रिसर्च इंजन
क्या भारत में 2026 तक नष्ट हो पाएगा नक्सलवाद?
बीते मई में 50 घंटे चले मिलिट्री ऑपरेशन में इसकी हत्या कर दी गई। 21 मई 2025 को छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जंगलों में ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ के तहत CRPF, CoBRA और DRG की 500-600 सैनिकों ने ड्रोन और हेलीकॉप्टर का उपयोग कर माओवादी कैंप पर हमला बोला, जिसमें बसवराज समेत 27 माओवादी मारे गए। बसवराज की मौत माओवादी नेतृत्व के 70% हिस्से को खत्म करने वाली साबित हुई। गृह मंत्री अमित शाह ने इसे नक्सलवाद पर “निर्णायक झटका” बताया, जिससे रेड कॉरिडोर सिमट गया।
- बेहतर समन्वय और खुफिया जानकारी: केंद्रीय और राज्य बलों (CRPF, CoBRA, ग्रेहाउंड्स) के बीच यूनिफाइड कमांड ने काम किया। इंटेलिजेंस-बेस्ड ऑपरेशंस (जैसे अबूझमाड़ घुसपैठ) ने माओवादी नेतृत्व को निशाना बनाया। 2024 से ड्रोन, हेलीकॉप्टर और सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल बढ़ा, जो पहले सीमित था।
- सरेंडर पॉलिसी ने आकर्षित किया : सरेंडर पॉलिसी को और बेहतर बनाया जिसमें ₹50,000 की सहायता राशि व नई जिंदगी शुरू करने के लिए ट्रेनिंग व नौकरी दी जाती है। गृह मंत्रालय (MHA) के आधिकारिक डेटा के अनुसार, 2024-25 में लगभग 881 नक्सली सरेंडर हुए और मुख्यधारा में लौटे।
- सरंदा डेवलपमेंट प्लान – झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सरंदा जंगलों को माओवादियों का मजबूत गढ़ माना जाता था, यहां 2012 से 2018 तक एक पायलट योजना चली जिसे सरंदा डेवलपमेंट प्लान कहा गया। फिर इस विकास योजना को 2018 में ‘राष्ट्रीय नक्सल नियंत्रण रणनीति’ का हिस्सा बनाया। इसके तहत आदिवासी इलाकों में बुनियादी सुविधाएँ जैसे सड़कें, स्कूल, अस्पताल, बिजली और पानी मुहैया कराना शुरू किया गया। इससे आदिवासियों के बीच माओवादियों का असर घटा। इसके तहत 2024-25 में 200+ गाँवों तक बिजली और मोबाइल नेटवर्क पहुँचा, जो पहले माओवादियों की शक्ति थी। 50 नए प्राइमरी स्कूल और 10 स्वास्थ्य केंद्र खोले गए। 2025 में 15,000 घरों का निर्माण शुरू हुआ, जो अब पूरा होने की कगार पर है।
- सेना की संख्या बढ़ाई- पहले जो क्षेत्र माओवादियों के कब्जे में थे, अब वहां जगह-जगह सेना है। 2024 से इन क्षेत्रों में 10,000 से ज्यादा सैनिकों की तैनाती की गई है। CIAT स्कूलों (काउंटर इंटरसेप्ट एंड एंटी-टेरर ट्रेनिंग सेंटर्स) को बढ़ाया गया है, जहाँ पुलिस को जंगल युद्ध और नक्सलियों से लड़ने की ट्रेनिंग दी जाती है। SRE स्कीम (सिक्योरिटी रिलेटेड एक्सपेंडीचर) के तहत फंडिंग बढ़ाई गई है, जो पुलिस को हथियार, ट्रेनिंग और बीमा के लिए पैसे देती है।
- माओवादियों की आंतरिक कलह भी मददगार बनी – 2023 में सेंट्रल कमिटी मेंबर ‘गणपति’ (एम. लक्ष्मण राव, पूर्व महासचिव) और ‘अभय’ (मल्लोजुला वेणुगोपाल राव, वर्तमान प्रवक्ता) के बीच मतभेद इतने बढ़ गए कि दोनों ने अलग-अलग गुट बना लिए। ‘गणपति’ चाहते थे हिंसक रास्ता जारी रखें, जबकि ‘अभय’ शांति वार्ता की बात कर रहे थे। इससे संगठन में एकता टूट गई और लोग एक-दूसरे से भरोसा खो बैठे।
- कोविड में कैडर कमजोर हुआ- कोरोना वायरल संक्रमण के दौरान माओवादियों को बहुत नुकसान पहुँचाया। 2020-2022 में जंगलों में इलाज की कमी से 100 से ज्यादा माओवादी मर गए, जो उनके लिए बड़ा झटका था।
- नेतृत्व की कमी ने कमजोर किया- हाल में माओवादी संगठन को सबसे तगड़ा झटका उनके महासचिव नंबाला केशव राव (बसवराज) की मई 2025 में हत्या का लगा। वह इस संगठन का दिमाग था और उसकी कमी से माओवादियों को और कमजोर कर दिया।
इन सैन्य ऑपरेशनों में नक्सलियों को नुकसान हुआ
- ऑपरेशन कागर (2024-2025): छत्तीसगढ़ के बस्तर में 20,000 से ज्यादा सैनिकों ने माओवादी बेस पर हमले किए।
- ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट (मई 2025) : इसमें 31 माओवादी मारे गए, यह ऑपरेशन कागर का ही विस्तार है।
- कांकेर क्लैश (अप्रैल 2024): 29 माओवादी मारे गए, पार्टापुर एरिया कमिटी खत्म हुई।
- अबूझमाड़ में बड़ी कार्रवाई (अक्टूबर 2024, मई 2025): 38 और 26 माओवादी मारे गए, जिसमें महासचिव नंबाला केशव राव (बसवराज) भी शामिल थे।
- सरेंडर और गिरफ्तारियाँ: 2024 में 163, 2025 में 142 माओवादी मारे गए। सितंबर 2025 में नारायणपुर में 16 और सेंट्रल कमिटी मेंबर सुजाता ने सरेंडर किया।
