चुनावी डायरी
Bihar Election: कई जिलों में वोट का बहिष्कार! जानिए कहां और क्यों नाराज हुए मतदाता
- रोहतास में दो जगहों पर, पश्चिमी चंपारण व अररिया में एक-एक जगह पर वोट बहिष्कार का मामला सामने आया है।
रोहतास| अविनाश श्रीवास्तव
बिहार के रोहतास जिले में आम जनता जनप्रतिनिधियों से इतनी ज्यादा नाराज है कि वोटिंग के दौरान अब तक यहां तीन इलाकों से वोट बहिष्कार की खबरें सामने आ चुकी हैं। यहां चेनारी विधानसभा क्षेत्र में दो गांव और करगहर विधानसभा में एक जगह पर वोट बहिष्कार जारी है। इन दोनों क्षेत्रों से पिछले बार कांग्रेस पार्टी से जो विधायक जीते, उन्हें इस बार फिर से प्रत्याशी बनाया गया है जबकि स्थानीय लोगों में उनके खिलाफ जोरदार गुस्सा है।
प्राइमरी स्कूल की मांग के लिए वोट बहिष्कार, बच्चे भी प्रदर्शन में शामिल
शिवसागर | करगहर विधानसभा के शिवसागर प्रखंड में रोझईं गांव के लोग प्राइमरी स्कूल की मांग को लेकर वोट बहिष्कार कर रहे हैं। इस वोट बहिष्कार में छोटे बच्चे भी शामिल हो गए। छोटे बच्चे हाथ में ‘स्कूल नहीं तो वोट नहीं’ का बैनर लेकर गांव के बाहर तक गए और वहां मौजूद सुरक्षाबलों को बहिष्कार का संदेश देने की कोशिश की। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस बल के लोग बच्चों को वहां से हटाते दिखे।
भारत में आठवीं तक की शिक्षा, सभी बच्चों का मूल अधिकार है, इसके बावजूद स्कूल की मांग के लिए गांव वालों को वोट बहिष्कार का सहारा लेना पड़ रहा है। यहां प्रशासन की टीम ने पहुंचकर लोगों को समझाने की कोशिश की है।
इस दौरान मतदान केंद्र के बाहर ग्रामीणों की भारी भीड़ इकट्ठा है और लोग बैनर पोस्टर लेकर मतदान का बहिष्कार कर रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार दोपहर 2 बजे तक ग्रामीणों ने अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया है।
पंचायत भवन का निर्माण अधूरा, डीएम ने बात नहीं सुनी, अब वोट बहिष्कार
करगहर | दूसरा मामला भी इसी विधानसभा के करगहर ब्लॉक का है। यहां के लड़ुई बिशनपुरा गांव में सुबह से ही कोई वोट नहीं डला है। यहां लोगों की शिकायत है कि पंचायत भवन बनने का काम 20% ही पूरा हो पाया था और उसके बाद इसे रोक दिया गया है। वे डीएम तक अपनी शिकायत रख चुके हैं पर अब तक निर्माण शुरू नहीं हुआ इसलिए वे वोट नहीं करेंगे।
पंचायत भवन दूसरे गांव में ट्रांसफर होने से नाराज, वोट नहीं किया
चेनारी | इसके अलावा, चेनारी विधानसभा क्षेत्र कोनकी गांव में भी कोई बूथ पर नहीं पहुंचा। यहां ग्रामीणों की शिकायत है कि जो पंचायत भवन उनके गांव में बनना था, उसे प्रशासन ने दूसरे गांव में ट्रांसफर कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, वे वोट नहीं डालेंगे।
कांग्रेस से जीते थे दोनों सीटों के विधायक, नाराजगी के बाद भी टिकट मिला
आपको बता दें कि करगहर विधानसभा सीट से 5 साल पहले कांग्रेस के टिकट पर संतोष मिश्र जीते थे, इन्हें दोबारा कांग्रेस ने टिकट दिया है। दूसरी ओर, चेनारी विधानसभा सीट पर मुरारी गौतम कांग्रेस से ही जीते थे पर कुछ ही महीनों के बाद वे भाजपा में शामिल हो गए थे और उन्हें इस बार भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है।
अब ऐसे में देखना होगा कि इन नेताओं को जनता दोबारा चुनती है या किसी दूसरे नेता को मौका देगी। साथ ही, यहां से जो भी विधायक बनेंगे, क्या वे इनकी मूलभूत समस्याओं को हल कर पाएंगे या नहीं?
