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ईरान में विद्रोह का 13वां दिन: अब तक 62 मौतें, पूरे देश में इंटरनेट बंद … आखिर क्यों बिगड़े हालात?

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ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन के चलते पूरे देश में इंटरनेट बंद कर दिया गया है। यह तस्वीर 8 जनवरी के प्रदर्शन की है। (साभार - X)
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन के चलते पूरे देश में इंटरनेट बंद कर दिया गया है। यह तस्वीर 8 जनवरी के प्रदर्शन की है। (साभार - X)
  • ईरान के 31 राज्यों के सौ से ज्यादा शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन फैल चुका है।

नई दिल्ली| 

ईरान में 13 दिन से लगातार जारी प्रदर्शनों ने खामनेई सरकार को बीते कुछ वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती दे दी है। ये प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब वेनेजुएला में ट्रंप ने राष्ट्रपति को अगवा कर लिया और अब वह ईरानी सरकार को धमकी दे रहा है कि अगर प्रदर्शनों को कुचला गया तो वह स्ट्राइक कर सकते हैं। प्रदर्शनों को भड़काने से रोकने के लिए सरकार ने सात साल बाद पूरे देेश में इंटरनेट बंद कर दिया है।

ईरान पहले ही संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के चलते भारी आर्थिक दवाब में है, जिसके चलते महंगाई बढ़ जाने से जनता नाराज है। ईरान में जारी प्रदर्शनों में अब तक 62 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,300 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रदर्शन भड़कने से रोकने के लिए ईरान में कई इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया गया है फिर भी प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

कहां से हुई शुरूआत : अचानक महंगाई बढ़ने से दुकानदारों ने हड़ताल की

ये विरोध प्रदर्शन राजधानी तेहरान के बाज़ारों में बढ़ती महंगाई के खिलाफ़ हड़ताल के रूप में शुरू हुआ जो पूरे देश में आंदोलन बन गया। महंगाई को लेकर आम लोगों की चिंता 13 दिन पहले चरम पर पहुंच गई क्योंकि खाना पकाने के तेल और चिकन जैसी बुनियादी वस्तुओं की कीमतें रातोंरात नाटकीय रूप से बढ़ गईं, और कुछ उत्पाद तो दुकानों से पूरी तरह गायब ही हो गए, जिससे दुकानदारों को झटका लगा।

केंद्रीय बैंक के आदेश ने गुस्सा बढ़ाया :

सीएनएन के मुताबिक, इस स्थिति को केंद्रीय बैंक के उस आदेश ने और बदतर बना दिया जिसमें कुछ आयातकों को बाज़ार के बाकी हिस्सों की तुलना में सस्ते अमेरिकी डॉलर प्राप्त करने की अनुमति देने वाले कार्यक्रम को समाप्त कर दिया गया था। जिसके कारण दुकानदारों ने कीमतें बढ़ा दीं और कुछ ने अपनी दुकानें बंद कर दीं, जिससे प्रदर्शनों की शुरुआत हुई।

सरकार समर्थक ही प्रदर्शन करने लगे :

ऐसी स्थितियों से परेशान होकर बाज़ारी समूह ने प्रदर्शन और हड़ताल शुरू कर दी, ये वही बाजारी समूह हैं जिन्हें पारंपरिक रूप से इस्लामी गणराज्य का समर्थक माना जाता है। ऐसे में अपनी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे इन दुकानदारों का गुस्सा बाकी लोगों के बीच भी फैलता चला गया।

सरकारी राशि से भी गुस्सा शांत नहीं हुआ

सरकार ने सुधारवादी कदम उठाते हुए प्रभावित लोगों को लगभग 7 डॉलर प्रति माह की नकद सहायता देना शुरू किया ताकि दबाव कम हो सके पर यह कदम भी अशांति को कम नहीं कर सका।


प्रदर्शनकारियों की ओर बंदूक ताने ईरानी सुरक्षा बल (साभार - X)

प्रदर्शनकारियों की ओर बंदूक ताने ईरानी सुरक्षा बल (साभार – X)

