रिपोर्टर की डायरी
बिहार में जादू-टोने के नाम पर हत्या: नवादा में दो महिलाओं पर रॉड से हमला, एक ने तोड़ा दम
- बिहार के नवादा जिले में अंध विश्वास के चलते एक महिला की हत्या कर दी गई।
- महिला को पीट-पीटकर मार डाला गया, उसकी जेठानी और पति की हालत गंभीर है।
- नवादा की इस घटना में अब तक तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है।
नवादा | अमन कुमार सिन्हा
बिहार में अब भी अंधविश्वास (superstition) इस हद तक फैला हुआ है कि 8 जनवरी को टोना टोटका (witchcraft/witch-hunting) करने के आरोप में दो महिलाओं को बुरी तरह पीटा गया, जिसमें एक की मौत (Murder) हो गई। महिला को बचाने की कोशिश कर रहे पति को भी आरोपियों ने खूब पीटा। महिला की मौत से चार बच्चों से सिर से मां का साया उठ गया है। पुलिस ने इस घटना में तीन आरोपियों को हिरासत (Detained) में लिया है। अभी केस दर्ज नहीं किया गया है।
टोना करने का आरोप लगाकर जेठानी-देवरानी पर हमला
यह पूरा मामला नवादा जिले (Nawada) के रजौली थाना क्षेत्र (Rajauli Police Station) के मोहल्ला सती स्थान का है। यहां पिछले एक सप्ताह से दो गोतिया परिवारों (patrilineal lineage family) के बीच झगड़ा चल रहा था, जिसमें किरण देवी व उनकी जेठानी ललिता देवी के ऊपर आरोप लगाया जा रहा था कि वे टोटका करती हैं। यह मामला गुरुवार को इतना बढ़ गया कि आरोपित परिवार ने रॉड और ईंट-पत्थर से किरण व ललिता देवी के ऊपर हमला कर दिया। दोनों को बचाने की कोशिश कर रहे किरण देवी के पति महेंद्र चौधरी भी घायल हो गए।
इलाज के दौरान दम तोड़ा, फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए
किरण देवी की हालत को लेकर ऑन ड्यूटी डॉक्टर डॉ. इलिका भारती ने बताया कि महिला की हालत काफी सीरियस थी और प्राथमिक उपचार के दौरान ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
इस मामले में थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर रंजीत कुमार ने कहा-
“घटना की गंभीरता देखते हुए फॉरेंसिक टीम बुलाकर साक्ष्य जुटाए गए। उन्होंने कहा कि महिला के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
मारपीट में आरोपी पक्ष के भी दो लोग घायल हुए
इस घटना में दूसरे पक्ष के भी दो लोग घायल हो गए, जिनका इलाज एक निजी अस्पताल में किया जा रहा है। आरोपी पक्ष के मुकेश कुमार, नटरु चौधरी, शोभा कुमारी, बबीता देवी पर हमला करने का आरोप लगाया गया है।
यह घटना बिहार में अशिक्षा के चलते समाज में फैली अंधविश्वास की गहरी जड़ों को दर्शाती है, इस स्थिति को बदलने के लिए गंभीर सामाजिक प्रयास की जरूरत है।
बिहार में क्यों होती है जादू-टोने के नाम पर हिंसा
बिहार में जादू-टोने के खिलाफ कानून, पर इस्तेमाल कम:
बिहार देश का पहला राज्य था जिसने 1999 में जादू-टोने को लेकर होने वाली हिंसा को रोकने के लिए कानून बनाया, जिसका नाम ‘डायन प्रथा निवारण अधिनियम, 1999’ (Bihar Prevention of Witch (Daain) Practices Act, 1999) है। पर समस्या यह है कि अधिकांश मामलों में पुलिस इस कानून की जगह IPC/BNS की सामान्य हिंसा में इस्तेमाल होने वाली धाराओं का इस्तेमाल करता आया है।
बिना वारंट गिरफ्तारी का प्रावधान
- अपराध: किसी को “डायन” (witch) कहना, उस पर जादू-टोने का आरोप लगाना, या ऐसी मान्यता से शारीरिक/मानसिक प्रताड़ना देना।
- सजा: 3 महीने से 1 साल तक की जेल और एक हजार रुपये का जुर्माना (कुछ मामलों में जेल बढ़ सकती है)।
- संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध : पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है।
- संबंधित IPC/BNS धाराएं: हत्या (BNS 103/302), गंभीर चोट (BNS 117), अपहरण, बलात्कार, या सामूहिक हिंसा (mob lynching) के लिए अलग से मुकदमा चलता है।
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गोपालगंज : फाइलेरिया रोकने की दवा खाने के बाद स्कूली बच्चे बीमार
- गोपालगंज के हरखुआ माध्यमिक विद्यालय में 15 बच्चे बीमार पड़े।
- 58 बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई, फिर तबीयत बिगड़ी।
- सभी बच्चों को सदर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, सभी सुरक्षित।
गोपालगंज | आलोक कुमार
बिहार के गोपालगंज में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाए जाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। स्कूल में अभिभावकों ने पहुंचकर हंगामा किया, हालांकि टीचरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। इस बीच हेडमास्टर ने एंबुलेंस बुलाकर 15 बीमार बच्चों को सदर अस्पताल में एडमिट कराया है। बता दें कि हाथी पांव या फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दो साल से बड़े बच्चों को यह दवा खिलाई जाती है, जो एकदम सुरक्षित है।
गोपालगंज में बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना शहर के हरखुआ गांव के एक माध्यमिक विद्यालय में घटी। हेडमास्टर कृष्ण मुरारी पांडे ने बताया कि स्कूल में 27 फरवरी को 58 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों ने मिड डे मील खाया। फिर दोपहर करीब 3:00 बजे आशा वर्करो ने स्कूल आकर सभी 58 बच्चों को फाइलेरिया और एल्बेंडाजोल की गोलियां दीं।
प्रिंसिपल ने बताया कि दवा खाते ही कुछ बच्चों को अचानक नींद आने लगी और वे सोने लगे, जबकि कुछ को उल्टी हुई।
