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Manipur Civil Services Exam Postponed Again: दो साल की हिंसा के बीच बड़ी चूक, 100 पदों की परीक्षा स्थगित – उम्मीदवारों को बड़ा झटका
- मणिपुर पब्लिक सर्विस कमीशन ने परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों को गलत प्रश्नपत्र दे दिए गए।
नई दिल्ली |
मणिपुर पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित मणिपुर सिविल सर्विसेज कंबाइंड कॉम्पिटिटिव (मेंस) परीक्षा 2022 (Manipur Civil Services Combined Competitive (Mains) Examination 2022) में रविवार को बड़ी लापरवाही सामने आई। परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों को गलत प्रश्नपत्र दे दिए गए, जिसके बाद आयोग ने तुरंत दोनों पेपर रद्द कर दिए। अब इन दोनों पेपरों की परीक्षा 22 नवंबर (November 22) को दोबारा कराई जाएगी।
यह परीक्षा 7 नवंबर (November 7) से शुरू हुई थी और रविवार को खत्म होनी थी। लेकिन सुबह की शिफ्ट में जब उम्मीदवार जनरल स्टडीज़ पेपर-III (General Studies Paper-III) देने पहुंचे, तो उन्हें गलती से पेपर-IV (Paper-IV) का प्रश्नपत्र मिल गया। सवालों का विषय पूरी तरह अलग था। जैसे ही यह बात सामने आई, परीक्षा हॉल में अफरातफरी मच गई और आयोग (Manipur Public Service Commission – MPSC) को दोनों पेपर रद्द करने का फैसला लेना पड़ा।
कैसे हुई यह गलती
MPSC के परीक्षा नियंत्रक ख. लालमणी (Kh. Lalmani) ने बताया कि यह गलती उस सिक्योर प्रिंटिंग प्रेस (Secured Printing Press) की थी, जिसे प्रश्नपत्र छापने की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि आयोग की गोपनीयता नीति (Confidentiality Policy) के कारण कोई अधिकारी परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र नहीं देख सकता। इसी वजह से गलती पहले नहीं पकड़ी जा सकी।
उन्होंने कहा, “हम परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इस बार प्रिंटिंग प्रेस की लापरवाही से यह त्रुटि हुई। प्रेस को सख्त चेतावनी दी गई है ताकि ऐसा दोबारा न हो।” इंफाल और गुवाहाटी (Imphal & Guwahati) के दो केंद्रों पर करीब 1,200 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी थी, जिनमें लगभग 200 उम्मीदवार गुवाहाटी से थे। जैसे ही गड़बड़ी का पता चला, परीक्षा रोक दी गई और उम्मीदवारों को परीक्षा हॉल से बाहर भेज दिया गया।
उम्मीदवार बोले- दो साल से मेंस का इंतजार कर रहे थे
एक उम्मीदवार ने बताया कि प्रीलिम्स परीक्षा (Preliminary Examination) दो साल पहले अप्रैल-2023 में हुई थी, और तब से मेंस (Mains) कई बार टल चुकी है। उन्होंने कहा, “हम महीनों से तैयारी कर रहे हैं। अब दो पेपरों का रद्द होना बेहद निराशाजनक है। कई लोग लंबी दूरी तय करके पहुंचे, रहने-खाने में खर्च हुआ, लेकिन अब सब बेकार चला गया।”
छात्र संगठन ने जताया कड़ा विरोध
थाडो स्टूडेंट्स एसोसिएशन (Thadou Students’ Association – TSA) ने इस लापरवाही को “गंभीर प्रशासनिक विफलता” बताते हुए आयोग की आलोचना की।
संगठन ने कहा कि यह घटना आयोग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। TSA ने सार्वजनिक माफी (Public Apology), उच्चस्तरीय जांच (High-Level Inquiry) और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई (Action Against Responsible Officials) की मांग की है।
हिंसा के बीच परीक्षा, अब फिर झटका
मणिपुर में पिछले दो वर्षों से जारी हिंसा (Ethnic Violence) और अस्थिरता के कारण यह परीक्षा कई बार स्थगित होती रही थी। दो साल बाद जब आखिरकार परीक्षा शुरू हुई, तो इसे राज्य में स्थिरता और प्रशासनिक सुधार (Administrative Reform) की दिशा में एक कदम माना जा रहा था। लेकिन अब दो पेपरों का रद्द होना न सिर्फ उम्मीदवारों की मेहनत पर पानी फेर गया, बल्कि यह प्रशासनिक प्रणाली की जवाबदेही (Accountability) पर भी सवाल छोड़ गया है।
