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रूसी तेल पर भारत को आंख दिखाने वाले ट्रंप ने हंगरी को सालभर की छूट क्यों दे दी?

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व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान (Photo credit- Orbán Viktor FB)
व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान (Photo credit- Orbán Viktor FB)
  • डोनाल्ड ट्रंप ने हंगरी के प्रधानमंत्री से व्हाइट हाउस में मुलाकात की।
  • अमेरिकी छूट के बाद रुस से तेल खरीदना जारी रख सकेगा हंगरी।

 

नई दिल्ली |

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump), भारत के ऊपर लगातार रूसी तेल की खरीद (Russian oil Import) बंद कराने का दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह रूस युद्ध को फंड नहीं कर पाएगा और यूक्रेन पर हमले बंद हो जाएंगे।  लेकिन अमेरिका ने एक यूरोपीय देश को रूस से अगले एक साल तक रूसी तेल और गैस (Oil and Natural gas) खरीदने पर यूएस प्रतिबंधों (US sanctions) से छूट दे दी है।

यह फैसला व्हाइट हाउस (White House) में राष्ट्रपति ट्रंप और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान (Viktor Orbán) की मुलाकात के बाद आया।

हंगरी पर ट्रंप की नरमी इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि यह यूरोप में इकलौता देश है जो यूक्रेन युद्ध पर मदद नहीं भेज रहा और यूक्रेन को यूरोपीय संघ का सदस्य बनाने के भी खिलाफ है। हंगरी का कहना है कि ऐसा होने पर युद्ध यूरोप में आ जाएगा और उनकी जनता का नुकसान होगा।

ट्रंप के साथ बैठक में हंगरी के प्रधानमंत्री ओर्बान ने यहां तक कह दिया कि “कोई चमत्कार ही यूक्रेन को रूस के ऊपर जीत दिला सकती है।”

आइए जानते हैं कि ट्रंप ने आखिर क्यों हंगरी पर नरसी दिखाई है?

 

ट्रंप ने क्यों दी यह ‘विशेष छूट’?

ट्रंप ने इस छूट के पीछे हंगरी की भौगोलिक स्थिति को एक बड़ा कारण बताया।

1. ट्रंप का तर्क: उन्होंने कहा कि हंगरी के लिए दूसरे देशों से तेल-गैस लाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि “उनके पास समुद्र नहीं है, उनके पास बंदरगाह नहीं हैं।” दरअसल हंगरी चारों तरफ भूमि से घिर यानी Landlocked देश है।

2. ओर्बान की दलील: पीएम ओर्बान ने भी ट्रंप को समझाया कि गैस पाइपलाइन उनके लिए “राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक भौतिक आवश्यकता है और रूसी ऊर्जा उनके देश के लिए महत्वपूर्ण है।


 

असली डील : ‘रूसी तेल छूट’ के बदले US से गैस खरीदेगा हंगरी 

ट्रंप की इस ‘नरमी’ के पीछे एक बड़ी व्यापारिक डील (business deal) है।

1. 5000 करोड़ रूपये की LNG डील: व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने Reuters को बताया कि प्रतिबंधों में छूट (sanctions exemption) के बदले में, हंगरी ने अमेरिका (US) से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (Liquefied Natural Gas – LNG)  खरीदने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। यह कॉन्ट्रैक्ट (contracts) लगभग $600 मिलियन (करीब 5000 करोड़ रुपये) के हैं।

गौरतलब है कि ब्लूमबर्ग ने पहले ही रिपोर्ट दी थी कि ओर्बान, ट्रंप को मनाने के लिए अमेरिकी LNG और परमाणु ईंधन (nuclear fuel) खरीदने का प्रस्ताव दे सकते हैं।

2. हंगरी आम चुनाव में सस्ते तेल का चुनावी वादा : ट्रंप से मिली रियायत ऐसे वक्त में आई है जबकि हंगरी (Hungary elections) में अगले साल अप्रैल में आम चुनाव होने हैं और अपनी सख्त प्रवासी व सामाजिक नीतियों के चलते विक्टर ओर्बान चुनाव में चुनौती मिल रही है। इसके बीच ओर्बान ने वोटरोें के सामने सस्ते रूसी तेल का वादा किया है। माना जा रहा है कि ट्रंप की रियायत उन्हें घरेलू स्तर पर मददगार साबित होगी।