पूरे देश में फैला आंदोलन : सभी 31 राज्यों में प्रदर्शन, पूरे देश में इंटरनेट बंद  

  • अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, 9 जनवरी तक करीब 62 आम ईरानी मारे जा चुके हैं जिसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं।
  • पूरे देश में इंटरनेट बंद लागू हुए 24 घंटे से ज्यादा वक्त हो चुका है, ऐसा इससे पहले 2019 में ईरान में हुआ था। लेकिन प्रदर्शनकारी VPN और सैटेलाइट फोन से वीडियो भेज रहे हैं।
  • नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स ने 11 राज्यों के 51 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जिसमें नौ लोगों की उम्र 18 साल के कम बताई गई है।
  • सभी 31 राज्यों के सौ से ज्यादा शहरों में कई संगठन, यूनिवर्सिटी, बाजारों में प्रदर्शन और हड़तालें जारी हैं।
  • जिन्हें कुचलने के लिए ईरानी सुरक्षा बलों के आंसू गैस, लाठीचार्ज और लाइव फायरिंग करने की खबरें रिपोर्ट हो रही हैं।
  • पश्चिमी मीडिया के मुताबिक, तेहरान, इस्फहान, मशहद और तबरीज में सबसे ज्यादा हिंसा हुई। प्रदर्शनकारी “मौत मशहद” और “खामेनेई हत्यारा” जैसे नारे लगा रहे हैं।

ट्रंप बोले: ‘प्रदर्शनकारियों को मारा तो हम हमला करेंगे’

ट्रंप (सांकेतिक तस्वीर)

ट्रंप (सांकेतिक तस्वीर)

AFP के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 9 जनवरी को एक बार फिर चेतावनी दी कि वे सैन्य हमले का आदेश दे सकते हैं और प्रतिबंध भी लगा सकते हैं।

“ईरान गंभीर संकट में है, कुछ सप्ताह पहले सोचा नहीं जा सकता था कि आम लोग इस तरह सड़कों पर कब्जा कर लेंगे। ईरान के नेताओं को संदेश है कि बेहतर होगा कि वे इनपर गोलीबारी शुरू न करें क्योंकि तब हम भी गोलीबारी शुरू कर देंगे। इसका मतलब यह नहीं कि हम ज़मीन पर सेना भेजेेंगे, बल्कि हम बहुत ज़ोरदार चोट वहां पहुंचाएंगे, जहां उन्हें सबसे ज़्यादा दर्द हो।”

ईरान बोला- शांतिपूर्ण प्रदर्शन को अमेरिका ने भड़काया

ईरान सरकार के सर्वोच्च नेता व अन्य प्रमुख नेता। (फाइल फोटो, साभार विकिमीडिया)

ईरान सरकार के सर्वोच्च नेता व अन्य प्रमुख नेता। (फाइल फोटो, साभार विकिमीडिया)

रायटर्स के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के ईरानी राजदूत ने इस वैश्विक संस्था को लिखा है कि उनके देश में हो रहे ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनों’ को हिंसा में बदलने के लिए अमेरिका दोषी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने हस्तक्षेप किया और देश में अस्थिरता फैलाने वाली कार्रवाइयां करने की कोशिश की।

भारत ने क्या प्रतिक्रिया दी ?

भारत ने कहा है कि वह स्थिति पर नजदीकी से नजर रख रहा है और शांति और संवाद की अपील की है।


 

सरकार विरोधी प्रदर्शनों का क्या होगा असर?

हाल में ईरानी प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें ईरान की एक सड़क को एक प्रदर्शनकारी ने ‘ट्रंप स्ट्रीट’ नाम दे दिया। इस पर व्हाइट हाउस ने तक प्रतिक्रिया दी कि वे ईरानी लोगों की भावनाओं का आदर करते हैं। यह एक उदाहरण भर है, ये प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब ट्रंप ने कई देशों पर अपना दावा ठोका है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की धमकी से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। ईरान पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा है। प्रदर्शन अगर और फैले तो खामनेई सरकार को बड़ा झटका लग सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह 2019 ईंधन प्रदर्शनों से भी बड़ा आंदोलन बन सकता है। अभी तक कोई बड़ा नेतृत्व प्रदर्शन में नहीं दिखा, लेकिन युवा और महिलाएं सबसे आगे हैं। ईरान में अगले कुछ दिन निर्णायक होंगे।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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Middle East Tensions : पीएम मोदी ने इजरायल और यूएई के नेताओं से क्या बात की?

