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बोलें-सुनें

चीन से आयी थी भारतीयों की पसंदीदा चाय !

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History of the Tea : बिना चाय के हम भारतीय अपने दिन की कल्पना नहीं कर सकते। बिना चाय के हमारे घरों में मेहमानबाजी अघूरी मानी जाती है…। पर आखिर चाय हमारे जिंदगी का अहम हिस्सा किस तरह बन गई? चाय तो भारत में अंग्रेज लाए थे न, फिर आखिर चीन से इसका क्या संबंध है भला? चलिए जानते हैं बोलते पन्ने के रिसर्च इंजन पॉडकास्ट में । चाय का इतिहास पर रिसर्च के साथ इसे पेश किया है दिल्ली के पत्रकार गजेंद्र रिक्की सिंह ने।

 

 

 

 

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।