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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को इस्लामाबाद भेजा जाएगा, जानिए क्या हैं शांति समझौते के लिए इसके मायने?

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इस्लामाबाद | अमेरिका व ईरान के बीच आठ अप्रैल को हुए सीज़फायर पर भले संकट के बादल छाए हों, लेकिन 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से उम्मीद की किरण जगी है। अहम बात यह है कि इस शांति वार्ता के लिए अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भेजा जा रहा है। वेंस को लेकर ईरान का रुख अन्य अमेरिकी नेताओं के मुकाबले लचीला रहा है।

हाल में ट्रंप ने इशारा किया था कि ईरान पर हमला करने की योजना को लेकर उपराष्ट्रपति वेंस शुरुआत में सहमत नहीं थे। हाल में पश्चिमी मीडिया में यह तथ्य भी सामने आया है कि पाकिस्तानी फील्ड मार्शल ने ईरानी विदेश मंत्री व अमेरिकी उपराष्ट्रपति के बीच टेस्क्ट मैसेज भेजने में भूमिका निभाई।

व्हाइट हाउस की ओर से प्रतिनिधिमंडल में जेडी वेंस के अलावा राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल होंगे।

 गौरतलब है कि विटकॉफ और कुशनर ने ही फरवरी में जेनेवा में ईरान के साथ शुरुआती बातचीत की थी। ऐसे में ईरान पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसे इन दोनों नेताओं पर भरोसा नहीं है।

ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि जब जेनेवा में वार्ता जारी थी, तभी ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर बमबारी शुरू कर दी थी, जिससे विश्वास का भारी संकट (Trust Deficit) पैदा हो गया था।

उधर, इस्लामाबाद जाने के लिए ईरानी प्रतिनिधि मंडल को लेकर एक्स पर एक जानकारी सामने आई लेकिन इसे कुछ देर में ही डिलीट कर दिया गया।  पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेजा अमिरी मुघदम ने एक्स पर घोषणा की कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल गुरुवार रात को इस्लामाबाद पहुंच जाएगा। लेकिन कुछ ही देर बाद उन्होंने इसे डिलीट कर दिया। दूतावास के अधिकारियों का कहना है कि यह जानकारी ‘समय से पहले’ साझा कर दी गई थी। इस घटनाक्रम से वार्ता को लेकर आशंका पैदा हो गई क्योंकि लेबनान पर हुए हमलों के बाद ईरान ने कहा कि संघर्ष विराम का उल्लंघन हुआ।

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ट्रंप सीज़फायर की शर्त से पलटे : ‘लेबनान पर हमले’ को समझौते से बाहर बताया, लेबनान में 254 मौतों के बाद राष्ट्रीय शोक

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नई दिल्ली | 7 अप्रैल की सुबह अमेरिका-ईरान के बीच हुआ सीज़फायर शाम होते-होते कमजोर पड़ गया है।

इज़रायल ने ईरान के ऊपर हमले न करने से जुड़ी सीज़फायर की शर्त तो मानी, लेकिन साफ कह दिया कि वह लेबनान पर हमले जारी रखेगा।

फिर इज़रायल ने लेबनान पर अब तक के सबसे भीषण हवाई हमले किए। लेबनान की सिविल डिफेंस एजेंसी के मुताबिक, अब तक 254 लोगों की मौत हो चुकी है और कम से कम 1,165 लोग घायल हैं।

लेबनान में राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।

उधर, इज़रायल के रुख के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप फिर पलट गए। उन्होंने अमेरिका की PBS न्यूज़ को दिए इंटरव्यू  में कहा कि “सीज़फायर की शर्तों में लेबनान शामिल नहीं था।”

जबकि मध्यस्थ पाकिस्तान के पीएम ने अपने ट्वीट में साफ लिखा था कि “ईरान, लेबनान व उसके अन्य सहयोगियों के खिलाफ अमेरिका दो सप्ताह तक हमले रोकने के लिए राज़ी हो गया है।”

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर अमेरिका को चेताया कि “संघर्ष विराम और हमले साथ-साथ नहीं चल सकते।” ईरानी फार्स न्यूज ने खबर दी कि सीज़फायर के बाद खोला गया होर्मुज़ स्ट्रेट का सुरक्षित रास्ता बंद कर दिया गया है।

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टूटने की कगार पर सीज़फायर : लेबनान पर इजरायली बमबारी के बाद ईरान ने ‘होर्मुज़’ को फिर किया बंद

