दुनिया गोल
रूसी तेल पर भारत को आंख दिखाने वाले ट्रंप ने हंगरी को सालभर की छूट क्यों दे दी?
- डोनाल्ड ट्रंप ने हंगरी के प्रधानमंत्री से व्हाइट हाउस में मुलाकात की।
- अमेरिकी छूट के बाद रुस से तेल खरीदना जारी रख सकेगा हंगरी।
नई दिल्ली |
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump), भारत के ऊपर लगातार रूसी तेल की खरीद (Russian oil Import) बंद कराने का दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह रूस युद्ध को फंड नहीं कर पाएगा और यूक्रेन पर हमले बंद हो जाएंगे। लेकिन अमेरिका ने एक यूरोपीय देश को रूस से अगले एक साल तक रूसी तेल और गैस (Oil and Natural gas) खरीदने पर यूएस प्रतिबंधों (US sanctions) से छूट दे दी है।
यह फैसला व्हाइट हाउस (White House) में राष्ट्रपति ट्रंप और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान (Viktor Orbán) की मुलाकात के बाद आया।
हंगरी पर ट्रंप की नरमी इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि यह यूरोप में इकलौता देश है जो यूक्रेन युद्ध पर मदद नहीं भेज रहा और यूक्रेन को यूरोपीय संघ का सदस्य बनाने के भी खिलाफ है। हंगरी का कहना है कि ऐसा होने पर युद्ध यूरोप में आ जाएगा और उनकी जनता का नुकसान होगा।
ट्रंप के साथ बैठक में हंगरी के प्रधानमंत्री ओर्बान ने यहां तक कह दिया कि “कोई चमत्कार ही यूक्रेन को रूस के ऊपर जीत दिला सकती है।”
आइए जानते हैं कि ट्रंप ने आखिर क्यों हंगरी पर नरसी दिखाई है?
ट्रंप ने क्यों दी यह ‘विशेष छूट’?
ट्रंप ने इस छूट के पीछे हंगरी की भौगोलिक स्थिति को एक बड़ा कारण बताया।
1. ट्रंप का तर्क: उन्होंने कहा कि हंगरी के लिए दूसरे देशों से तेल-गैस लाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि “उनके पास समुद्र नहीं है, उनके पास बंदरगाह नहीं हैं।” दरअसल हंगरी चारों तरफ भूमि से घिर यानी Landlocked देश है।
2. ओर्बान की दलील: पीएम ओर्बान ने भी ट्रंप को समझाया कि गैस पाइपलाइन उनके लिए “राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक भौतिक आवश्यकता है और रूसी ऊर्जा उनके देश के लिए महत्वपूर्ण है।
असली डील : ‘रूसी तेल छूट’ के बदले US से गैस खरीदेगा हंगरी
ट्रंप की इस ‘नरमी’ के पीछे एक बड़ी व्यापारिक डील (business deal) है।
1. 5000 करोड़ रूपये की LNG डील: व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने Reuters को बताया कि प्रतिबंधों में छूट (sanctions exemption) के बदले में, हंगरी ने अमेरिका (US) से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (Liquefied Natural Gas – LNG) खरीदने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। यह कॉन्ट्रैक्ट (contracts) लगभग $600 मिलियन (करीब 5000 करोड़ रुपये) के हैं।
गौरतलब है कि ब्लूमबर्ग ने पहले ही रिपोर्ट दी थी कि ओर्बान, ट्रंप को मनाने के लिए अमेरिकी LNG और परमाणु ईंधन (nuclear fuel) खरीदने का प्रस्ताव दे सकते हैं।
2. हंगरी आम चुनाव में सस्ते तेल का चुनावी वादा : ट्रंप से मिली रियायत ऐसे वक्त में आई है जबकि हंगरी (Hungary elections) में अगले साल अप्रैल में आम चुनाव होने हैं और अपनी सख्त प्रवासी व सामाजिक नीतियों के चलते विक्टर ओर्बान चुनाव में चुनौती मिल रही है। इसके बीच ओर्बान ने वोटरोें के सामने सस्ते रूसी तेल का वादा किया है। माना जा रहा है कि ट्रंप की रियायत उन्हें घरेलू स्तर पर मददगार साबित होगी।
विचारधारा : Trump के लिए ओर्बान ‘अहम’
डोनाल्ड ट्रंप और विक्टर ओर्बान, दोनों को दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी नेता माना जाता है। ट्रंप के दोबारा सत्ता में लौटने के बाद ओर्बान की यह पहली व्हाइट हाउस यात्रा थी, जिसमें दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की जमकर तारीफ की।
1. इमिग्रेशन पर एकमत: ट्रंप ने ओर्बान की इमिग्रेशन (immigration) पर सख्त नीतियों की तारीफ की और कहा कि यूरोपीय नेताओं को उनका सम्मान करना चाहिए, क्योंकि “वह इमिग्रेशन पर सही रहे हैं।”
2. ‘ईसाई सरकार’: ओर्बान ने खुद को “यूरोप की एकमात्र ईसाई सरकार (Christian government)” बताया, जबकि बाकी यूरोपीय सरकारों को “लिबरल लेफ्टिस्ट” कहा।