इस बारे में सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में गैस बनने की शिकायत हो सकती है, जिससे उल्टी या पेट दर्द महसूस होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार डर के कारण भी बच्चों को ऐसी समस्या होती है, इसमें किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।
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शराब तस्करी में जेल गए आरोपी की मौत, परिवार बोला- हत्या हुई, जेल प्रशासन ने हार्टअटैक बताया
- बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की मौत होने से उठे सवाल।
- शराब तस्करी के आरोप में जेल में 14 दिन से था बंदी।
- जेल में अचानक हुई मौत को परिजनों ने बताया हत्या।
बक्सर | अमीषा कुमारी
बिहार में शराब तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की मौत बक्सर सेंट्रल जेल में हो गई है। बीती 12 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में उसके साथ मारपीट हुई, उसके शरीर पर लाल निशान हैं। परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए सदर अस्पताल में हंगामा किया, तब मौके पर पुलिस पहुंची।अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में जेल प्रशासन ने उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।
दरअसल 40 साल के राजेंद्र सिंह को बक्सर पुलिस पकड़कर ले गई थी और 12 फरवरी को उसे जेल भेजा गया था। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के विराट नगर के रहने वाले थे। मृतक के बड़े भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के दौरान ही पुलिस ने राजेंद्र के साथ मारपीट की थी, जबकि वह बीमार चल रहा था। राजू का आरोप है कि “जेल भेजने के बाद भी भाई को पीटा गया। शरीर पर मौजूद लाल निशान साफ बता रहे हैं कि उसकी हत्या हुई है।
राजू ने बताया कि 27 फरवरी की सुबह करीब 11 बजे जेल प्रशासन की ओर से कॉल आया कि राजेंद्र की तबीयत बिगड़ गई है और वे अस्पताल पहुंच जाएं। लेकिन जब वे लोग सदर अस्पताल पहुंचे तो एक्स-रे रूम के बाहर स्ट्रेचर पर मृत अवस्था में राजेंद्र मिले। वहां कोई मौजूद नहीं था। इसके बाद परिजनों ने हंगामा किया और मौके पर पुलिस पहुंची।
मृतक राजेंद्र पेशे से पेंटर थे और उनके दो छोटे बच्चे हैं। अचानक हुई इस मौत ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। वहीं, यह घटना बिहार में शराबबंदी लागू कराने के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। साथ ही, जेल में बंदी की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन पर भी सवाल खड़ा होता है। मृतक के भाई ने बताया कि 25 फरवरी को वह अपने भाई से मिलने जेल गए थे, तब उसे ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी जिसके चलते उसकी अचानक मौत हो सकती है।
बक्सर सेंट्रल जेल के अधीक्षक ज्ञानित गौरव ने परिजनों के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मौत हार्ट अटैक से प्रतीत होती है। हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इसका सही कारण पता लग सकेगा।
बक्सर सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में तैनात डॉक्टर अमित कुमार ने पुष्टि की कि कैदी को अस्पताल लाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। वहीं, नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने सदर अस्पताल में मीडिया से कहा कि अगर कहीं कोई लापरवाही पाई जाती है तो उस पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।”
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बिहार में अब दारोगा-कोतवाल के खिलाफ केस चलाने से पहले सरकार की अनुमति जरूरी
- बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने जारी की अधिसूचना।
- पुलिस कर्मियों पर मुकदमा चलाने के लिए लेनी होगी सरकार की अनुमति।
- बिहार पुलिस के सभी पदाधिकारी व कर्मियों पर लागू होगा नियम।
पटना |
बिहार में अब दारोगा से लेकर इंस्पेक्टर तक के खिलाफ किसी मामले में तब ही केस दर्ज हो सकेगा जब उसकी इजाजत राज्य सरकार देगी।
बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने गुरुवार (26 feb) को इसको लेकर अधिसूचना जारी की है। यह नियम पहले DSP/ACP और ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू था, लेकिन अब राज्य सरकार ने यह सुरक्षा कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक बढ़ा दी है। सरकार का तर्क है कि इस तरह बदले की भावना के चलते पुलिस पर कार्रवाई व उत्पीड़न को रोका जा सकेगा।
सरकार के इस महत्वपूर्ण सर्कुलर में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति (sanction) अनिवार्य होगी। यह शर्त उन कार्यों पर लागू होगी जो आधिकारिक ड्यूटी (official duty) के दौरान या उसके संबंध में किए गए हों।
यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। जिसमें पहले “केंद्रीय सरकार” के स्थान पर अब स्पष्ट रूप से “राज्य सरकार” को यह अधिकार दिया गया है।
बिहार जैसे राज्य जहां पुलिस के ऊपर भ्रष्टाचार व गलत मुकदमें में फंसाने के मामले सामने आते रहे हैं, राज्य सरकार की ओर से दी जा रही इम्यूनिटी उनकी ताकत को और बढ़ा देगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
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