रिपोर्टर की डायरी
रोहतास(बिहार) : धीमी धान खरीद और चुनावी राजनीति से धान किसान परेशान
- जिले में धान की अच्छी पैदावार हुई पर अब तक सिर्फ 26% धान की खरीद ही प्रशासन कर सका है।
सासाराम | अविनाश श्रीवास्तव
बिहार में धान खरीद का सीजन है और रोहतास जिले में धान खरीद के लक्ष्य (Paddy Procurement Target) को घटा दिए जाने के धान किसान परेशान हैं कि बहुतायत में पैदा उनकी फसल का अब क्या होगा। इस समस्या के साथ ही उनकी एक बड़ी परेशानी जिला पंचायत स्तर पर धान की खरीद में भेदभाव बरता जाना है।
रोहतास जिले के कुछ धान किसानों (Paddy Farmers) का आरोप है कि धान खरीद में पैक्स अध्यक्ष चुनावी राजनीति के हिसाब से भेदभाव कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वोट की राजनीति अगर धान की खरीद में चलेगी तो हम गरीब किसान कैसे गुजर बसर कर पाएंगे?
विक्रमगंज ब्लॉक के चांप गांव के किसान दामोदर सिंह का कहना है कि हम दस बीघा में धान उगाए हैं, पैक्स अध्यक्ष (PACS Chairman) हमारा धान नहीं खरीद रहे हैं। वो हमसे बात ही नहीं कर रहे हैं और पूछते हैं कि क्या ये लोग (किसान) हमको वोट दिए हैं? दामोदर सिंह ने यह भी कहा कि सहकारिता पदाधिकारी अगर दावा कर रहे हैं कि सब जगह ठीक से धान खरीदारी हो रही है तो उन्हें यहां आकर खेत-खलिहान देखना चाहिए कि कितने किसानों का धान खरीदा गया है।
क्या बोले सहकारिता पदाधिकारी
इस मामले पर रोहतास के जिला सहकारिता पदाधिकारी (District Cooperative Officer) नयन प्रकाश ने कहा कि अगर किसी किसान को समस्या है तो वे हमारे हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
अब तक सिर्फ 26% धान खरीदा
इस साल रोहतास जिले को 3 लाख 14 हजार मेट्रिक टन धान खरीद का टारगेट मिला है। जिला सहकारिता पदाधिकारी नयन प्रकाश के मुताबिक अब तक 26 प्रतिशत धान की खरीद 11 हजार रजिस्टर्ड धान किसानों से की जा चुकी है, धान खरीद के लिए पूरे जिले में 55 हजार किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके लिए 240 क्रय या बिक्री केंद्र बनाए गए हैं।
धीमी गति से खरीद, फरवरी अंत तक कैसे पूरी होगी?
किसानों का कहना है कि अब तक सिर्फ 26% धान खरीद हुई है, धान खरीद के लिए फरवरी अंत तक की समय सीमा रखी गई है। ऐसे में सौ प्रतिशत खरीद कैसे हो पाएगी। किसानों का कहना है कि क्रय केंद्रों पर खरीद की गति को बढ़ाया जाए। साथ ही उनकी मांग है कि जिले के धान खरीद के टारगेट को भी बढ़ाया जाए ताकि किसान को आम बाजार में कम दाम पर धान को न बेचना पड़े।