3. ट्रंप की तारीफ: ओर्बान ने ट्रंप की तारीफ करते हुए पिछले (बाइडेन) प्रशासन को “धांधलीबाज (rigged)” बताया।
हंगरी को समर्थन, EU को असहज करेगा
अमेरिका व हंगरी के शीर्ष नेताओं की मुलाकात ने यूरोपीय संघ (EU) में भी हलचल बढ़ा दी है क्योंकि वो पहले से हंगरी के पीएम के ऊपर रूस (Russia) के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाते रहे हैं, इसके बावजूद ट्रंप ने उनका समर्थन किया।
इतना ही नहीं, ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को हंगरी को ज्यादा इज्जत देनी चाहिए। दरअसल, EU के नेता हंगरी पीएम ओर्बान को रूसी राष्ट्रपति (क्रेमलिन) का “ट्रोजन हॉर्स” (Trojan horse) कहते रहे हैं।
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दुनिया गोल
ट्रंप ने गज़ा शांति योजना का Phase-2 किया जारी, जानिए अंतरिम सरकार कैसे शांति लाएगी?
- गजा में नया प्रशासन NCAG बनेगा, हमास पर सख्ती बढ़ेगी।
गज़ा में हथियारबंद लोग पूरी तरह हटाए जाएंगे
अस्थायी प्रशासनिक समिति बनेगी, 15 सदस्य होंगे
‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर घोषणा जल्द
योजना का पहला चरण अमेरिका की नजर में सफल
- ट्रंप प्रशासन ने दावा किया कि फेज वन में ऐतिहासिक मानवीय सहायता (Humanitarian Aid) पहुंचाई गई।
- अमेरिका का दावा है कि गज़ा में सीजफायर कायम रहा।
- सभी जीवित बंधकों को वापस लाया गया, साथ ही 28 मृत बंधकों में से 27 के शव वापस लाए जा चुके हैं।
- अमेरिका ने मिस्र, तुर्की और कतर को मध्यस्थता के लिए धन्यवाद दिया।
गज़ा के असल हालात : संघर्ष विराम के बाद 442 मौतें
फिलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 11 अक्तूबर को गज़ा में संघर्ष विराम लागू हुआ, तब से यहां 442 लोग मारे जा चुके हैं और 1236 लोग घायल हो चुके हैं। गज़ा में अब तक हुईं कुल मौतों की संख्या 71,412 है और 171,314 लोग घायल हैं। मरने वाले लोगों में 70% महिलाएं और बच्चे हैं।
दुनिया गोल
वेनेजुएला पर कब्जे के बाद ट्रंप अब लगातार पड़ोसी देशों पर दावा क्यों कर रहे हैं?
नई दिल्ली|
6 देशों पर ट्रंप की नजर
- ग्रीनलैंड: “यह अमेरिका के लिए रणनीतिक जरूरी है। हम इसे खरीद लेंगे या ले लेंगे।”
- पनामा कैनाल: “यह अमेरिका ने बनाया था, अब पनामा ने बहुत ज्यादा टैरिफ लगा दिया। हम इसे वापस ले सकते हैं।”
- कनाडा: “कनाडा 51वाँ राज्य बन सकता है। हम दोनों मिलकर मजबूत होंगे।”
- क्यूबा: “क्यूबा पर फिर से दबाव बढ़ाना होगा।”
- कोलंबिया: “कोलंबिया से ड्रग्स आ रहे हैं, हमें हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।”
- मैक्सिको: यहां पर भी ट्रंप ने ड्रग्स को संभावित हमले का आधार बनाया है।
ट्रंप ने पुरानी विदेश नीति की नई व्याख्या की
नए देशों पर दावे के पीछे के कारणों को समझिए
ऊर्जा सुरक्षा: वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर कब्जा करने के बाद ट्रंप अमेरिका को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। पनामा कैनाल पर कब्जा करने के पीछे उनकी नीयत अमेरिका के लिए तेल ट्रांसपोर्ट को सस्ता और सुरक्षित बनाने की है। चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना: चीन ने ग्रीनलैंड, पनामा और लैटिन अमेरिका में काफी बड़ी तादाद में निवेश किया है। ट्रंप इसे अमेरिकी हितों के खिलाफ मानते हैं और कहते हैं कि रूस और चीन उनके पड़ोसी नहीं हो सकते इसलिए उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए ये देश चाहिए।
चुनावी राजनीति: ट्रंप अपने वोटर बेस के सामने एक मजबूत अमेरिका का संदेश देना चाहते हैं, इस साल मध्यावधि (मिड-टर्म) चुनाव से पहले उनके ये कदम उन्हें अपने वोटर के बीच लोकप्रिय बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं।
रूस और चीन के साथ तनाव: ईरान और वेनेजुएला पर दबाव बढ़ाने के साथ ट्रंप, रूस-चीन के प्रभाव को कम करना चाहते हैं।
दुनिया गोल
ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर लगाया 25% एक्स्ट्रा टैरिफ, चीन पर सबसे ज्यादा असर, भारत पर कितना फर्क पड़ेगा ?