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भारतीय पीएम मोदी
  • पीएम मोदी ने दोनों राष्ट्राध्यक्षों से फोन वार्ता में तनाव कम करने पर जोर दिया है।

नई दिल्ली |

इजरायल व अमेरिकी की ओर से ईरान पर किए गए हमले के बाद मध्य पूर्व में बनी तनाव की स्थिति के बीच भारतीय पीएम ने रविवार रात (1 march) दो देशों के राष्ट्राध्यक्षों से वार्ता की है। इससे पहले भारत की ओर से इस तनाव को लेकर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है।

गौरतलब है कि इस हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर (रहवर) खामेनेई की हत्या को लेकर भारत की ओर से ईरानी प्रतिनिधि से कोई वार्ता नहीं की गई है। साथ ही, ये हमले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसराइल की दो दिन की यात्रा से लौटने के तुरंत बाद हुए हैं।

पीएम मोदी ने ट्वीट करके बताया कि उन्होंने इजरायली पीएम नेतन्याहू से बात करके क्षेत्रीय तनाव को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। साथ ही कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। पीएम मोदी ने भी दोहराया कि जल्द से जल्द संघर्ष रोकना ज़रूरी है।

यूएई पर हुए हमलोें की निंदा की

इजराय से फोन वार्ता से पहले पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से फोन पर बात की। उन्होंने ट्वीट करके लिखा कि मैंने यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और इन हमलों में हुई जानों के नुकसान पर शोक व्यक्त किया।

गौरतलब है कि ईरान ने यूएई स्थित दुनिया के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट में से एक दुबई एयरपोर्ट पर हमला किया है, जिसे लड़ाई शुरू होने के बाद ऑपरेशन के लिए बंद कर दिया गया है। इससे पहले दुबई के मशहूर लैंड आइलैंड पाम और एक लग्जरी होटल बुर्ज अल अरब पर हमला किया था।

पीएम मोदी ने यूएई राष्ट्रपति से कहा है कि भारत इस मुश्किल समय में यूएई के साथ एकजुट खड़ा है। उन्होंने यूएई में रहने वाले भारतीय समुदाय की देखभाल करने के लिए उनका धन्यवाद किया। साथ ही कहा कि भारत तनाव कम करने (De-escalation) , क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता का समर्थन करता है।

भारत ने हमलों पर संयम बरतने की अपील की

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार को अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए संयम बरतने की अपील की। MEA के बयान में कहा गया है –
“भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है। हम सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हैं।”
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Breaking News : अमेरिका-इजरायल हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत, सरकारी मीडिया ने पुष्टि की

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अयातुल्ला अली ख़ामेनेई

नई दिल्ली |

अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान की मीडिया तसनीम और फार्स समाचार एजेंसियों ने रविवार सुबह (1 march) इसकी पुष्टि की है।

इस हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू के मारे जाने की भी खबर है।

आयतुल्लाह खामेनेई ने 1989 में इस्लामी गणराज्य के संस्थापक इमाम खुमैनी की मौत के बाद से 37 साल तक ईरान और मुस्लिम उम्मत का नेतृत्व किया, अब उनकी हत्या के बाद ईरान में यह स्थान खाली हो गया है, देखना होगा कि उनका उत्तराधिकारी किसे बनाया जाता है। 

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत का दावा किया था।

बता दें कि इजरायल-अमेरिका की ओर से शनिवार को शुरू किए गए हवाई हमलों में ईरान के 31 में से 24 प्रांतों को निशाना बनाया गया, जिसमें राजधानी तेहरान भी शामिल है।

ईरानी सेना ने खामेनेई की शहादत के बाद “खतरनाक अभियान” की शुरुआत की घोषणा की है। सेना ने कहा कि यह हमला कुछ ही देर में शुरू होगा और क्षेत्र में कब्जे वाले क्षेत्रों और अमेरिकी आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाएगा।

ईरान में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक

उधर, इस्लामिक रिवॉल्यूशन गार्ड्स कोर (IRGC) ने इस्लामिक क्रांति के नेता खामनेई की शहादत पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा – इससे ईरानी राष्ट्र उनकी राह पर चलने के लिए और अधिक दृढ़ होगा।

ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की गई है।

ईरान में अब तक 200 से ज्यादा मौतें

ईरान के एक गैर-सरकारी मानवतावादी संगठन ‘ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी’ का कहना है कि इन हमलों में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 740 से ज्यादा लोग घायल हैं। ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की मौत हो गई और 45 छात्राएं घायल हैं।

ईरान का पलटवार- 9 देशों पर हमले

अमेरिका और इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने इजराइल समेत मिडिल-ईस्ट के 9 देशों को निशाना बनाया। ईरान ने इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागीं।  कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब व UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। इतना ही नहीं, ईरान ने UAE के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया। ईरान ने दुबई के पाम होटल एंड रिसोर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमला किया। इसके अलावा बहरीन में कई रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया।

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Critical Minerals Deal: भारत-ब्राजील के बीच हुआ समझौता, कितनी घटाएगा चीन पर निर्भरता?

