार कुत्ता काटने की बात बता रहा है, शराब पीने से जुड़े कोई साक्ष्य मौके पर नहीं मिले हैं, मौत कुत्ता काटने से ही हुई है।”

अब देखना होगा कि पटना से आई जांच टीम को इस मामले में क्या मिलता है क्योंकि तीनों शवों का अंतिम संस्कार बिना पोस्टमार्टम कराए ही हो चुका है।

 

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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बेगूसराय पुलिस पर उठे सवाल : शराब तस्करी के शक में पीछा किया, युवक की मौत हो गई; परिवार बोला- हत्या हुई

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पोस्टमार्टम हाउस पर विलाप करते मृतक युवक के परिजन। (तस्वीर- बेगूसराय संवाददाता)
पोस्टमार्टम हाउस पर विलाप करते मृतक युवक के परिजन। (तस्वीर- बेगूसराय संवाददाता)
  • बेगूसराय में शराब तस्करी के शक में एक युवक की मौत।
  • पुलिस युवक का पीछा कर रही थी, गिरने से मौत का दावा।
  • परिवार ने कहा- गिरने से नहीं गला दबाने से हत्या हुई है।

बेगूसराय | धनंजय कुमार झा

बिहार में शराबबंदी के नाम पर होने वाली चेकिंग के दौरान एक युवक की संदिग्ध हालात में मौत का मामला बेगूसराय में सामने आया है। परिवार का कहना है कि उनके बेटे के शरीर पर एक भी चोट का निशान नहीं मिला है, जबकि पुलिस ने उनसे कहा कि मौत गिरने के बाद हुई है। परिजन इसे एक तरह का एनकाउंटर बता रहे हैं और उनका कहना है कि उनके बेटे के शरीर पर बालू लगी हुई थी, हो न हो पुलिस प्रशासन ने उनके बेटे का गला दबोचकर उसकी हत्या कर दी है।

24 फरवरी की रात में हुई इस घटना के बाद रात ही में मेडिकल बोर्ड बनाकर शव का पोस्टमार्टम कराया गया है और इसकी वीडियोग्राफी भी हुई है। घटनास्थल पर FSL टीम ने भी जांच की है।

इस मामले में बेगूसराय बखरी डीएसपी कुंदन कुमार का कहना है कि उनकी गश्ती टीम ने इस युवक की बाइक का पीछा संदेह के आधार पर किया। जिसके बाद बाइक छोड़कर युवक भागा और किसी कारणवश अचेत होकर गिर गया, अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। थाना पुलिस का कहना है कि मरने वाले युवक के पास से दो कार्टन शराब बरामद हुई है जो वह बाइक पर ले जा रहा था। बाइक पर सवार एक अन्य आरोपी अभी फरार है, जिसे वह जल्द पकड़ लेगी। परिवार ने इन आरोपों को झूठ बताया है।

मरने वाले व्यक्ति 30 साल का ललित कुमार है, जिनके पिता का नाम कपिल देव महतो है। यह बखरी थाना क्षेत्र के इमादपुर गांव का निवासी था। मृतक ललित के साथ हुई घटना गढ़पुरा थाना क्षेत्र के कुम्हारसों दुर्गा स्थान के पास हुई थी।

पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद युवक के परिजन ने मीडिया से कहा कि शाम आठ बजे तक ललित उनके साथ ही था, फिर खाना खाने की बात कहकर चला गया। रात 11 बजे उन्हें फोन पर घटना की सूचना मिली। उनका कहना है कि पहले पुलिस ने कहा कि हार्टअटैक आने से मौत हो गई। फिर कहा कि गिरने से मौत हुई। युवक का कहना है कि वह न तो इतना कमजोर दिल का था कि उसे ऐसे ही हार्टअटैक आ जाएगा और न ही उसके शरीर पर कोई चोट का निशान मिला है।