बिहार के कई जिलों में भी हुआ वोट बहिष्कार
सिर्फ रोहतास ही नहीं, बिहार के अन्य जिलों में भी वोटिंग के बहिष्कार की खबरें सामने आई हैं। बांका जिले के कटोरिया (Banka, Katoria) में लोगों ने पंचायत भवन की मांग को लेकर मतदान नहीं किया। वहीं पश्चिमी चंपारण (West Champaran) के बगहा (Bagaha) में करीब 15 हजार मतदाताओं ने पानी, सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से नाराज होकर वोट बहिष्कार किया। अररिया (Araria) और किशनगंज (Kishanganj) में भी कुछ इलाकों से वोटिंग न करने की खबरें आई हैं, हालांकि प्रशासन इन मामलों की जांच कर रहा है।
राजनीतिक झड़प और घटनाएं
- कई इलाकों में छिटपुट हिंसक घटनाएं भी हुईं अररिया में बीजेपी और कांग्रेस समर्थक आपस में भिड़ गए।
- कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बीजेपी समर्थकों ने धमकी दी।
- बेतिया (Bettiah) में पैसे लेते हुए दो राजद समर्थकों को गिरफ्तार किया गया।
- नवादा (Nawada) के धरिया गांव में लोगों ने BJP उम्मीदवार अनिल सिंह को खदेड़ दिया। ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने इलाके में कोई विकास कार्य नहीं कराया।
राज्यभर में 20 जिलों की 122 सीटों पर वोटिंग
दूसरे और अंतिम चरण में 12 मंत्रियों समेत 1302 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनकी किस्मत का फैसला 3.70 करोड़ मतदाता करेंगे। कुल 45,399 बूथों पर वोटिंग हो रही है, जिनमें 4,109 बूथों को संवेदनशील (Sensitive) घोषित किया गया है। संवेदनशील बूथों पर शाम 4 से 5 बजे तक वोटिंग होगी, जबकि बाकी बूथों पर शाम 6 बजे तक मतदान जारी रहेगा। नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
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RJD में नए युग की शुरुआत: तेजस्वी यादव बनाए गए पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष
- लालू यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे, आज जारी कार्यकारिणी बैठक में ऐलान हुआ।
लालू यादव के निर्देश पर आया प्रस्ताव
अब पार्टी में क्या होगी तेजस्वी की भूमिका
प्रतिक्रियाएं – किसने क्या कहा ?
राजद बोली- एक नए दौर की शुरूआत
“एक नए युग का शुभारंभ! श्री @yadavtejashwi जी बनाए गए राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष!”
रोहिणी आचार्य बोलीं- कटपुतली बना शहजादा
“सियासत के शिखर – पुरुष की गौरवशाली पारी का एक तरह से पटाक्षेप , ठकुरसुहाती करने वालों और ” गिरोह – ए – घुसपैठ ” को उनके हाथों की “कठपुतली बने शहजादा” की ताजपोशी मुबारक ..”
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने दी बधाई
“श्री तेजस्वी यादव जी को राष्ट्रीय जनता दल का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई!”
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RJD की राष्ट्रीय बैठक से ठीक पहले ‘एक्टिव’ हुए तेजस्वी यादव; कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के संकेत, बहन रोहिणी आचार्य ने फिर खोला मोर्चा
- राजद की नई कार्यकारिणी की पहली बैठक आज पटना के मौर्य होटल में हो रही।
नई दिल्ली|
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से लंबी चुप्पी साधे राजद नेता तेजस्वी यादव अपने पुराने तेवर में लौटे और राज्य में हो रही अपराध की घटनाओं पर सीधे पीएम मोदी से सवाल किया है। राजद कार्यालय में कर्पूरी ठाकुर की जयंती के मौके पर उन्होंने कहा कि बिहार में देश के गृह मंत्री और प्रधानमंत्री लगातार दौरा कर रहे थे पर नीट छात्रा के साथ हुए अपराध पर उनके एक ट्वीट तक नहीं हुआ। तेजस्वी यादव ने यह भी घोषणा की कि बजट सेशन के बाद वे हर जिले का दौरा करके जनता व पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलेंगे।
गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा के जरिए राज्य में एक्टिव हैं, और तेजस्वी की चुप्पी के चलते राजद पर सक्रियता से जुड़े सवाल उठने लगे हैं। साथ ही, तेजस्वी ने अपने तीखे तेवर राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के ठीक एक दिन पहले दिया। माना जा रहा है कि इस बैठक में तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। हालांकि इस सुगबुगाहट के बीच उनकी बड़ी बहन रोहिणी आचार्य ने फिर से ट्वीट करके अपनी नाराजगी जता दी है।
