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रूस में एक सैन्य विमान विमान क्रैश होने से 29 लोगों की मौत

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By Igor Dvurekov - http://russianplanes.net/id43446, CC BY-SA 3.0, Link
An-26 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान (फाइल फोटो - विकिमीडिया)

नई दिल्ली | रूस का एक सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे उसमें सवार 29 लोगों की मौत हो गई।

रूसी रक्षा मंत्रालय के हवाले से रूसी समाचार एजेंसी TASS (TASS News Russia) ने यह खबर बुधवार सुबह दी है।

ट्रांसपोर्ट विमान में 6 क्रू सदस्य और 23 यात्री सवार थे। सभी की मौत की पुष्टि हुई है।

घटना को लेकर रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक जांच टीम गठित करने का आदेश दिया है।

बताया गया है कि क्रीमिया के ऊपर उड़ान भर रहे मिलिट्री विमान एंटोनोव-26 का संपर्क टूट गया।

लंबी कोशिश के बाद खोजी व बचाव दल ने विमान को एक पहाड़ी के पास दुर्घटनाग्रस्त पाया।

विमान ने बीती 31 मार्च को उड़ान भरी थी, उसे रूस के क्रीमिया प्रायद्वीप के ऊपर एक निर्धारित उड़ान भरनी थी। शाम 6 बजे An-26 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान से इस सैन्य विमान का संपर्क टूटा।

TASS ने एक स्रोत के हवाले से बताया कि सैन्य विमान एक चट्टान से टकरा गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी बाहरी हमले या नुकसान के संकेत नहीं मिले हैं।

दुर्घटना का संभावित कारण तकनीकी खराबी बताया जा रहा है।

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ईरान युद्ध में समझौता कराने के लिए सामने पाक के साथ आया चीन, क्या है वजह?

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नई दिल्ली |  ईरान युद्ध पर अब तक सधी हुई प्रतिक्रिया देते रहे चीन ने शांति समझौते का प्रस्ताव पेश करके दुनिया को चौंका दिया है।

यह प्रस्ताव 31 मार्च की शाम को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है जो इस समय बीजिंग के दौरे पर हैं।

शांति प्रस्ताव चीन व पाकिस्तान की ओर से संयुक्त रूप से जारी हुआ है। इसमें पांच बिंदुओं में संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत समझौते की शर्तें रखी गई हैं।

इससे पहले 29 व 30 मार्च को पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने सऊदी अरब, तुर्किये व मिस्त्र के विदेश मंत्रियों के साथ मिलकर शांति समझौते की योजना को लेकर मंथन किया था।

हालांकि इस बैठक को लेकर ईरान ने कहा था कि उनसे समझौते पर कोई सीधी वार्ता नहीं की है।

क्या है चीन-पाक का पीस प्लान?   

1- तत्काल युद्धविराम : सबसे पहली शर्त यह है कि दोनों पक्ष (अमेरिका/इजरायल और ईरान) तत्काल प्रभाव से सैन्य हमले रोकें ताकि मानवीय सहायता के लिए गलियारा (Corridor) बनाया जा सके।

2- संयुक्त राष्ट्र (UN) की निगरानी में वार्ता: शांति प्रक्रिया किसी एक देश के प्रभाव में न होकर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों के तहत हो। चीन ने प्रस्ताव दिया है कि एक निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय समिति इस समझौते की निगरानी करे।

3- संप्रभुता का सम्मान (Respect for Sovereignty): प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि ईरान की क्षेत्रीय अखंडता और उसकी संप्रभुता का सम्मान किया जाए। किसी भी बाहरी शक्ति को ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

4- आर्थिक प्रतिबंधों में ढील: चीन ने शर्त रखी है कि शांति वार्ता शुरू होने के साथ ही ईरान पर लगे उन कड़े प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाया जाए, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।

5- क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा: एक ऐसा साझा सुरक्षा तंत्र बनाया जाए जिसमें ईरान के पड़ोसी देश (जैसे पाक, सऊदी अरब, तुर्किये) शामिल हों, ताकि भविष्य में इस तरह के संघर्षों को बातचीत से सुलझाया जा सके।

समझौते की कितनी उम्मीद ?