 

विचारधारा : Trump के लिए ओर्बान ‘अहम’  

डोनाल्ड ट्रंप और विक्टर ओर्बान, दोनों को दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी नेता माना जाता है। ट्रंप के दोबारा सत्ता में लौटने के बाद ओर्बान की यह पहली व्हाइट हाउस यात्रा थी, जिसमें दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की जमकर तारीफ की।

1. इमिग्रेशन पर एकमत: ट्रंप ने ओर्बान की इमिग्रेशन (immigration) पर सख्त नीतियों की तारीफ की और कहा कि यूरोपीय नेताओं को उनका सम्मान करना चाहिए, क्योंकि “वह इमिग्रेशन पर सही रहे हैं।”

2. ‘ईसाई सरकार’: ओर्बान ने खुद को “यूरोप की एकमात्र ईसाई सरकार (Christian government)” बताया, जबकि बाकी यूरोपीय सरकारों को “लिबरल लेफ्टिस्ट” कहा।

3. ट्रंप की तारीफ: ओर्बान ने ट्रंप की तारीफ करते हुए पिछले (बाइडेन) प्रशासन को “धांधलीबाज (rigged)” बताया।


 

हंगरी को समर्थन, EU को असहज करेगा

अमेरिका व हंगरी के शीर्ष नेताओं की मुलाकात ने यूरोपीय संघ (EU) में भी हलचल बढ़ा दी है क्योंकि वो पहले से हंगरी के पीएम के ऊपर रूस (Russia) के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाते रहे हैं, इसके बावजूद ट्रंप ने उनका समर्थन किया।

इतना ही नहीं, ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को हंगरी को ज्यादा इज्जत देनी चाहिए। दरअसल, EU के नेता हंगरी पीएम ओर्बान को रूसी राष्ट्रपति (क्रेमलिन) का “ट्रोजन हॉर्स” (Trojan horse) कहते रहे हैं।

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Written By : Mahak Arora (content writer)

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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Saudi Aramco : सऊदी स्थित मध्यपूर्व की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी पर हमला

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नई दिल्ली | मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco की प्रमुख ऊर्जा साइट रास तनुरा रिफाइनरी (Ras Tanura refinery) पर ईरान ने ड्रोन हमला किया है।

रॉयटर्स ने सोर्स के हवाले से खबर दी है कि इस हमले के बाद इस रिफाइनरी को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। इस घटना के बाद वैश्विक तेल बाजार में तेज हलचल देखी गई और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 9.32% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

बता दें कि सऊदी अरामको, सऊदी सरकार के स्वामित्व वाली पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस कंपनी है जो सऊदी अरब की राष्ट्रीय तेल कंपनी है। इसकी रस तनूरा कॉम्प्लेक्स नामक रिफाइनरी मध्य पूर्व में सबसे बड़ी है। यह सऊदी अरब के खाड़ी तट पर स्थित है।

इसकी क्षमता 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) है और यह सऊदी क्रूड ऑयल के निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण टर्मिनल के रूप में कार्य करती है।

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Middle East Tensions : पीएम मोदी ने इजरायल और यूएई के नेताओं से क्या बात की?

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https://www.flickr.com/photos/meaindia/53847805909
भारतीय पीएम मोदी
  • पीएम मोदी ने दोनों राष्ट्राध्यक्षों से फोन वार्ता में तनाव कम करने पर जोर दिया है।

नई दिल्ली |

इजरायल व अमेरिकी की ओर से ईरान पर किए गए हमले के बाद मध्य पूर्व में बनी तनाव की स्थिति के बीच भारतीय पीएम ने रविवार रात (1 march) दो देशों के राष्ट्राध्यक्षों से वार्ता की है। इससे पहले भारत की ओर से इस तनाव को लेकर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है।

गौरतलब है कि इस हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर (रहवर) खामेनेई की हत्या को लेकर भारत की ओर से ईरानी प्रतिनिधि से कोई वार्ता नहीं की गई है। साथ ही, ये हमले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसराइल की दो दिन की यात्रा से लौटने के तुरंत बाद हुए हैं।

