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रिपोर्टर की डायरी

Bihar: आंधी-बारिश से मधेपुरा में तबाही, 300 घर टूटे, 20 घायल, 1 महिला मरी

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मधेपुरा के ग्रामीण इलाके में भारी बारिश के बाद लोग रातभर अंधेरे में एक-दूसरे की खैरियत के लिए भटकते रहे।
मधेपुरा के ग्रामीण इलाके में भारी बारिश के बाद लोग रातभर अंधेरे में एक-दूसरे की खैरियत के लिए भटकते रहे। (फोटो- टीम बोलते पन्ने)
  • पुरैनी और आलमनगर प्रखंडों के कई गांवों में शनिवार रात आए आंधी और बारिश ने भारी तबाही मचाई।
  • 300 से ज्यादा घरों को क्षति, कई मवेशियों की मौत, 20 से ज्यादा लोग घायल, राहत सामग्री बांटी जा रही।

मधेपुरा | राजीव रंजन

मधेपुरा में हुई भारी बारिश ने दो प्रखंडों के कई गांव में भारी तबाही मचाई है। पुरैनी और आलमनगर के कई गांव में 300 से अधिक मकान पूरी तरह टूट गए हैं। एक महिला की मौत हो गई है, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हैं। इसके अलावा, कई मवेशियों की भी बारिश से जान चली गई है।

मधेपुरा के पुरैनी प्रखंड अंतर्गत औराई में शनिवार शाम आई आंधी-तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचाई। करीब 30 मिनट तक चले तूफान ने क्षेत्र में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया।  खेरहो वार्ड-16 में शौचालय का दीवार गिरने से एक 65 वर्षीय महिला की मौत गई।

स्थानीय लोगों के अनुसार, घायलों में से कुछ को भागलपुर ले जाया गया है, जबकि अन्य का इलाज स्थानीय अस्पतालों में चल रहा है।

 

“खेरहो और औराई में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। पीड़ितों के साथ सरकार खड़ी है। घायलों के इलाज की व्यवस्था की गई है। रविवार से सामूहिक रसोई शुरू होगी।” – नरेंद्र नारायण यादव, स्थानीय विधायक व बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष

 

पेड़ गिरने से बिजली कटी, रातभर अंधेरे में भटके लोग

आंधी के कारण बिजली आपूर्ति ठप हो गई और सड़कों पर पेड़ गिरने से आवागमन बाधित हुआ।

रात होने के कारण प्रशासन को पेड़ हटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, रविवार सुबह से राहत कार्य ने गति पकड़ी है।

प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गई हैं। प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री वितरित करने के आदेश दिए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि घरों और मवेशियों के नुकसान का आकलन शुरू हो गया है, जल्द ही पीड़ितों को सहायता प्रदान की जाएगी।

 

 

7 अक्तूबर तक भारी बारिश की संभावना 

बता दें कि मौसम विभाग ने 7 अक्टूबर तक भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे स्थानीय लोग और अधिक सतर्क हैं। डीडीसी अनिल बसाक और उदाकिशुनगंज एसडीएम सहित प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेजी से चल रहे हैं। प्रशासन की टीम को प्रभावित लोगों के गुस्से का भी सामना करना पड़ रहा है।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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गोपालगंज : फाइलेरिया रोकने की दवा खाने के बाद स्कूली बच्चे बीमार

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  • गोपालगंज के हरखुआ माध्यमिक विद्यालय में 15 बच्चे बीमार पड़े।
  • 58 बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई, फिर तबीयत बिगड़ी।
  • सभी बच्चों को सदर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, सभी सुरक्षित।

गोपालगंज | आलोक कुमार 

बिहार के गोपालगंज में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाए जाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। स्कूल में अभिभावकों ने पहुंचकर हंगामा किया, हालांकि टीचरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। इस बीच हेडमास्टर ने एंबुलेंस बुलाकर 15 बीमार बच्चों को सदर अस्पताल में एडमिट कराया है। बता दें कि हाथी पांव या फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दो साल से बड़े बच्चों को यह दवा खिलाई जाती है, जो एकदम सुरक्षित है।

