रिपोर्टर की डायरी
रोहतास (बिहार): सरकारी स्कूलों के हेडमास्टरों को आवारा कुत्तों की गिनती करने की मिलेगी जिम्मेदारी
- रोेहतास जिले के नगर निगम ने सभी सरकारी स्कूलों के हेडमास्टरों को नोडल पदाधिकारी बनाए जाने का आदेश जारी किया।
सासाराम | अविनाश श्रीवास्तव
एक ओर भाजपा शासित दिल्ली सरकार साफ इनकार कर रही है कि आवारा कुत्तों की गिनती शिक्षकों से कराने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। इसको लेकर दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने बाक़ायदा बयान देकर स्पष्टीकरण दिया है। दूसरी ओर, भाजपा व अन्य सहयोगी दलों वाले NDA शासित बिहार के रोहतास जिले में सरकारी टीचरों को यह काम थमा दिया गया है। रोहतास जिले में नगर निगम की ओर से आदेश जारी हुआ है कि सभी सरकारी स्कूलों में हेडमास्टरों को नोडल अफसर बनाकर संबंधित इलाके में आवारा कुत्तों की गिनती पूरी की जाएगी।
सासाराम नगर आयुक्त विकास कुमार ने बताया कि शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर सरकार से प्राप्त निर्देशों के आलोक में यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में हमारी ओर से यह आदेश शिक्षा विभाग को जारी किया गया है। हालांकि इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कुछ कहने से इनकार किया है। वहीं, कुछ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों ने बताया कि अभी उन्हें लेटर नहीं मिला है, हालांकि इस मामले की उन्हें मीडिया के जरिए जानकारी मिली है। दूसरी ओर, आवारा कुत्तों की गिनती शिक्षकों से कराने के आदेश की खबर सामने आने के बाद जिलेभर के शिक्षकों में गुस्सा है।
15 दिन पहले नगर निगम से जारी हुआ आदेश
रोहतास जिले के नगर निगम के नगर आयुक्त की ओर से 15 दिसंबर 2025 को एक आदेश जिले के सभी सरकारी स्कूलों व प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को जारी किया गया है। जारी पत्र में सभी उच्च माध्यमिक विद्यालय, माध्यमिक विद्यालय, मध्य विद्यालय व प्राथमिक विद्यालय के प्राचार्य/ प्रधानाचार्य शामिल हैं। साथ ही इसकी कॉपी सभी ब्लॉक के शिक्षा पदाधिकारियों को भेजा जाना मार्क हुआ है।
हेड टीचर को बनाया जाए नोडल अधिकारी
नगर आयुक्त की ओर से जारी पत्र में सबसे नीचे प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्तर पर सभी स्कूलों में प्रधानाचार्य को नोडल पदाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त करने का निर्देश देना सुनिश्चित करें। यानी साफ है कि इस काम के लिए हर स्कूल से हेड टीचर को नोडल पदाधिकारी बनाया जाएगा। आदेश में कहा गया है कि आवारा कुत्तों/पशुओं के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के संदर्भ में नोडल पदाधिकारी बनाया जाना है।
बिहार हाईकोर्ट के आदेश पर होगी गिनती
रोहतास जिले के मुख्यालय सासाराम के नगर निगम की ओर से जारी हुए आदेश में बिहार हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया है, जो आवारा कुत्तों के चलते मासूम बच्चों के ऊपर हो रहे हमले के संदर्भ में एक स्वत: संज्ञान से जुड़ा मामला है। इस आदेश के आलोक में बिहार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने कुत्तों की गिनती करने के लिए कुछ निर्देश जारी किए हैं, जिसके तरह सासाराम नगर निगम ने जिला शिक्षा विभाग को कुत्तों की गिनती का आदेश जारी किया है।
बिहार सरकार की ओर से पिछले साल नवंबर में आवारा कुत्तों की गिनती को लेकर आदेश जारी हुआ।
क्या है बिहार सरकार का आदेश
गौरतलब है कि बिहार सरकार के आदेश में कहीं पर भी शिक्षकों को नोडल अफसर बनाकर कुत्तों की गिनती कराने की बात का उल्लेख नहीं है। बल्कि उस आदेश में बिहार के मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि सभी शिक्षा संस्थानों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड, खेल परिसरों से आवारा कुत्तों की पहचान की जाए। साथ ही, उनका टीकाकरण कराना सुनिश्चित हो। यह आदेश बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से पिछले साल 11 नवंबर को सभी नगर निगमों के लिए जारी हुआ है। हालांकि हैरानी की बात यह है कि बिहार में रोहतास को छोड़कर अभी किसी अन्य जिले में इसके अनुपालन में नोडल अफसर बनाने का काम शुरू नहीं हुआ है।
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गोपालगंज : फाइलेरिया रोकने की दवा खाने के बाद स्कूली बच्चे बीमार
- गोपालगंज के हरखुआ माध्यमिक विद्यालय में 15 बच्चे बीमार पड़े।
- 58 बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई, फिर तबीयत बिगड़ी।
- सभी बच्चों को सदर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, सभी सुरक्षित।
गोपालगंज | आलोक कुमार
बिहार के गोपालगंज में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाए जाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। स्कूल में अभिभावकों ने पहुंचकर हंगामा किया, हालांकि टीचरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। इस बीच हेडमास्टर ने एंबुलेंस बुलाकर 15 बीमार बच्चों को सदर अस्पताल में एडमिट कराया है। बता दें कि हाथी पांव या फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दो साल से बड़े बच्चों को यह दवा खिलाई जाती है, जो एकदम सुरक्षित है।
गोपालगंज में बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना शहर के हरखुआ गांव के एक माध्यमिक विद्यालय में घटी। हेडमास्टर कृष्ण मुरारी पांडे ने बताया कि स्कूल में 27 फरवरी को 58 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों ने मिड डे मील खाया। फिर दोपहर करीब 3:00 बजे आशा वर्करो ने स्कूल आकर सभी 58 बच्चों को फाइलेरिया और एल्बेंडाजोल की गोलियां दीं।
