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रिपोर्टर की डायरी

रोहतास (बिहार) : मनरेगा की जगह आए G-RAM-G कानून के नाम पर होने लगा घोटाला

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By Mulkh Singh - Own work, CC BY-SA 4.0, https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=128850615
मनरेगा की जगह आए नए रोजगार गारंटी कानून के बाद फर्जी तरीके से रुपया निकालना शुरू हो गया है।
  • सासाराम प्रखंड की करसेरुआ पंचायत में फर्जी तरीके से ऑनलाइन हाजिरी लगवाई जा रही।
  • बोला जा रहा- मनरेगा बंद हो गया, विभाग के कहने पर इसका रुपया निकाला जा रहा है।
  • प्रखंड कार्यालय पदाधिकारी व पंचायत रोजगार सेवक मिलकर कर रहे घोटाला।

 

रोहतास | अविनाश श्रीवास्तव

मनरेगा को हटाकर बनाए गए नए कानून VBG-RAM-G ले आई है, जिनसे योजना से जुड़े कर्मचारियों को घोटाला करने का नया उपाय दे दिया है। बिहार के रोहतास जिले में एक मामला सामने आया है, मनरेगा बंद होने के नाम पर फर्जी ऑनलाइन हाजिरी लगाकर मजदूरों के नाम पर पेमेंट निकाला जा रहा है। इस मामले में सासाराम ब्लॉक के ग्रामीणों ने डीएम से कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में आरोपी पदाधिकारी का पक्ष सामने नहीं आया है।

मनरेगा बंद होने के नाम पर लोगों को बहका रहे

यह पूरा मामला रोहतास जिले के सदर प्रखंड सासाराम से जुड़ा है। यहां की ग्राम पंचायत करसेरुआ के आम लोगोें को बुलाकर ऑनलाइन हाजिरी लगवाई जा रही है, जिसमें सासाराम के प्रखंड कार्यालय पदाधिकारी व पंचायत रोजगार सेवक मिले हुए हैं। आरोप है कि आम लोगों को निर्माण साइट पर बुलाकर फोटो खिंचवाते हुए समझाया जा रहा है कि “ऐसा मनरेगा कार्यालय के कहने पर हो रहा है क्योंकि यह योजना बंद होकर VBG-RAM-G हो चुकी है। अब किसी तरह इसका रुपया निकालकर योजना को बंद करना है।”

आवेदन में बताया गया है कि किस तरह मनरेगा बंद होने के नाम पर ग्रामीणों को बहकाकर फर्जी तरीके से ऑनलाइन हाजिरी लगवाई जा रही है।

आवेदन में बताया गया है कि किस तरह मनरेगा बंद होने के नाम पर ग्रामीणों को बहकाकर फर्जी तरीके से ऑनलाइन हाजिरी लगवाई जा रही है।

कुसुढ़ी गांव के जॉब कार्ड, करसेरुआ के लोगों की हाजिरी

करसेरूआ गांव के शिकायतकर्ता धर्मेंद्र पासवान ने डीएम से शिकायत में कहा है कि इस योजना के मास्टर रोल में ग्राम कुसुढ़ी के लोगों के जॉब कार्ड हैं लेकिन जिन्हें बुलाकर ऑनलाइन हाजिरी करायी जा रही है, वे सभी करसेरुआ पंचायत के आम महिला-पुरुष हैं।

शिकायतकर्ता धर्मेंद्र पासवान ने इस मामले की शिकायत डीएम, उपविकास आयुक्त, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी से की है।

शिकायतकर्ता धर्मेंद्र पासवान ने इस मामले की शिकायत डीएम, उपविकास आयुक्त, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी से की है।

शिकायतकर्ता ने दो जनवरी से नौ जनवरी के बीच के मास्टर रोल और इस दौरान लगाई गई ऑनलाइन हाजिरी की डिटेल भी डीएम को सौंपी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि अगर जॉब कार्ड धारकों के फोटो से ऑनलाइन हाजिरी के फोटो का मिलान कर लिया जाए, तब भी साफ हो जाएगा कि किस तरह सरकारी रुपये का गवन किया जा रहा है।

सिर्फ कागजों पर काम, नहीं मिल रही गारंटेड मजदूरी

इस मामले ने एक बार फिर उस चिंता को सामने ला दिया है कि मनरेगा में भले सौ दिन के काम की गारंटी मिल रही थी पर जमीन पर मजदूरों को गारंटी के आधे दिनों का काम तक नहीं मिलता। अब नए कानून VBG-RAM-G में 125 दिनों के काम की गारंटी केंद्र सरकार दे रही है, पर जमीन पर इस योजना को चलाने वाले अभी से घपला करने लगे हैं, ऐसे में आम मजदूर नए कानून से भला क्या उम्मीद कर सकते हैं।

 

