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रिपोर्टर की डायरी

रोहतास में 7 साल की बच्ची से शव पर ड्रामा करने वाला ही बलात्कारी और हत्यारा निकला

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पोस्टमार्टम के लिए बच्ची का शव ले जाया गया है। (इनसेट में बच्ची का ब्लर फोटो)
  • बच्ची का शव देखकर चिल्लाने वाले युवक के शरीर पर मिले खरोंच के निशान

रोहतास | अविनाश श्रीवास्तव

बिहार के रोहतास जिले में जिस मासूम बच्ची के शव को देखकर एक युवक ने चिल्लाकर गांववालों को आगाह किया था, वहीं उस बच्ची का बलात्कारी और कातिल निकला है। रविवार को प्रेस वार्ता करके जिला पुलिस ने इसका खुलासा तथ्यों के आधार पर किया। बच्ची शाम साढ़े सात बजे कोचिंग पढ़कर लौट रही थी, तभी गांव के ही युवक ने अगवा करके उसके साथ जघन्य अपराध किया था।

शव देखकर शोर मचाने वाला हीं निकला हत्यारा

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिस व्यक्ति ने सबसे पहले शव को देखकर शोर मचाया और गांव वालों को इकट्ठा किया, वही इस जघन्य अपराध का मुख्य आरोपी निकला। हालांकि आरोपी ने गांव वालों एवं पुलिस का ध्यान भटकाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन उसके कपड़ों से मिले खून के धब्बे और शरीर पर पड़े नाखून के निशान देखकर पुलिस का शक गहराता चला गया। पुलिस ने कई साक्ष्यों व गवाहों से गहन पूछताछ के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया है और पोस्टमार्टम के दौरान बच्ची के शव से संग्रहीत तथा घटनास्थल से एफएसएल टीम द्वारा संग्रहित सभी प्रदर्श के साथ-साथ गिरफ्तार उपेंद्र राम के कपड़ों को भी जप्त कर आवश्यक जॉच के लिए विधि-विज्ञान प्रयोगशाला पटना भेज दिया है।

आरोपी को गली से गुजरते गांव वालों ने देखा

मामले में रविवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान रोहतास एसपी रौशन कुमार ने बताया कि घटनास्थल का निरीक्षण एवं आस-पास मौजूद लोगों द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि मृतका बच्ची गाँव में ही ट्यूशन पढ़कर करीब शाम के 7 बजकर 30 मिनट के आस-पास अपने कोचिंग से निकली थी तथा उसी वक्त गाँव का उपेन्द्र राम भी अपने घर से शिव मंदिर की तरफ जा रहा था, जिसके 10 मिनट के बाद हीं बच्ची के साथ यह घटना घटित हुई है। उन्होंने कहा कि जब संदिग्ध उपेन्द्र राम से घटना के संबंध में पूछताछ किया गया, तो प्रस्तुत किये गये सभी तथ्य गलत पाये गये और उपेन्द्र राम के शरीर पर कई जगह नाखून एवं खरोंच के भी निशान पाए गए, जिसको देखकर अंदाजा लगाया गया कि घटना के वक्त बच्ची ने खुद को आरोपी से बचाने के लिए उसके शरीर को नोचनें का प्रयास किया होगा।

खून के धब्बे मिटाने का प्रयास

एसपी ने बताया कि घटना के बाद उपेन्द्र राम द्वारा साक्ष्य को मिटाने के उद्देश्य से पहने हुए जैकेट एवं फूलपैंट को भी धोने का प्रयास किया था। सारे तथ्यों की जाँच से यह स्पष्ट हुआ है कि घटना को उपेन्द्र राम के द्वारा हीं कारित किया गया है तथा दिगभ्रमित करने के लिए बच्ची के शव को घटनास्थल से उठाकर बगल के एक गली में रखकर बच्ची के शव होने का हल्ला किया गया, ताकि उसके उपर कोई शक न करे। प्रेस वार्ता के दौरान बिक्रमगंज एएसपी संकेत कुमार भी मौजूद रहे।

 

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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गोपालगंज : फाइलेरिया रोकने की दवा खाने के बाद स्कूली बच्चे बीमार

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  • गोपालगंज के हरखुआ माध्यमिक विद्यालय में 15 बच्चे बीमार पड़े।
  • 58 बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई, फिर तबीयत बिगड़ी।
  • सभी बच्चों को सदर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, सभी सुरक्षित।

