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रिपोर्टर की डायरी

पटना(बिहार) : पति-बेटे को खोने के बाद अकेली पड़ी महिला ने करोड़ों की संपत्ति बेच गांव को समर्पित किया भव्य मंदिर

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निर्माणाधीन मंदिर में अब तक दो करोड़ रुपया लग चुका है, चंद्रकांता अपने पति-बेटे की प्रतिमाएं भी लगवा रही हैं।
निर्माणाधीन मंदिर में अब तक दो करोड़ रुपया लग चुका है, चंद्रकांता अपने पति-बेटे की प्रतिमाएं भी लगवा रही हैं।
  • चंद्रकांता प्रियदर्शी का जीवन अकेली रह रहीं अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा है।

पटना/नालंदा | संजीव राज

अपने पति और बेटे को खोने के बाद एक महिला ने रिश्तेदारों को संपत्ति देकर उनके सहारे रहने के बजाय उसे समाज को समर्पित करने का कदम उठाया है। बिहार के पटना जिले में चंद्रकांता नाम की महिला के जीवन में भले किस्मत ने नाइंसाफी की हो, पर उन्होंने अपने दुखों को अपनी शक्ति बना लिया और समाज के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उन्होंने करोड़ों रुपये की जमीन बेचकर भव्य मंदिर बनवाया है जो अब निर्माण के अंतिम चरण में है।

उनका कहना है कि वे आगे गरीब बेटियों की शादी भी करेंगी। महिला अब तक मंदिर में दो करोड़ रुपये लगा चुकी हैं। साथ ही वे बेजुबान जानवरों विशेषकर कुत्तों की सेवा करती हैं। वे अपने अंदर के अकेलेपन को बयां नहीं कर सकतीं पर समाज के लिए कुछ करने का जज्बा उन्हें जीवित रखे हुए है।

पति की ब्रेन हेमरेज, बेटे की लिंचिंग से मौत

इस समाजसेवी महिला का नाम चंद्रकांता प्रियदर्शी है जो पटना के बेचछी ब्लॉक के बराह गांव की रहने वाली हैं। यह इलाका नालंदा जिले की सीमा पर पड़ता है। चंद्रकांता ने बताया कि उनके पति अरुण कुमार की मौत साल 2014 में ब्रेन हेमरेज से हो गई थी। इसके बाद वे अपने बेटे को अकेले पाल रही थीं, 2023 में बेटे सूर्य प्रियदर्शी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। तब उनका बेटा पढ़ाई कर रहा था। इस घटना ने चंद्रकांता को अंदर तक तोड़ दिया।

संपत्ति बेचकर गांव के लिए मंदिर बना रहीं

बेटे की हत्या हो जाने के बाद चंद्रकांता पूरी तरह अकेली हो गईं, उनके पास पति की 20 बीघा जमीन थी जिसमें से उन्होंने 13 बीघा बेचकर मंदिर बनवाना शुरू किया। इससे पहले पांच बीघा जमीन उन्होंने पति के इलाज में खर्च कर दी थी। अब उनके पास दो बीघा जमीन बची है, उनका कहना है कि अब तक मंदिर में दो करोड़ रुपया लग चुका है। अब भी जो रुपया लगेगा, वे लगाएंगी और आगे गरीब बेटियों की शादी भी करवाने की उनकी योजना है।

‘मंदिर के बहाने लोग पति-बेटे को याद रखेंगे’

उनका कहना है कि मंदिर बनवाने से उन्हें सुकून मिला कि भले उनके परिवार में अब कोई नाम लेने वाला न बचा हो पर इस मंदिर के सहारे लोग उनके पति-बेटे को याद रखेंगे। वे भावुक होकर कहती हैं कि मंदिर की भव्यता के चलते बहुत से नई उम्र के बच्चे इसे देखने आते हैं, इसका वीडियो बनाकर ले जाते हैं, वे जब उन्हें आंटी कहते हैं तो उन्हें बहुत खुशी होती है कि अभी भी कोई उन्हें मां जैसा मानने वाला है।

भव्य मंदिर में नौ प्रतिमाएं, पति-बेटे की भी मूर्ति

मंदिर निर्माण में राधा कृष्ण, सूर्य नारायण भगवान, दुर्गा जी का नौ रूप, पंचमुखी हनुमान, अर्द्धनारी शिवलिंग, शनिदेव भगवान की मूर्ति लगी है। साथ ही उन्होंने बताया कि मंदिर में पति और बच्चे की भी प्रतिमा भी लगवा रही हैं ताकि लोग उन्हें याद रखें क्योंकि उन्होंने पति-बेटे की स्मृति में ही मंदिर बनवाया है।

 

 

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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गोपालगंज : फाइलेरिया रोकने की दवा खाने के बाद स्कूली बच्चे बीमार