- बिजापुर और झारखंड ऑपरेशन (2025): IED अटैक और रेलवे विस्फोट के जवाब में 5-3 माओवादी मारे गए।
रिसर्च इंजन
कैसे समृद्ध बनेगा बिहार? हर 100 में से 72 रुपये के लिए हम केंद्र के भरोसे, CAG Report में खुलासा
- बिहार में साल 2022-23 के लेखे-जोखे से जुड़ी कैग रिपोर्ट विधानसभा में पेश हुई।
- नीतीश सरकार ने ₹70,877 करोड़ के खर्च का कोई हिसाब नहीं सौंपा।
1- 72.12% बजट के लिए केंद्र पर निर्भर
2. भारी-भरकम खर्च का हिसाब नहीं
3. राजस्व वसूली में सुस्ती से कमाई घटी
4. आधी सरकारी कंपनियां ‘सफेद हाथी’
5. बिहार पर GSDP के 39% हिस्से का कर्ज
कैग रिपोर्ट से पता लगा है कि साल 2022-23 में बिहार की कुल देनदारियां (कर्ज) ₹2.88 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान था। यह बिहार की कुल सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 38.66% था।
धीमी गति से सुधार : मात्र ₹5 रुपये की निर्भरता घटी
कैसे बदलेगी तस्वीर?
- बुनियादी ढांचे पर जोर : सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाने से उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
- उद्योगों को बढ़ावा: जब तक राज्य में निजी निवेश नहीं आएगा, राज्य का अपना टैक्स (SGST) नहीं बढ़ेगा।
- टैक्स चोरी पर लगाम: परिवहन और खनन जैसे क्षेत्रों में लीकेज रोककर राजस्व बढ़ाया जा सकता है।
- सरकारी कंपनियों का कायाकल्प: घाटे में चल रही कंपनियों को बंद करना या उनमें सुधार करना अनिवार्य।
- नॉन-टैक्स राजस्व बढ़ाना: बालू खनन और पर्यटन की आय को व्यवस्थित व पारदर्शी बनाना होगा।
- वित्तीय पारदर्शिता : सरकारी विभाग अपने हर खर्च के हिसाब को पारदर्शी बनाएं, वरना केंद्र से मदद में देरी होगी।
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दुनिया गोल
Critical Minerals Deal: भारत-ब्राजील के बीच हुआ समझौता, कितनी घटाएगा चीन पर निर्भरता?
- ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत दौरे पर महत्वपूर्ण समझौता किया।
- महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा को लेकर हुआ एमओयू।
- अभी इस क्षेत्र में भारत 95% खनिजों का आयात करता है।
नई दिल्ली |
रिसर्च इंजन
AI Impact Summit-2026 : 88 देश जिस घोषणा पत्र पर सहमत हुए, उसे जानिए
- एआई तकनीक को लेकर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 16 से 21 फरवरी के बीच हुआ।
नई दिल्ली|
भारत में आयोजित हुए पहले एआई इम्पैक्ट समिट- 2026 (India AI Impact Summit 2026) का समापन शनिवार (21 feb) को हो गया। दिल्ली के भारत मंडपम में चली इस सम्मेलन में 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस बात की जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर दी।
मानव केंद्रित AI का दिया संदेश
इस घोषणा पत्र की प्रस्तावना (Preamble) में स्पष्ट किया गया है कि एआई के वादे को तभी साकार किया जा सकता है जब उसके लाभ मानवतावादी हों। इसी घोषणापत्र को लेकर IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर लिखा – “पूरी दुनिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ह्यूमन सेंट्रिक एआई सोच को समर्थन दिया है। यह डिक्लेरेशन ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत से प्रेरित है, ताकि एआई संसाधन पूरी दुनिया के लोगों के लिए उपलब्ध हो सकें।”
इन घोषणाओं पर बनी सहमति
- एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण किया जाए, जिसमें मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्ती कनेक्टिविटी हो।
- “वसुधैव कुटुम्बकम” से प्रेरित होकर सभी देशों तक एआई संसाधनों की पहुंच बढ़ानी चाहिए।
- डेमोक्रेटिक डिफ्यूजन ऑफ एआई चार्टर को एक स्वैच्छिक फ्रेमवर्क के रूप में नोट किया गया, जो फाउंडेशनल एआई संसाधनों तक पहुंच बढ़ाएगा।
- आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई के लिए एआई की व्यापक स्वीकृति हो।
- सुरक्षित और मजबूत एआई विश्वास बनाने और सामाजिक–आर्थिक लाभों को अधिकतम करने के लिए बुनियादी है।
- एआई सिस्टम में सुरक्षा महत्वपूर्ण है, उद्योग–प्रेरित स्वैच्छिक उपायों, तकनीकी समाधानों और नीतिगत फ्रेमवर्क को अपनाने पर जोर।
गौरतलब है कि यह घोषणापत्र बाध्यकारी नहीं है, यह देशों व संगठनों के लिए स्वैच्छिक है।
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