ईरान ने भले इस्लामाबाद में हुई बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया हो लेकिन समझौते की कोशिशों में चीन के आगे आ जाने से उम्मीद बढ़ गई है। ईरान अपना सबसे ज्यादा तेल चीन को ही बेचता है।

पाक, ईरान का पड़ोसी देश है, उसके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हाल में करीबी रिश्ते देखे गए हैं। फिर भी उसने पड़ोसी देश ईरान में हुए हमले की आलोचना की थी।

दूसरी ओर पाक के चीन से भी बेहतर संबंध हैं जो ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीददार है।

माना जा रहा है कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ने से चीनी बाजार पर असर पड़ेगा इसलिए वह शांति समझौते में शामिल हुआ है।

 

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ईरानी रिपब्लिक डे पर जनता के बीच पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति व विदेश मंत्री

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नई दिल्ली | आज यानी एक अप्रैल को ईरान अपना रिपब्लिक डे मना रहा है। इस मौके की पूर्व संध्या पर निकाली गई एक रैली के दौरान ईरानी राष्ट्रपति व विदेश मंत्री जनता के बीच नज़र आए।
31 मार्च की शाम को वे मास्क लगाकर जनता के बीच पहुंचे और मीडिया से भी बात की। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजे़शकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघ़ची ने आम लोगों के साथ सेल्फी भी ली।
स्थानीय मीडिया ने जब विदेश मंत्री अराघ़ची से इस दौरे का मकसद पूछा तो उन्होंने मास्क हटाते हुए कहा,
“मैं  ज़मीनी स्तर पर चल रहे इस आंदोलन से ऊर्जा लेने आया हूं।”
इससे पहले ये दोनों शीर्ष नेता आखिरी बार तेहरान की सड़कों पर “ईरानी कुद्स दिवस” के मौके पर ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीज़ानी के साथ दिखे थे।
बाद में सुरक्षा प्रमुख लारीज़ानी की इज़रायली हवाई हमले में मौत हो गई थी।
बता दें 1979 में 30 और 31 मार्च को जनमत संग्रह के बाद 1 अप्रैल को ‘राजशाही’ खत्म करके ‘ईरान इस्लामी गणराज्य’ की स्थापना हुई थी।
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आज अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के राष्ट्रप्रमुख करेंगे अपने देशों को संबोधित; जानें क्या है बड़ी वजह

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अमेरिका के राष्ट्रपति, ब्रिटेन व ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री आज देंगे देश के नाम संबोधन
अमेरिका के राष्ट्रपति, ब्रिटेन व ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री आज देंगे देश के नाम संबोधन

नई दिल्ली | आज यानी एक अप्रैल की अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया व ब्रिटेन के राष्ट्राध्यक्ष अपने-अपने देश को संबोधित करने जा रहे हैं। कनाडा में स्थानीय समय शाम सात बजे पीएम का भाषण शुरू हो चुका है।

ऑस्ट्रेलिया पीएम अल्बनीज़ ने ऑस्ट्रेलिया के वासियों से कहा है कि इस युद्ध में हमारी सक्रिय भागीदारी नहीं है लेकिन हर ऑस्ट्रेलियाई व्यक्ति को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। अपील की है कि सभी ईंधन बचाएं। युद्ध के चलते आर्थिक झटके आने वाले कई महीनों तक महसूस किए जाएंगे।

अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप स्थानीय समय रात नौ बजे अपना भाषण देते हुए एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करेंगे। यह जानकारी उनकी प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मीडिया को दी है। एक दिन पहले ही ट्रंप ने संकेत दिए थे कि युद्ध समाप्त होने वाला है, अमेरिका दो से तीन सप्ताह के अंदर ईरान से बाहर निकल सकता है।

उधर, ब्रिटेन में भी स्थानीय समय के मुताबिक आज दोपहर को पीएम देश के नाम संबोधन देने जा रहे हैं। एक दिन पहले उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए संदेश दिया था कि वे ईंधन के दाम बढ़ने से रोकने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

हालांकि इन तीनों देशों के संबोधन का आपस में कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। लेकिन माना जा रहा है कि तीनों ही राष्ट्राध्यक्ष अपने देशवासियों को पश्चिम एशिया (मध्य-पूर्व) की परिस्थितियों को लेकर जानकारी देंगे।

 

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