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  • गोपालगंज के हरखुआ माध्यमिक विद्यालय में 15 बच्चे बीमार पड़े।
  • 58 बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई, फिर तबीयत बिगड़ी।
  • सभी बच्चों को सदर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, सभी सुरक्षित।

गोपालगंज | आलोक कुमार 

बिहार के गोपालगंज में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाए जाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। स्कूल में अभिभावकों ने पहुंचकर हंगामा किया, हालांकि टीचरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। इस बीच हेडमास्टर ने एंबुलेंस बुलाकर 15 बीमार बच्चों को सदर अस्पताल में एडमिट कराया है। बता दें कि हाथी पांव या फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दो साल से बड़े बच्चों को यह दवा खिलाई जाती है, जो एकदम सुरक्षित है।

गोपालगंज में बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना शहर के हरखुआ गांव के एक माध्यमिक विद्यालय में घटी। हेडमास्टर कृष्ण मुरारी पांडे ने बताया कि स्कूल में 27 फरवरी को 58 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों ने मिड डे मील खाया। फिर दोपहर करीब 3:00 बजे आशा वर्करो  ने स्कूल आकर सभी 58 बच्चों को फाइलेरिया और एल्बेंडाजोल की गोलियां दीं।

प्रिंसिपल ने बताया कि दवा खाते ही कुछ बच्चों को अचानक नींद आने लगी और वे सोने लगे, जबकि कुछ को उल्टी हुई।

इस बारे में सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में गैस बनने की शिकायत हो सकती है, जिससे उल्टी या पेट दर्द महसूस होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार डर के कारण भी बच्चों को ऐसी समस्या होती है, इसमें किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।

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शराब तस्करी में जेल गए आरोपी की मौत, परिवार बोला- हत्या हुई, जेल प्रशासन ने हार्टअटैक बताया

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परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
  • बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की मौत होने से उठे सवाल।
  • शराब तस्करी के आरोप में जेल में 14 दिन से था बंदी।
  • जेल में अचानक हुई मौत को परिजनों ने बताया हत्या।

बक्सर | अमीषा कुमारी

बिहार में शराब तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की मौत बक्सर सेंट्रल जेल में हो गई है। बीती 12 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में उसके साथ मारपीट हुई, उसके शरीर पर लाल निशान हैं। परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए सदर अस्पताल में हंगामा किया, तब मौके पर पुलिस पहुंची।अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में जेल प्रशासन ने उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।

दरअसल 40 साल के राजेंद्र सिंह को बक्सर पुलिस पकड़कर ले गई थी और 12 फरवरी को उसे जेल भेजा गया था। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के विराट नगर के रहने वाले थे।  मृतक के बड़े भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के दौरान ही पुलिस ने राजेंद्र के साथ मारपीट की थी, जबकि वह बीमार चल रहा था। राजू का आरोप है कि “जेल भेजने के बाद भी भाई को पीटा गया। शरीर पर मौजूद लाल निशान साफ बता रहे हैं कि उसकी हत्या हुई है।

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बिहार में अब दारोगा-कोतवाल के खिलाफ केस चलाने से पहले सरकार की अनुमति जरूरी

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बिहार पुलिस
बिहार पुलिस (प्रतीकात्मक फोटो)
  • बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने जारी की अधिसूचना।
  • पुलिस कर्मियों पर मुकदमा चलाने के लिए लेनी होगी सरकार की अनुमति।
  • बिहार पुलिस के सभी पदाधिकारी व कर्मियों पर लागू होगा नियम।

पटना |

बिहार में अब दारोगा से लेकर इंस्पेक्टर तक के खिलाफ किसी मामले में तब ही केस दर्ज हो सकेगा जब उसकी इजाजत राज्य सरकार देगी।

बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने गुरुवार (26 feb) को इसको लेकर अधिसूचना जारी की है। यह नियम पहले DSP/ACP और ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू था, लेकिन अब राज्य सरकार ने यह सुरक्षा कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक बढ़ा दी है।  सरकार का तर्क है कि इस तरह बदले की भावना के चलते पुलिस पर कार्रवाई व उत्पीड़न को रोका जा सकेगा।

सरकार के इस महत्वपूर्ण सर्कुलर में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति (sanction) अनिवार्य होगी। यह शर्त उन कार्यों पर लागू होगी जो आधिकारिक ड्यूटी (official duty) के दौरान या उसके संबंध में किए गए हों।

 यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। जिसमें पहले “केंद्रीय सरकार” के स्थान पर अब स्पष्ट रूप से “राज्य सरकार” को यह अधिकार दिया गया है।

बिहार जैसे राज्य जहां पुलिस के ऊपर भ्रष्टाचार व गलत मुकदमें में फंसाने के मामले सामने आते रहे हैं, राज्य सरकार की ओर से दी जा रही इम्यूनिटी उनकी ताकत को और बढ़ा देगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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