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Delhi में कार ब्लास्ट करने वाला आतंकी डॉ. उमर, एक वीडियो में क्या प्रैक्टिस करता दिखा?

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आतंकी डॉ. उमर का वीडियो वायरल हो रहा है।
आतंकी डॉ. उमर का वीडियो वायरल हो रहा है।
  • अब मर चुके आतंकी डॉ. उमर के फोन से जांच एजेंसियों को एक वीडियो रिकवर हुआ है।

नई दिल्ली|

दिल्ली में 10 नवंबर को लाल किला के पास हुए कार ब्लास्ट में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों को मुख्य संदिग्ध, फिदायीन हमलावर डॉक्टर उमर उन नबी (Dr. Umar un Nabi) का एक वीडियो मिला है, जिसमें वह अंग्रेजी (English) में ‘शहादत के ऑपरेशन’ (martyrdom operations) और ‘सुसाइड बॉम्बिंग’ (suicide bombing) की पैरवी (defending) करता दिखाई दे रहा है। यह वीडियो उसके भाई की एक गलती के कारण सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लग गया।

 

वीडियो में क्या बोल रहा है आतंकी उमर?
1 मिनट 20 सेकंड के इस वीडियो में डॉ. उमर एक कैमरे के सामने बैठकर तकरीर दे रहा है।
वह कहता है, “जिसे लोग सुसाइड बॉम्बिंग कहते हैं, इस्लाम में उसे ‘शहादत का ऑपरेशन’ कहते हैं… शहादत का ऑपरेशन वह होता है जब कोई व्यक्ति एक खास जगह और खास समय पर मरने के इरादे से जाता है।”
जांचकर्ताओं (Investigators) का मानना है कि यह वीडियो लोगों का ब्रेन वॉश (brainwash) करने के लिए बनाया गया था और इसका टोन (tone) पुलवामा हमले (Pulwama attack) के आतंकी आदिल डार (Adil Dar) के वीडियो जैसा ही है।

 

तकरीर देने की प्रैक्टिस कर रहा था

डॉ. उमर का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। द हिन्दू ने दावा किया है कि वीडियो कम से कम आठ महीने पहले शूट किया गया है। वीडियो में सुना जा सकता है कि डॉ. उमर सुसाइड बॉम्बिंग को लेकर अपने भड़कीले भाषण के लिए अभ्यास (practise) कर रहा है, वह वीडियो में कई बार अटकता है और स्क्रीन के पास से कुछ पढ़ने की कोशिश करता भी दिखता है और आखिर में अटक जाने के बाद वीडियो बंद कर देता है।

 

भाई ने ‘तालाब’ में फेंका था फोन
यह वीडियो एजेंसियों तक कैसे पहुंचा, इसकी कहानी भी दिलचस्प है।
1. कार ब्लास्ट से पहले, जब फरीदाबाद मॉड्यूल (Faridabad module) के अन्य डॉक्टर (मुजम्मिल, शाहीन और अदील) गिरफ्तार होने लगे तो उमर का भाई डर गया।
2. उमर ने अपना फोन अपने भाई के सुपुर्द किया था। गिरफ्तारी के डर से भाई ने वह फोन अपने घर के पास एक तालाब (pond) में फेंक दिया।
3. जांच के दौरान, एजेंसियों ने जब उमर के फोन की लोकेशन (location) ट्रेस (trace) की और उसके भाई से सख्ती से पूछताछ की, तो उसने राज उगल दिया। एजेंसियों ने तालाब से फोन बरामद कर लिया और डेटा रिकवर कर लिया।

 

कौन था डॉक्टर उमर?
1. पेशा: मोहम्मद उमर पेशे से डॉक्टर था और फरीदाबाद (Faridabad) की अल-फलाह यूनिवर्सिटी (Al-Falah University) में असिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant Professor) के तौर पर तैनात था।
2. निवासी: वह जम्मू-कश्मीर (J&K) के पुलवामा (Pulwama) जिले का रहने वाला था।
3. साजिश: वह फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल (terror module) का हिस्सा था। 10 नवंबर को अपने साथियों की गिरफ्तारी के बाद, उसने लाल किले के पास कार में खुद को उड़ा लिया।
4. कनेक्शन: यह मॉड्यूल पाकिस्तान (Pakistan) स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

