रिपोर्टर की डायरी
बिहार में उम्र का फर्क नहीं रोक सका प्यार: 55 साल की महिला ने 30 साल के प्रेमी संग रहने की मांग की
- बांका की महिला पहले से शादीशुदा है, उसका प्रेमी अनाथ और अविवाहित है।
- दोनों के बीच मिस कॉल से शुरू हुआ संवाद, पंजाब जाकर शादी भी कर ली।
- 55 साल की महिला के तीन बच्चे हैं, बांका बस स्टैंड पर बेटे ने पकड़ लिया।
बांका | दीपक कुमार
भारतीय महिलाओं को लेकर एक खास छवि रही है कि वे परिवार को अपने निजी जीवन से ऊपर रखती हैं और कड़वाहट भरे निजी रिश्तों को भी जीवनभर निभाती हैं। पर बदलते समय के साथ जब महिलाओं को डेहरी से बाहर की दुनिया जानने को मिल रही है, तकनीकी व अन्य साधनों के जरिए बाहरी लोगों से संवाद करने का मौका मिल रहा है तो निजी इच्छाओं को जीवनभर दबाए रखने और परिवार के लिए जीवन काट देने की उनकी पारंपरिक सोच में बदलाव आ रहा है। कुछ ऐसा ही बिहार के बांका में देखने को मिला, 55 साल की एक अधेड़ महिला, अपने 30 साल के प्रेमी से लिपटी रोती रही, वह मीडियाकर्मियों से कहती रही कि उनसे प्यार किया है, ये उसका फैसला है। महिला ने उम्र व सामाजिक बंधन को दरकिनार करके यह फैसला लिया जो जिलेभर में चर्चा का विषय है।
मिस कॉल से दोस्ती हुई, बस स्टैंड पर बेटे ने पकड़ लिया
दरअसल अमरपुर प्रखंड की खुशबू देवी, अपने प्रेमी वकील मिश्रा के साथ तीन महीने पहले अपने घर से लापता हो गई थीं। वकील मिश्रा अररिया जिले के नारायणपुर थानाक्षेत्र का रहने वाला 30 साल का एक युवक है, जिससे मोबाइल फोन पर मिस कॉल के जरिए उनकी बातचीत शुरू हुई थी। वकील मिश्रा अनाथ है और अब तक उसकी शादी नहीं हुई है। वहीं, खुशबू देवी शादीशुदा और तीन बड़े बच्चों की मां हैं। 12 जनवरी को खुशबू देवी को बांका बस अड्डे पर उनके बेटे समीत मंडल ने उनके प्रेमी संग पकड़ लिया गया। तब वे जिले से बाहर जाने के लिए बस का इंतजार कर रही थीं। इस दौरान अचानक वहां उसका बेटा पहुंच गया और दोनों को सरेआम बेइज्जत किया। लोगों का कहना है कि बेटे ने अपनी मां और उनके साथी की पिटाई भी लगाई और फिर उन्हें पुलिस थाने ले गया।
पंजाब जाकर शादी कर ली, एक-दूसरे संग रहने पर अड़े
पुलिस थाने में अपने प्रेमी और खुद के भविष्य को लेकर डरी हुईं खुशबू देवी लगातार मीडियाकर्मियों के सामने कह रही थी कि उसके प्रेमी की इसमें कोई गलती नहीं है। वह अपनी मर्जी से ही घर छोड़कर उसके साथ चली गई थी और वे दोनों साथ में रहना चाहते हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि वे दोनों पंजाब के लुधियाना चले गए थे, जहां उन्होंने शादी भी कर ली। खुशबू देवी के बेटे ने मीडिया से कहा कि मेरी मां ने घर में छोटे भाई को फोन किया था और उसे अपने साथ ले जाना चाहती थी क्योंकि वो छोटा है। वहीं से उन्हें पता लगा और वो तुरंत बस स्टैंड पहुंच गए।
क्या कहता है कानून
भारतीय कानून के हिसाब से देखें तो एक वयस्क महिला अपने जीवन का फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है, भले उसकी पहले से शादी हो चुकी हो। पर व्यावहारिक तौर पर ऐसे मामलों में सामाजिक दवाब बनाने की कोशिश होती आई है।
पितृसत्तात्मक मानसिकता से ग्रस्त पुलिस, वकील और मीडिया भी ऐसी घटनाओं में महिला को उलाहना देते पाए जाते हैं, जो उनका मनोबल तोड़ती है।
क्या बोली पुलिस
बांका की इस घटना को लेकर पुलिस ने मीडिया से कहा कि महिला के बेटेे का आवेदन आने पर हम आगे की कार्रवाई करेंगे। इस मामले में यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि महिला खुशबू देवी को पुलिस ने कब तक हिरासत में रखा और उसका प्रेमी अभी कहां है?
