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मुक्तक

करवाचौथ : इंतजार की अमावस्या …

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पति के गुजरने के बाद करवाचौथ के मौके की टीस को कविता में बयां किया गया है। यह कविता जीवनसाथी की याद और बिछुड़न की कलात्मक अभिव्यक्ति है। इस कविता को लिखा और प्रस्तुत किया है शिवांगी ने। हमारी कविता श्रृंखला में आप जो भी कविताएं सुनेंगे.. वे सभी मूल सामग्री हैं। कविता सुनिए और अपना फीडबैक दीजिए।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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