 

‘पैनिक’ में नहीं, ‘सोची-समझी’ साजिश थी
शुरुआत में माना जा रहा था कि यह धमाका हड़बड़ी में हुआ था। लेकिन अब इस वीडियो के सामने आने के बाद, जांच एजेंसियों को यकीन हो गया है कि यह कोई पैनिक ब्लास्ट (panic blast) नहीं, बल्कि एक बेहद सोची-समझी और खतरनाक इरादों वाली आतंकी साजिश (terror conspiracy) थी।
(राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अब इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है और इसे दिल्ली में हुआ पहला ‘कार-बॉर्न सुसाइड अटैक’ (car-borne suicide attack) माना जा रहा है।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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PU Election : पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में NSUI की बड़ी जीत

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पटना |

पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ (PUSU) चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI ने इस बार शानदार प्रदर्शन किया है। 

पटना यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष और महासचिव पद पर NSUI के कैंडिडेट की जीत हुई है। NSUI के शांतनु शेखर नए छात्र अध्यक्ष और खुशी महासचिव बनीं हैं। निर्दलीय उम्मीदवार सिफत फैज उपाध्यक्ष चुनी गई हैं। जबकि ABVP को संयुक्त सचिव व कोषाध्यक्ष पद पर जीत मिली है। ABVP के अभिषेक शर्मा को संयुक्त सचिव व हर्षवर्धन को पटना यूनिवर्सिटी का कोषाध्यक्ष चुना गया है।

विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के लिए चुनाव रिजल्ट 28 फरवरी को जारी हुए हैं। चुनाव में 37.84% वोटिंग हुई, सबसे ज्यादा वोट पटना लॉ कॉलेज (50.66%) में पड़े। सबसे कम वोटिंग बीएन कॉलेज(21.2%) में दर्ज की गई।

अध्यक्ष पद पर बड़े अंतर से जीत

अध्यक्ष बने शांतनु शेखर ने छात्र जदयू के प्रिंस कुमार को 1496 वोटों से हराया। शांतनु को 2896, जबकि प्रिंस को 1400 वोट मिले।

उपाध्यक्ष बनीं सिफत फैज ने छात्र जदयू के आयुष हर्ष को 65 वोटों से हरा दिया। सिफत को 1571, जबकि आयुष को 1503 वोट मिले।

महासचिव बनीं खुशी ने छात्र राजद के प्रत्यूष राज को 553 वोटों से हराया है। खुशी को 2164, जबकि प्रत्यूष को 1611 वोट मिले।

संयुक्त सचिव बने अभिषेक कुमार ने एनएसयूआई के एमडी मोनावर आजम को 392 वोटों से हराया है। अभिषेक को 2143, जबकि मोनावार को 1751 वोट मिले।

ABVP ने फिर गंवाया अध्यक्ष पद

2025 में ABVP ने छात्रसंघ चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 13 साल बाद इसे हासिल किया था। इसके साथ ही उसकी प्रत्याशी मैथिली मृणालिनी (ABVP) पटना यूनिवर्सिटी की पहली महिला प्रेसिडेंट भी बनी थीं। पर एक साल बार फिर से अध्यक्ष पद की दौड़ से ABVP बाहर हो गया। इस पद के लिए अंतिम मुकाबला NSUI और छात्र JDU के बीच हुआ। 