पीएम मोदी ने ट्वीट करके बताया कि उन्होंने इजरायली पीएम नेतन्याहू से बात करके क्षेत्रीय तनाव को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। साथ ही कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। पीएम मोदी ने भी दोहराया कि जल्द से जल्द संघर्ष रोकना ज़रूरी है।

यूएई पर हुए हमलोें की निंदा की

इजरायल से फोन वार्ता से पहले पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बात की। उन्होंने ट्वीट करके लिखा कि मैंने यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और इन हमलों में हुई जानों के नुकसान पर शोक व्यक्त किया।

गौरतलब है कि ईरान ने यूएई स्थित दुनिया के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट में से एक दुबई एयरपोर्ट पर हमला किया है, जिसे लड़ाई शुरू होने के बाद ऑपरेशन के लिए बंद कर दिया गया है। इससे पहले दुबई के मशहूर लैंड आइलैंड पाम और एक लग्जरी होटल बुर्ज अल अरब पर हमला किया था।

पीएम मोदी ने यूएई राष्ट्रपति से कहा है कि भारत इस मुश्किल समय में यूएई के साथ एकजुट खड़ा है। उन्होंने यूएई में रहने वाले भारतीय समुदाय की देखभाल करने के लिए उनका धन्यवाद किया। साथ ही कहा कि भारत तनाव कम करने (De-escalation) , क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता का समर्थन करता है।

भारत ने हमलों पर संयम बरतने की अपील की

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार को अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए संयम बरतने की अपील की। MEA के बयान में कहा गया है –
“भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है। हम सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हैं।”
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Breaking News : अमेरिका-इजरायल हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत, सरकारी मीडिया ने पुष्टि की

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अयातुल्ला अली ख़ामेनेई

नई दिल्ली |

अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान की मीडिया तसनीम और फार्स समाचार एजेंसियों ने रविवार सुबह (1 march) इसकी पुष्टि की है।

इस हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू के मारे जाने की भी खबर है।

आयतुल्लाह खामेनेई ने 1989 में इस्लामी गणराज्य के संस्थापक इमाम खुमैनी की मौत के बाद से 37 साल तक ईरान और मुस्लिम उम्मत का नेतृत्व किया, अब उनकी हत्या के बाद ईरान में यह स्थान खाली हो गया है, देखना होगा कि उनका उत्तराधिकारी किसे बनाया जाता है। 

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत का दावा किया था।

बता दें कि इजरायल-अमेरिका की ओर से शनिवार को शुरू किए गए हवाई हमलों में ईरान के 31 में से 24 प्रांतों को निशाना बनाया गया, जिसमें राजधानी तेहरान भी शामिल है।

ईरानी सेना ने खामेनेई की शहादत के बाद “खतरनाक अभियान” की शुरुआत की घोषणा की है। सेना ने कहा कि यह हमला कुछ ही देर में शुरू होगा और क्षेत्र में कब्जे वाले क्षेत्रों और अमेरिकी आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाएगा।

ईरान में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक

उधर, इस्लामिक रिवॉल्यूशन गार्ड्स कोर (IRGC) ने इस्लामिक क्रांति के नेता खामनेई की शहादत पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा – इससे ईरानी राष्ट्र उनकी राह पर चलने के लिए और अधिक दृढ़ होगा।

ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की गई है।

ईरान में अब तक 200 से ज्यादा मौतें

ईरान के एक गैर-सरकारी मानवतावादी संगठन ‘ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी’ का कहना है कि इन हमलों में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 740 से ज्यादा लोग घायल हैं। ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की मौत हो गई और 45 छात्राएं घायल हैं।

ईरान का पलटवार- 9 देशों पर हमले

अमेरिका और इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने इजराइल समेत मिडिल-ईस्ट के 9 देशों को निशाना बनाया। ईरान ने इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागीं।  कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब व UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। इतना ही नहीं, ईरान ने UAE के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया। ईरान ने दुबई के पाम होटल एंड रिसोर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमला किया। इसके अलावा बहरीन में कई रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया।

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