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Electoral Roll SIR Phase-2: फॉर्म कैसे भरें, कौन-से दस्तावेज़ चलेंगे? कुछ राज्यों में BLO की मौत से तनाव

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SIR की प्रक्रिया 4 दिसंबर तक चलेगी।
SIR की प्रक्रिया 4 दिसंबर तक चलेगी।
  • 4 नवंबर से शुरू हुई SIR फॉर्म भरने की प्रक्रिया 4 दिसंबर को पूरी हो जाएगी।

नई दिल्ली |

वोटर लिस्ट को पूरी तरह अपडेट करने का काम (SIR) तेज गति से देश के 12 राज्यों व तीन केंद्र शासित प्रदेशों मे जारी है।

दूसरी ओर, SIR का काम कर रहे बूथ लेवल ऑफिसर की मौत व आत्महत्या के मामले सामने आने के बाद तनाव की स्थिति बन गई है। केरल में आज (17 नवंबर) को BLO ने कार्यबहिष्कार कर दिया है।

इस बीच चुनाव आयोग ने बताया है कि 16 नवंबर तक करीब 51 करोड़ मतदाताओं में से 49 करोड़ को BLO आंशिक रूप से भरे हुए फॉर्म दे चुके हैं। यानी कवरेज 97.52% हो चुका है। यह काम 4 नवंबर से शुरू हुआ था और 4 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

 

क्या है SIR

बता दें कि SIR का उद्देश्य, मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट करना है। जिसमें मृत या डुप्लीकेट नाम हटाया जाएगा, पता बदलने वालों को सही जगह दर्ज किया जाएगा और नए मतदाताओं को भी जोड़ा जाएगा। SIR की कटऑफ ईयर हर राज्य में अलग है, अधिकांश राज्यों में आखिरी बार SIR 2 दशक पहले हुआ था।

 

कौन-कौन से राज्यों में चल रहा है SIR?

छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्यप्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, अंडमान–निकोबार और लक्षद्वीप।
इनमें से पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में 2026 में चुनाव होने हैं, इसलिए SIR बेहद महत्वपूर्ण है।


 

:: ऑनलाइन SIR फॉर्म कैसे भरें?

SIR फॉर्म ऑनलाइन वोटर सर्विसेज़ पोर्टल या राज्य के CEO पोर्टल पर भरा जा सकता है।

प्रक्रिया:
– EPIC नंबर या उससे जुड़े मोबाइल नंबर से लॉग-इन
– नाम और पता चेक
– नई जानकारी एडिट
– सफेद बैकग्राउंड में फोटो अपलोड
– फॉर्म सबमिट करने के बाद स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं

जिनके पास EPIC नहीं है, उनके लिए नया फॉर्म उपलब्ध है।

कौन-कौन से दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे?

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये दस्तावेज मान्य हैं—
* पहचान पत्र या पेंशन आदेश
• पासपोर्ट
• जन्म प्रमाणपत्र
• बोर्ड/यूनिवर्सिटी की डिग्री
• स्थायी पता प्रमाण पत्र
• जाति प्रमाण पत्र
• आधार कार्ड (सिर्फ ID के रूप में)
• परिवार रजिस्टर
• भूमि/भवन आवंटन का प्रमाण

‘आधार कार्ड सिर्फ पहचान पत्र’

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा—

“आधार नागरिकता या जन्मतिथि का प्रमाण नहीं है, सिर्फ पहचान के तौर पर इस्तेमाल होगा।”

 

:: SIR प्रक्रिया कैसे चलती है?

BLO घर–घर जाकर दो फॉर्म देता है

  • एक फॉर्म भरकर उसे वापस करना होता है।
  • दूसरा फॉर्म मतदाता के पास रखना होता है।
  • BLO नाम, उम्र, पता और EPIC नंबर की पुष्टि करता है।

तीन बार हर मतदाता से संपर्क करेगा

  • अगर मतदाता घर पर नहीं मिला, तो BLO दोबारा और फिर तीसरी बार फॉलोअप करता है।

डेटा मिलान किया जाता है

  • EPIC, आधार, पुराने SIR और वोटर लिस्ट में नाम एक जैसा होना चाहिए।
  • कहीं भी फर्क मिलने पर फॉर्म दोबारा भरना पड़ता है।

9 दिसंबर को आएगी ड्राफ्ट लिस्ट

  • 4 दिसंबर को SIR में फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 9 दिसंबर को ड्रॉफ्ट लिस्ट जारी होगी।

फाइनल सूची अगले वर्ष जारी होगी

  • नाम जोड़ने-हटाने और सुधार के बाद चुनाव आयोग नई मतदाता सूची प्रकाशित करता है।

 

