दुनिया गोल
डोनाल्ड ट्रंप ने 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को बाहर निकाला, मानवाधिकार और ऊर्जा से जुड़े संगठनों की लिस्ट जानिए
- व्हाइट हाउस ने कहा कि ये संगठन अमेरिकी हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।
नई दिल्ली |
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को बाहर निकाल दिया है। इसमें 31 संगठन संयुक्त राष्ट्र से जुड़े हैं और 35 संगठन गैर संयुक्त राष्ट्र संबद्ध हैं। इन संगठनों का संबंध शिक्षा, मानवाधिकार, ऊर्जा क्षेत्र, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, श्रम, सामाजिक मुद्दों व आपराधिक कानूनों आदि से है। इन सभी संगठनों को मिलने वाली अमेरिकी फंडिंग भी रोकने का आदेश दिया गया है।
यह फैसला पिछले साल 4 फरवरी को साइन किए गए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर का हिस्सा है। इस तरह अमेरिका ने वैश्विक सहभागिता से पीछे हटने का आधिकारिक कदम उठाया है जो पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। इस कदम के बारे में व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ये सभी संगठन/कन्वेंशन/संधियां अमेरिकी हितों के खिलाफ हैं इसलिए यह कदम उठाया गया है।
मानवाधिकार से जुड़े मुख्य संगठन:
- यूएन ह्यूमन राइट्स काउंसिल (UNHRC): अमेरिका ने 2018 में भी इससे बाहर निकाला था, अब दोबारा इस संगठन से बाहर निकले का फैसला हुआ है।
- यूएनआरडब्ल्यूए (UN Relief and Works Agency for Palestine Refugees): फिलिस्तीनी शरणार्थियों की एजेंसी से बाहर निकलकर अमेरिका ने इसकी फंडिंग पर रोक लगा दी है।
ऊर्जा से जुड़े मुख्य संगठन:
- पेरिस क्लाइमेट एग्रीमेंट: जलवायु परिवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण समझौते से अमेरिका को दोबारा बाहर निकाला।
- इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC): जलवायु विज्ञान की यूएन बॉडी से अमेरिका बाहर हो गया है।
- इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (IRENA): नवीकरणीय ऊर्जा पर फोकस करने वाले संगठन की फंडिंग रोकी, बाहर हुआ।
- यूएन वॉटर और यूएन ओशंस: जल और समुद्री ऊर्जा/पर्यावरण से जुड़े इस संगठन से अमेरिका की निकासी।
WHO व UNESCO से फिर अमेरिका बाहर
- 24/7 Carbon-Free Energy Compact
- Colombo Plan Council
- Commission for Environmental Cooperation
- Education Cannot Wait
- European Centre of Excellence for Countering Hybrid Threats
- Forum of European National Highway Research Laboratories
- Freedom Online Coalition
- Global Community Engagement and Resilience Fund
- Global Counterterrorism Forum
- Global Forum on Cyber Expertise
- Global Forum on Migration and Development
- Inter-American Institute for Global Change Research
- Intergovernmental Forum on Mining, Minerals, Metals, and Sustainable Development
- Intergovernmental Panel on Climate Change
- Intergovernmental Science-Policy Platform on Biodiversity and Ecosystem Services
- International Centre for the Study of the Preservation and Restoration of Cultural Property
- International Cotton Advisory Committee
- International Development Law Organization
- International Energy Forum
- International Federation of Arts Councils and Culture Agencies
- International Institute for Democracy and Electoral Assistance
- International Institute for Justice and the Rule of the Law
- International Lead and Zinc Study Group
- International Renewable Energy Agency
- International Solar Alliance
- International Tropical Timber Organization
- International Union for Conservation of Nature
- Pan American Institute of Geography and History
- Partnership for Atlantic Cooperation
- Regional Cooperation Agreement on Combatting Piracy and Armed Robbery against Ships in Asia
- Regional Cooperation Council
- Renewable Energy Policy Network for the 21st Century
- Science and Technology Center in Ukraine
- Secretariat of the Pacific Regional Environment Programme
- Venice Commission of the Council of Europe
- Department of Economic and Social Affairs
- UN Economic and Social Council (ECOSOC) — Economic Commission for Africa
- ECOSOC — Economic Commission for Latin America and the Caribbean
- ECOSOC — Economic and Social Commission for Asia and the Pacific
- ECOSOC — Economic and Social Commission for Western Asia
- International Law Commission
- International Residual Mechanism for Criminal Tribunals
- International Trade Centre
- Office of the Special Adviser on Africa
- Office of the Special Representative of the Secretary General for Children in Armed Conflict
- Office of the Special Representative of the Secretary-General on Sexual Violence in Conflict
- Office of the Special Representative of the Secretary-General on Violence Against Children
- Peacebuilding Commission
- Peacebuilding Fund
- Permanent Forum on People of African Descent
- UN Alliance of Civilizations
- UN Collaborative Programme on Reducing Emissions from Deforestation and Forest Degradation in Developing Countries
- UN Conference on Trade and Development
- UN Democracy Fund
- UN Energy
- UN Entity for Gender Equality and the Empowerment of Women
- UN Framework Convention on Climate Change
- UN Human Settlements Programme
- UN Institute for Training and Research
- UN Oceans
- UN Population Fund
- UN Register of Conventional Arms
- UN System Chief Executives Board for Coordination
- UN System Staff College
- UN Water
- UN University
दुनिया गोल
ट्रंप ने गज़ा शांति योजना का Phase-2 किया जारी, जानिए अंतरिम सरकार कैसे शांति लाएगी?
