रिपोर्टर की डायरी
सहरसा(बिहार): टेंपो से एक्सीडेंट के बाद ग्रामीणों ने ड्राइवर को तीन दिन तक बंधक बनाया, छुड़ाने आई पुलिस पर भी गुस्सा फूटा
- सहरसा जिले में टेंपो की टक्कर से छह लोग हो गए थे घायल।
- ड्राइवर को तीन दिनों तक बंधक बनाया, छुड़ाने आई पुलिस पर हमला।
- थानाप्रभारी व कई पुलिसकर्मी गंभीर रुप से घायल हो गए।
(इस खबर को वीडियो पर देखने के लिए इस लिंक पर जाइए।)
सहरसा | मुकेश कुमार सिंह
साल 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर दिन औसतन 1264 रोड एक्सीडेंट होते हैं और हर दिन ऐसे हादसों में जान गंवाने वालो की संख्या 462 है। फिर भी रोड दुर्घटनाएं रोकने व ट्रैफिक के नियमों का कड़ाई से पालन करने के लिए न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकारें इस ओर कोई कड़ा कदम उठा रही हैं, जिससे आम लोग कानून अपने हाथ में ले लेते हैं।
बिहार के सहरसा जिले में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया जब एक टेंपो की टक्कर से 6 लोगों के घायल होने के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने टेंपो ड्राइवर को तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा। इस मामले की सूचना मिलने पर जब पुलिस उसे छुड़ाने पहुंची तो गुस्साए लोगों ने पुलिस पर भी हमला कर दिया जिसमें थानाध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मी गंभीर रुप से घायल हो गए। हालांकि टेंपो चालक को पुलिस ने सुरक्षित छुड़ा लिया।
यह पूरा मामला सहरसा जिले के पतरघट थाना क्षेत्र के बिनटोली गांव का है। छह फरवरी को हुए रोड एक्सीडेंट के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने टेंपो चालक को पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई करने के बाद उसे बंधक बनाकर अपने कब्जे में रखा।
घटना के तीसरे दिन 9 फरवरी को पुलिस अपनी टीम के साथ बिनटोली गांव पहुंची और बंधक बनाए गए युवक को ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाने का प्रयास किया।
ग्रामीणों ने रास्ते में लकड़िया डालकर कई जगहों पर अवरोधक लगा दिए और टेंपो चालक को बचाने आई पुलिस दल पर हमला करने के लिए बड़ी संख्या में इकट्ठे हो गए।
इसी दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। ग्रामीण बंधक बनाए गए युवक को पुलिस के हवाले करने का विरोध करने लगे और जब पुलिस उसे अपने साथ ले जाने लगी तो ग्रामीणों ने युवक को जबरन छुड़ाने की कोशिश की। स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती चली गई और देखते ही देखते आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस टीम पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
इस हमले में पतरघट थाना प्रभारी गंभीर रूप से घायल हो गए। साथ ही कई अन्य पुलिसकर्मी भी जख्मी हो गए। घायल पुलिसकर्मियों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और हमले में शामिल आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
प्रदेश रिपोर्ट
सासाराम (बिहार) : मेडिकल कर्मियों के लिए बने 60 फ्लैटों में खुला ‘तबेला’, करोड़ों का प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा
सासाराम | अविनाश श्रीवास्तव
रोहतास जिले के मुख्य चिकित्सा केंद्र (सदर अस्पताल) में भ्रष्टाचार और लापरवाही की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सरकारी सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े करती है। मेडिकल कर्मियों को 24 घंटे अस्पताल परिसर में उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई 60 फ्लैटों की बड़ी बिल्डिंग आज मवेशियों का अड्डा और नशेड़ियों की शरणस्थली बन चुकी है।
बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSICL) ने करीब 8 साल पहले 40 करोड़ रुपये की लागत से इस प्रोजेक्ट की नींव रखी थी।
इस प्रोजेक्ट का काम 90% पूरा हो चुका है लेकिन एजेंसी व ठेकेदार के बीच ‘कमीशन’ और ‘अनियमितताएं’ के फेर में हैंड-ओवर अधर में लटका है।
एक स्थानीय निवासी राहुल कुमार ने कहा कि “ये पूरा इलाका तबेला बन चुका है। जहां डॉक्टरों को रहना था, वहां लोग गाय-भैंस बांध रहे हैं।”
इस बारे में सासाराम के सिविल सर्जन डॉ. मणिराज रंजन ने बताया कि जब से उन्होंने यहां का चार्ज संभाला है, तब से वे इस मामले में कई बार पत्राचार कर चुके हैं। उन्होंने कहा-
“हम तो चाहते हैं कि ये बिल्डिंग जल्द हैंडओवर हो, हमने समय-समय पर वहां की सफाई आदि भी करवाई है। लोकल लोग वहां अपने जानवर बांध रहे हैं। हमने जनप्रतिनिधि उपेंद्र कुशवाहा की डायरी में भी ये मुद्दा लिखवाया था। आगे भी अपने स्तर पर प्रयास जारी रखेंगे।”
प्रदेश रिपोर्ट
बिहार : बेगूसराय में युवक के ऊपर एसिड अटैक फेंका, CCTV में कैद हुई घटना
“रवि सोनी शराब के नशे में गाली दे रहे थे, जिसका मैंने विरोध किया। आसपास के लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया। लेकिन कुछ देर बाद रवि सोनी मेरी ओर आए और तेज़ी से बोतल से कुछ फेंका। मेरे शरीर में तेज़ जलन होने लगी और मैं जान बचाने के लिए भागा।”
प्रदेश रिपोर्ट
रोहतास : पति की हत्या के बाद जहर खाने वाली महिला की मौत, दो बच्चे अनाथ हुए
सासाराम | अविनाश कुमार श्रीवास्तव
बिहार के रोहतास जिले में जिस महिला ने पति की हत्या के बाद जहर खा लिया था, उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई है। महिला ने अपने दो छोटे बच्चों को भी दूध में मिलाकर जहर दिया था।
हालांकि दोनों बच्चों की हालत स्थिर है। लेकिन इस घटना ने दोनों बच्चों को अनाथ कर दिया है।
30 मार्च की शाम को रेशमा खातून ने अपने घर में बच्चों को जहर देकर आत्महत्या की कोशिश की थी। उन्हें सदर अस्पताल ले जाया गया था, जहां के यूपी के वाराणसी हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया।
1 मार्च को वाराणसी में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई है। हालांकि महिला के दो मासूम बच्चे तैयबा खातून और हमजद सदर अस्पताल में ही भर्ती हैं।
फिलहाल अस्पताल में भर्ती बच्चों की देखभाल उनकी बुजुर्ग नानी कर रही हैं।
बता दें कि पति हसन रज़ा की सड़क पर पीट-पीटकर हत्या कर देने के बाद से उनकी पत्नी सदमे में थीं।
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