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रिपोर्टर की डायरी

Impact Story : खबर छपी तो भीख मांग रहे विकलांग को सरकारी गाड़ी से अस्पताल ले गए अफसर, सर्टिफिकेट दिलाया…जल्द मिलेगी ट्राई साइकिल

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बोलते पन्ने के संवाददाता ने विकलांग रमेश का मुद्दा उठाया तो अफसर ने अगले दिन ही इस पर लिया ऐक्शन, हाथों से चलने को मजबूर नहीं होंगे अब रमेश।
बोलते पन्ने के संवाददाता ने विकलांग रमेश का मुद्दा उठाया तो अफसर ने अगले दिन ही इस पर लिया ऐक्शन, हाथों से चलने को मजबूर नहीं होंगे अब रमेश।

बोलते पन्ने की खबर का बड़ा असर

रोहतास | अविनाश श्रीवास्तव

सासाराम में हाथों के बल चलने को मजबूर रमेश कुमार के जीवन में 29 जनवरी नए रंग लेकर आया, बड़े अफसर उनसे मिलने वहां पहुंच गए, जिस इलाके में वो भीख मांगते हैं। अफसर ने अपनी सरकारी गाड़ी में आगे की सीट पर उन्हें बैठाया और अस्पताल ले गए। वहीं हाथों-हाथ रमेश का विकलांगता सर्टिफिकेट बन गया, फिर अफसर ने कहा कि अब जल्द ही उन्हें ट्राई साइकिल दिलाएंगे और दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ भी। इस दौरान रमेश के चेहरे की खुशी देखते ही बनी। बता दें कि एक दिन पहले इस संवाददाता ने रमेश के जीवन संघर्ष और विकलांगता कल्याण से जुड़े लाभ उन्हें न मिलने का मुद्दा उठाया था। इसके बाद जिम्मेदार विभाग के सहायक निदेशक ने तत्परता व मानवीय भाव दिखाते हुए पूरे सम्मान के साथ रमेश को उनका हक दिलाने की शुरूआत कर दी।

अफसर ने सदर अस्पताल ले जाकर दिलाया सर्टिफिकेट

जिला दिव्यांग सशक्तिकरण कोषांग के सहायक निदेशक आफताब करीम ने विकलांग रमेश से गुरुवार को मिलकर उनका हाल जाना और ससम्मान अपनी सरकारी गाड़ी की अगली सीट पर बैठाकर सीधे सदर अस्पताल ले गए। उन्होंने सदर अस्पताल में रमेश की जांच करवाई और मौके पर ही उसका दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करवाया।

दिलाया भरोसा- एक सप्ताह के अंदर ट्राई साइकिल

सहायक निदेशक आफताब करीम ने दिव्यांग रमेश को भरोसा दिलाया कि आगामी एक सप्ताह के भीतर विभाग की ओर से उसे ट्राई साइकिल सहित अन्य आवश्यक सहायक उपकरण दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरतमंद लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए विभाग पूरा प्रयास करता है लेकिन फिर भी कुछ लोग इससे वंचित रह जाते हैं। उन्होंने विकलांग रमेश के बारे में मीडिया रिपोर्ट के लिए भी आभार जताया।

 

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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रिपोर्टर की डायरी

पूर्णिया में आंधी-बारिश का कहर: किसानों की मक्का, आलू और मिर्च की फसलें पूरी तरह बर्बाद

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बारिश के बाद हवा चलने से फसल को काफी नुकसान हुआ है।
  • पूर्णिया में बेमौसम बारिश व आंधी से फसल बर्बाद।
  • करीब ढाई सौ एकड़ में लगी मक्का व सब्जियां नष्ट हुईं।
  • मौसम की बढ़ती अनिश्चितता ने किसानों पर बोझ बढ़ाया।

पूर्णिया | पंकज नायक

मार्च के मध्य में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ ने देशभर के मौसम का मिजाज बदल दिया है, इसका असर सबसे ज्यादा किसानों पर पड़ रहा है।

बिहार के पूर्णिया में मौसम के अचानक बदले स्वरूप ने किसानों पर भारी मार डाली है। पूर्णिया जिले में पिछले दिनों आई तेज आंधी और बेमौसम बारिश ने सैकड़ों एकड़ फसलें तबाह कर दीं।
सदभेली पंचायत के सर्रा बथनाहा गांव में किसानों की लाखों रुपये की फसल एक रात में नष्ट हो गई। पंचायत के उप मुखिया इमरान ने बताया कि करीब ढाई सौ एकड़ में लगी मक्का, आलू, मिर्च और हरी सब्जियों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।
सबसे ज्यादा नुकसान मक्का की फसल का हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रति बीघा औसतन 1 लाख रुपये की फसल थी, जिससे कुल नुकसान 5 करोड़ रुपये से अधिक का अनुमान है।
महिला किसान अंजुम आरा ने बताया कि उन्होंने 7 बीघा जमीन पर लाखों रुपये कर्ज लेकर मक्का लगाया था। यह फसल उनके परिवार की मुख्य आय का स्रोत थी। अब सब कुछ बर्बाद हो चुका है।
अंजुम के परिवार में 7 सदस्य हैं और वे पूरी तरह खेती पर निर्भर थे।
वार्ड नंबर 1 के किसान सलीमउद्दीन ने कहा कि उनके 6 एकड़ में लगी मक्का की फसल पूरी तरह उजड़ गई। उन्होंने कर्ज लेकर बीज और खाद खरीदा था।
अब कर्ज चुकाने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। इन जैसे सैकड़ों किसान अब सरकार से उचित मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
उप मुखिया इमरान ने बताया कि उन्होंने सलाहकार को बुलाकर पूरा नुकसान दिखाया है और रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई है।
यह घटना पूर्वी भारत में मौसम की अनिश्चितता और किसानों की बढ़ती परेशानियों को फिर से उजागर करती है। किसान अब मुआवजे और राहत की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