प्रिंसिपल ने बताया कि दवा खाते ही कुछ बच्चों को अचानक नींद आने लगी और वे सोने लगे, जबकि कुछ को उल्टी हुई।
इस बारे में सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में गैस बनने की शिकायत हो सकती है, जिससे उल्टी या पेट दर्द महसूस होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार डर के कारण भी बच्चों को ऐसी समस्या होती है, इसमें किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।
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शराब तस्करी में जेल गए आरोपी की मौत, परिवार बोला- हत्या हुई, जेल प्रशासन ने हार्टअटैक बताया
- बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की मौत होने से उठे सवाल।
- शराब तस्करी के आरोप में जेल में 14 दिन से था बंदी।
- जेल में अचानक हुई मौत को परिजनों ने बताया हत्या।
बक्सर | अमीषा कुमारी
बिहार में शराब तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की मौत बक्सर सेंट्रल जेल में हो गई है। बीती 12 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में उसके साथ मारपीट हुई, उसके शरीर पर लाल निशान हैं। परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए सदर अस्पताल में हंगामा किया, तब मौके पर पुलिस पहुंची।अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में जेल प्रशासन ने उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।
दरअसल 40 साल के राजेंद्र सिंह को बक्सर पुलिस पकड़कर ले गई थी और 12 फरवरी को उसे जेल भेजा गया था। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के विराट नगर के रहने वाले थे। मृतक के बड़े भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के दौरान ही पुलिस ने राजेंद्र के साथ मारपीट की थी, जबकि वह बीमार चल रहा था। राजू का आरोप है कि “जेल भेजने के बाद भी भाई को पीटा गया। शरीर पर मौजूद लाल निशान साफ बता रहे हैं कि उसकी हत्या हुई है।
राजू ने बताया कि 27 फरवरी की सुबह करीब 11 बजे जेल प्रशासन की ओर से कॉल आया कि राजेंद्र की तबीयत बिगड़ गई है और वे अस्पताल पहुंच जाएं। लेकिन जब वे लोग सदर अस्पताल पहुंचे तो एक्स-रे रूम के बाहर स्ट्रेचर पर मृत अवस्था में राजेंद्र मिले। वहां कोई मौजूद नहीं था। इसके बाद परिजनों ने हंगामा किया और मौके पर पुलिस पहुंची।
मृतक राजेंद्र पेशे से पेंटर थे और उनके दो छोटे बच्चे हैं। अचानक हुई इस मौत ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। वहीं, यह घटना बिहार में शराबबंदी लागू कराने के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। साथ ही, जेल में बंदी की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन पर भी सवाल खड़ा होता है। मृतक के भाई ने बताया कि 25 फरवरी को वह अपने भाई से मिलने जेल गए थे, तब उसे ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी जिसके चलते उसकी अचानक मौत हो सकती है।
बक्सर सेंट्रल जेल के अधीक्षक ज्ञानित गौरव ने परिजनों के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मौत हार्ट अटैक से प्रतीत होती है। हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इसका सही कारण पता लग सकेगा।
बक्सर सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में तैनात डॉक्टर अमित कुमार ने पुष्टि की कि कैदी को अस्पताल लाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। वहीं, नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने सदर अस्पताल में मीडिया से कहा कि अगर कहीं कोई लापरवाही पाई जाती है तो उस पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।”
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बिहार में अब दारोगा-कोतवाल के खिलाफ केस चलाने से पहले सरकार की अनुमति जरूरी
- बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने जारी की अधिसूचना।
- पुलिस कर्मियों पर मुकदमा चलाने के लिए लेनी होगी सरकार की अनुमति।
- बिहार पुलिस के सभी पदाधिकारी व कर्मियों पर लागू होगा नियम।
पटना |
बिहार में अब दारोगा से लेकर इंस्पेक्टर तक के खिलाफ किसी मामले में तब ही केस दर्ज हो सकेगा जब उसकी इजाजत राज्य सरकार देगी।
बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने गुरुवार (26 feb) को इसको लेकर अधिसूचना जारी की है। यह नियम पहले DSP/ACP और ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू था, लेकिन अब राज्य सरकार ने यह सुरक्षा कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक बढ़ा दी है। सरकार का तर्क है कि इस तरह बदले की भावना के चलते पुलिस पर कार्रवाई व उत्पीड़न को रोका जा सकेगा।
सरकार के इस महत्वपूर्ण सर्कुलर में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति (sanction) अनिवार्य होगी। यह शर्त उन कार्यों पर लागू होगी जो आधिकारिक ड्यूटी (official duty) के दौरान या उसके संबंध में किए गए हों।
यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। जिसमें पहले “केंद्रीय सरकार” के स्थान पर अब स्पष्ट रूप से “राज्य सरकार” को यह अधिकार दिया गया है।
बिहार जैसे राज्य जहां पुलिस के ऊपर भ्रष्टाचार व गलत मुकदमें में फंसाने के मामले सामने आते रहे हैं, राज्य सरकार की ओर से दी जा रही इम्यूनिटी उनकी ताकत को और बढ़ा देगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
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