Connect with us

रिपोर्टर की डायरी

सिवान में पुलिस की बड़ी नाकामी: गुमशुदगी रिपोर्ट के बावजूद असम का युवक लावारिस मौत मरा

Published

on

लापता पति(इनसेट) की सिवान सदर अस्पताल में पांच दिन पहले मौत हो जाने की जानकारी पता लगने के बाद बिलखती पत्नी। (तस्वीर- सिवान संवाददाता)
  • सिवान सदर अस्पताल में अज्ञात युवक एक सप्ताह से भर्ती था।
  • नगर थाने में एक गुमशुदगी दर्ज थी, फिर भी पुलिस नहीं चेती।
  • मौत के पांच दिन बाद परिजन उसे ढूंढ पाए, अस्पताल में हंगामा।

सिवान | गगन पांडेय

बिहार में पुलिस सिस्टम की लापरवाही और नाकामी के चलते एक व्यक्ति की जान चली गई। असम का एक युवक सिवान रिश्तेदारी में आया और कथित रूप से एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गया। सात दिनों तक उसका इलाज सदर अस्पताल में लावारिस के तौर पर चला और आखिर में उसकी मौत हो गई। जबकि सिवान के नगर थाने में ही उसी युवक की गुमशुदगी असम के परिवार ने दर्ज कराई थी।

यानी पुलिस को पता था कि उनके इलाके में एक व्यक्ति लापता हुआ है। पुलिस की जानकारी में यह भी था कि सदर अस्पताल में एक अज्ञात घायल का इलाज चल रहा है। क्योंकि नियमानुसार सदर अस्पताल को अपने यहां आए अज्ञात लोगों की जानकारी नजदीकी थाने को देनी होती है। इसके बावजूद पुलिस ने दोनों मामलों को जोड़कर पड़ताल करने की कोशिश नहीं की।

उधर अपने पति के लापता हो जाने से परेशान महिला अपने बच्चे को गोद में लिए दोबारा नगर पुलिस थाना पहुंची। तब जानकारी मिली कि सदर अस्पताल में एक अज्ञात भर्ती है। महिला व उसके परिजन बड़ी उम्मीद के साथ सदर अस्पताल पहुंचे पर वहां जाकर पता लगा कि उस व्यक्ति की मौत तो पांच दिन पहले ही हो चुकी है।

सदर अस्पताल में बिलखती महिला व परिजनों ने काफी हंगामा किया, उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर गुमशुदगी दर्ज होने के बाद भी उन्हें नगर थाना पुलिस ने क्यों सूचना नहीं दी?

परिजनों का कहना है कि अगर उन्हें समय से पता लग जाता तो वे अपने बेटे का बेहतर इलाज कराकर उसे बचा पाते। या अंतिम समय में उसके साथ मौजूद रहते, उनके बेटे की मौत लावारिस के तौर पर नहीं होती।

सिवान में ससुराल थी, होली पर आए थे

असम के सौरभ की ससुराल सिवान में थी, जहां से वे लापता हो गए थे।

इस घटना में जान गंवाने वाले युवक का नाम सौरभ गुप्ता (35) है जो मूल रूप से असम के हैं। बेटे को गोद में लेकर बिलख रही उनकी पत्नी ने बताया कि सौरभ होली मनाने के लिए उनके मायके सिवान के आंदर ढाला आए थे। वहां  7 मार्च की शाम 6 बजे से वे लापता थे।

पुलिस व अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल

सदर अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक, सौरभ को सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद अज्ञात अवस्था में 9 मार्च को भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान 16 मार्च को उनकी मौत हो गई।

अस्पताल प्रशासन या पुलिस में से किसी के पास इस बात का जवाब नहीं है कि सौरभ 7 को लापता होने के बाद 9 मार्च को घायल अवस्था में अस्पताल कैसे पहुंचे? दो दिन वे कहां थे और उन्हें किसने अस्पताल पहुंचाया?