 

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चुनावी डायरी

बिहार : चुनावी हत्या केस में जेल से बाहर आए बाहुबली अनंत सिंह, आज करेंगे बड़ा रोड शो

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दुलारचंद यादव (इनसेट) हत्याकांड में चार महीने पहले जेल गए थे बाहुबली अनंत सिंह को मिली बेल। (फाइल फोटो)

पटना | पिछले साल नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हुई एक चुनावी हत्या के मुख्य आरोपी व बाहुबली विधायक अनंत सिंह बेऊर सेंट्रल जेल से बाहर आ गए।

जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे स्थानीय नेता दुलारचंद की हत्या के लिए उन्हें 1 नवंबर, 2025 को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था।

आज (24 march) अनंत सिंह अपने विधानसभा क्षेत्र मोकामा पहुंचकर करीब 50 किलोमीटर लंबा रोड शो करेंगे। यह रोड शो मोकामा से होते हुए लखीसराय के बड़हिया स्थित महारानी स्थान पहुंचेगा जहां वे पूजा-अर्चना करेंगे।

इससे पहले सोमवार (23 march) को अनंत सिंह बेऊर सेंट्रल जेल से बाहर आए तो उनके समर्थकों का बड़ा हुजूम स्वागत के लिए मौजूद था।

रिहाई के बाद देर शाम अनंत सिंह लैंड क्रूजर में सवार होकर करीब 50 गाड़ियों के काफिले के साथ सीधे पटना स्थित विधायक आवास के लिए रवाना हुए।

रिहाई के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि दुलारचंद हत्याकांड में उन्हें झूठा फंसाया गया है। दावा किया कि घटना के समय वे घटनास्थल से करीब 4 किलोमीटर दूर थे।

गौरतलब है कि 20 मार्च को पटना हाईकोर्ट से बाहुबली अनंत सिंह को हत्या मामले में जमानत मिली। हालांकि बॉन्ड पेपर नहीं भरे जाने के कारण 3 दिनों के बाद अनंत सिंह जेल से बाहर आएं।

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रिपोर्टर की डायरी

Bihar Board 12th Result: पिता हरियाणा में मजदूरी करके पढ़ा रहे, बेटा आर्ट्स में बिहार का तीसरा टॉपर बना

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अपनी मां व बधाई देने आए स्थानीय लोगों के साथ आदर्श
सहरसा | मुकेश कुमार सिंह
बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में सहरसा जिले के सिहोल गांव के मजदूर परिवार का बेटा आदर्श कुमार ने आर्ट्स स्ट्रीम में राज्य स्तर पर तीसरा स्थान हासिल किया है।
यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि आदर्श ने पूरी पढ़ाई अभाव भरे जीवन में सरकारी स्कूल से की है। उसने बिना ट्यूशन के गांव में रहकर ही इतना बड़ा मुकाम हासिल किया।
आदर्श के पिता रंजीत कुमार झा हरियाणा के सोनीपत में मजदूरी करते हैं। वे परिवार का भरण-पोषण इसी कमाई से करते हैं।
आदर्श की प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा 1 से 5 तक) दिल्ली में हुई, लेकिन बाद में पूरा परिवार गांव लौट आया।
यहां से आदर्श ने दुर्गा उच्च विद्यालय में मैट्रिक और इंटरमीडिएट (आर्ट्स) की पढ़ाई पूरी की। आदर्श बचपन से ही पढ़ाई में तेज और मेहनती रहा है।
उसकी मां बंटी देवी बताती हैं कि वह अक्सर कहता था, “पढ़कर हम शिक्षक बनेंगे।” परिवार में दो भाई हैं और आदर्श सबसे छोटा है।
बड़े भाई शिवम झा ने कहा, “हमारे लिए यह गर्व की बात है कि छोटा भाई इतना आगे बढ़ा। उसकी सफलता से पूरा गांव खुश है।”आदर्श ने कभी कोचिंग या ट्यूशन नहीं लिया।
न तो कोई प्राइवेट स्कूल की सुविधा थी और न ही आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति।
फिर भी उसने सिर्फ स्कूल की किताबों और अपनी लगन से यह मुकाम हासिल किया।
पूरे गांव में आज खुशी का माहौल है। लोग इसे “गांव की शान” कह रहे हैं।
यह सफलता उन लाखों ग्रामीण बच्चों के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी में भी बड़े सपने देखते हैं।
आदर्श की कहानी यह साबित करती है कि मेहनत और इच्छाशक्ति से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
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