घटना के समय मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से दैनिक भास्कर ने लिखा है कि वे लोग मंदिर पर बैठे थे। तभी एक युवक को भागते देखा, पुलिस उसका पीछा कर रही थी। युवक ने इधर-उधर भागते हुए दुर्गा मंदिर के पीछे से चारदीवारी फांदने की कोशिश की, इस दौरान वहां लगे लोहे के बोर्ड से वह टकराकर गिर गया। तभी पीछा करती पुलिस पहुंची और बेहोशी की हालत में उसे उठाकर ले गई।

एसपी मनीष का कहना है कि मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता लग सकेगा।

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ताड़ी से बदली किस्मत: बोधगया में मीठी ताड़ी के तिलकुट-चाय ने विदेशी पर्यटकों का दिल जीता

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  • शराबबंदी के बीच पारंपरागत पेय की मांग ने रोजगार का नया रास्ता खोला।

पटना/बोधगया |

बोधगया में महाबोधी मंदिर आने वाले दुनिया भर के पर्यटकों की अब एक नई पसंद बन गई है – मीठी ताड़ी (नीर) से बनी तिलकुट, अनरसा, लाई, लड्डू और चाय। ये पारंपरिक मिठाइयां और पेय न सिर्फ स्वाद में लाजवाब हैं, बल्कि सेहत के लिए भी अच्छे हैं। साथ ही, यह बिहार में दस साल से जारी शराबबंदी के चलते वैकल्पिक रोजगार का रास्ता खोल रहा है जिसे जीविका का खूब सहयोग मिला है।

सफलता की यह कहानी दरअसल बोधगया के इलरा गांव के निवासी डब्ल्यू कुमार की है। वे पहले दूसरे राज्यों में मजदूरी करते थे। दस साल पहले 2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद यहां के इलाकों में मीठी ताड़ी को बढ़ावा मिला जिसे स्थानीय लोग नीर भी कहते हैं । डब्ल्यू कुमार ने ताड़ी से गुड़ बनाना शुरू किया और उसी गुड़ से तिलकुट, अनरसा, लाई और लड्डू तैयार करने लगे। उनकी चर्चा इतनी फैली कि 2023 में खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आकर उनकी स्वादिष्ट मिठाइयों को चखा।  आज उनका स्टॉल महाबोधी मंदिर के पास आकर्षण का केंद्र बन गया है।

दरअसल मीठी ताड़ी से बने उत्पादों की खासियत यह है कि ये कम मीठे होते हैं। सामान्य तिलकुट में चीनी या पारंपरिक गुड़ का इस्तेमाल होता है, लेकिन ताड़ी का गुड़ नेचुरल और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला होता है। इसी वजह से डायबिटीज के मरीज भी इन्हें बेझिझक खा रहे हैं। जापान, थाईलैंड, श्रीलंका, यूरोप और अमेरिका से आने वाले विदेशी पर्यटक इसे खास तौर पर पसंद कर रहे हैं।

डब्ल्यू कुमार बताते हैं कि सीएम से प्रोत्साहन मिलने के बाद उन्हें हिम्मत मिली। अब उनकी पत्नी पुष्पा कुमारी समेत पूरा परिवार इसी काम में लगा है।  तिलकुट सीजन में रोजाना 150 किलो से ज्यादा बिक्री होती है। हालांकि इसकी कीमत सामान्य तिलकुट से थोड़ी ज्यादा करीब 400 रुपये प्रति किलो है, लेकिन स्वाद और सेहत के कारण पर्यटक खुशी-खुशी खरीदते हैं।

बिहार सरकार की जीविका (Jeevika) ने इस व्यवसाय को बढ़ावा दिया। बोधगया और गया में विशेष काउंटर दिए गए। पटना के गांधी मैदान में सरस मेले में भी स्टॉल मिला, जहां रोजाना 70-100 किलो तिलकुट बिका। इस साल एक लाख लीटर से ज्यादा मीठी ताड़ी से गुड़ तैयार किए जाने का दावा है, जिससे पेड़ा, लाई और ताड़ी की चाय भी बन रही है।

