रिपोर्टर की डायरी
UP: रायबरेली में दलित युवक को ‘ड्रोन चोर’ समझकर पीटा, राहुल गांधी का नाम लेने पर क्रूरता से हत्या
- बेहद क्रूरता से हाथ-पैर बांधकर पीटने और मुंह पर पेशाब करते युवकों ने खुद को ‘बाबा वाले आदमी’ कहा।
- घटना का वीडियो वायरल होने के बाद राहुल गांधी ने मृतक के पिता व बहन से फोन पर बात की।
- रायबरेली एसपी ने उन्नचौर कोतवाल का तबादला किया, एसआई व कांस्टेबल को निलंबित किया गया।
- फतेहपुर का युवक रायबरेली में अपनी ससुराल जा रहा था, रास्ते में हत्या, यूपी कांग्रेस प्रभारी पिता से मिले।
(यूपी के फतेहपुर से इनपुट) नई दिल्ली |
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के उन्नचौर थाना क्षेत्र में 1 अक्टूबर की रात को एक दिल दहला देने वाली घटना ने सनसनी फैला दी। 38 वर्षीय दलित युवक हरिओम वाल्मीकि, जो फतेहपुर जिले के तुरावली का पुरवा गांव का निवासी था, को ग्रामीणों ने ड्रोन चोर समझकर पीट-पीटकर हत्या कर दी।
घटना के दौरान की वीडियो फुटेज ने पूरे मामले को और भयावह बना दिया है, जिसमें हमलावरों ने हरिओम के मुंह पर पेशाब किया, उसके दोनों पैरों को फाड़ने की कोशिश की, लाठियां और बेल्टों से प्रहार किए।
मरते वक्त चीखते हरिओम ने राहुल गांधी का नाम लिया, तो भीड़ ने चेतावनी दी- “हम बाबा जी वाले हैं… तू राहुल गांधी कहेगा या चंद्र शेखर आजाद?” यह घटना न केवल दलित उत्पीड़न का प्रतीक बनी, बल्कि पुलिस की लापरवाही पर भी सवाल खड़े कर रही है।
बेरहमी से पीटकर हत्या कर दी, वीडियो वायरल
हरिओम अपनी पत्नी पिंकी से मिलने के लिए पैदल उन्नचौर की नई बस्ती जा रहा था। पिंकी एनटीपीसी में पंजाब नेशनल बैंक की सफाई कर्मचारी हैं। रात करीब 1 बजे ईश्वरदासपुर गांव के पास उन्नचौर-दलमऊ रोड पर 24-25 ग्रामीणों ने उसे रोक लिया।
ड्रोन चोरी की अफवाहों के चलते ग्रामीण रात्रि गश्त कर रहे थे। हरिओम के संतोषजनक जवाब न देने पर उन्होंने उसे चोर समझ लिया। पहले तो लाठियों और बेल्टों से पीटा, फिर उसके हाथों को उसकी ही शर्ट से बांध दिया।
गांव के बाहर नहर किनारे ले जाकर एक खंभे से बांधा और फिर बेरहमी से पिटाई की।

7 अक्तूबर को वाल्मीकि जयंती के मौके पर राहुल गांधी ने इस मामले पर संयुक्त बयान जारी किया ।
राहुल गांधी और चंद्रशेखर आजाद के नाम का जिक्र
वीडियो में साफ दिख रहा है कि हरिओम को आधी नग्न अवस्था में जमीन पर लिटाकर उसकी जांघों और प्राइवेट पार्ट्स पर बेल्ट और लाठियों से वार किए जा रहे हैं। एक हमलावर उसके मुंह पर पेशाब करता नजर आता है, जबकि अन्य उसके पैरों को खींचकर फाड़ने की कोशिश करते हैं।
दर्द से तड़पते हरिओम ने चीखकर कहा, “राहुल गांधी!” तो भीड़ ने हंसते हुए जवाब दिया, “यहां सब बाबा जी वाले हैं… तू राहुल गांधी कहेगा या चंद्र शेखर आजाद?”