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भारत दौरे पर आए ब्राजीली राष्ट्रपति लुला के साथ भारतीय पीएम मोदी। (Photo Credit - X/@narendramodi)
भारत दौरे पर आए ब्राजीली राष्ट्रपति लुला के साथ भारतीय पीएम मोदी। (Photo Credit - X/@narendramodi)
  • ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत दौरे पर महत्वपूर्ण समझौता किया।
  • महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा को लेकर हुआ एमओयू।
  • अभी इस क्षेत्र में भारत 95% खनिजों का आयात करता है।

नई दिल्ली |

भारत और ब्राजील ने महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals) और दुर्लभ मृदा (rare earths) को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है। इन प्राकृतिक संसाधनों की खरीद के लिए भारत की निर्भरता चीन पर बहुत ज्यादा है, ऐसे में इस समझौते (Memorandum of Understanding) के जरिए भारत को ब्राजील के रूप में नया आयातक मिलेगी जो उसकी चीन पर निर्भरता घटाने की रणनीति का हिस्सा है। यह समझौता ब्राजीली राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा के भारत दौरे के दौरान 21 फरवरी को हुआ।

आवश्यक खनिज से जुड़े MoU हस्ताक्षर से पहले हुई बैठक। (X/@narendramodi)

आवश्यक खनिज से जुड़े MoU हस्ताक्षर से पहले हुई बैठक। (X/@narendramodi)

इस समझौते से वैश्विक सप्लाई चेन (Global Supply Chain) को भी मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को विश्वास का प्रतिबिंब बताया है। जबकि राष्ट्रपति लुला (Lula da Silva) ने कहा कि इस समझौते से ब्राजील के खनिज भंडार के उपयोग में वृद्धि हो सकती है, जो अभी सिर्फ 30% ही उपयोग हो रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों का लक्ष्य अगले 5 साल में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का है।

गौरतलब है कि क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, नियोबियम, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ्स) का इस्तेमाल हरित ऊर्जा, EVs, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा के लिए जरूरी है। भारत अपनी खनिज जरूरत का 95% हिस्सा आयात करता है। दूसरी ओर, खनिज क्षेत्र में पूरी दुनिया के उत्पादन का 90 फीसदी से अधिक हिस्से का नियंत्रण चीन के पास है। ऐसे में इस MoU से भारत को वैकल्पिक स्रोत मिलेगा, जो भू-राजनीतिक जोखिम कम करेगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की खनिज खरीद में तत्काल बड़ी कमी नहीं आएगी लेकिन आने वाले 3 से 5 साल में चीन पर निर्भरता 20 से 30% तक घट सकती है।

भारत व ब्राजील के बीच हुआ समझौता।

MoU साइन होने के दौरान ब्राजीली राष्ट्रपति व भारतीय पीएम।

समझौते की डिटेल जानिए 

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी दस्तावेजों के अनुसार, ब्राजील के साथ हस्ताक्षर किया गया MoU, रेयर अर्थ मिनरल्स और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग पर केंद्रित है। इसकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं-

1- अनछुए खनिज खोजने में भारतीय कंपनियां मदद कर सकेंगी –   अनछुए खनिज भंडार का पता लगाने में (Exploration) भारतीय कंपनियां हिस्सा ले सकती हैं। लुला ने कहा कि भारत की तकनीकी विशेषज्ञता से ब्राजील के 70% अनछुए भंडारों का फायदा उठाया जा सकता है। ब्राजील के अभी तक उपयोग में नहीं लाए जा सके (Unused) खनिज भंडार – नीओबियम, लिथियम व आयरन (Iron Ore) से जुड़े हैं।

2- लौह अयस्क के लिए बनेगा स्पेशल इकोनॉमिक जोन – भारत-ब्राजील के संयुक्त उद्यम के जरिए लौह अयस्क का खनन बढ़ाया जाएगा। इसके लिए भारत में लौह अयस्क के सबसे बड़े उत्पादक NMDC (राष्ट्रीय खनिज विकास निगम), ब्राजील की Vale और अडानी गंगावरम पोर्ट के बीच एक त्रिपक्षीय MoU पर हस्ताक्षर हुए हैं, जो $500 मिलियन का है। इसके जरिए लौह अयस्क या आयरन ओर की ब्लेंडिंग फैसिलिटी के लिए स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाया जाएगा।