पहले चरण में बड़ा संकट—कई राज्यों में BLO की मौत, विरोध-प्रदर्शन शुरू

SIR की तेज़ गति और अचानक बढ़ा काम का बोझ कई राज्यों में BLO के ऊपर भारी पड़ रहा है।

केरल — 1 BLO की आत्महत्या

कन्नूर में BLO अनीश जॉर्ज (44) ने फांसी लगाकर जान दी। परिवार का आरोप—“SIR के काम का दबाव था, लगातार देर रात तक काम करना पड़ रहा था।”

राजस्थान — 1 BLO की आत्महत्या

जयपुर में BLO मुकेश जांगिड़ (48) ने ट्रेन के आगे छलांग लगाई।
सुसाइड नोट में लिखा— “अधिकारी काम का प्रेशर डाल रहे हैं, सस्पेंड करने की धमकी दे रहे हैं।”

पश्चिम बंगाल — BLO अस्पताल में भर्ती

परिजनों ने कहा—“SIR का काम समय पर पूरा करने का दबाव है।”

कुल मिलाकर 5 राज्यों में गंभीर घटनाएँ सामने आईं।

 

केरल में BLO ने हड़ताल की, SIR आगे बढ़ाने की मांग
– केरल में आज (17 नवंबर) BLO ने राज्यभर में काम का बहिष्कार कर दिया। यहां निकाय चुनाव के चलते BLO पहले से दवाब में हैं और चाहते हैं कि SIR का काम आगे बढ़ दिया जाए। यहां के NGO एसोसिएशन ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला।

 

सुप्रीम कोर्ट ने SIR याचिकाओं पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा

तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में SIR के विरोध में दाखिल की गई याचिकाओं की सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू कर दी है। इस मामले में चुनाव आयोग को 2 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा गया है। अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।

इस सुनवाई में सर्वोच्च अदालत जांचेगी, कि—

  • क्या BLO पर अत्यधिक दबाव डाला जा रहा है?
  • क्या SIR की समयसीमा व्यवहारिक है?
  • क्या आयोग को दिशानिर्देश बदलने चाहिए?

written by Mahak Arora (content writer)

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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बिहार : गाेपालगंज में बेटे ने 100 रुपये के लिए मां का गला रेता

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गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र उसरी बिनटोली में घटना की जानकारी देते मृतका के पति गणेश रावत। (गाेपालगंज संवाददाता )
गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र उसरी बिनटोली में घटना की जानकारी देते मृतका के पति गणेश रावत। (गाेपालगंज संवाददाता )
  • नशे में आया था आरोपी, रुपये न देने पर कर दी हत्या  
  • वारदात के बाद गुस्साए लोगों ने जमकर पीटा, गिरफ्तार
  • नशे का आदी है आरोपी और दो पत्नियां उसे छोड़ चुकीं

 

गोपालगंज | आलोक कुमार 

बिहार में शराबबंदी लागू करते हुए सरकार का मानना था कि इससे महिला हिंसा में कमी आएगी पर राज्य में हर रोज होने वाली घटनाएं बताती हैं कि न तो शराब बंदी ठीक से लागू है और न ही शराबबंदी अकेले घरेलू हिंसा रोकने में मददगार है।

दरअसल गोपालगंज जिले में नशे में घर पहुंचे एक जवान बेटे ने केवल 100 रुपये के लिए अपनी मां की गला रेतकर हत्या कर दी है। अपनी मां को मार डालने वाला आरोपी पकड़ लिया गया है, वह पहले भी हिंसा करता रहा है। गांव वालो का कहना है कि उसके इस व्यवहार के चलते ही उसकी दो शादियां हुईं पर एक भी रिश्ता नहीं चल पाया। अब बीते 22 फरवरी को भी इस व्यक्ति ने अपनी मां को मार डाला।

गांव वालो ने पीटकर पुलिस को सौंपा

आरोपी रामभरोस रावत। (गाेपालगंज संवाददाता )

आरोपी रामभरोसे रावत को जमकर हुई पिटाई के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया। (गाेपालगंज संवाददाता )

यह वारदात गाेपालगंज जिले की है, वहां के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र उसरी बिनटोली में रविवार शाम (22 Feb) को यह घटना हुई। हमले के बाद गुस्साए लोगों ने आरोपी को जमकर पीटा और पुलिस के हवाले किया। पुलिस ने आरोपी रामभरोसे रावत को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है। मृतका की पहचान सुमित्रा देवी (55) के रूप में हुई है।

वारदात के समय अकेली थी मां

मृतका के पति गणेश रावत ने बताया, उनका बेटा शराब पीकर घर आया था, उस समय घर पर उनकी पत्नी अकेली थी। जबकि वे घर के बाहर काम कर रहे थे। पिता का कहना है कि बेटा बार-बार सौ रूपये मांग रहा था जो उनकी पत्नी के पास नहीं थे। इस पर गुस्साए बेटे ने वहीं पर रखे धारदार हथियार से मां का गला रेत दिया। मौके पर पत्नी चीखीं तो आसपास के लोग जुटे। उनके बेटे ने मां को मारकर भागने की कोशिश की तब सबने पकड़कर उसको खूब पीटा और पुलिस को बुलाकर उन्हें सौंप दिया।

