प्रदेश रिपोर्ट
पति को सरेआम पीट-पीटकर मार डाला गया, न्याय न मिला तो पत्नी ने दो बच्चों संग खाया जहर
- रोहतास जिले का मामला, एक सप्ताह पहले पति की लिंचिंग हुई।
- जहर खाने के बाद पत्नी व उसके दो बच्चों की हालत गंभीर है।
- तीनों वाराणसी रेफर, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा।
सासाराम | अविनाश श्रीवास्तव
बिहार में एक युवक को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला, लिंचिंग की इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ लेकिन पुलिस अब तक सभी आरोपियों को नहीं पकड़ पाई है। इस घटना के छह दिन बाद युवक की पत्नी ने अपने छोटे बच्चों को जहर देकर खुद भी आत्महत्या करने की कोशिश की है।
इस दर्दनाक घटना में तीनों की हालत गंभीर है उन्हें यूपी के वाराणसी के लिए रेफर किया गया है।
यह घटना जिले के सासाराम मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बाराडीह गांव में सोमवार की देर शाम को हुई।
हमलावरों ने युवक को रस्सी से बांधकर सड़क पर घसीटते हुए लाठी-डंडों से पीटा और फिर अधमरा हो जाने पर गाड़ी से एक सूनसान इलाके पर फेंककर भाग गए।
रजिया बेगम ने बताया कि उनकी बेटी रेशमा खातून ने अपने बच्चों तैयबा खातून और हमजद के साथ घर के ही कमरे में जहर खा लिया। काफी देर तक जब रेशमा कमरे से बाहर नहीं निकलीं और बच्चों की आवाजें नहीं आईं तो सबको अनहोनी का शक हुआ।
बड़ी मशक्कत के बाद कमरे का दरवाजा खोला गया। परिजनों ने रेशमा को दोनों बच्चों के साथ अचेत पाया और उनके मुंह से झाग निकल रहे थे। इसके बाद रजिया बेगम अन्य परिजनों के साथ अपने बेटी व नाती-नातिन को इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचीं।
रेशमा की मां रजिया बेगम ने बताया कि उनकी बेटी अपने पति की बर्बरता से हुई हत्या के वीडियो देखने के बाद से गहरे सदमे में थी और किसी से ढंग से बातचीत नहीं कर रही थी।
उन्होंने पुलिस पर लापरवाही करने का आरोप लगाते हुए कहा कि
“अगर मेरे दामाद के हत्यारों के खिलाफ पुलिस समय पर कड़ी कार्रवाई करती तो शायद आज मेरी बेटी इस तरह बच्चों के साथ जिंदगी खत्म करने की कोशिश न करती।”
प्रदेश रिपोर्ट
नालंदा में बड़ा हादसा: शीतला अष्टमी पूजा के दौरान मंदिर में मची भगदड़, 9 महिलाओं की मौत
- बिहार के नालंदा जिले में शीतला मंदिर में भारी भीड़ के चलते भगदड़।
- भगदड़ से नौ लोगों की मौत हुई जिसमें 8 महिलाएं शामिल।
- पीएम मोदी व सीएम नीतीश कुमार ने राहत राशि की घोषणा की।
बिहार शरीफ | बिहार के नालंदा जिले की मघड़ा शीतला मंदिर में मंगलवार सुबह शीतला अष्टमी की पूजा के दौरान गर्भगृह में भगदड़ मचने से नौ श्रद्धालुओं की मौत हो गई जिसमें नौ महिलाएं हैं।
इस भगदड़ में कई श्रद्धालु जख्मी हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए मॉडल अस्पताल बिहार शरीफ भेजा गया है। माना जा रहा है कि मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती है।
गौरतलब है कि मंगलवार को चैत्र कृष्ण अष्टमी के मौके पर शीतला अष्टमी की विशेष पूजा के लिए मंदिर में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। और यहां मेला भी लगा हुआ था, जिसमें शामिल होने पटना व अन्य जिलों से भी श्रद्धालु पहुंचे थे।
हादसे पर पीएम मोदी व सीएम नीतीश कुमार ने शोक व्यक्त किया है।
घटना को लेकर नालंदा के एसपी भारत सोनी ने मीडिया से कहा कि मंदिर परिसर में अत्यधिक भीड़ और तेज गर्मी के कारण स्थिति बिगड़ गई। मंदिर की परंपरा के मुताबिक, महिलाएं स्नान के बाद मंदिर में प्रवेश कर रही थीं, तेज गर्मी से डी-हाइड्रेशन व घुटन होने से दम घुटने के चलते कुछ महिलाएं बेहोश होने लगीं जिससे भगदड़ मच गई और हालात बेकाबू हो गए।
कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से रिपोर्ट किया गया है कि गर्भगृह के संकरे रास्ते पर तेज गर्मी के बीच भीड़ बढ़ने के दौरान भगदड़ मची।
प्रत्यक्षदर्शियों ने प्रशासन को दोष दिया कि जब सबको पता है कि चैत्र मेले और शीतला अष्टमी के चलते यहां भीड़ होती है तो फिर उसके हिसाब से इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
भीड़ मैनेजमेंट को लेकर पूछे गए सवाल पर एसपी ने कहा है कि मंदिर में आयोजकों की ओर से पुलिस थाने को यह जानकारी नहीं दी गई थी कि इतनी अधिक संख्या में श्रद्धालु आ सकते हैं।
गौरतलब है कि देश में मंदिरों व मेलों में भीड़ मैनेजमेंट न होने के चलते भगदड़ की गई गंभीर घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय का ट्वीट