यूपी-एमपी में दबदबा, फिर बिहार में क्यों कमजोर ABVP

  • क्षेत्रीय राजनीति का असर: बिहार में RJD, JD(U) और NSUI जैसी स्थानीय ताकतें मजबूत हैं। ABVP को “BJP की छात्र शाखा” के तौर पर देखा जाता है, जिससे कुछ छात्रों में दूरी रहती है।
  • महिला और इंडिपेंडेंट कैंडिडेट का उदय: 2025 में मैथिली मृणालिनी की जीत के बाद भी 2026 में NSUI ने महिलाओं और युवा मुद्दों (जैसे कैंपस सेफ्टी, सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस) पर बेहतर कैंपेन किया।
  • स्थानीय मुद्दों पर फोकस: NSUI ने कैंपस में लड़कियों की सुरक्षा, प्लेसमेंट और एकेडमिक रिफॉर्म्स पर जोर दिया, जबकि ABVP को “राष्ट्रीय मुद्दों” पर ज्यादा फोकस करने का आरोप लगा।
  • वोट बंटवारा: RJD, JD(U) और इंडिपेंडेंट्स के बीच वोट बंटने से NSUI को फायदा हुआ। ABVP को सिर्फ एक सीट मिली, जबकि 2025 में भी वह बहुमत नहीं बना पाया था।

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Breaking News : अमेरिका-इजरायल हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत, सरकारी मीडिया ने पुष्टि की

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अयातुल्ला अली ख़ामेनेई

नई दिल्ली |

अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान की मीडिया तसनीम और फार्स समाचार एजेंसियों ने रविवार सुबह (1 march) इसकी पुष्टि की है।

इस हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू के मारे जाने की भी खबर है।

आयतुल्लाह खामेनेई ने 1989 में इस्लामी गणराज्य के संस्थापक इमाम खुमैनी की मौत के बाद से 37 साल तक ईरान और मुस्लिम उम्मत का नेतृत्व किया, अब उनकी हत्या के बाद ईरान में यह स्थान खाली हो गया है, देखना होगा कि उनका उत्तराधिकारी किसे बनाया जाता है। 

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत का दावा किया था।

बता दें कि इजरायल-अमेरिका की ओर से शनिवार को शुरू किए गए हवाई हमलों में ईरान के 31 में से 24 प्रांतों को निशाना बनाया गया, जिसमें राजधानी तेहरान भी शामिल है।

ईरानी सेना ने खामेनेई की शहादत के बाद “खतरनाक अभियान” की शुरुआत की घोषणा की है। सेना ने कहा कि यह हमला कुछ ही देर में शुरू होगा और क्षेत्र में कब्जे वाले क्षेत्रों और अमेरिकी आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाएगा।

ईरान में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक

उधर, इस्लामिक रिवॉल्यूशन गार्ड्स कोर (IRGC) ने इस्लामिक क्रांति के नेता खामनेई की शहादत पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा – इससे ईरानी राष्ट्र उनकी राह पर चलने के लिए और अधिक दृढ़ होगा।

ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की गई है।

ईरान में अब तक 200 से ज्यादा मौतें

ईरान के एक गैर-सरकारी मानवतावादी संगठन ‘ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी’ का कहना है कि इन हमलों में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 740 से ज्यादा लोग घायल हैं। ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की मौत हो गई और 45 छात्राएं घायल हैं।

ईरान का पलटवार- 9 देशों पर हमले

अमेरिका और इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने इजराइल समेत मिडिल-ईस्ट के 9 देशों को निशाना बनाया। ईरान ने इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागीं।  कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब व UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। इतना ही नहीं, ईरान ने UAE के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया। ईरान ने दुबई के पाम होटल एंड रिसोर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमला किया। इसके अलावा बहरीन में कई रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया।

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Breaking News : शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया बरी, CBI कोर्ट बोली- आरोप साबित नहीं

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अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को लंबे समय तक ऐसे केस में जेल में रहना पड़ा जो झूठा साबित हुआ है।
अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को लंबे समय तक ऐसे केस में जेल में रहना पड़ा जो झूठा साबित हुआ है।
  • दिल्ली की शराब नीति को घोटाला बताते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों ने केस दर्ज किया था।