गोपालगंज | आलोक कुमार 

बिहार के गोपालगंज में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाए जाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। स्कूल में अभिभावकों ने पहुंचकर हंगामा किया, हालांकि टीचरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। इस बीच हेडमास्टर ने एंबुलेंस बुलाकर 15 बीमार बच्चों को सदर अस्पताल में एडमिट कराया है। बता दें कि हाथी पांव या फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दो साल से बड़े बच्चों को यह दवा खिलाई जाती है, जो एकदम सुरक्षित है।

गोपालगंज में बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना शहर के हरखुआ गांव के एक माध्यमिक विद्यालय में घटी। हेडमास्टर कृष्ण मुरारी पांडे ने बताया कि स्कूल में 27 फरवरी को 58 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों ने मिड डे मील खाया। फिर दोपहर करीब 3:00 बजे आशा वर्करो  ने स्कूल आकर सभी 58 बच्चों को फाइलेरिया और एल्बेंडाजोल की गोलियां दीं।

प्रिंसिपल ने बताया कि दवा खाते ही कुछ बच्चों को अचानक नींद आने लगी और वे सोने लगे, जबकि कुछ को उल्टी हुई।

इस बारे में सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में गैस बनने की शिकायत हो सकती है, जिससे उल्टी या पेट दर्द महसूस होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार डर के कारण भी बच्चों को ऐसी समस्या होती है, इसमें किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।

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शराब तस्करी में जेल गए आरोपी की मौत, परिवार बोला- हत्या हुई, जेल प्रशासन ने हार्टअटैक बताया

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परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
  • बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की मौत होने से उठे सवाल।
  • शराब तस्करी के आरोप में जेल में 14 दिन से था बंदी।
  • जेल में अचानक हुई मौत को परिजनों ने बताया हत्या।

बक्सर | अमीषा कुमारी

बिहार में शराब तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की मौत बक्सर सेंट्रल जेल में हो गई है। बीती 12 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में उसके साथ मारपीट हुई, उसके शरीर पर लाल निशान हैं। परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए सदर अस्पताल में हंगामा किया, तब मौके पर पुलिस पहुंची।अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में जेल प्रशासन ने उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।

दरअसल 40 साल के राजेंद्र सिंह को बक्सर पुलिस पकड़कर ले गई थी और 12 फरवरी को उसे जेल भेजा गया था। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के विराट नगर के रहने वाले थे।  मृतक के बड़े भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के दौरान ही पुलिस ने राजेंद्र के साथ मारपीट की थी, जबकि वह बीमार चल रहा था। राजू का आरोप है कि “जेल भेजने के बाद भी भाई को पीटा गया। शरीर पर मौजूद लाल निशान साफ बता रहे हैं कि उसकी हत्या हुई है।

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बिहार में अब दारोगा-कोतवाल के खिलाफ केस चलाने से पहले सरकार की अनुमति जरूरी

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बिहार पुलिस
बिहार पुलिस (प्रतीकात्मक फोटो)
  • बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने जारी की अधिसूचना।
  • पुलिस कर्मियों पर मुकदमा चलाने के लिए लेनी होगी सरकार की अनुमति।
  • बिहार पुलिस के सभी पदाधिकारी व कर्मियों पर लागू होगा नियम।

पटना |

बिहार में अब दारोगा से लेकर इंस्पेक्टर तक के खिलाफ किसी मामले में तब ही केस दर्ज हो सकेगा जब उसकी इजाजत राज्य सरकार देगी।

बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने गुरुवार (26 feb) को इसको लेकर अधिसूचना जारी की है। यह नियम पहले DSP/ACP और ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू था, लेकिन अब राज्य सरकार ने यह सुरक्षा कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक बढ़ा दी है।  सरकार का तर्क है कि इस तरह बदले की भावना के चलते पुलिस पर कार्रवाई व उत्पीड़न को रोका जा सकेगा।

सरकार के इस महत्वपूर्ण सर्कुलर में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति (sanction) अनिवार्य होगी। यह शर्त उन कार्यों पर लागू होगी जो आधिकारिक ड्यूटी (official duty) के दौरान या उसके संबंध में किए गए हों।

 यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। जिसमें पहले “केंद्रीय सरकार” के स्थान पर अब स्पष्ट रूप से “राज्य सरकार” को यह अधिकार दिया गया है।

बिहार जैसे राज्य जहां पुलिस के ऊपर भ्रष्टाचार व गलत मुकदमें में फंसाने के मामले सामने आते रहे हैं, राज्य सरकार की ओर से दी जा रही इम्यूनिटी उनकी ताकत को और बढ़ा देगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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