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दुनिया गोल

अमेरिका-ईरान सीज़फायर : ईरान की वे शर्तें क्या हैं, जिन पर ट्रंप विचार करने को राजी हो गए?

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नई दिल्ली |  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच दो सप्ताह के सीज़-फायर (संघर्ष विराम) पर सहमति बन गई है। यह समझौता पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद हुआ है।

इस तरह ट्रंप ने अपनी उस ‘विनाशकारी’ धमकी को फिलहाल टाल दिया है जिसमें उन्होंने “एक पूरी सभ्यता को नष्ट” करने की बात कही थी। ट्रंप ने कहा है कि वे ईरान के भेजे शांति प्रस्ताव पर विचार करेंगे। ईरान ने भी इस बात का उल्लेख करते हुए सीज़ फायर पर सहमति दे दी है।

ईरान ने इस युद्ध को खत्म करने के लिए एक 10-सूत्रीय प्लान (10-point Peace Plan) पेश किया है। ट्रंप ने इसे “काम करने लायक आधार” (Workable basis) बताया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने आधिकारिक बयान में कहा-

“संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच पिछले विवादों के लगभग सभी विभिन्न बिंदुओं पर सहमति बन गई है, लेकिन दो सप्ताह का समय इस समझौते को अंतिम रूप देने और इसे पूर्ण रूप से लागू करने की अनुमति देगा।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप

ईरान की दस शर्तों वाला शांति प्रस्ताव 

ईरान की ओर से पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को भेजे गए दस बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव की आधिकारिक डिटेल सामने नहीं आई हैं लेकिन ईरानी मीडिया के हवाले से इन दस बिंदुओं पर पश्चिमी मीडिया व पश्चिम एशिया में रिपोर्टिंग हो रही है। इसके बिंदु इस प्रकार है-

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़

1- ईरानी निगरानी में होर्मुज़ खुलेगा : इस जलमार्ग को ईरान खोलेगा लेकिन इसका प्रबंधन ईरानी सेना के समन्वय में ही होगा।

2- आक्रामकता खत्म हो – सभी प्रकार की आक्रामक कार्रवाइयों को स्थायी रूप से बंद किया जाए।

3- सभी बैन हटाए जाएं : अमेरिका को ईरान पर लगे सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंध (Primary & Secondary Sanctions) हटाने होंगे।

4- ईरान के खिलाफ प्रस्ताव खत्म हों : सुरक्षा परिषद (Security Council) के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (IAEA) के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना।

5- परमाणु कार्यक्रम को मान्यता: ईरान की मांग है कि अमेरिका उसके यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के अधिकार को स्वीकार करे।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप व ईरानी सुप्रीम लीडर।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप व ईरानी सुप्रीम लीडर।

6- सैन्य वापसी: पश्चिम-एशिया के देशों में मौजूद अमेरिकी लड़ाकू विमानों और सैन्य बलों की वापसी की शर्त शामिल है।

7- फ्रीज़ संपत्ति रिलीज़ हों: यह भी शर्त है कि विदेश में ईरान की सभी फ्रीज़ संपत्तियों (Frozen Assets) को तुरंत रिलीज किया जाए।

8- मुआवजे की मांग: युद्ध और प्रतिबंधों से हुए नुकसान के लिए ईरान को पूर्ण हर्जाना दिये जाने की शर्त शामिल है।

9- सुरक्षा की गारंटी: भविष्य में ईरान पर दोबारा हमला न करने की लिखित गारंटी मिलने की शर्त भी है।

10- लेबनान और सहयोगियों पर हमले का अंत: इज़रायल और अमेरिका द्वारा लेबनान और अन्य ईरानी सहयोगियों पर हमलों को रोकना भी प्रमुख शर्त है।

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शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद जाएंगे अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस, सीज़फायर उल्लंघन के बीच क्या हैं इसके मायने?

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नई दिल्ली | अमेरिका व ईरान के बीच आठ अप्रैल को हुए सीज़फायर का उल्लंघन हो रहा है लेकिन दोनों देश शांतिवार्ता के लिए इस्लामाबाद जाएंगे।
10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भेजा जाएगा। वेंस को भेजे जाने की व्हाइट हाउस की घोषणा को वार्ता के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
दरअसल ईरान अन्य अमेरिकी नेताओं की तुलना में वेंस के प्रति लचीला रुख रखता है।  वेंस अनिश्चितकालीन युद्धों में अमेरिका के फंसे रहने के विरोधी रहे हैं। वे पूर्व में अमेरिका के लिए इराक युद्ध में सेवा भी दे चुके हैं।
उधर, व्हाइट हाउस की ओर से प्रतिनिधिमंडल में जेडी वेंस के अलावा राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर को भी किए जाने की जानकारी दी गई है।
यह ध्यान रखने योग्य है कि विटकॉफ और कुशनर ने ही बीती फरवरी में जेनेवा में चली ईरान वार्ता में अमेरिका की ओर से हिस्सा लिया था।
ऐसे में ईरान पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसे इन दोनों नेताओं पर भरोसा नहीं है क्योंकि वार्ता के बीच ही उस पर बमबारी शुरू हुई थी।