- गजा में नया प्रशासन NCAG बनेगा, हमास पर सख्ती बढ़ेगी।
गज़ा में हथियारबंद लोग पूरी तरह हटाए जाएंगे
अस्थायी प्रशासनिक समिति बनेगी, 15 सदस्य होंगे
‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर घोषणा जल्द
योजना का पहला चरण अमेरिका की नजर में सफल
- ट्रंप प्रशासन ने दावा किया कि फेज वन में ऐतिहासिक मानवीय सहायता (Humanitarian Aid) पहुंचाई गई।
- अमेरिका का दावा है कि गज़ा में सीजफायर कायम रहा।
- सभी जीवित बंधकों को वापस लाया गया, साथ ही 28 मृत बंधकों में से 27 के शव वापस लाए जा चुके हैं।
- अमेरिका ने मिस्र, तुर्की और कतर को मध्यस्थता के लिए धन्यवाद दिया।
गज़ा के असल हालात : संघर्ष विराम के बाद 442 मौतें
फिलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 11 अक्तूबर को गज़ा में संघर्ष विराम लागू हुआ, तब से यहां 442 लोग मारे जा चुके हैं और 1236 लोग घायल हो चुके हैं। गज़ा में अब तक हुईं कुल मौतों की संख्या 71,412 है और 171,314 लोग घायल हैं। मरने वाले लोगों में 70% महिलाएं और बच्चे हैं।
दुनिया गोल
वेनेजुएला पर कब्जे के बाद ट्रंप अब लगातार पड़ोसी देशों पर दावा क्यों कर रहे हैं?
नई दिल्ली|
6 देशों पर ट्रंप की नजर
- ग्रीनलैंड: “यह अमेरिका के लिए रणनीतिक जरूरी है। हम इसे खरीद लेंगे या ले लेंगे।”
- पनामा कैनाल: “यह अमेरिका ने बनाया था, अब पनामा ने बहुत ज्यादा टैरिफ लगा दिया। हम इसे वापस ले सकते हैं।”
- कनाडा: “कनाडा 51वाँ राज्य बन सकता है। हम दोनों मिलकर मजबूत होंगे।”
- क्यूबा: “क्यूबा पर फिर से दबाव बढ़ाना होगा।”
- कोलंबिया: “कोलंबिया से ड्रग्स आ रहे हैं, हमें हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।”
- मैक्सिको: यहां पर भी ट्रंप ने ड्रग्स को संभावित हमले का आधार बनाया है।
ट्रंप ने पुरानी विदेश नीति की नई व्याख्या की
नए देशों पर दावे के पीछे के कारणों को समझिए
ऊर्जा सुरक्षा: वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर कब्जा करने के बाद ट्रंप अमेरिका को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। पनामा कैनाल पर कब्जा करने के पीछे उनकी नीयत अमेरिका के लिए तेल ट्रांसपोर्ट को सस्ता और सुरक्षित बनाने की है। चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना: चीन ने ग्रीनलैंड, पनामा और लैटिन अमेरिका में काफी बड़ी तादाद में निवेश किया है। ट्रंप इसे अमेरिकी हितों के खिलाफ मानते हैं और कहते हैं कि रूस और चीन उनके पड़ोसी नहीं हो सकते इसलिए उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए ये देश चाहिए।
चुनावी राजनीति: ट्रंप अपने वोटर बेस के सामने एक मजबूत अमेरिका का संदेश देना चाहते हैं, इस साल मध्यावधि (मिड-टर्म) चुनाव से पहले उनके ये कदम उन्हें अपने वोटर के बीच लोकप्रिय बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं।
रूस और चीन के साथ तनाव: ईरान और वेनेजुएला पर दबाव बढ़ाने के साथ ट्रंप, रूस-चीन के प्रभाव को कम करना चाहते हैं।
दुनिया गोल
ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर लगाया 25% एक्स्ट्रा टैरिफ, चीन पर सबसे ज्यादा असर, भारत पर कितना फर्क पड़ेगा ?