नालंदा में हुए इस हादसे पर PMO ने प्रधानमंत्री राहत कोष की ओर से मृतकों के परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपये व घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये राहत राशि देने की घोषणा की है।
दूसरी ओर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृतकों के परिजनों के लिए छह-छह लाख रुपये की राहत राशि की घोषणा की है। जिसमें 4 लाख रुपये आपदा प्रबंधन विभाग और 2 लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री कार्यालय का पत्र
विपक्षी दलों के नेता तेजस्वी यादव ने दुख जताकर राज्य सरकार से हाई-लेवल जांच कराने की मांग की है।

बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव का ट्वीट
मघड़ा शीतला मंदिर के परिसर में बीती 10 मार्च से चैत्र का मेला भी लगा हुआ था जिसका आज विशेष पूजा के बाद समापन होना था, इसलिए भी लोग बड़ी संख्या में अपने परिवार के साथ पहुंचे थे।
भगदड़ के बाद स्थिति काबू में करने के लिए पुलिस ने मंदिर व मंदिर परिसर में जुड़े मेले को बंद करा दिया है।
प्रदेश रिपोर्ट
बिहार में दो भ्रष्ट अफसरों से जुड़े 12 ठिकानों पर आर्थिक अपराध शाखा की रेड जारी
- SDPO (किशनगंज) व DRDO (सहरसा) ने आय से दो करोड़ ज्यादा संपत्ति जुटाई।
सहरसा | मुकेश कुमार
बिहार सरकार के दो भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा ने मंगलवार सुबह राज्य के 12 स्थानों पर दबिश दी है।
किशनगंज में तैनात अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPP) गौतम कुमार और सहरसा में तैनात DRDO के डायरेक्टर वैभव कुमार से जुड़े स्थानों पर रेड की जा रही है।
आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने सहरसा, मुजफ्फरपुर, पटना, पूर्णिया और किशनगंज समेत 6 स्थानों पर छापामारी जारी रखी है।
दोनों अफसरों के खिलाफ आय से अधिक आपत्ति अर्जित करने के मामले में केस दर्ज है। निगरानी शाखा ने अदालत से तलाशी का आदेश लेकर यह कार्रवाई की है।
जानकारी के मुताबिक, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (किशनगंज) गौतम कुमार ने 1 करोड़, 94 लाख, 9 हजार, 244 रुपए (₹1,09,49,244) की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
इनके पटना, पूर्णिया और किशनगंज जिले में अलग-अलग ठिकानों पर की जा रही है।
वहीं, DRDA (सहरसा) वैभव कुमार से जुड़े स्थानों पर छापामारी जारी है। वैभव कुमार पर 2 करोड़, 41 लाख, 14 हजार रूपये (₹2,41,14,000) की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में कार्रवाई की गई है।
वैभव कुमार के मुजफ्फरपुर और सहरसा के ठिकानों पर छापेमारी चल रही है।
चुनावी डायरी
विधान परिषद की सदस्यता छोड़ी पर CM पद क्यों नहीं, क्या है नीतीश कुमार की रणनीति?
नई दिल्ली | नीतीश कुमार ने सोमवार (30 march) को बिहार विधान परिषद से इस्तीफा देकर अपनी राज्यसभा सदस्यता बचा ली है।
लेकिन साथ ही उन्होंने एक और राजनीतिक दांव खेलते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया।
यानी भले वे अब बिहार विधानसभा के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं लेकिन नियम के हिसाब से अगले 6 महीने तक इस तरह भी मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं।
दरअसल, संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत कोई भी व्यक्ति बिना किसी सदन का सदस्य रहे 6 महीने तक मुख्यमंत्री रह सकता है।
हालांकि यह भी अटकलें हैं कि वे 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
बिहार की राजनीति में खरमास के समय राजनेताओं के शुभ काम न करने का चलन रहा है, खरमास इसी तारीख को खत्म हो रहा है।
उधर, नीतीश कुमार के इस्तीफा देते ही उनके करीबी मंत्री अशोक चौधरी भावुक हो गए। पूरे बिहार में जदयू कार्यकर्ताओं के बीच निराशा देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीएम पद न छोड़ना नीतीश कुमार की एक सोची-समझी रणनीति है। वे अपने समर्थकों को संदेश देना चाहते हैं कि वे अपनी शर्तों पर विदा हो रहे हैं।
उधर, जदयू से जुड़े बाहुबली नेता आनंद मोहन ने हाल में कहा कि नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के फैसले से कार्यकर्ताओं में भगदड़ है। साथ ही चेताया कि नीतीश को दिल्ली भेजने के इस षडयंत्र का नुकसान भाजपा को भी होगा।
बता दें कि नीतीश कुमार लंबे समय से विधान परिषद के सदस्य बनकर विधानसभा में पहुंचते रहे हैं। उन्होंने आखिरी बार 1985 में हरनौत सीट से विधान सभा का चुनाव लड़ा था। आगामी 10 अप्रैल को वे राज्यसभा सदस्य पद की शपथ लेंगे।
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