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पहचान नहीं होने पर नियमानुसार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।

सीसीटीवी कैमरा दिखाने की मांग की

परिजनों ने मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की मांग की।

उनका आरोप था कि यदि समय पर सूचना दी जाती तो शायद सौरभ की जान बचाई जा सकती थी या कम से कम वे अंतिम समय में उनके साथ होते।

हंगामे की सूचना पर सदर अस्पताल पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। पुलिस ने आश्वासन दिया कि पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी, जिसमें अस्पताल के रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच शामिल होगी।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

रिपोर्टर की डायरी

Bihar Board 12th Result: पिता हरियाणा में मजदूरी करके पढ़ा रहे, बेटा आर्ट्स में बिहार का तीसरा टॉपर बना

Published

on

अपनी मां व बधाई देने आए स्थानीय लोगों के साथ आदर्श
सहरसा | मुकेश कुमार सिंह
बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में सहरसा जिले के सिहोल गांव के मजदूर परिवार का बेटा आदर्श कुमार ने आर्ट्स स्ट्रीम में राज्य स्तर पर तीसरा स्थान हासिल किया है।
यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि आदर्श ने पूरी पढ़ाई अभाव भरे जीवन में सरकारी स्कूल से की है। उसने बिना ट्यूशन के गांव में रहकर ही इतना बड़ा मुकाम हासिल किया।
आदर्श के पिता रंजीत कुमार झा हरियाणा के सोनीपत में मजदूरी करते हैं। वे परिवार का भरण-पोषण इसी कमाई से करते हैं।
आदर्श की प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा 1 से 5 तक) दिल्ली में हुई, लेकिन बाद में पूरा परिवार गांव लौट आया।
यहां से आदर्श ने दुर्गा उच्च विद्यालय में मैट्रिक और इंटरमीडिएट (आर्ट्स) की पढ़ाई पूरी की। आदर्श बचपन से ही पढ़ाई में तेज और मेहनती रहा है।
उसकी मां बंटी देवी बताती हैं कि वह अक्सर कहता था, “पढ़कर हम शिक्षक बनेंगे।” परिवार में दो भाई हैं और आदर्श सबसे छोटा है।
बड़े भाई शिवम झा ने कहा, “हमारे लिए यह गर्व की बात है कि छोटा भाई इतना आगे बढ़ा। उसकी सफलता से पूरा गांव खुश है।”आदर्श ने कभी कोचिंग या ट्यूशन नहीं लिया।
न तो कोई प्राइवेट स्कूल की सुविधा थी और न ही आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति।
फिर भी उसने सिर्फ स्कूल की किताबों और अपनी लगन से यह मुकाम हासिल किया।
पूरे गांव में आज खुशी का माहौल है। लोग इसे “गांव की शान” कह रहे हैं।
यह सफलता उन लाखों ग्रामीण बच्चों के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी में भी बड़े सपने देखते हैं।
आदर्श की कहानी यह साबित करती है कि मेहनत और इच्छाशक्ति से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
Continue Reading

रिपोर्टर की डायरी

Bihar Board 12th Result : फुटपाथ पर घड़ी संभालते हैं पिता, बेटा बना सेकंड टॉपर

Published

on

बेटे लकी को मिठाई खिलाते माता-पिता।

पूर्णिया | पंकज कुमार नायक

बिहार बोर्ड ने 12वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट जारी किए हैं । पूर्णिया का लक्की अंसारी बोर्ड का सेकंड टॉपर बना है । लक्की को 500 अंकों में कुल 478 अंक आए हैं, जो टॉपर से महज़ 1 अंक कम है । नतीजे आने के बाद लक्की के घर में जश्न का माहौल है । आंख में आंसू और बुलंद हौंसले के साथ परिवार वाले भी बेटे के सफलता की कहानी बता रहे हैं ।