आखिर में उसे रेलवे ट्रैक के पास फेंक दिया गया, जहां 2 अक्टूबर सुबह उसका खून से लथपथ शव मिला। शव पर सिर में गहरी चोटें, छाती पर बेल्ट के निशान और पूरे शरीर पर नीले-काले निशान थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पिटाई से मौत की पुष्टि हुई।
परिवार का दर्द और गंभीर आरोप:
हरिओम मानसिक रूप से कमजोर था और अपनी ससुराल जा रहा था। उसके भाई शिवम ने बताया, “भाई को चोर समझकर पीटा गया। जब उसने राहुल गांधी का नाम लिया, तो पिटाई और तेज हो गई।”
पिता गंगादीन ने आंसू भरी आवाज में कहा, “मेरा बेटा निर्दोष था, बस अपनी पत्नी से मिलने जा रहा था।” परिवार ने हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, 1 करोड़ रुपये मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग की है।
उन्होंने पुलिस पर भी लापरवाही का आरोप लगाया कि घटनास्थल पर पुलिस मौजूद थी, लेकिन हस्तक्षेप नहीं किया।
पुलिस ने पांच युवक पकड़े, कहा- आरोपी भी पिछड़े समुदाय से
घटना के बाद पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया। 4 अक्टूबर को 5 नामजद—वैभव सिंह (ईश्वरदासपुर), विपिन मौर्य (ददेपुर), विजय मौर्य (बहादरपुर), सहदेव और सुरेश कुमार (दोनों ददेपुर जमुनापुर)—को गिरफ्तार किया गया।
उनके कब्जे से दो चमड़े की बेल्ट, एक शर्ट, एक यकल्पत्र की लाठी और एक बनियान बरामद हुई।
एएसपी संजीव कुमार सिन्हा ने ग्रामीणों से जातिगत अफवाहें न फैलाने की अपील की और कहा कि आरोपी विभिन्न समुदायों (दलित, पिछड़े) से हैं। जांच जारी है, वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
कोतवाल का ट्रांसफर, SI-दारोगा निलंबित
एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने उन्नचौर कोतवाल संजय कुमार को क्राइम ब्रांच भेज दिया। लापरवाही के आरोप में एसआई कमल सिंह यादव और कांस्टेबल प्रदीप कुमार व अभिषेक कुमार को निलंबित कर दिया गया।
राहुल ने फोन पर बात की, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मिलने पहुंचे
घटना ने राजनीतिक तूफान ला दिया। रायबरेली से सांसद राहुल गांधी ने गंगादीन से फोन पर बात की और कहा, “चिंता मत करो, कांग्रेस आपके परिवार के साथ है। मैं पूरी कोशिश करूंगा मदद की।”
मृतक के भाई शिवम ने कहा, “सब फोन पर बात करते हैं, लेकिन राहुल जी ने व्यक्तिगत रूप से साथ खड़े होने का भरोसा दिया।”
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने 5 अक्टूबर को फतेहपुर आकर मृतक के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने इसे “जंगल राज” करार देते हुए कहा-
“यह घटना योगी सरकार की बेरुखी दिखाती है। हरिओम का नाम लेते ही पिटाई तेज हो गई, जो दलितों पर अत्याचार का प्रतीक है।”
अजय राय ने मांग की—आरोपियों को कड़ी सजा, 1 करोड़ मुआवजा, सरकारी नौकरी मिले और एसआईटी जांच हो।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस इस अन्याय के खिलाफ हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगी।”
दूसरी ओर, आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद ने भी मामले का समर्थन किया है।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर #JusticeForHariomValmiki अभियान चलाया, जिसमें योगी सरकार पर दलितों के खिलाफ अपराधों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
नोट – फतेहपुर से हमारे संवाददाता संदीप केशरवानी का इनपुट
रिपोर्टर की डायरी
बिहार : बिना हथकड़ी हिस्ट्रीशीटर को लग्जरी गाड़ी से कोर्ट ले गई मधेपुरा पुलिस, रील भी बनी
मधेपुरा | रजनीश सिंह
बिहार के एक हिस्ट्रीशीटर को बिना हथकड़ी लगाए एक लग्जरी गाड़ी में कोर्ट ले जाने की रील बनाई गई और फिर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कराकर हिस्ट्रीशीटर का प्रचार किया गया। इस रील के वायरल होने के बाद मधेपुरा पुलिस के ऊपर हिस्ट्रीशीटर को वीआईपी ट्रीटमेंट देने का गंभीर आरोप लगा। सोशल मीडिया पर पुलिस की आलोचना होने के बाद एसपी ने जांच के आदेश दिए और अब कड़ा ऐक्शन हुआ है।
हिस्ट्रीशीटर अंकज कुमार उर्फ लल्लू यादव का वीडियो वायरल होने के बाद एक एसआई और दो चौकीदारों को सस्पेंड किया गया है। सस्पेंड होने वाले एसआई राम उदय कुमार और दो चौकीदार अनिल कुमार व मोहम्मद रसूल हैं। तीनों से 24 घंटे में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है कि उन्होंने कुख्यात अपराधी को वीआईपी ट्रीटमेंट आखिर क्यों दिया?