आरोपी से पूछताछ जारी, धारधार हथियार बरामद

घटना की जानकारी देते सदर एसडीपीओ 2 राजेश कुमार।  (गाेपालगंज संवाददाता )

घटना की जानकारी देते सदर एसडीपीओ 2 राजेश कुमार।  (गाेपालगंज संवाददाता )

इस मामले में सदर एसडीपीओ-2 राजेश कुमार ने बताया कि आरोपी रामभरोसे रावत को गिरफ्तार करके महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए मॉडल अस्पताल भेज दिया है। आरोपी घायल है इसलिए उसे भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, उससे पूछताछ की जा रही है, आगे जेल भेजा जाएगा।

 

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बिहार की सड़कों पर सुरक्षित पैदल चल सकेंगे: सरकार ने दिए बड़े निर्देश, जानिए क्या बदलेगा?

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By Heba Aisha - Own work, CC BY-SA 4.0, Link
बिहार की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर फुटपाथ निर्माण का काम शुरू होगा। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
  • सड़क सुरक्षा को लेकर बिहार सरकार का बड़ा कदम पर योजना स्पष्ट नहीं।

पटना | हमारे संवाददाता

बिहार सरकार ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार सुबह अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा कि राज्य की सड़कों पर बढ़ते वाहनों के बीच पैदल चलने वालों को सम्मान और सुविधा मिलेगी। अपनी घोषणा में मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य की सड़कों पर फुटपाथ, जेब्रा क्रॉसिंग व ऐसी सुविधायें बढ़ाई जाएंगी जिससे पैदल चलने वालोे की सुरक्षा सुनिश्चित हो। गौरतलब है कि बिहार में सड़कों पर पैदल चलने के लिए या तो फुटपाथ है ही नहीं, या फिर वे जगह-जगह टूटे या अतिक्रमण से घिरे हैं, जिससे राहगीरों को सड़क पर चलने को विवश होना पड़ता है और वे दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में यह घोषणा काफी अहम मानी जा रही है।

सभी बड़ी सड़कों पर ये बदलाव होंगे 

सरकार के ‘सात निश्चय-3’ (2025-2030) के सातवें निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ के तहत परिवहन विभाग को 5 बड़े निर्देश दिए गए हैं।

  • भीड़-भाड़ वाले शहरी और ग्रामीण इलाकों में जल्द फुटपाथ बनाए जाएंगे।
  • चिह्नित जगहों पर जेब्रा क्रॉसिंग मार्क की जाएगी।
  • व्यस्त स्थानों पर फुट ओवर ब्रिज (एस्केलेटर सहित) और अंडरपास का निर्माण होगा।
  • वाहन चालकों को पैदल यात्रियों के अधिकारों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • ग्रामीण-शहरी ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना-प्रवण जगहें) चिह्नित कर फुटपाथ बनाए जाएंगे और CCTV कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि दुर्घटनाओं का आकलन हो और कमी लाई जा सके।

बिहार में पैदल यात्रियों की मौतें आम

बिहार में पैदल यात्री की स्थिति सबसे दयनीय और असुरक्षित है। सड़क परिवहन व राज्यमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की 2022 रिपोर्ट के अनुसार, बिाहर में हर सौ सड़क दुर्घटनाओं में मौत का प्रतिशत सबसे ज्यादा 82.4 फीसदी है। यानी रोड एक्सीडेंट के दस पीड़ित में से सिर्फ दो लोगों की जान ही बच पाती है।

पैदल यात्रियों की मौतों की बात करें तो राष्ट्रीय स्तर पर 19.5% हैं, लेकिन बिहार जैसे राज्यों में यह अनुपात ज्यादा है। 2019-2023 में भारत में 1.5 लाख पैदल यात्रियों की मौत हुई, जिसमें बिहार का बड़ा हिस्सा है।

बिहार की सड़कों पर फुटपाथ का हाल

कई सड़कों पर फुटपाथ या तो नहीं हैं या घुसपैठ से अवरुद्ध हैं। ब्लैक स्पॉट्स पर CCTV या सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी से दुर्घटनाएं बढ़ती हैं। पटना में कुछ जगहों पर फुटपाथ (जैसे बेली रोड, JP गंगा पथ) और अंडरपास (पटना जंक्शन से मल्टी-मॉडल हब) हैं, लेकिन अन्य शहरों में सुविधाएं सीमित या निर्माणाधीन हैं।

नए कदमों से क्या लाभ हो सकता है?

