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चुनावी डायरी

Bihar Election: जहां 5 साल पहले वोट बहिष्कार हुआ, हालात जस के तस..निराश ग्रामीणों ने फिर वोट नहीं डाला

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अररिया के वैधनाथपुर गांव के लोगों ने खुद ही अपने फोटो मीडिया को उपलब्ध करवाए क्योंकि नाव न होने से उनके गांव तक कोई नहीं पहुंच सका।
अररिया के वैधनाथपुर गांव के लोगों ने खुद ही अपने फोटो मीडिया को उपलब्ध करवाए क्योंकि नाव न होने से उनके गांव तक कोई नहीं पहुंच सका।

 

अररिया | हमारे संवाददाता

सरकारी वादों की सच्चाई से हम सब वाकिफ हैं पर जब-जब ये सामने आती है, हताशा होती है कि लोगों के मत से चुनी गईं सरकारें उनके जीवन में कोई सुधार नहीं ला रहीं।

बिहार के अररिया में ऐसा ही एक मामला रानीगंज विधानसभा क्षेत्र में 11 नवंबर की वोटिंग के दिन देखने को मिला।

रानीगंज ब्लॉक के वैधनाथपुर गांव के लोगों ने वोट बहिष्कार कर दिया और नदी पार करके वोट डालने बूथ पर नहीं पहुंचे।

ग्रामीणों ने कहा कि पांच साल पहले भी जब चुनाव हुआ था तो हमने नदी पर पक्के पुल का मुद्दा उठाया था।

तब कह दिया गया कि सरकार बनवाने पर जरूर मांग सुनी जाएगी। तब भी गांव के कुछ ही लोगों ने वोट डाला था। अब पांच साल बाद दोबारा नई सरकार बनने के लिए चुनाव हो रहे हैं लेकिन उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है।

आज भी वे नदी में उतरकर दूसरी ओर जा पाते हैं, जब नदी उफान पर होती है तो उनका संपर्क आसपास के एरिया से कट जाता है।

वैधनाथपुर में वोट बहिष्कार की खबर आने के बाद हमारे संवाददाता ने प्रयास किया पर वहां नहीं पहुंच पाए क्योंकि नदी उफान पर है और मौके पर नाव की व्यवस्था नहीं मिली।

गांव वालों ने फोन पर जानकारी दी कि इस समय नदी में नाव का भी इंतजाम नहीं है इसलिए वे नदी पार बूथ पर नहीं जा पाएंगे।

ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर भी नाराजगी जतायी कि उनके गांव में 1200 वोटर हैं, सरकारी स्कूल है, फिर भी वहां बूथ नहीं बनाया गया। जबकि नदी पार के जिस गांव में बूथ बनाया गया है, वहां सिर्फ 200 वोटर ही हैं।

इस मामले में रानीगंज की बीडीओ रूबी कुमारी का कहना है कि मतदान के लिए नाव का इंतजाम कराया गया था लेकिन नाव के अचानक गायब हो जाने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

आपको बता दें कि वैधनाथपुर के लोगों के लिए नदी के बिना दूसरी ओर जाना पड़े तो उन्हें दस किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ता है, जिसके चलते उनकी लंबे समय से मांग रही है कि नदी पर पुल बना दिया जाए।

बता दें कि इस इलाके में जदयू के विधायक अचमित ऋषिदेव जीते थे।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।