बच्चों की बात
सहरसा : पीलिया से पीड़ित बच्चा टाई नहीं पहन पाया, स्कूल टीचर ने ग्राउंड के चक्कर लगवाए
- सहरसा जिले के प्राइवेट स्कूल में बीमार बच्चे को दंड में दौड़ाया।
- उल्टी व मुंह से खून निकलने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
- टाई लगाकर नहीं आया था, मेडिकल कंडिशन पता होने पर भी दंड।
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सहरसा | मुकेश कुमार सिंह
बिहार के एक प्राइवेट स्कूल में टाई लगाकर नहीं पहुंचे सातवीं क्लास के एक बच्चे को टीचर ने इतना दौड़ाया कि उसे उल्टियां होने लगीं, तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर स्कूल की ओर से बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हैरानी की बात यह है कि यह बच्चा 6 महीने से लीवर की बीमारी से पीड़ित है, जिसके मेडिकल डॉक्यूमेंट पहले से स्कूल में जमा हैं। फिर भी बच्चे को ऐसा दंड दिया गया जिसने उसकी सेहत पर बुरा असर हुआ है।
इतना ही नहीं, पीड़ित बच्चे की मां की हत्या हो चुकी है और वह अपनी नानी के पास रहकर पढ़ता है। छोटी सी उम्र में चुनौतियां झेल रहे इस बच्चे के प्रति स्कूल प्रशासन संवेदनशील नहीं रहा जिससे अब बच्चे को अस्पताल में इलाज कराना पड़ रहा है। इस घटना का संज्ञान लेते हुए पुलिस ने बच्चे का फर्द बयान दर्ज कर लिया है, आगे आरोपी टीचर पर कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में स्कूल प्रशासन का पक्ष नहीं मिल सका है क्योंकि स्कूल प्रशासन ने संवाददाता का फोन नहीं उठाया। स्कूल जाकर पूछताछ करने की कोशिश की गई तब भी स्कूल की ओर से कोई बात प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
यह मामला सहरसा के शांति मिशन एकेडमी स्कूल का है जो बरियाही बाजार में पड़ता है। बच्चे के मामा मो. लुकमान अली की ओर से शिकायत की गई है। पीड़ित छात्र अकरम अभी सदर अस्पताल में भर्ती है। अकरम के मामा का कहना है कि 23 फरवरी को उनका भांजा स्कूल गया तो वो टाई नहीं पहने हुए था। इसको लेकर जब टीचर ने उससे पूछा तो बच्चे ने बताया कि अभी स्कूल की ओर से उसे टाई नहीं मिली है। इस पर भी टीचर ने अकरम से ग्राउंड से पांच चक्कर लगाने को बोला जबकि उनके भांजे ने टीचर से कहा कि उसे ज्वांडिस है।
फिर भी उससे चक्कर लगवाए गए, इस दौरान बच्चे के पेट में दर्द होने लगा और उल्टी भी हुई। मो. लुकमान का कहना है कि स्कूल की ओर से फोन पर उन्हें सूचना मिली कि उनका भांजा अस्पताल में भर्ती है। अस्पताल से मीडियाकर्मियों के सामने मो. लुकमान ने उसी नंबर पर दोबारा फोन लगाकर बच्चे को मिली पनिश्मेंट के बारे में पूछताछ की। दूसरी ओर से बात कर रहे स्कूल के प्रतिनिधि ने बताया कि टाई न पहनने के चलते कई बच्चों को यह पनिश्मेंट दी गई थी। फोन कॉल में उन्होंने यह भी माना है कि इस बच्चे के मेडिकल डॉक्यूमेंट स्कूल में दर्ज हैं। हालांकि टीचर का कहना था कि ग्राउंड में दौड़ने की पन्शिमेंट मिलने पर बच्चे को अपनी तबीयत के बारे में बताना चाहिए था जो उसने नहीं किया।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर निजी स्कूलों में नियमों का कड़ाई से पालन कराने के नाम पर विद्यार्थियों के साथ होने वाले सुलूक की परतें खोल दी हैं।