नई कार्यकारिणी 6 माह पहले बनी, अब हो रही पहली बैठक
तेजस्वी यादव लगातार कहते आ रहे हैं कि बिहार के चुनाव में लोक हार गया और तंत्र की जीत हो गई, यही बात उन्होंने 24 जनवरी को भी दोहराई। मगर बात अगर पार्टी के अंदर के लोकतंत्र की करें तो हाल इतना खराब है कि पार्टी की नई कार्यकारिणी छह महीने पहले गठित (5 जुलाई, 2025) हो चुकी है मगर उसकी पहली बैठक अब होने जा रही है। इसको लेकर राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन का तर्क है कि कार्यकारिणी बनने के बाद विधानसभा चुनाव होने के चलते पार्टी की कोई बड़ी बैठक नहीं हो पाई थी इसलिए नए साल में 25 जनवरी को पार्टी की कार्यकारिणी की पहली बैठक होगी।
एजेंडा – चुनावी हार की समीक्षा होगी
पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय बैठक में सभी प्रमुख राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी, साथ ही बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की करारी हार के कारणों और आगे की रणनीति पर भी मंथन होगा।
- राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के 85 सदस्य शामिल होंगे।
- सभी राज्यों के राजद के प्रदेश अध्यक्ष मौजूद रहेंगे
- सभी विधायक, सांसद, राज्यसभा सांसद एवं विधान पार्षद शामिल होंगे।
- राजद के विशेष आमंत्रित सदस्य व 200 बड़े नेता शामिल होंगे।
साल 2028 तक राजद के अध्यक्ष रहेंगे लालू यादव
बीते साल 5 जुलाई में राजद के राष्ट्रीय परिषद का खुला अधिवेशन हुआ था, तब मांग उठी थी कि तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया जाए क्योंकि लालू यादव की तबीयत खराब रहने लगी है। हालांकि इन मांगों को दरकिनार करके लालू यादव ने अगले तीन साल (2025-28) के लिए पार्टी के अध्यक्ष पद को अपने पास ही रखा और कार्यकारी अध्यक्ष किसी को नहीं बनाया। हालांकि तब उन्होंने तेजस्वी यादव के काम की तारीफ करके यह संकेत दे दिए थे कि बिहार विधानसभा चुनाव में टिकट बांटने की जिम्मेदारी उनके पास रहेगी।
तेजस्वी को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के संकेत
नई कार्यकारिणी की पहली बैठक से ठीक पहले तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के संकेत मिलने लगे हैं। तेजस्वी भी दोबारा एक्टिव हो गए हैं। हालांकि इस मामले में आरजेडी प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा है कि तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर अभी कोई राजनीतिक प्रस्ताव नहीं आया है। रविवार को होने वाली बैठक में कोई इस तरह का प्रस्ताव आएगा तो उसपर विचार किया जा सकता है।
‘परिवार-पार्टी के बीच समन्वय के लिए लालू जरूरी’ – विशेषज्ञ
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि जिस तरह लालू यादव के परिवार में बिखराव है, ऐसे में पार्टी का पूरा नियंत्रण वे तेजस्वी यादव को नहीं देना चाहते। लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप पहले ही पार्टी से निष्कासित हैं और नई राजनीतिक पार्टी बनाकर चुनाव भी लड़ चुके हैं। दूसरी ओर, लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य लगातार तेजस्वी यादव के खिलाफ बयान देती आ रही हैं। ऐसे में लालू यादव का पार्टी की धुरी बने रहना समय की जरूरत है।
इतिहास – लालू को कभी रास नहीं आया कार्यकारी अध्यक्ष
पार्टी के इतिहास की बात करें तो राजद के अस्तित्व में आने के ठीक बाद एक मौका आया जब लालू यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाना पड़ा। 1997 में बिहार में लालू यादव के नेतृत्व में जनता दल की सरकार थी। तब चारा घोटाले में लालू का नाम आने के बाद सरकार और संगठन की कमान छोड़ने का दबाव उनपर बना। तब लालू ने जनता दल से अलग होकर ‘राष्ट्रीय जनता दल’ (RJD) बनाया और पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया। साथ ही, अपने करीबी रंजन यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। पर कुछ ही दिन के बाद रंजन यादव पर राबड़ी देवी को सत्ता से हटाने की रणनीति बनाने के आरोप लगे, इसकी भनक लगते ही लालू ने उनके अधिकार वापस ले लिए।