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गोपालगंज : फाइलेरिया रोकने की दवा खाने के बाद स्कूली बच्चे बीमार
- गोपालगंज के हरखुआ माध्यमिक विद्यालय में 15 बच्चे बीमार पड़े।
- 58 बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई, फिर तबीयत बिगड़ी।
- सभी बच्चों को सदर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, सभी सुरक्षित।
गोपालगंज | आलोक कुमार
बिहार के गोपालगंज में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाए जाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। स्कूल में अभिभावकों ने पहुंचकर हंगामा किया, हालांकि टीचरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। इस बीच हेडमास्टर ने एंबुलेंस बुलाकर 15 बीमार बच्चों को सदर अस्पताल में एडमिट कराया है। बता दें कि हाथी पांव या फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दो साल से बड़े बच्चों को यह दवा खिलाई जाती है, जो एकदम सुरक्षित है।
गोपालगंज में बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना शहर के हरखुआ गांव के एक माध्यमिक विद्यालय में घटी। हेडमास्टर कृष्ण मुरारी पांडे ने बताया कि स्कूल में 27 फरवरी को 58 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों ने मिड डे मील खाया। फिर दोपहर करीब 3:00 बजे आशा वर्करो ने स्कूल आकर सभी 58 बच्चों को फाइलेरिया और एल्बेंडाजोल की गोलियां दीं।
प्रिंसिपल ने बताया कि दवा खाते ही कुछ बच्चों को अचानक नींद आने लगी और वे सोने लगे, जबकि कुछ को उल्टी हुई।
इस बारे में सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में गैस बनने की शिकायत हो सकती है, जिससे उल्टी या पेट दर्द महसूस होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार डर के कारण भी बच्चों को ऐसी समस्या होती है, इसमें किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।
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शराब तस्करी में जेल गए आरोपी की मौत, परिवार बोला- हत्या हुई, जेल प्रशासन ने हार्टअटैक बताया
- बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की मौत होने से उठे सवाल।
- शराब तस्करी के आरोप में जेल में 14 दिन से था बंदी।
- जेल में अचानक हुई मौत को परिजनों ने बताया हत्या।
बक्सर | अमीषा कुमारी
बिहार में शराब तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की मौत बक्सर सेंट्रल जेल में हो गई है। बीती 12 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में उसके साथ मारपीट हुई, उसके शरीर पर लाल निशान हैं। परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए सदर अस्पताल में हंगामा किया, तब मौके पर पुलिस पहुंची।अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में जेल प्रशासन ने उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।
दरअसल 40 साल के राजेंद्र सिंह को बक्सर पुलिस पकड़कर ले गई थी और 12 फरवरी को उसे जेल भेजा गया था। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के विराट नगर के रहने वाले थे। मृतक के बड़े भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के दौरान ही पुलिस ने राजेंद्र के साथ मारपीट की थी, जबकि वह बीमार चल रहा था। राजू का आरोप है कि “जेल भेजने के बाद भी भाई को पीटा गया। शरीर पर मौजूद लाल निशान साफ बता रहे हैं कि उसकी हत्या हुई है।
राजू ने बताया कि 27 फरवरी की सुबह करीब 11 बजे जेल प्रशासन की ओर से कॉल आया कि राजेंद्र की तबीयत बिगड़ गई है और वे अस्पताल पहुंच जाएं। लेकिन जब वे लोग सदर अस्पताल पहुंचे तो एक्स-रे रूम के बाहर स्ट्रेचर पर मृत अवस्था में राजेंद्र मिले। वहां कोई मौजूद नहीं था। इसके बाद परिजनों ने हंगामा किया और मौके पर पुलिस पहुंची।
मृतक राजेंद्र पेशे से पेंटर थे और उनके दो छोटे बच्चे हैं। अचानक हुई इस मौत ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। वहीं, यह घटना बिहार में शराबबंदी लागू कराने के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। साथ ही, जेल में बंदी की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन पर भी सवाल खड़ा होता है। मृतक के भाई ने बताया कि 25 फरवरी को वह अपने भाई से मिलने जेल गए थे, तब उसे ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी जिसके चलते उसकी अचानक मौत हो सकती है।
बक्सर सेंट्रल जेल के अधीक्षक ज्ञानित गौरव ने परिजनों के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मौत हार्ट अटैक से प्रतीत होती है। हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इसका सही कारण पता लग सकेगा।
बक्सर सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में तैनात डॉक्टर अमित कुमार ने पुष्टि की कि कैदी को अस्पताल लाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। वहीं, नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने सदर अस्पताल में मीडिया से कहा कि अगर कहीं कोई लापरवाही पाई जाती है तो उस पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।”
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बिहार में अब दारोगा-कोतवाल के खिलाफ केस चलाने से पहले सरकार की अनुमति जरूरी
- बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने जारी की अधिसूचना।
- पुलिस कर्मियों पर मुकदमा चलाने के लिए लेनी होगी सरकार की अनुमति।
- बिहार पुलिस के सभी पदाधिकारी व कर्मियों पर लागू होगा नियम।
पटना |
बिहार में अब दारोगा से लेकर इंस्पेक्टर तक के खिलाफ किसी मामले में तब ही केस दर्ज हो सकेगा जब उसकी इजाजत राज्य सरकार देगी।
बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने गुरुवार (26 feb) को इसको लेकर अधिसूचना जारी की है। यह नियम पहले DSP/ACP और ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू था, लेकिन अब राज्य सरकार ने यह सुरक्षा कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक बढ़ा दी है। सरकार का तर्क है कि इस तरह बदले की भावना के चलते पुलिस पर कार्रवाई व उत्पीड़न को रोका जा सकेगा।
सरकार के इस महत्वपूर्ण सर्कुलर में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति (sanction) अनिवार्य होगी। यह शर्त उन कार्यों पर लागू होगी जो आधिकारिक ड्यूटी (official duty) के दौरान या उसके संबंध में किए गए हों।
यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। जिसमें पहले “केंद्रीय सरकार” के स्थान पर अब स्पष्ट रूप से “राज्य सरकार” को यह अधिकार दिया गया है।
बिहार जैसे राज्य जहां पुलिस के ऊपर भ्रष्टाचार व गलत मुकदमें में फंसाने के मामले सामने आते रहे हैं, राज्य सरकार की ओर से दी जा रही इम्यूनिटी उनकी ताकत को और बढ़ा देगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
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