गोपालगंज में बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना शहर के हरखुआ गांव के एक माध्यमिक विद्यालय में घटी। हेडमास्टर कृष्ण मुरारी पांडे ने बताया कि स्कूल में 27 फरवरी को 58 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों ने मिड डे मील खाया। फिर दोपहर करीब 3:00 बजे आशा वर्करो  ने स्कूल आकर सभी 58 बच्चों को फाइलेरिया और एल्बेंडाजोल की गोलियां दीं।

प्रिंसिपल ने बताया कि दवा खाते ही कुछ बच्चों को अचानक नींद आने लगी और वे सोने लगे, जबकि कुछ को उल्टी हुई।

इस बारे में सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में गैस बनने की शिकायत हो सकती है, जिससे उल्टी या पेट दर्द महसूस होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार डर के कारण भी बच्चों को ऐसी समस्या होती है, इसमें किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।

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शराब तस्करी में जेल गए आरोपी की मौत, परिवार बोला- हत्या हुई, जेल प्रशासन ने हार्टअटैक बताया

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परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
  • बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की मौत होने से उठे सवाल।
  • शराब तस्करी के आरोप में जेल में 14 दिन से था बंदी।
  • जेल में अचानक हुई मौत को परिजनों ने बताया हत्या।

बक्सर | अमीषा कुमारी

बिहार में शराब तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की मौत बक्सर सेंट्रल जेल में हो गई है। बीती 12 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में उसके साथ मारपीट हुई, उसके शरीर पर लाल निशान हैं। परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए सदर अस्पताल में हंगामा किया, तब मौके पर पुलिस पहुंची।अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में जेल प्रशासन ने उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।

दरअसल 40 साल के राजेंद्र सिंह को बक्सर पुलिस पकड़कर ले गई थी और 12 फरवरी को उसे जेल भेजा गया था। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के विराट नगर के रहने वाले थे।  मृतक के बड़े भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के दौरान ही पुलिस ने राजेंद्र के साथ मारपीट की थी, जबकि वह बीमार चल रहा था। राजू का आरोप है कि “जेल भेजने के बाद भी भाई को पीटा गया। शरीर पर मौजूद लाल निशान साफ बता रहे हैं कि उसकी हत्या हुई है।

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बिहार में अब दारोगा-कोतवाल के खिलाफ केस चलाने से पहले सरकार की अनुमति जरूरी

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बिहार पुलिस
बिहार पुलिस (प्रतीकात्मक फोटो)
  • बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने जारी की अधिसूचना।
  • पुलिस कर्मियों पर मुकदमा चलाने के लिए लेनी होगी सरकार की अनुमति।
  • बिहार पुलिस के सभी पदाधिकारी व कर्मियों पर लागू होगा नियम।

पटना |

बिहार में अब दारोगा से लेकर इंस्पेक्टर तक के खिलाफ किसी मामले में तब ही केस दर्ज हो सकेगा जब उसकी इजाजत राज्य सरकार देगी।

बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने गुरुवार (26 feb) को इसको लेकर अधिसूचना जारी की है। यह नियम पहले DSP/ACP और ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू था, लेकिन अब राज्य सरकार ने यह सुरक्षा कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक बढ़ा दी है।  सरकार का तर्क है कि इस तरह बदले की भावना के चलते पुलिस पर कार्रवाई व उत्पीड़न को रोका जा सकेगा।

सरकार के इस महत्वपूर्ण सर्कुलर में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति (sanction) अनिवार्य होगी। यह शर्त उन कार्यों पर लागू होगी जो आधिकारिक ड्यूटी (official duty) के दौरान या उसके संबंध में किए गए हों।

 यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। जिसमें पहले “केंद्रीय सरकार” के स्थान पर अब स्पष्ट रूप से “राज्य सरकार” को यह अधिकार दिया गया है।

बिहार जैसे राज्य जहां पुलिस के ऊपर भ्रष्टाचार व गलत मुकदमें में फंसाने के मामले सामने आते रहे हैं, राज्य सरकार की ओर से दी जा रही इम्यूनिटी उनकी ताकत को और बढ़ा देगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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