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एक अच्छी बात

विवेकानंद जो कभी बूढ़े नहीं हुए | एक अच्छी सी बात

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विवेकानंद बहुत कम उम्र में भारतीय जनमानस पर ऐसे छा गए,जैसे कोई पुराना बरगद का पेड़ धरती को ढक ले । बचपन में इनकीं तस्वीर देख हम सोचते थे कि इनकीं बुढ़ापे की शक्ल कैसी रही होगी । पके हुए बालों में आसन्न लगाए वह कैसे लगते होंगे । झुकी हुई कमर से उठी हुई आंखे आसमान को क्या इशारा करेंगी,मगर जब बड़े हुए और जाना कि यह शख्स तो बूढ़ा ही नही हुआ । सिर्फ़ 39 साल की ज़िन्दगी और ज़माना उनके पीछे । यक़ीन नही हुआ कि विवेकानंद बूढ़े नही हुए ।

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एक अच्छी बात

वो भारतीय..जिसने पैदल चलकर तिब्बत का नक्शा बनाया

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पंडित नैन सिंह रावत, साभार - विकीपीडिया

‘एक अच्छी सी बात’ के इस एपिसोड में हम बता रहे हैं नैन सिंह रावत (1830-1895) के बारे में, जिन्होने अंग्रेजों के लिए हिमालय के क्षेत्रों की खोजबीन की। नैन सिंह कुमाऊँ घाटी के रहने वाले थे। उन्होंने नेपाल से होते हुए तिब्बत तक के व्यापारिक मार्ग का मानचित्रण किया। उन्होने ही सबसे पहले ल्हासा की स्थिति तथा ऊँचाई ज्ञात की और तिब्बत से बहने वाली मुख्य नदी त्सांगपो (Tsangpo) के बहुत बड़े भाग का मानचित्रण भी किया।

 

नैन सिंह रावत पर गूगल डूडल

नैन सिंह रावत पर गूगल डूडल (साभार – गूगल)

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एक अच्छी बात

जब बीमार टैगोर ने बापू से मिलने की जिद ठान ली

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शांति निकेतन में बापू, बा और गुरुदेव टैगोर की तस्वीर (साभार - इंटरनेट)
सांकेतिक फोटो, साभार इंटरनेट

हमारे साथी अमित कुमार ग्वाल की आवाज में एक अच्छी सी बात …. पॉडकास्ट सुनिए। वे ऐसा ऐतिहासिक किस्सा सुना रहे हैं, जब बीमार रविंद्र टैगोर, महात्मा गांधी से मिलने जा पहुंचे थे। वे इतने बीमार थे कि ज़ीना चढ़ नहीं सकते थे, उन्हें कुर्सी पर बैठाकर ऊपर चढ़ाकर ले जाया गया। इस कुर्सी को इतिहास के चार महान लोगों ने पकड़ रखा था।

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एक अच्छी बात

फिनिश लाइन नहीं दिखी तो आगे ढकेल बनाया विनर

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फिनिश लाइन नहीं दिखी तो आगे ढकेल बनाया विनर
थम्बनेल - बोलते पन्ने टीम

ओलंपिक प्रतियोगिता के अंतिम राउंड में दौड़ते वक्त स्पेन के इव्हान फर्नांडिस ने जो कर दिखाया, वह स्पोर्टर्समैनशिप का सबसे अद्भुत उदाहारण है। आइए सुनते हैं फिनिश लाइन से जुड़ा यह शानदार किस्सा । प्रस्तुति है हमारे साथी अमित ग्वाल की।

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