जनहित में जारी
बिहार की सड़कों पर सुरक्षित पैदल चल सकेंगे: सरकार ने दिए बड़े निर्देश, जानिए क्या बदलेगा?
- सड़क सुरक्षा को लेकर बिहार सरकार का बड़ा कदम पर योजना स्पष्ट नहीं।
पटना | हमारे संवाददाता
बिहार सरकार ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार सुबह अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा कि राज्य की सड़कों पर बढ़ते वाहनों के बीच पैदल चलने वालों को सम्मान और सुविधा मिलेगी। अपनी घोषणा में मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य की सड़कों पर फुटपाथ, जेब्रा क्रॉसिंग व ऐसी सुविधायें बढ़ाई जाएंगी जिससे पैदल चलने वालोे की सुरक्षा सुनिश्चित हो। गौरतलब है कि बिहार में सड़कों पर पैदल चलने के लिए या तो फुटपाथ है ही नहीं, या फिर वे जगह-जगह टूटे या अतिक्रमण से घिरे हैं, जिससे राहगीरों को सड़क पर चलने को विवश होना पड़ता है और वे दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में यह घोषणा काफी अहम मानी जा रही है।
सभी बड़ी सड़कों पर ये बदलाव होंगे
सरकार के ‘सात निश्चय-3’ (2025-2030) के सातवें निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ के तहत परिवहन विभाग को 5 बड़े निर्देश दिए गए हैं।
- भीड़-भाड़ वाले शहरी और ग्रामीण इलाकों में जल्द फुटपाथ बनाए जाएंगे।
- चिह्नित जगहों पर जेब्रा क्रॉसिंग मार्क की जाएगी।
- व्यस्त स्थानों पर फुट ओवर ब्रिज (एस्केलेटर सहित) और अंडरपास का निर्माण होगा।
- वाहन चालकों को पैदल यात्रियों के अधिकारों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- ग्रामीण-शहरी ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना-प्रवण जगहें) चिह्नित कर फुटपाथ बनाए जाएंगे और CCTV कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि दुर्घटनाओं का आकलन हो और कमी लाई जा सके।
बिहार में पैदल यात्रियों की मौतें आम
बिहार में पैदल यात्री की स्थिति सबसे दयनीय और असुरक्षित है। सड़क परिवहन व राज्यमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की 2022 रिपोर्ट के अनुसार, बिाहर में हर सौ सड़क दुर्घटनाओं में मौत का प्रतिशत सबसे ज्यादा 82.4 फीसदी है। यानी रोड एक्सीडेंट के दस पीड़ित में से सिर्फ दो लोगों की जान ही बच पाती है।
पैदल यात्रियों की मौतों की बात करें तो राष्ट्रीय स्तर पर 19.5% हैं, लेकिन बिहार जैसे राज्यों में यह अनुपात ज्यादा है। 2019-2023 में भारत में 1.5 लाख पैदल यात्रियों की मौत हुई, जिसमें बिहार का बड़ा हिस्सा है।
बिहार की सड़कों पर फुटपाथ का हाल
कई सड़कों पर फुटपाथ या तो नहीं हैं या घुसपैठ से अवरुद्ध हैं। ब्लैक स्पॉट्स पर CCTV या सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी से दुर्घटनाएं बढ़ती हैं। पटना में कुछ जगहों पर फुटपाथ (जैसे बेली रोड, JP गंगा पथ) और अंडरपास (पटना जंक्शन से मल्टी-मॉडल हब) हैं, लेकिन अन्य शहरों में सुविधाएं सीमित या निर्माणाधीन हैं।
नए कदमों से क्या लाभ हो सकता है?