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लेबनान की राजधानी बेरूत में इज़रायल की भीषण बमबारी ने शांति की पहल को झटका दिया है।
लेबनान की राजधानी बेरूत में इज़रायल की भीषण बमबारी ने शांति की पहल को झटका दिया है।

नई दिल्ली | अमेरिका-ईरान की बीच बुधवार की सुबह हुआ संघर्ष विराम रात होते-होते खत्म होता नज़र आ रहा है। बुधवार की देर शाम को इज़रायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर भीषण हवाई बमबारी की है, जिसके बाद ईरान ने सीज़फायर न मानने की धमकी दी है। ईरानी मीडिया ने कहा है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के सुरक्षित रास्ते को बंद कर दिया है जिसे सुबह सीज़फायर समझौते के तहत खोला गया था।

खबरों के मुताबिक, इजरायली वायुसेना ने बेरूत में महज 10 मिनट के भीतर 100 से अधिक हवाई हमले किए हैं। इस सैन्य कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी विदेश मंत्री ने ‘एक्स’ (X) पर स्पष्ट किया कि सीज़फायर की शर्तों के तहत इजरायल को लेबनान पर हमले रोकने होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि

“अगर राष्ट्रपति ट्रंप इजरायल के जरिए लेबनान पर हमले जारी रखते हैं, तो यह संघर्ष विराम प्रभावी नहीं रहेगा।”

होर्मुज़ स्ट्रेट फिर से बंद

इस बीच ईरान की ‘फार्स न्यूज़’ ने रिपोर्ट किया है कि शांति वार्ता के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से जिस सुरक्षित समुद्री रास्ते को व्यापार के लिए खोला गया था, उसे ईरानी सेना ने दोबारा बंद कर दिया है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

‘हिजबुल्ला के खिलाफ ऑपरेशन जारी रहेगा’ – IDF 

इजरायली रक्षा बल (IDF) के प्रवक्ता ने एक वीडियो बयान जारी कर अपनी स्थिति साफ की है। प्रवक्ता ने कहा कि हिजबुल्ला के खिलाफ इजरायल का सैन्य ऑपरेशन जारी रहेगा क्योंकि यह “इजरायली सभ्यता के अस्तित्व को बचाने” के लिए अनिवार्य है।

पाकिस्तान ने की शांति की अपील

क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्वीट कर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि संघर्ष क्षेत्र से सीज़फायर के उल्लंघन की खबरें चिंताजनक हैं। उन्होंने सभी पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने और समझौते का सम्मान करने की अपील की है।

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ताइवान की मुख्य विपक्षी नेता चीन पहुंचीं, राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हो सकती है मुलाकात

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नई दिल्ली | ताइवान की मुख्य विपक्षी पार्टी की नेता छह दिन के चीन दौरे पर हैं, जिसकी दुनिया भर में चर्चा है। इस दौरे के दौरान उनकी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात होने की संभावना है।

ताइवान में कुओमिन्तांग (KMT) पार्टी मुख्य विपक्षी दल है और चेंग ली-वुन को पिछले साल इसका अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने मीडिया को बताया कि

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से उन्हें दौरा करने का निमंत्रण मिला था जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया। वे “शांति के लिए एक पुल” का काम करेंगी।”

खास बात यह है कि चेंग पिछले एक दशक में चीन की यात्रा करने वाली केएमटी (KMT) की पहली वर्तमान अध्यक्ष हैं।

बता दें कि चीन के ताइवान की वर्तमान सरकार के साथ तनावपूर्ण रिश्ते हैं। ताइवान में अगला आम चुनाव 2028 में होना है।

विपक्षी नेता चेंग के बीजिंग दौरे को लेकर ताइवान की सत्तारूढ़ पार्टी (DPP) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चेंग का रवैया बीजिंग के प्रति “दब्बू” जैसा है और उनकी यात्रा पर कम्युनिस्ट पार्टी का नियंत्रण होगा।

दरअसल, स्वशासित ताइवान को चीन अपना ही एक हिस्सा मानता है। चीन कहता है कि ताइवान अंततः उसका ही हिस्सा बनेगा। साथ ही चीन इसे हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार भी नहीं करता है।

ताइवान में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) की 2016 में सरकार बनी, तब से यहां की सरकार चीन को “क्षेत्रीय शांति भंग करने का मुख्य दोषी” बताती आई है।

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