मीठी ताड़ी अब बिहार में रोजगार का नया मॉडल बन चुकी है। शराबबंदी के बाद ताड़ी टैपर्स को वैकल्पिक आजीविका मिली। गांवों में ताड़ी उत्पादन बढ़ा, परिवारों को घर पर काम मिला, और बोधगया जैसे पर्यटन स्थलों पर लोकल प्रोडक्ट ने विदेशी पर्यटकों का दिल जीता।

यह कहानी सिर्फ तिलकुट की नहीं, बल्कि बिहार में शराबबंदी के बाद सस्टेनेबल रोजगार और हेल्थी फूड इनोवेशन की है। बोधगया आने वाले हर तीर्थयात्री के लिए मीठी ताड़ी का तिलकुट अब एक जरूरी स्वाद बन चुका है।

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रोहतास का अदृश्य पुल: शेरशाह सूरी के GT Road की खास कड़ी, जानिए पूरा इतिहास

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रोहतास का अदृश्य पुल बिना संरक्षण के खराब हो रहा। (तस्वीर - रोहतास संवाददाता)
रोहतास का अदृश्य पुल बिना संरक्षण के खराब हो रहा। (तस्वीर - रोहतास संवाददाता)
  • रोहतास का अदृश्य पुल शेरशाह सूरी की इंजीनियरिंग का उदाहरण।
  • बरसात में डूब जाता और सूखे में उभर जाता है यह अदृश्य पुल।
  • शेरशाह सूरी ने GT Road के लिए इस पुल को बनवाया था।
(note – इस खबर को वीडियो में देखने के लिए इस लिंक पर जाएं।)
रोहतास | अविनाश श्रीवास्तव
बिहार के रोहतास जिले में एक अनोखा ऐतिहासिक पुल है, जो बरसात में पानी में समा जाता है और सूखे में उभर आता है। स्थानीय लोग इसे “अदृश्य पुल” कहते हैं। देहरी-ऑन-सोन (Dehri-on-Sone) के पास सोन नदी में छिपे इस पुल का महत्व इसलिए भी बहुत है क्योंकि इसे शेरशाह सूरी (1540-1545) ने बनवाया था।
जिन्होंने एशिया की सबसे लंबी व पुरानी सड़क कहे जाने वाले ग्रैंड ट्रंक रोड (GT Road या Sadak-e-Azam) को बनवाया। इस रोड का विस्तार करते हुए उन्होंने बंगाल से अफगानिस्तान तक रोड बनवाई, जिसके चलते यह अदृश्य पुल बना, जिसकी कहानी आज हम आपको बता रहे हैं। तब यह रोड व्यापार, सेना की आवाजाही और साम्राज्य नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण था। लेकिन इसके निर्माण में सोन नदी एक बड़ी बाधा थी क्योंकि बरसात में नदी उफान पर होती थी।

GT Road पर सोन नदी पार करना जरूरी था, इसलिए 4 किमी लंबा और 20 फीट चौड़ा पत्थर का causeway यानी उभरी सड़क या पुल बनवाया गया जो पारंपरिक पुल से एकदम अलग है। यह 10 फीट लंबे पत्थर से बना था। यह पुल submersible causeway था जो बरसात में डूब जाता, लेकिन सूखे में रोड बन जाता है। यह शेरशाह काल की  इंजीनियरिंग का कमाल है। 

Indrapuri Barrage से पानी छोड़नेे के चलते बरसात में सोन नदी का जलस्तर बढ़ता है इसलिए यह पुल पानी में डूब जाता है। पानी घटने पर पत्थरों की कतार फिर दिखती है। यह हर साल होने वाला दृश्य चमत्कार जैसा लगता है लेकिन अब संरक्षण की कमी से इसका वजूद मिट रहा है।  साथ ही  Nehru Setu जैसे आधुनिक पुल बनने से उपयोगिता खत्म हो गई। 

पुरातत्व विभाग (ASI) ने साल 2016 में इसकी खोज की थी, लेकिन पूर्ण संरक्षण नहीं हुआ। स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और रेत माफिया की गतिविधियों से पत्थर क्षरण का शिकार हो रहे हैं। ASI ने इसे प्रोटेक्टेड नहीं किया, इसलिए पर्यटन विकास नहीं हो पाया।
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