‘लालूवाद को नष्ट-करने वालो के हाथ में पार्टी की असली कमान’
रविवार को होने जा रही पार्टी की नई कार्यकारिणी की पहली बैठक से ठीक पहले लालू यादव की दूसरे नंबर की बेटी रोहिणी आचार्य ने ट्वीट करके तेजस्वी यादव और उनके सहयोगियों के ऊपर वार किया है। रविवार सुबह आए उनके लंबे ट्वीट में कहा गया है कि पार्टी को ‘तहस-नहस’ करने वालो के हाथ में इसकी असली कमान है और ये लोग पार्टी को नष्ट करने के ‘टास्क’ में काफी हद तक सफल हो चुके हैं। गौरतलब है कि नवंबर में रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया था कि उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें उनके भाई व उनके दो दोस्तों ने मिलकर घर से निकाल दिया था।
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बिहार : दही-चूड़ा के बहाने फिर बेटे तेज प्रताप से फिर जुड़ रही लालू परिवार के रिश्तों की डोर
नई दिल्ली|
लालू यादव और उनके परिवार की बड़े बेटे तेज प्रताप के साथ टूट गए रिश्तों की डोर दोबारा जुड़ती नजर आई है। मकर संक्रांति के मौके पर तेज प्रताप ने चूड़ा भोज का आयोजन करके परिवार को निमंत्रण भेजा, जिसमें लालू यादव ने शामिल होकर पारिवारिक जुड़ाव का संकेत दिया है।
हालांकि तेजस्वी यादव न्यौते के बाद भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। इस बारे में पूछे जाने पर तेज प्रताप ने कोई नाराजगी नहीं दिेखाई, बल्कि यह कहकर बात टाल दी कि ‘तेजस्वी छोटे भाई हैं, देरी से सोकर उठते हैं।’ इस पूरे घटनाक्रम से साफ संकेत मिला है कि बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की करारी हार के बाद आखिर यह बर्फ पिघल रही है।
गौरतलब है कि लालू यादव ने बड़े बेटे की गैर जिम्मेदाराना गतिविधियों का हवाला देते हुए उन्हें पार्टी और परिवार से अलग कर दिया था।
तेज प्रताप बोले- पिता का आशीर्वाद मिला
दही-चूड़ा कार्यक्रम के दौरान आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद और बड़े बेटे तेज प्रताप यादव एक ही सोफे पर बैठे नजर आए। लालू प्रसाद के भोज में आने के बाद तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मुझे पिता का आशीर्वाद मिला है।” साथ ही बोले कि “बिहार के गवर्नर भी आएं थे, उन्होंने भी आशीर्वाद दिया है. बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लेते हुए कुछ नया काम करना है।”
एक दिन पहले घर जाकर न्यौता दिया था
13 जनवरी को तेज प्रताप ने अपने एक्स हैंडिल से भाई तेजस्वी यादव और मां राबड़ी देवी को दही-चूड़ा के आयोजन का निमंत्रण देते हुए तस्वीरें साझा की थीं, जिसने लोगों को चौंका दिया। तेजप्रताप अपने भाई तेजस्वी के घर पहुंचे थे, वहां अपनी भतीजी के साथ भी उन्होंने एक फोटो खिंचवाया।
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा भी शामिल हुए
तेज प्रताप के इस कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद शामिल हुए। साथ ही, विपक्षी दल भाजपा के प्रमुख नेता व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने भी शिरकत की। गौरतलब है कि एक दिन पहले डिप्टी सीएम सिन्हा के आवास पर दही-चूड़ा का आयोजन था, जिसमें तेजप्रताप शामिल हुए थे।
लालू के साले बोले- परिवार एक है, कोई दूरी नहीं
लालू यादव के अलावा तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में उनके बड़े मामा प्रभुनाथ यादव भी पहुंचे। उन्होंने कहा, “राज्यपाल और लालू जी ने आशीर्वाद दिए हैं, आज से दिन शुभ होने वाला है, परिवार एक है, कोई दूरी नहीं है।” वह बोले कि हमने अपने भगिना को आशीर्वाद दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी बड़ी बात कही कि तेज प्रताप यादव बहुत आगे जाने वाले हैं। दोनों भाई एक साथ हैं। सारे मामा का आशीर्वाद है।
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