पूर्णिया शहर के खंजांची का रहने वाला लक्की अंसारी बिहार बोर्ड का सेकंड टॉपर बना है । टॉपर्स में नाम आते ही बधाई देने के लिए लोगों की भीड़ भी लक्की के घर पहुंचनी शुरू हो गई है । तंग सी गली में टूटे फूटे मकान और रसोई में लगा बेड लक्की के संघर्ष की कहानी बयां कर रहा है । लक्की के पिता इम्तियाज़ अंसारी पेशे से एक पूर्णिया के भट्टा बाज़ार के फुटपाथ में घड़ी की दुकान चलाते हैं । और यहीं आमदनी का एकमात्र जरिया है । यहीं से लक्की की संघर्ष मेहनत और सफलता की कहानी शुरू होती है ।

लक्की के पिता इम्तियाज़ अंसारी बताते हैं कि वो लंबे समय से भट्ठाबाजार के फुटपाथ में एक टेबल पर घड़ी की दुकान चलाते हैं । वहीं से चंद पैसे आते हैं और घर का खर्च चलता है । लेकिन अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए उन्होंने कोई कमी नहीं छोड़ी । अच्छे से पढ़ाने के लिए कर्ज़ भी लिया और बेटे के भविष्य के लिए जीतोड़ मेहनत की । बेटे ने भी घर के हालात, पिता के संघर्ष और परिवार के परवरिश को देखते हुए एक सपना संजोया । पढ़ाई में खुद को डूबा दिया और नतीजा आज मेहनत रंग लाई, सेकंड टॉपर बना ।

लक्की की मां बताती हैं कि बेटा शुरू से पढ़ने में तेज़ था । हम सब उसकी पढ़ाई में कोई कमी न रहे, इसका ख्याल रखते थे । वो मेहनत करता था और हम उनके लिए बस दुआ और अपनी तरफ से मेहनत करते थे। बेटे ने सपने को पूरा करके दिखाया है ।

लक्की की बहन घर को दिखाते हुए बताती है कि एक छोटे से घर में एक ही कमरा है । जिसकी चौंकी पर लक्की पढ़ता था, और उसी कमरे में नीचे बिस्तर बिछा कर सोता था । एक रसोई घर है, जहां दिन में खाना पकता था और उसी रसोई में पलंग लगाकर परिवार के लोग सोते थे । संघर्ष और मेहनत में किसी ने कोई कमी नहीं छोड़ी है ।

लक्की ने बताया कि वो बड़ा होकर सरकारी शिक्षक बनना चाहता है । अगर उन्हें बेहतर श्रोत मिला तो वो बड़े परीक्षा की तैयारी भी करना चाहता है और आगे बढ़ना चाहता है।

Continue Reading

रिपोर्टर की डायरी

बिहार बोर्ड : नवादा के नक्सली गांव की सपना, सरकारी स्कूल से पढ़कर बनीं साइंस स्ट्रीम में सेकंड टॉपर  

Published

on

नवादा में अपने परिवार के साथ मौजूद सपना।

नवादा | अमन कुमार सिन्हा

नवादा जिले के नक्सल प्रभावित कौवाकोल प्रखंड के नावाडीह गांव की सपना कुमारी ने बिहार इंटरमीडिएट साइंस परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल किया है।

सुधीर चौरसिया की छोटी बेटी सपना ने पूरे बिहार में 479 अंक प्राप्त कर यह मुकाम हासिल किया।

सपना ने बताया कि उनकी बुआ कैंसर से पीड़ित थीं और उनके निधन के बाद ही उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा था। उन्होंने संकल्प लिया था कि वे एक दिन डॉक्टर बनकर अपने परिवार और समाज की सेवा करेंगी।

सपना के पिता एक छोटी सी राशन की दुकान चलाते हैं और उसी से अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद, उनके पिता ने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का प्रयास किया। उनकी मां ने भी कठिनाइयों के बावजूद उन्हें पढ़ाया और कभी मुश्किलों का एहसास नहीं होने दिया।

सपना के दो भाई और दो बहनें हैं। उनके बड़े भाई नौसेना में कार्यरत हैं, जबकि छोटा भाई बीटेक की तैयारी कर रहा है। उनकी बड़ी बहन बीए पार्ट वन में पढ़ रही है। सपना का अंतिम लक्ष्य एक अच्छा डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना है।

Continue Reading
Advertisement

Categories

Trending