  • सुरक्षित क्रॉसिंग और फुटपाथ से पैदल यात्रियों की दुर्घटनाएं 20-30% तक कम हो सकती हैं (राष्ट्रीय स्तर पर समान उपायों से देखा गया)।
  • ब्लैक स्पॉट्स पर CCTV से मॉनिटरिंग और तेज कार्रवाई संभव होगी।
  • वाहन चालकों का प्रशिक्षण संवेदनशीलता बढ़ाएगा, जिससे ओवर-स्पीडिंग और लेन अनुशासन में सुधार आएगा।
  • कुल मिलाकर, दैनिक जीवन आसान होगा, बुजुर्गों/बच्चों की सुरक्षा बढ़ेगी और राज्य की सड़क सुरक्षा रैंकिंग सुधरेगी।

निर्देश तो सराहनीय पर बजट का पता नहीं  

सरकार ने परिवहन विभाग को इसको लेकर तेजी से काम करने के निर्देश हैं, लेकिन स्पष्ट राशि का उल्लेख नहीं है। हालांकि राज्य बजट में सड़क विकास और सुरक्षा के लिए आवंटन बढ़ रहा है। पिछले वर्षों में राष्ट्रीय राज्यमार्ग व शहरी सड़कों पर हजारों करोड़ रुपये का खर्च हुआ है। माना जा रहा है कि यह  प्रोजेक्ट उसी से फंडेड होंगे। इसको लेकर विभाग जल्द ही कार्य योजना बनाएगा।

बता दें कि ये काम ‘सात निश्चय-3’ योजना के तहत होंगे, जिसे हाल ही में कैबिनेट ने मंजूरी दी है। योजना का फोकस ‘Ease of Living’ पर है, जिसमें सड़क सुरक्षा शामिल है।

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बिहार : भाजपा विधायक ने अपनी सरकार के शिक्षा विभाग पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, बोले- ₹2425 करोड़ का घोटाला हुआ

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हिसुआ विधायक अनिल सिंह के आरोप से शिक्षा विभाग के काम पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। (फाइल फोटो)
हिसुआ विधायक अनिल सिंह के आरोप से शिक्षा विभाग के काम पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। (फाइल फोटो)
  • हिसुआ विधायक अनिल सिंह के आरोपों से सदन में हंगामा मचा।
  • विधायक बोले- रखरखाव के नाम पर करोड़ो रुपये का घोटाला।

नवादा/पटना | अमन कुमार सिन्हा 

बिहार के भाजपा विधायक ने विधानसभा में NDA सरकार के शिक्षा विभाग के ऊपर बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। नवादा जिले की हिसुआ विधानसभा से विधायक अनिल सिंह ने शिक्षा विभाग में 2425 करोड़ रुपये की अनियमितता का बड़ा आरोप लगाकर जांच की मांग की। गौरतलब है कि NDA सरकार में भाजपा प्रमुख सहयोगी है, ऐसे में भाजपा विधायक का सवाल उठाना मायने रखता है।

भाजपा विधायक के साथ अन्य सांसदों ने भी शिक्षा मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। फिर आखिर में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को कहना पड़ा कि वे इस मामले की जांच करवाएंगे।

विधानसभा में बोलते शिक्षा मंत्री सुनील कुमार (credit - Facebook/Sunil Kumar)

विधानसभा में बोलते शिक्षा मंत्री सुनील कुमार (credit – Facebook/Sunil Kumar)

भाजपा विधायक अनिल सिंह ने सदन में कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा रखरखाव और अन्य मदों पर खर्च किए गए 2425 करोड़ रुपये में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि यह राशि निविदा के माध्यम से खर्च की गई है। उन्होंने शिक्षा मंत्री को चुनौती देते हुए इस मामले की पूरी तरह जांच कराने की मांग की।

विधायक ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के डीओ, डीपीओ स्थापना और संबंधित इंजीनियरों द्वारा राशि का दुरुपयोग किया गया है। अनिल सिंह ने विधानसभा में इस मामले की विस्तृत जांच के लिए एक कमेटी गठित करने की मांग की।

By Bihar Government - Bihar Government website, <a href="https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0" title="Creative Commons Attribution-Share Alike 4.0">CC BY-SA 4.0</a>, <a href="https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=83254005">Link</a>

बिहार विधानसभा

उन्होंने कहा कि भवन निर्माण के लिए शिक्षा विभाग को मिले 2425 करोड़ रुपये में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ है। इस मुद्दे पर सदन में खूब बहस हुई, जिसके बाद सभी विधायकों ने एक स्वर में शिक्षा विभाग के खिलाफ आवाज उठाई।

आखिर में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि जिलाधिकारी (DM) को जांच के आदेश दिए गए हैं और जांच से संबंधित सभी जानकारी विधायकों को भी उपलब्ध कराई जाएगी।

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