- सुरक्षित क्रॉसिंग और फुटपाथ से पैदल यात्रियों की दुर्घटनाएं 20-30% तक कम हो सकती हैं (राष्ट्रीय स्तर पर समान उपायों से देखा गया)।
- ब्लैक स्पॉट्स पर CCTV से मॉनिटरिंग और तेज कार्रवाई संभव होगी।
- वाहन चालकों का प्रशिक्षण संवेदनशीलता बढ़ाएगा, जिससे ओवर-स्पीडिंग और लेन अनुशासन में सुधार आएगा।
- कुल मिलाकर, दैनिक जीवन आसान होगा, बुजुर्गों/बच्चों की सुरक्षा बढ़ेगी और राज्य की सड़क सुरक्षा रैंकिंग सुधरेगी।
निर्देश तो सराहनीय पर बजट का पता नहीं
सरकार ने परिवहन विभाग को इसको लेकर तेजी से काम करने के निर्देश हैं, लेकिन स्पष्ट राशि का उल्लेख नहीं है। हालांकि राज्य बजट में सड़क विकास और सुरक्षा के लिए आवंटन बढ़ रहा है। पिछले वर्षों में राष्ट्रीय राज्यमार्ग व शहरी सड़कों पर हजारों करोड़ रुपये का खर्च हुआ है। माना जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट उसी से फंडेड होंगे। इसको लेकर विभाग जल्द ही कार्य योजना बनाएगा।
बता दें कि ये काम ‘सात निश्चय-3’ योजना के तहत होंगे, जिसे हाल ही में कैबिनेट ने मंजूरी दी है। योजना का फोकस ‘Ease of Living’ पर है, जिसमें सड़क सुरक्षा शामिल है।
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पश्चिम बंगाल: वोटर लिस्ट से कटे रिकॉर्ड 91 लाख नाम! मालदा और मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा असर
नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग (ECI) की विशेष जांच प्रक्रिया (SIR) के बाद मतदाता सूची की जो तस्वीर सामने आई है, उससे पता लगता है कि राज्य की वोटर लिस्ट से 91 लाख लोगों ने नाम कट गए हैं।
बीते सोमवार की देर रात चुनाव आयोग की ओर से तार्किक विसंगति’ (Logical Errors) की जांच के बाद इसकी अंतिम सूची जारी की गई। इसमें करीब 60 लाख में से 27 लाख वोटरों ने नाम हटा दिए गए हैं। ये ऐसे वोटर हैं जिनके नाम, उनके माता-पिता के नाम व उम्र के अंतर अथवा पते आदि में लॉजिकल कमियां थीं।
बीती 28 फ़रवरी को चुनाव आयोग ने जो वोटर लिस्ट प्रकाशित की थी, उसमें 63.67 लाख नाम हटाए गए थे। अब तार्किक विसंगति वाली सूची में हटे नामों को जोड़ने पर कुल हटाए गए वोटरों की संख्या 90.83 लाख यानी करीब 91 लाख पहुंच गई है।
बढ़ सकती है नाम कटने वालो की संख्या
वोटर लिस्ट से नाम हटने वालो की संख्या और बढ़ सकती है। दरअसल आयोग ने कहा है कि अब भी तार्किक विसंगति वाले क़रीब 22 हज़ार मतदाताओं के मामले में ई-हस्ताक्षर नहीं होने के कारण उनके नाम सूची में शामिल नहीं हो सके हैं।
हालांकि, उनके दस्तावेज़ों की जांच पूरी हो गई है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद सूची से हटने वाले वोटरों की संख्या बढ़ सकती है।
सबसे ज्यादा नाम मुर्शीदाबाद व मालदा में कटे
चुनाव आयोग की ओर से सोमवार देर रात जारी तार्किक विसंगतियों से जुड़ी सूची में इस बात का ब्यौरा दिया गया है कि किस ज़िले से कितने नाम कटे हैं।
तार्किक विसंगति वाली सूची में सबसे ज़्यादा 4.55 लाख वोटरों के नाम मुर्शिदाबाद ज़िले से कटे हैं। इससे पहले 28 फ़रवरी की सूची में भी 2.94 लाख नाम कटे थे। यानी अकेले इसी ज़िले से क़रीब 7.49 लाख वोटरों के नाम सूची से कट गए हैं।
उसके बाद मालदा ज़िले से कुल 4.59 लाख वोटरों के नाम कटे हैं।
SIR से पहले 7.66 करोड़ वोटर थे
बता दें कि प. बंगाल में SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ थी। लेकिन ड्राफ़्ट सूची में 58 लाख से ज़्यादा नाम काट दिए गए थे। 28 फ़रवरी को प्रकाशित अंतिम सूची में क़रीब साढ़े पांच लाख वोटरों के नाम कट गए थे।
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राहत: केंद्र ने पेट्रोल पर ₹10 ‘स्पेशल ड्यूटी’ घटाई, डीजल से विशेष टैक्स पूरी तरह खत्म
नई दिल्ली | भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लागू एक्साइज ड्यूटी (Special additional excise duty) को तुरंत प्रभाव से हटा दिया है। पीटीआई के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने 26 मार्च की देर रात एक नोटिफिकेशन जारी करके यह जानकारी दी है।