- ईरान में महंगाई के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन पूरे देश में फैला।
- 16 दिन से जारी प्रदर्शन में 648 मौतें, 5 दिन से इंटरनेट बंद।
- ट्रंप ने ईरान पर हमला करने की धमकी दी, फिर टैरिफ लगाया।
“तत्काल प्रभाव से ईरान से बिजनेस करने वाले किसी भी देश को अमेरिका के साथ सभी ट्रेड पर 25% टैरिफ देना होगा।”डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर ईरानी व्यापार पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की।
चीन पर सबसे ज्यादा असर: 90% ईरानी तेल का खरीददार
इस आदेश का सबसे बड़ा असर चीन पर होने जा रहा है क्योंकि वह ईरान के कुल तेल निर्यात का 90% से ज्यादा हिस्सा खरीदता है। इससे पहले ट्रंप वेनेजुएला पर नियंत्रण करके चीन को झटका दे चुके हैं क्योंकि चीन वेनेजुएला के तेल का बड़ा खरीददार था। 2025 में चीन ने ईरान से औसतन 1.3-1.5 मिलियन बैरल तेल प्रति दिन आयात किया, जो ब्रेंट क्रूड से $7-10 प्रति बैरल सस्ता है।
अमेरिका-चीन के बीच तनाव बढ़ेगा – पिछले साल अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ युद्ध देखने को मिला था जब ट्रंप ने चीन पर सौ फीसदी से ज्यादा टैरिफ की घोषणा की थी, इसकी प्रतिक्रिया में चीन ने भी अमेरिका के ऊपर टैरिफ लगा दिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत हुई और अभी चीन के ऊपर अमेरिका का करीब 34% टैरिफ है।
अमेरिकी दवाब में भारत पहले से कम ईरानी तेल खरीद रहा
चाबहार पोर्ट को लेकर दवाब बढ़ेगा – नए टैरिफ से ईरान स्थित चाबहार पोर्ट को लेकर भारत पर दवाब बढ़ सकता है, भारत ने इस प्रोजेक्ट पर $500 मिलियन का निवेश किया है। अमेरिका ने पिछले साल चाबहार पोर्ट के जरिए व्यापार किए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, हालांकि बाद में प्रतिबंध हटाने की अवधि छह महीने के लिए बढ़ा दी गई। अब देखना होगा कि अमेरिका आगे चाबहार पोर्ट को लेकर क्या रुख रखता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत को वैकल्पिक स्रोत सऊदी, UAE से तेल लेना पड़ेगा।
इन देशों पर भी असर : UAE, तुर्की, EU
- ईरानी तेल के बड़े खरीददार में चीन के बाद UAE और तुर्की आते हैं, जो करीब 3-6% तेल खरीदते हैं।
- यूरोपीय संघ (EU) से जुड़े जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स जैसे देश ईरान से कृषि से जुड़े सामान, खाद्य पदार्थों, इंडस्ट्रियल उत्पादों का व्यापार करती हैं, हालांकि पहले से ईरान में जारी प्रतिबंधों के चलते इसकी संख्या घटती रही है, फिर भी नए टैरिफ के चलते इन देशों के अमेरिकी उत्पाद महंगे हो जाएंगे।

ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान बहुत बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं जिनकी तस्वीरें इंटरनेट बैन के बावजूद ईरान से बाहर पहुंच रही हैं। (तस्वीर- साभार X)
ईरान में 16 दिनों से जारी प्रदर्शनों में अब तक 648 मौतें
ट्रंप ने कहा था- प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलीं तो हमला करेंगे

ईरान (प्रतीकात्मक फोटो)
पहले से खस्ता ईरानी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

अयातुल्ला अली ख़ामेनेई, ईरानी सर्वोच्च नेता
चरम पर पहुंचे प्रदर्शन के बीच वार्ता को राजी सरकार
12 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरानी अधिकारियों ने उनके सामने बातचीत की पेशकश रखी है। दूसरी ओर, ईरानी मीडिया की ओर से कहा गया है कि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता करना चाहती है, सरकार ने बातचीत की पेशकश की है।
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