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गोपालगंज : फाइलेरिया रोकने की दवा खाने के बाद स्कूली बच्चे बीमार
- गोपालगंज के हरखुआ माध्यमिक विद्यालय में 15 बच्चे बीमार पड़े।
- 58 बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई, फिर तबीयत बिगड़ी।
- सभी बच्चों को सदर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, सभी सुरक्षित।
गोपालगंज | आलोक कुमार
बिहार के गोपालगंज में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाए जाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। स्कूल में अभिभावकों ने पहुंचकर हंगामा किया, हालांकि टीचरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। इस बीच हेडमास्टर ने एंबुलेंस बुलाकर 15 बीमार बच्चों को सदर अस्पताल में एडमिट कराया है। बता दें कि हाथी पांव या फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दो साल से बड़े बच्चों को यह दवा खिलाई जाती है, जो एकदम सुरक्षित है।
गोपालगंज में बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना शहर के हरखुआ गांव के एक माध्यमिक विद्यालय में घटी। हेडमास्टर कृष्ण मुरारी पांडे ने बताया कि स्कूल में 27 फरवरी को 58 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों ने मिड डे मील खाया। फिर दोपहर करीब 3:00 बजे आशा वर्करो ने स्कूल आकर सभी 58 बच्चों को फाइलेरिया और एल्बेंडाजोल की गोलियां दीं।
प्रिंसिपल ने बताया कि दवा खाते ही कुछ बच्चों को अचानक नींद आने लगी और वे सोने लगे, जबकि कुछ को उल्टी हुई।
इस बारे में सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में गैस बनने की शिकायत हो सकती है, जिससे उल्टी या पेट दर्द महसूस होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार डर के कारण भी बच्चों को ऐसी समस्या होती है, इसमें किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।
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शराब तस्करी में जेल गए आरोपी की मौत, परिवार बोला- हत्या हुई, जेल प्रशासन ने हार्टअटैक बताया
- बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की मौत होने से उठे सवाल।
- शराब तस्करी के आरोप में जेल में 14 दिन से था बंदी।
- जेल में अचानक हुई मौत को परिजनों ने बताया हत्या।
बक्सर | अमीषा कुमारी
बिहार में शराब तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की मौत बक्सर सेंट्रल जेल में हो गई है। बीती 12 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में उसके साथ मारपीट हुई, उसके शरीर पर लाल निशान हैं। परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए सदर अस्पताल में हंगामा किया, तब मौके पर पुलिस पहुंची।अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में जेल प्रशासन ने उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।
दरअसल 40 साल के राजेंद्र सिंह को बक्सर पुलिस पकड़कर ले गई थी और 12 फरवरी को उसे जेल भेजा गया था। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के विराट नगर के रहने वाले थे। मृतक के बड़े भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के दौरान ही पुलिस ने राजेंद्र के साथ मारपीट की थी, जबकि वह बीमार चल रहा था। राजू का आरोप है कि “जेल भेजने के बाद भी भाई को पीटा गया। शरीर पर मौजूद लाल निशान साफ बता रहे हैं कि उसकी हत्या हुई है।
राजू ने बताया कि 27 फरवरी की सुबह करीब 11 बजे जेल प्रशासन की ओर से कॉल आया कि राजेंद्र की तबीयत बिगड़ गई है और वे अस्पताल पहुंच जाएं। लेकिन जब वे लोग सदर अस्पताल पहुंचे तो एक्स-रे रूम के बाहर स्ट्रेचर पर मृत अवस्था में राजेंद्र मिले। वहां कोई मौजूद नहीं था। इसके बाद परिजनों ने हंगामा किया और मौके पर पुलिस पहुंची।
मृतक राजेंद्र पेशे से पेंटर थे और उनके दो छोटे बच्चे हैं। अचानक हुई इस मौत ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। वहीं, यह घटना बिहार में शराबबंदी लागू कराने के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। साथ ही, जेल में बंदी की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन पर भी सवाल खड़ा होता है। मृतक के भाई ने बताया कि 25 फरवरी को वह अपने भाई से मिलने जेल गए थे, तब उसे ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी जिसके चलते उसकी अचानक मौत हो सकती है।
बक्सर सेंट्रल जेल के अधीक्षक ज्ञानित गौरव ने परिजनों के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मौत हार्ट अटैक से प्रतीत होती है। हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इसका सही कारण पता लग सकेगा।
बक्सर सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में तैनात डॉक्टर अमित कुमार ने पुष्टि की कि कैदी को अस्पताल लाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। वहीं, नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने सदर अस्पताल में मीडिया से कहा कि अगर कहीं कोई लापरवाही पाई जाती है तो उस पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।”
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