नोटिफिकेशन के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल पर लगे स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
वहीं, डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दी गई है।
यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ये ड्यूटी हटा जाने के आम लोगों को पेट्रोल व डीजल कितना सस्ता मिलेगा।
बता दें कि विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) टैक्स या ड्यूटी, केंद्र सरकार की ओर से तब लगाई जाती है जब बाजार में बहुत उतार-चढ़ाव होता है। इस टैक्स से होने वाली कमाई का हिस्सा राज्यों के साथ नहीं बांटा जाता, यह पूरी तरह केंद्र के खजाने में जाता है।
उपभोक्ता व तेल कंपनियों को मिलेगी राहत
ड्यूटी हटाने को लेकर केंद्र सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के असर से आम उपभोक्ताओं को बचाने के लिए ऐसा किया गया है।
साथ ही, पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को रिफाइनिंग में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए अतिरिक्त रेवेन्यू जुटाने का ज्यादा मौका मिलेगा।
बता दें कि देश में 90% तेल का वितरण हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की मदद से होता है।
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‘बीते 10 साल में बढ़ गया LPG व PNG का आयात’: जयराम रमेश ने मोदी सरकार को घेरा
नई दिल्ली | कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को कहा कि देश को गैस के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ बनाने का पीएम मोदी का वादा गैस जैसा ही निकला।
उन्होंने आंकड़ों के जरिए कहा कि मोदी के दस साल के कार्यकाल में नेचुरल गैस का आयात घटने के बजाय बढ़ गया है।
साथ ही उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी के किए गए उस दावे की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2007 तक कृष्णा-गोदावरी बेसिन से गैस का उत्पादन होने लगेगा।
बता दें कि कैग की रिपोर्ट में गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन की इस योजना पर सवाल उठाए गए थे।
आंकड़ों के जरिए PM को घेरा
कांग्रेस नेता ने अपनी पोस्ट में कुछ आंकड़े बताए हैं जिनकी स्वतंत्र रूप से जांच नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि साल 2014-15 में कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता 84% थी, जो 2024-25 में बढ़कर 90% हो गई है।
साथ ही, इसी अवधि के दौरान देश का एलपीजी आयात 46% से बढ़कर 62% तक पहुंच गया है।
सोशल मीडिया पर साधा निशाना
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा,
“पीएम मोदी द्वारा जिस गैस का बड़े स्तर पर वादा किया गया था, वह सिर्फ ‘गैस’ (हवाई बातें) ही बनकर रह गई है।”
साभार – X/Jairam_Ramesh
कांग्रेस महासचिव ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भरता के मंत्र’ पर सवाल उठाए हैं।
क्या था ‘देश के पहले गैस भंडार’ की खोज का मामला?

कृष्णा-गोदावरी बेसिन, जहां पर प्राकृतिक गैस के भंडार का दावा किया गया था। (तस्वीर – ndrdgh.gov.in)
जयराम रमेश ने जून, 2005 का जिक्र करते हुए कहा कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने दावा किया था कि ‘गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन’ (GSPC) ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन में देश का सबसे बड़ा गैस भंडार खोज लिया है, जिससे भारत ऊर्जा के क्षेत्र में स्वतंत्र हो जाएगा।
जयराम रमेश ने कहा कि तब 2011 से 2016 के बीच की पांच कैग रिपोर्ट से खुलासा हुआ था कि इस पूरी योजना में करीब 20,000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी का दावा पूरी तरह खोखला साबित हुआ और बाद में इसे ढकने के लिए GSPC का विलय ONGC में कर दिया गया।
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