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रिपोर्टर की डायरी

Bihar : रास्ते में पोती से छेड़छाड़, विरोध करने पर दादा की पीट-पीटकर हत्या

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बुजुर्ग की हत्या के बाद इस गरीब परिवार में सन्नाटा पसरा है। (तस्वीर- सुनील कुमार)
बुजुर्ग की हत्या के बाद इस गरीब परिवार में सन्नाटा पसरा है। (तस्वीर- सुनील कुमार)
  • बाजार से लौट रही थीं बुआ-भतीजी, लड़कों ने घेरा, जैसे-तैसे घर पहुंचीं और दादा को घटना बतायी
  • बिहार में लड़कियों की सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षित आवाजाही पर सवाल खड़े करने वाली घटना

नवादा | सुनील कुमार
बिहार के नवादा जिले में घर लौट रही एक लड़की से छेड़छाड़ की घटना ने हत्या का रूप ले लिया। लड़की अपनी बुआ के साथ बाजार से पैदल लौट रही थी, तभी गांव के ही कुछ युवकों ने रास्ते में उसके साथ छेड़छाड़ की। घर पहुँचने पर जब लड़की ने परिवार को घटना बताई तो उसके दादा विरोध करने पहुंचे। इसी दौरान आरोपियों ने 65 वर्षीय दादा को लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया।

घटना पकरीबरावां थाना क्षेत्र के एक गांव की है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर एक आरोपी इंदल मांझी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दूसरा आरोपी फरार है। गौरतलब है कि मृतक बुजुर्ग व आरोपी दोनों ही समुदाय के हैं। ऐसे में यह मामला


रास्ते में लड़कों ने दुपट्टा खींचा, छेड़खानी की

इस मामले में बुजुर्ग के बेटे और लड़की के चाचा ने बताया कि शाम साढ़े छह बजे के आसपास उनकी भतीजी और बहन बाजार से घर लौटे तो उन्होंने बताया कि गांव के ही दो युवकों ने रास्ते में छेड़खानी की। चाचा का आरोप है कि उनकी भतीजी के गले से दुपट्टा खींच लिया गया और चूमने की कोशिश की। जैसे-तैसे वे दोनों घर लौटीं। फिर बुजुर्ग समेत परिवार के सभी पुरुष उस लड़के के घर गए। आरोप है कि वहीं पर आरोपी शराब के नशे में बुजुर्ग पर हमलावर हो गया।

मृतक बुजुर्ग की पोती अपने परिजनों के साथ बाजार से लौट रही थी। रास्ते में आरोपी ने युवती का हाथ पकड़कर छेड़खानी की। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो विवाद बढ़ गया और आरोपी ने बुजुर्ग पर हमला कर दिया। गंभीर चोटों से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। – इंस्पेक्टर रंजीत कुमार, थाना अध्यक्ष, पकरीबरावां


पहले भी की थी छेड़छाड़

मृतक के बेटे का कहना है कि उसनी भतीजी के साथ गांव के उन्हीं आरोपियों ने पहले भी छेड़छाड़ करने की कोशिश की थी। तब समुदाय के लोगों को बैठाकर दोनों को चेतावनी दी गई थी। पर इस बार दोबारा लड़कों ने वैसा ही किया और उसके दादा की जान चली गई। इस मामले में बुजुर्ग का शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया गया और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। अधिकारियों ने कहा कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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गोपालगंज : फाइलेरिया रोकने की दवा खाने के बाद स्कूली बच्चे बीमार

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  • गोपालगंज के हरखुआ माध्यमिक विद्यालय में 15 बच्चे बीमार पड़े।
  • 58 बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई, फिर तबीयत बिगड़ी।
  • सभी बच्चों को सदर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, सभी सुरक्षित।

गोपालगंज | आलोक कुमार 

बिहार के गोपालगंज में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाए जाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। स्कूल में अभिभावकों ने पहुंचकर हंगामा किया, हालांकि टीचरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। इस बीच हेडमास्टर ने एंबुलेंस बुलाकर 15 बीमार बच्चों को सदर अस्पताल में एडमिट कराया है। बता दें कि हाथी पांव या फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दो साल से बड़े बच्चों को यह दवा खिलाई जाती है, जो एकदम सुरक्षित है।