3- भारतीय कंपनियों को ब्राजील में खनन प्रोजेक्ट मिलेंगे – भारतीय निवेशकों को ब्राजील में खनन प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी मिलेगी। और ब्राजील को भारत में तकनीकी निवेश मिलेगा।


समझौते पर आगे की राह

भारत-ब्राजील के बीच का यह एक गैर-बाध्यकारी MoU है, जो व्यावहारिक सहयोग के लिए रोडमैप देता है। इससे आगे जॉइंट वर्किंग ग्रुप्स बनेंगे, जो मिनिस्ट्री ऑफ माइन्स और विदेश मंत्रालय के तहत काम करेंगे।

गौरतलब है कि 2023 में भारत ने ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिशन’ के तहत लक्ष्य रखा था कि वह साल 2030 तक इन आवश्यक खनिजों का 50% उत्पादन घरेलू स्तर पर करेगा।


By <a href="//commons.wikimedia.org/wiki/User:RCraig09" title="User:RCraig09">RCraig09</a> - <span class="int-own-work" lang="en">Own work</span>, <a href="https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0" title="Creative Commons Attribution-Share Alike 4.0">CC BY-SA 4.0</a>, <a href="https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=148115012">Link</a>

आवश्यक खनिज की जितनी ज्यादा आवश्यकता बढ़ती जा रही है, जलवायु परिवर्तन के चलते उतनी ही तेजी से इनके अस्तित्व पर भी संकट पैदा हो गया है। (साभार – विकिमीडिया)

भारत की चीन पर निर्भरता कितनी ?

  • भारत अपनी रेयर अर्थ्स की जरूरत का 95 से 100% हिस्सा चीन से खरीदता है, यानी पूरी तरह चीन पर निर्भर है।
  •  ग्रेफाइट का 80%, लिथियम का 60-70% हिस्सा चीन से खरीदा जाता है।
  • 2025 में भारत ने चीन से 1.5 अरब डॉलर के मिनरल्स आयात किए।

चीन के अलावा किससे होता है आयात

  • लिथियम का आयात ऑस्ट्रेलिया व चिली से।
  • कोबाल्ट का आयात कांगो व इंडोनेशिया से।
  • निकेल के लिए भारत चीन के अलावा इंडोनेशिया पर निर्भर।

भारत को इतने खनिज की आखिर क्या जरूरत?

क्रिटिकल मिनिरल या आवश्यक खनिज का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण, सोलर विंड एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा (मिसाइल्स) व फार्मा के क्षेत्र में होता है। बैटरी बनाने में 70% आवश्यक खनिज इस्तेमाल होता है।

1- इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण : 

भारत में बढ़ती बाइक-कारों की मांग, मंहगे होते पेट्रोल-डीजल व बढ़ते प्रदूषण के चलते सरकार ने 2030 तक कुल वाहनों का 30% इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए ज्यादा आवश्यक खनिज चाहिए। 

2- सोलर और विंड एनर्जी :

कोयले पर भारत की निर्भरता घटाने के लिए सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाना होगा। 2030 तक 500 गीगावाट (GW) नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता बनाने का लक्ष्य है। अभी इसकी दक्षता लगभग 200 GW है। 

3- इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र :

स्मार्टफोन, कंप्यूटर, LED लाइट, सेमीकंडक्टर चिप्स में रेयर अर्थ लगते हैं। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को $300 बिलियन तक ले जाना चाहता है। डिजिटल इंडिया, AI व 5G जैसे क्षेत्र बिना क्रिटिकल मिनरल्स के नहीं चल सकते। 

4- रक्षा (मिसाइल्स, एयरोस्पेस):

टाइटेनियम, टंगस्टन व रेयर अर्थ्स के जरिए मिसाइल, फाइटर जेट, रडार व सैटेलाइट बनते हैं। आत्मनिर्भर भारत और रक्षा उत्पादन बढ़ाने के लिए इन मिनरल्स की आवश्यकता है वरना विदेशी निर्भरता कम नहीं होगी।  

5- फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां):

भारत दुनिया का बड़ा जेनेरिक दवा उत्पादक है। कुछ रेयर अर्थ और मिनरल कैटेलिस्ट के रूप में दवा बनाने में मदद करते हैं। इससे प्रोसेसिंग स्पीड बढ़ती है और शुद्धिकरण में इस्तेमाल होते हैं। ये मिनरल सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण हैं।

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