ईरानी नेता वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचेंगे 

उधर, इस्लामाबाद जाने के लिए ईरानी प्रतिनिधि मंडल को लेकर एक्स पर एक जानकारी सामने आई लेकिन इसे कुछ देर में ही डिलीट कर दिया गया।
पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेजा अमिरी मुघदम ने एक्स पर घोषणा की कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल गुरुवार रात को इस्लामाबाद पहुंच जाएगा। लेकिन कुछ ही देर बाद उन्होंने इसे डिलीट कर दिया।
दूतावास के अधिकारियों का कहना है कि यह जानकारी ‘समय से पहले’ साझा कर दी गई थी। इस घटनाक्रम से वार्ता को लेकर आशंका पैदा हो गई क्योंकि लेबनान पर हुए हमलों के बाद ईरान ने कहा कि संघर्ष विराम का उल्लंघन हुआ।

वार्ता में अहम पेंच- “परमाणु संवर्धन का अधिकार”

ईरान के परमाणु एजेंसी के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा है कि परमाणु संवर्धन के हमारे अधिकार से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।
दरअसल ईरान ने दस बिंदु वाली जो शांति योजना अमेरिका के सामने रखी है, उसमें यह प्रमुख शर्त है।
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ट्रंप सीज़फायर की शर्त से पलटे : ‘लेबनान पर हमले’ को समझौते से बाहर बताया, लेबनान में 254 मौतों के बाद राष्ट्रीय शोक

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (X/cginisty)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (X/cginisty)

नई दिल्ली | 7 अप्रैल की सुबह अमेरिका-ईरान के बीच हुआ सीज़फायर शाम होते-होते कमजोर पड़ गया है।

इज़रायल ने ईरान के ऊपर हमले न करने से जुड़ी सीज़फायर की शर्त तो मानी, लेकिन साफ कह दिया कि वह लेबनान पर हमले जारी रखेगा।

फिर इज़रायल ने लेबनान पर अब तक के सबसे भीषण हवाई हमले किए। लेबनान की सिविल डिफेंस एजेंसी के मुताबिक, अब तक 254 लोगों की मौत हो चुकी है और कम से कम 1,165 लोग घायल हैं।

लेबनान में राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।

उधर, इज़रायल के रुख के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप फिर पलट गए। उन्होंने अमेरिका की PBS न्यूज़ को दिए इंटरव्यू  में कहा कि “सीज़फायर की शर्तों में लेबनान शामिल नहीं था।”

जबकि मध्यस्थ पाकिस्तान के पीएम ने अपने ट्वीट में साफ लिखा था कि “ईरान, लेबनान व उसके अन्य सहयोगियों के खिलाफ अमेरिका दो सप्ताह तक हमले रोकने के लिए राज़ी हो गया है।”

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर अमेरिका को चेताया कि “संघर्ष विराम और हमले साथ-साथ नहीं चल सकते।” ईरानी फार्स न्यूज ने खबर दी कि सीज़फायर के बाद खोला गया होर्मुज़ स्ट्रेट का सुरक्षित रास्ता बंद कर दिया गया है।

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टूटने की कगार पर सीज़फायर : लेबनान पर इजरायली बमबारी के बाद ईरान ने ‘होर्मुज़’ को फिर किया बंद

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लेबनान की राजधानी बेरूत में इज़रायल की भीषण बमबारी ने शांति की पहल को झटका दिया है।
लेबनान की राजधानी बेरूत में इज़रायल की भीषण बमबारी ने शांति की पहल को झटका दिया है।

नई दिल्ली | अमेरिका-ईरान की बीच बुधवार की सुबह हुआ संघर्ष विराम रात होते-होते खत्म होता नज़र आ रहा है। बुधवार की देर शाम को इज़रायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर भीषण हवाई बमबारी की है, जिसके बाद ईरान ने सीज़फायर न मानने की धमकी दी है। ईरानी मीडिया ने कहा है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के सुरक्षित रास्ते को बंद कर दिया है जिसे सुबह सीज़फायर समझौते के तहत खोला गया था।

खबरों के मुताबिक, इजरायली वायुसेना ने बेरूत में महज 10 मिनट के भीतर 100 से अधिक हवाई हमले किए हैं। इस सैन्य कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी विदेश मंत्री ने ‘एक्स’ (X) पर स्पष्ट किया कि सीज़फायर की शर्तों के तहत इजरायल को लेबनान पर हमले रोकने होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि

“अगर राष्ट्रपति ट्रंप इजरायल के जरिए लेबनान पर हमले जारी रखते हैं, तो यह संघर्ष विराम प्रभावी नहीं रहेगा।”

होर्मुज़ स्ट्रेट फिर से बंद

इस बीच ईरान की ‘फार्स न्यूज़’ ने रिपोर्ट किया है कि शांति वार्ता के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से जिस सुरक्षित समुद्री रास्ते को व्यापार के लिए खोला गया था, उसे ईरानी सेना ने दोबारा बंद कर दिया है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

‘हिजबुल्ला के खिलाफ ऑपरेशन जारी रहेगा’ – IDF 

इजरायली रक्षा बल (IDF) के प्रवक्ता ने एक वीडियो बयान जारी कर अपनी स्थिति साफ की है। प्रवक्ता ने कहा कि हिजबुल्ला के खिलाफ इजरायल का सैन्य ऑपरेशन जारी रहेगा क्योंकि यह “इजरायली सभ्यता के अस्तित्व को बचाने” के लिए अनिवार्य है।

पाकिस्तान ने की शांति की अपील

क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्वीट कर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि संघर्ष क्षेत्र से सीज़फायर के उल्लंघन की खबरें चिंताजनक हैं। उन्होंने सभी पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने और समझौते का सम्मान करने की अपील की है।

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