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

रिपोर्टर की डायरी

गोपालगंज : फाइलेरिया रोकने की दवा खाने के बाद स्कूली बच्चे बीमार

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  • गोपालगंज के हरखुआ माध्यमिक विद्यालय में 15 बच्चे बीमार पड़े।
  • 58 बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई, फिर तबीयत बिगड़ी।
  • सभी बच्चों को सदर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, सभी सुरक्षित।

गोपालगंज | आलोक कुमार 

बिहार के गोपालगंज में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाए जाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। स्कूल में अभिभावकों ने पहुंचकर हंगामा किया, हालांकि टीचरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। इस बीच हेडमास्टर ने एंबुलेंस बुलाकर 15 बीमार बच्चों को सदर अस्पताल में एडमिट कराया है। बता दें कि हाथी पांव या फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दो साल से बड़े बच्चों को यह दवा खिलाई जाती है, जो एकदम सुरक्षित है।

गोपालगंज में बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना शहर के हरखुआ गांव के एक माध्यमिक विद्यालय में घटी। हेडमास्टर कृष्ण मुरारी पांडे ने बताया कि स्कूल में 27 फरवरी को 58 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों ने मिड डे मील खाया। फिर दोपहर करीब 3:00 बजे आशा वर्करो  ने स्कूल आकर सभी 58 बच्चों को फाइलेरिया और एल्बेंडाजोल की गोलियां दीं।

प्रिंसिपल ने बताया कि दवा खाते ही कुछ बच्चों को अचानक नींद आने लगी और वे सोने लगे, जबकि कुछ को उल्टी हुई।

इस बारे में सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में गैस बनने की शिकायत हो सकती है, जिससे उल्टी या पेट दर्द महसूस होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार डर के कारण भी बच्चों को ऐसी समस्या होती है, इसमें किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।

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शराब तस्करी में जेल गए आरोपी की मौत, परिवार बोला- हत्या हुई, जेल प्रशासन ने हार्टअटैक बताया

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परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
  • बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की मौत होने से उठे सवाल।
  • शराब तस्करी के आरोप में जेल में 14 दिन से था बंदी।
  • जेल में अचानक हुई मौत को परिजनों ने बताया हत्या।

बक्सर | अमीषा कुमारी

बिहार में शराब तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की मौत बक्सर सेंट्रल जेल में हो गई है। बीती 12 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में उसके साथ मारपीट हुई, उसके शरीर पर लाल निशान हैं। परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए सदर अस्पताल में हंगामा किया, तब मौके पर पुलिस पहुंची।अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में जेल प्रशासन ने उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।

दरअसल 40 साल के राजेंद्र सिंह को बक्सर पुलिस पकड़कर ले गई थी और 12 फरवरी को उसे जेल भेजा गया था। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के विराट नगर के रहने वाले थे।  मृतक के बड़े भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के दौरान ही पुलिस ने राजेंद्र के साथ मारपीट की थी, जबकि वह बीमार चल रहा था। राजू का आरोप है कि “जेल भेजने के बाद भी भाई को पीटा गया। शरीर पर मौजूद लाल निशान साफ बता रहे हैं कि उसकी हत्या हुई है।

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रिपोर्टर की डायरी

बिहार में अब दारोगा-कोतवाल के खिलाफ केस चलाने से पहले सरकार की अनुमति जरूरी

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बिहार पुलिस
बिहार पुलिस (प्रतीकात्मक फोटो)
  • बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने जारी की अधिसूचना।
  • पुलिस कर्मियों पर मुकदमा चलाने के लिए लेनी होगी सरकार की अनुमति।
  • बिहार पुलिस के सभी पदाधिकारी व कर्मियों पर लागू होगा नियम।

पटना |

बिहार में अब दारोगा से लेकर इंस्पेक्टर तक के खिलाफ किसी मामले में तब ही केस दर्ज हो सकेगा जब उसकी इजाजत राज्य सरकार देगी।

बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने गुरुवार (26 feb) को इसको लेकर अधिसूचना जारी की है। यह नियम पहले DSP/ACP और ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू था, लेकिन अब राज्य सरकार ने यह सुरक्षा कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक बढ़ा दी है।  सरकार का तर्क है कि इस तरह बदले की भावना के चलते पुलिस पर कार्रवाई व उत्पीड़न को रोका जा सकेगा।

सरकार के इस महत्वपूर्ण सर्कुलर में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति (sanction) अनिवार्य होगी। यह शर्त उन कार्यों पर लागू होगी जो आधिकारिक ड्यूटी (official duty) के दौरान या उसके संबंध में किए गए हों।

 यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। जिसमें पहले “केंद्रीय सरकार” के स्थान पर अब स्पष्ट रूप से “राज्य सरकार” को यह अधिकार दिया गया है।

बिहार जैसे राज्य जहां पुलिस के ऊपर भ्रष्टाचार व गलत मुकदमें में फंसाने के मामले सामने आते रहे हैं, राज्य सरकार की ओर से दी जा रही इम्यूनिटी उनकी ताकत को और बढ़ा देगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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