परीक्षा और भर्ती से जुड़ी अहम बातें
1. यह परीक्षा मणिपुर सिविल सर्विसेज कंबाइंड कॉम्पिटिटिव (मेंस) 2022 (Manipur Civil Services Combined Competitive (Mains) 2022) के तहत ली जा रही है।
2. परीक्षा के जरिए राज्य सरकार के करीब 100 ग्रुप A और ग्रुप B पदों (Group A and B Posts) पर भर्ती की जानी है।
3. इसमें डीएसपी (DSP), मणिपुर सिविल सर्विस अधिकारी (Manipur Civil Service Officer) और वित्त सेवा (Finance Service) जैसे पद शामिल हैं।
4. कुल 1,200 उम्मीदवार (Candidates) ने परीक्षा दी, जिनमें से 200 गुवाहाटी केंद्र (Guwahati Centre) पर थे।
5. गलती: GS Paper-III की जगह GS Paper-IV का प्रश्नपत्र बांटा गया।
5.1 रद्द किए गए पेपर (Cancelled Papers): जनरल स्टडीज़ Paper-III और Paper-IV।
5.2.1 GS Paper-III – सुबह 9 बजे से 12 बजे तक (9 AM–12 Noon)।
5.2.2 GS Paper-IV – दोपहर 1:30 बजे से 4:30 बजे तक (1:30 PM–4:30 PM)।
6. एडमिट कार्ड और केंद्र (Admit Cards & Centres): पहले जैसे ही मान्य रहेंगे।
7. प्रीलिम्स परीक्षा (Prelims Exam): अप्रैल 2023 (April 2023) में हुई थी।
8. विशेष परिस्थिति (Special Context): मणिपुर में दो साल से जारी हिंसा के बीच परीक्षा आयोजित हुई।
9. आयोग की अपील (Commission’s Appeal): जो उम्मीदवार भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service – IFS) मेंस परीक्षा (Mains Exam) (16–23 नवंबर) में शामिल हो रहे हैं, वे तुरंत MPSC को सूचित करें ताकि तारीखों का टकराव न हो।
MPSC ने खेद जताया
MPSC ने अभ्यर्थियों से असुविधा के लिए खेद जताया है और कहा है कि आयोग पुनर्निर्धारित परीक्षा (Rescheduled Examination) को “पूर्ण पारदर्शिता और सावधानी” से आयोजित करेगा। आयोग ने कहा,
“हम उम्मीदवारों की मेहनत और उम्मीदों को समझते हैं। यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, पर हम सुनिश्चित करेंगे कि आगे ऐसा न हो।”
मणिपुर सिविल सर्विसेज परीक्षा (Manipur Civil Services Exam), जो हिंसा और अस्थिरता के बीच दो साल बाद आयोजित हुई थी, अब फिर विवाद (Controversy) में है। गलत प्रश्नपत्र (Wrong Question Paper) बांटने की लापरवाही ने न सिर्फ उम्मीदवारों को परेशानी में डाला, बल्कि आयोग की साख (Credibility) पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं अब सबकी नजरें 22 नवंबर (November 22) को होने वाली नई परीक्षा (Re-exam) पर हैं — जहां उम्मीदवार पारदर्शिता (Transparency) की उम्मीद कर रहे हैं और आयोग अपनी प्रतिष्ठा (Reputation) बहाल करने की कोशिश में है।
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Written by Mahak Arora
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कैसे समृद्ध बनेगा बिहार? हर 100 में से 72 रुपये के लिए हम केंद्र के भरोसे, CAG Report में खुलासा
- बिहार में साल 2022-23 के लेखे-जोखे से जुड़ी कैग रिपोर्ट विधानसभा में पेश हुई।
- नीतीश सरकार ने ₹70,877 करोड़ के खर्च का कोई हिसाब नहीं सौंपा।
1- 72.12% बजट के लिए केंद्र पर निर्भर
2. भारी-भरकम खर्च का हिसाब नहीं
3. राजस्व वसूली में सुस्ती से कमाई घटी
4. आधी सरकारी कंपनियां ‘सफेद हाथी’
5. बिहार पर GSDP के 39% हिस्से का कर्ज
कैग रिपोर्ट से पता लगा है कि साल 2022-23 में बिहार की कुल देनदारियां (कर्ज) ₹2.88 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान था। यह बिहार की कुल सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 38.66% था।
धीमी गति से सुधार : मात्र ₹5 रुपये की निर्भरता घटी
कैसे बदलेगी तस्वीर?