गोपालगंज में बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना शहर के हरखुआ गांव के एक माध्यमिक विद्यालय में घटी। हेडमास्टर कृष्ण मुरारी पांडे ने बताया कि स्कूल में 27 फरवरी को 58 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों ने मिड डे मील खाया। फिर दोपहर करीब 3:00 बजे आशा वर्करो  ने स्कूल आकर सभी 58 बच्चों को फाइलेरिया और एल्बेंडाजोल की गोलियां दीं।

प्रिंसिपल ने बताया कि दवा खाते ही कुछ बच्चों को अचानक नींद आने लगी और वे सोने लगे, जबकि कुछ को उल्टी हुई।

इस बारे में सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में गैस बनने की शिकायत हो सकती है, जिससे उल्टी या पेट दर्द महसूस होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार डर के कारण भी बच्चों को ऐसी समस्या होती है, इसमें किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।

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शराब तस्करी में जेल गए आरोपी की मौत, परिवार बोला- हत्या हुई, जेल प्रशासन ने हार्टअटैक बताया

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परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
  • बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की मौत होने से उठे सवाल।
  • शराब तस्करी के आरोप में जेल में 14 दिन से था बंदी।
  • जेल में अचानक हुई मौत को परिजनों ने बताया हत्या।

बक्सर | अमीषा कुमारी

बिहार में शराब तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की मौत बक्सर सेंट्रल जेल में हो गई है। बीती 12 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में उसके साथ मारपीट हुई, उसके शरीर पर लाल निशान हैं। परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए सदर अस्पताल में हंगामा किया, तब मौके पर पुलिस पहुंची।अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में जेल प्रशासन ने उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।

दरअसल 40 साल के राजेंद्र सिंह को बक्सर पुलिस पकड़कर ले गई थी और 12 फरवरी को उसे जेल भेजा गया था। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के विराट नगर के रहने वाले थे।  मृतक के बड़े भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के दौरान ही पुलिस ने राजेंद्र के साथ मारपीट की थी, जबकि वह बीमार चल रहा था। राजू का आरोप है कि “जेल भेजने के बाद भी भाई को पीटा गया। शरीर पर मौजूद लाल निशान साफ बता रहे हैं कि उसकी हत्या हुई है।

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बिहार में अब दारोगा-कोतवाल के खिलाफ केस चलाने से पहले सरकार की अनुमति जरूरी

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बिहार पुलिस
बिहार पुलिस (प्रतीकात्मक फोटो)
  • बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने जारी की अधिसूचना।
  • पुलिस कर्मियों पर मुकदमा चलाने के लिए लेनी होगी सरकार की अनुमति।
  • बिहार पुलिस के सभी पदाधिकारी व कर्मियों पर लागू होगा नियम।

पटना |

बिहार में अब दारोगा से लेकर इंस्पेक्टर तक के खिलाफ किसी मामले में तब ही केस दर्ज हो सकेगा जब उसकी इजाजत राज्य सरकार देगी।

बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने गुरुवार (26 feb) को इसको लेकर अधिसूचना जारी की है। यह नियम पहले DSP/ACP और ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू था, लेकिन अब राज्य सरकार ने यह सुरक्षा कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक बढ़ा दी है।  सरकार का तर्क है कि इस तरह बदले की भावना के चलते पुलिस पर कार्रवाई व उत्पीड़न को रोका जा सकेगा।

सरकार के इस महत्वपूर्ण सर्कुलर में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति (sanction) अनिवार्य होगी। यह शर्त उन कार्यों पर लागू होगी जो आधिकारिक ड्यूटी (official duty) के दौरान या उसके संबंध में किए गए हों।

 यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। जिसमें पहले “केंद्रीय सरकार” के स्थान पर अब स्पष्ट रूप से “राज्य सरकार” को यह अधिकार दिया गया है।

बिहार जैसे राज्य जहां पुलिस के ऊपर भ्रष्टाचार व गलत मुकदमें में फंसाने के मामले सामने आते रहे हैं, राज्य सरकार की ओर से दी जा रही इम्यूनिटी उनकी ताकत को और बढ़ा देगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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