- ईरान में महंगाई के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन पूरे देश में फैला।
- 16 दिन से जारी प्रदर्शन में 648 मौतें, 5 दिन से इंटरनेट बंद।
- ट्रंप ने ईरान पर हमला करने की धमकी दी, फिर टैरिफ लगाया।
“तत्काल प्रभाव से ईरान से बिजनेस करने वाले किसी भी देश को अमेरिका के साथ सभी ट्रेड पर 25% टैरिफ देना होगा।”डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर ईरानी व्यापार पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की।
चीन पर सबसे ज्यादा असर: 90% ईरानी तेल का खरीददार
इस आदेश का सबसे बड़ा असर चीन पर होने जा रहा है क्योंकि वह ईरान के कुल तेल निर्यात का 90% से ज्यादा हिस्सा खरीदता है। इससे पहले ट्रंप वेनेजुएला पर नियंत्रण करके चीन को झटका दे चुके हैं क्योंकि चीन वेनेजुएला के तेल का बड़ा खरीददार था। 2025 में चीन ने ईरान से औसतन 1.3-1.5 मिलियन बैरल तेल प्रति दिन आयात किया, जो ब्रेंट क्रूड से $7-10 प्रति बैरल सस्ता है।
अमेरिका-चीन के बीच तनाव बढ़ेगा – पिछले साल अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ युद्ध देखने को मिला था जब ट्रंप ने चीन पर सौ फीसदी से ज्यादा टैरिफ की घोषणा की थी, इसकी प्रतिक्रिया में चीन ने भी अमेरिका के ऊपर टैरिफ लगा दिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत हुई और अभी चीन के ऊपर अमेरिका का करीब 34% टैरिफ है।
अमेरिकी दवाब में भारत पहले से कम ईरानी तेल खरीद रहा
चाबहार पोर्ट को लेकर दवाब बढ़ेगा – नए टैरिफ से ईरान स्थित चाबहार पोर्ट को लेकर भारत पर दवाब बढ़ सकता है, भारत ने इस प्रोजेक्ट पर $500 मिलियन का निवेश किया है। अमेरिका ने पिछले साल चाबहार पोर्ट के जरिए व्यापार किए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, हालांकि बाद में प्रतिबंध हटाने की अवधि छह महीने के लिए बढ़ा दी गई। अब देखना होगा कि अमेरिका आगे चाबहार पोर्ट को लेकर क्या रुख रखता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत को वैकल्पिक स्रोत सऊदी, UAE से तेल लेना पड़ेगा।
इन देशों पर भी असर : UAE, तुर्की, EU
- ईरानी तेल के बड़े खरीददार में चीन के बाद UAE और तुर्की आते हैं, जो करीब 3-6% तेल खरीदते हैं।
- यूरोपीय संघ (EU) से जुड़े जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स जैसे देश ईरान से कृषि से जुड़े सामान, खाद्य पदार्थों, इंडस्ट्रियल उत्पादों का व्यापार करती हैं, हालांकि पहले से ईरान में जारी प्रतिबंधों के चलते इसकी संख्या घटती रही है, फिर भी नए टैरिफ के चलते इन देशों के अमेरिकी उत्पाद महंगे हो जाएंगे।

ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान बहुत बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं जिनकी तस्वीरें इंटरनेट बैन के बावजूद ईरान से बाहर पहुंच रही हैं। (तस्वीर- साभार X)
ईरान में 16 दिनों से जारी प्रदर्शनों में अब तक 648 मौतें
ट्रंप ने कहा था- प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलीं तो हमला करेंगे

ईरान (प्रतीकात्मक फोटो)
पहले से खस्ता ईरानी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

अयातुल्ला अली ख़ामेनेई, ईरानी सर्वोच्च नेता
चरम पर पहुंचे प्रदर्शन के बीच वार्ता को राजी सरकार
12 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरानी अधिकारियों ने उनके सामने बातचीत की पेशकश रखी है। दूसरी ओर, ईरानी मीडिया की ओर से कहा गया है कि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता करना चाहती है, सरकार ने बातचीत की पेशकश की है।
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