- बुनियादी ढांचे पर जोर : सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाने से उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
- उद्योगों को बढ़ावा: जब तक राज्य में निजी निवेश नहीं आएगा, राज्य का अपना टैक्स (SGST) नहीं बढ़ेगा।
- टैक्स चोरी पर लगाम: परिवहन और खनन जैसे क्षेत्रों में लीकेज रोककर राजस्व बढ़ाया जा सकता है।
- सरकारी कंपनियों का कायाकल्प: घाटे में चल रही कंपनियों को बंद करना या उनमें सुधार करना अनिवार्य।
- नॉन-टैक्स राजस्व बढ़ाना: बालू खनन और पर्यटन की आय को व्यवस्थित व पारदर्शी बनाना होगा।
- वित्तीय पारदर्शिता : सरकारी विभाग अपने हर खर्च के हिसाब को पारदर्शी बनाएं, वरना केंद्र से मदद में देरी होगी।
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दुनिया गोल
Critical Minerals Deal: भारत-ब्राजील के बीच हुआ समझौता, कितनी घटाएगा चीन पर निर्भरता?
- ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत दौरे पर महत्वपूर्ण समझौता किया।
- महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा को लेकर हुआ एमओयू।
- अभी इस क्षेत्र में भारत 95% खनिजों का आयात करता है।
नई दिल्ली |
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AI Impact Summit-2026 : 88 देश जिस घोषणा पत्र पर सहमत हुए, उसे जानिए
- एआई तकनीक को लेकर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 16 से 21 फरवरी के बीच हुआ।
नई दिल्ली|
भारत में आयोजित हुए पहले एआई इम्पैक्ट समिट- 2026 (India AI Impact Summit 2026) का समापन शनिवार (21 feb) को हो गया। दिल्ली के भारत मंडपम में चली इस सम्मेलन में 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस बात की जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर दी।
मानव केंद्रित AI का दिया संदेश
इस घोषणा पत्र की प्रस्तावना (Preamble) में स्पष्ट किया गया है कि एआई के वादे को तभी साकार किया जा सकता है जब उसके लाभ मानवतावादी हों। इसी घोषणापत्र को लेकर IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर लिखा – “पूरी दुनिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ह्यूमन सेंट्रिक एआई सोच को समर्थन दिया है। यह डिक्लेरेशन ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत से प्रेरित है, ताकि एआई संसाधन पूरी दुनिया के लोगों के लिए उपलब्ध हो सकें।”
इन घोषणाओं पर बनी सहमति
- एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण किया जाए, जिसमें मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्ती कनेक्टिविटी हो।
- “वसुधैव कुटुम्बकम” से प्रेरित होकर सभी देशों तक एआई संसाधनों की पहुंच बढ़ानी चाहिए।
- डेमोक्रेटिक डिफ्यूजन ऑफ एआई चार्टर को एक स्वैच्छिक फ्रेमवर्क के रूप में नोट किया गया, जो फाउंडेशनल एआई संसाधनों तक पहुंच बढ़ाएगा।
- आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई के लिए एआई की व्यापक स्वीकृति हो।
- सुरक्षित और मजबूत एआई विश्वास बनाने और सामाजिक–आर्थिक लाभों को अधिकतम करने के लिए बुनियादी है।
- एआई सिस्टम में सुरक्षा महत्वपूर्ण है, उद्योग–प्रेरित स्वैच्छिक उपायों, तकनीकी समाधानों और नीतिगत फ्रेमवर्क को अपनाने पर जोर।
गौरतलब है कि यह घोषणापत्र बाध्यकारी नहीं है, यह देशों व संगठनों के लिए स्वैच्छिक है।
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