बच्चों की बात
कैसा विकास : आंगनबाड़ी से लौट रही ढाई साल की बच्ची की गड्डे में गिरने से मौत
- पटना के नौबतपुर में नाले के चेंबर में गिरने से ढाई वर्षीय बच्ची की मौत।
- आगनबाड़ी केंद्र से पढ़कर अकेले घर जा रही थी छोटी बच्ची।
(note – इस खबर को वीडियो पर देखने के लिए इस लिंक पर जाएं।)
पटना | हमारे संवाददाता
यह घटना 19 फरवरी को पटना के नौबतपुर ब्लॉक में हुई। यहां के सरासत गांव के राकेश कुमार की बेटी रिया कुमारी आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने जाती थी। पिता राकेश कुमार ने बताया कि घटना के दिन बच्ची घर पर नहीं लौटी तो उसे ढूंढा गया। आंगनबाड़ी वर्कर ने कहा कि रोज की तरह बच्ची पढ़कर घर को चली गई थी। बताया जाता है कि आंगनबाड़ी सेंटर से बच्ची का घर मात्र सौ मीटर की दूरी पर है।
बच्ची की खोजबीन में लगे परिवार व गांव वालो को वह कहीं नहीं मिली, इसी दौरान गांव के खुले नाले के एक चेंबर में तैरता बस्ता एक व्यक्ति को नजर आया। उस बस्ते को नाले से निकालने के बाद गांव वालो ने मिलकर नाले का पानी बाहर निकाला, तब उन्हें बच्ची का शव नाले के अंदर डूबा मिला। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को हिलाकर रख दिया।
बच्ची की इस तरह हुई मौत ने उसके मां-पिता को अंदर से तोड़ दिया है। वे विलखते हुए कह रहे थे कि नाले में ढक्कन न लगा होेने से उनकी बेटी की मौत हुई है, ये सरकार की गलती है। परिवार की मांग है कि सरकार उन अफसरों पर ऐक्शन ले जिनकी लापरवाही से उनकी बेटी की जान गई है। साथ ही पिता ने सरकार से मुआवजे की मांग की है।
इस घटना को लेकर नौबतपुर के अंचलाधिकारी सुमित कुमार ने बताया कि एक बच्ची की गुमशुदगी का शिकायत मिली, बाद में पता चला की बच्ची की नाले में गिरकर मौत हुई है। बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए पटना एम्स भेज दिया गया है, इस मामले में परिवार को मुआवजा दिया जाएगा जिसका प्रोसेस शुरू किया जाएगा।
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सुनिए बच्चों के रोचक जवाब.. जब उनसे पूछा कि उन्हें कहां जाना पसंद है ?
बोलते पन्ने के इस सेग्मेंट ‘बच्चों की बात’ में बच्चों की जुबानी उनकी बातें सुनिए। इस वीडियो के जरिए हम आप तक बच्चों को सुंदर भविष्य देने का संदेश पहुंचा रहे हैं। अलग-अलग परिवेश से आने वाले छोटे बच्चों से जब हमारे सहयोगियों ने सवाल किया कि उन्हें कहां जाना पसंद है…? हर बच्चे का अलग जवाब उसके परिवेश को दर्शाता है, वैसा परिवेश जो हम और आपने इन बच्चों के लिए रख-छोड़ा है।
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बड़ों से सवाल : बच्चों को बड़े होकर भी किताबें क्यों पढ़नी चाहिए ?
विश्व पुस्तक मेला – 2019 में प्रगति मैदान आए लोगों से जब ये सवाल पूछा गया कि ‘बच्चों को बड़े होकर भी किताबें क्यों पढ़नी चाहिए ?’ तो उनके जवाब बेहद अनोखे और विचारयोग्य थे। आप भी सुनिए और हमें अपने विचार भी बताइए कि बच्चों को बड़े होकर भी किताबें क्यों पढ़नी चाहिए ?
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