नई दिल्ली|

शराब घोटाला केस में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश देते हुए कहा कि इनके खिलाफ शराब घोटाले से जुड़े आरोप साबित नहीं हुए क्योंकि इसको लेकर कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।

बता दें कि मनीष सिसोदिया उस वक्त दिल्ली के आबकारी मंत्री भी थे और उन्हें सबसे पहले इस कथित घोटाले में जेल भेजा गया था। यह वही कथित घोटाला है, जिसके चलते दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को जेल से सरकार चलानी पड़ी थी। फिर बाद में उनकी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव हार गई थी। इस हार के पीछे शराब घोटाले के चलते केजरीवाल के खिलाफ बनी पब्लिक ओपीनियन को बड़ी वजह माना जाता है।

बता दें कि शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ ED और CBI दोनों जांच एजेंसियों ने केस दर्ज किया था। ED ने उन्हें 21 मार्च, 2024 को अरेस्ट किया था। इसके बाद 26 जून को CBI ने जेल से ही उन्हें हिरासत में ले लिया था। ED मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से 12 जुलाई, 2024 को जमानत मिली थी।

दूसरी ओर, तत्कालीन आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया को इस केस के चलते करीब 530 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था। दिल्ली के शिक्षा मंत्री के तौर पर बनी उनकी छवि को इस कथित घोटाले ने काफी नुकसान पहुंचाया।

भावुक हुए केजरीवाल, सिसोदिया बोले- हम कट्टर ईमानदार

इस फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल भावुक हो गए और बोले कि साबित हो गया कि हमारे ऊपर लगाया गया इल्जाम फर्जी था। उनके साथी व सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया ने कहा कि ‘साबित हो गया कि अरविंद केजरीवाल-मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार हैं।’ इस मामले में आज शाम चार बजे अरविंद केजरीवाल प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।

फैसले के खिलाफ CBI जाएगी हाईकोर्ट

समाचार एजेंसी ANI ने सोर्स के आधार पर दावा किया है कि राऊज एवेन्यू कोर्ट में चले केस में हार के बाद CBI ने हाईकोर्ट जाने का फैसला किया है।

शराब नीति पर क्या आरोप लगे जो फर्जी निकले?

  • दिल्ली शराब नीति (2021-22) का उद्देश्य निजी फर्मों और उद्यम कंपनियों को खुदरा शराब क्षेत्र में लाना था। केजरीवाल सरकार का कहना था कि इसके जरिए उत्पाद शुल्क और खुदरा शराब क्षेत्र में सुधार होगा, यह भी कहा गया कि इससे राजस्व में 9,500 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई।  
  • इसको लेकर तत्कालीन विपक्षी दल कांग्रेस व भाजपा ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और इसे ‘शराब घोटाला’ कहा था। आप पर आरोप लगा कि इस नीति के जरिए लाइसेंस शुल्क में छूट और कमी करके निजी क्षेत्र के मालिकों और शेयरधारकों को लाभ पहुंचाया गया।  
  • नीति लागू होने के बाद, इसमें “कई करोड़ के घोटाले” के आरोप लगाते हुए कई शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से एक शिकायत जून 2022 में दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने दिल्ली पुलिस में दर्ज कराई।
  • जुलाई 2022 में दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने शराब नीति के निर्माण में प्रक्रियात्मक उल्लंघनों की रिपोर्ट सक्सेना को सौंपी, जिन्होंने सीबीआई जांच की सिफारिश की।
  • इन कथित उल्लंघनों में विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों की अनदेखी और नीति के कार्यान्वयन में उपराज्यपाल की भूमिका को दरकिनार करना शामिल था। इस रिपोर्ट में सरकारी खजाने को 580 करोड़ रुपये तक के नुकसान का आरोप लगाया गया था।
  • प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक अन्य जांच में आरोप लगाया गया कि शराब नीति, शराब थोक विक्रेताओं को 12% का गारंटीकृत लाभ मार्जिन देगी, जिसके बदले में आम आदमी पार्टी के मंत्रियों को 6% रिश्वत दी जाएगी।
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