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रिपोर्टर की डायरी

बांका : नवजात की मौत के दो दिन बाद नर्सिंग होम सील हुआ, मेडिकल टीम में क्रेडिट लेने की होड़!

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अस्पताल के पीछे के दरवाजे का ताला तुड़वाकर जब इसे खुलवाया गया तो तीन और प्रसूताएं मिलीं।
अस्पताल के पीछे के दरवाजे का ताला तुड़वाकर जब इसे खुलवाया गया तो तीन और प्रसूताएं मिलीं।
  • बांका में 9 फरवरी को निजी नर्सिंग होम में सुविधाओं के अभाव में नवजात की मौत हुई।
  • 11 फरवरी को चलाया गया जांच अभियान, नर्सिंग होम को सील किया, कई अन्य भी जांचे।
  • जिला प्रशासन बोला- हम जांच करने पहुंचे तो नर्सिंग होम के बाहर पीड़ित परिवार परेशान मिला।

बांका | दीपक कुमार

बिहार में धड़ल्ले से अवैध निजी नर्सिंग होम चलाए जा रहे हैं और इनके ऊपर तब जाकर कार्रवाई होती है जब किसी मासूम की जान चली जाती है। बांका जिले में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है, जब एक नवजात की मौत के बाद जाकर प्रशासन जागा। इसके दो दिन बाद सिविल सर्जन की बनाई एक मेडिकल टीम वहां पहुंची और नर्सिंग होम को सील किया गया। इस पूरे मामले में कार्रवाई का क्रेडिट लेने की होड़ भी देखने को मिली, मेडिकल टीम का कहना है कि वह नर्सिंग होम में जांच करने गई थी, तब उन्हें अचानक इस घटना का पता लगा और उन्होंने कार्रवाई करते हुए इसे सील किया है। दूसरी ओर, तथ्य कुछ और कहानी बता रहे हैं।

नवजात का जन्म और मौत 9 फरवरी को हुई है और स्वास्थ्य टीम ने 11 फरवरी को अस्पताल सील करने की कार्रवाई की है। इस घटना से जुड़ा पीड़ित परिवार बांका के चकसिया गांव का रहने वाला है। यहां के रुपेश यादव की पत्नी प्रीति देवी की बीते नौ फरवरी को तबीयत बिगड़ गई थी। तब गांव की आशा, बेला देवी के कहने पर उन्हें अमरपुर ब्लॉक के डॉ. आभा कुमारी के नर्सिंग होम ले जाया गया। यह नर्सिंग होम निरंजन मेडिकल हॉल परिसर में चलता है, इसके मालिक का नाम निरंजन शाह है जिनकी हाल में मौत हो चुकी है। अब अस्पताल कौन चला रहा है, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की टीम का कहना है कि उन्हें प्रसूता की ननद रानी देवी ने बताया कि उनकी भाभी की डिलीवरी करने के लिए अस्पताल ने 30 हजार रुपये जमा करवा लिए। उसी रात बेटा पैदा हुआ लेकिन उसकी हालत नाजुक होने पर डॉक्टर ने हायर सेंटर रेफर कर दिया, जहां पहुंचते ही उसे मृत घोषित कर दिया गया।

मेडिकल टीम का कहना है कि जब वे विशेष जांच अभियान के तहत इस अस्पताल में जांच करने पहुंचे तो वहां रानी देवी मिलीं और उन्होंने पूरी घटना बतायी। तब मेडिकल टीम ने अस्पताल संचालक को फोन लगाया जो बंद मिला। फिर मेडिकल टीम ने पुलिस की मदद लेकर पीछे के दरवाजे से नर्सिंग होम में प्रवेश किया। जहां उन्हें दो कमरों में बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं मिलीं और तीन अन्य गर्भवती एडमिट पाई गईं जिन्हें एंबुलेंस से सरकारी अस्पताल भिजवाया गया। इसके बाद मजिस्ट्रेट सह प्रखंड कल्याण पदाधिकारी गौतम कुमार की मौजूदगी में नर्सिंग होम के अंदर बने चार कमरों को 11 फरवरी को सील कर दिया गया।

इस तरह मेडिकल टीम का कहना है कि 11 फरवरी को हम अमरपुर ब्लॉक में विशेष अभियान के तहत जांच करने गए तो ये केस जानकारी में आया। जबकि तथ्य बता रहे हैं कि नौ फरवरी को नवजात की मौत हो जाने के बाद जिला प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए इस नर्सिंग होम को सील किया व  अमरपुर ब्लॉक में संचालित कई अन्य नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच की गई।

जांच टीम के सदस्य व सदर अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि इस नर्सिंग होम का लाइसेंस, नर्सिंग होम में तैनात डॉक्टरों के सर्टिफिकेट की जांच के बाद रिपोर्ट जिला में भेजी जाएगी, फिर इस मामले में ऐक्शन होगा। उस आशा वर्कर के ऊपर भी ऐक्शन लेने की बात कही गई है, जिसके जरिए प्रसूता को इस अवैध नर्सिंग होम में एडमिट कराया गया था।

 

 

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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प्रदेश रिपोर्ट

जहानाबाद : हॉस्टल में पढ़ रहे 5 साल के बच्चे से कुकर्म के बाद हुई थी हत्या

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  • PMCH की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्चे से साथ कुकर्म की पुष्टि।
  • 15 दिन पहले ही बच्चे का हुआ था गुरुकुल हॉस्टल में एडमिशन।

जहानाबाद | शिवा केशरी

बिहार के जहानाबाद के एक हॉस्टल में रहकर पढ़ रहे पांच साल के बच्चे की हत्या से पहले उसके साथ कुकर्म (अप्राकृतिक यौनाचार) हुआ था। इस बात की पुष्टि गुरुवार को पटना के पीएमसीएच से आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुई है।

शहर से सटे कनौदी बाईपास के पास के गुरुकुल छात्रावास में मासूम का दाखिला सिर्फ 15 दिन पहले हुआ था। यहां वह अपने 7 साल के भाई संग रहकर पढ़ रहा था।

जहानाबाद एसपी अपराजित लोहान ने शुक्रवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस ने छात्रावास में रहने वाले कैंटीन के एक गार्ड सुदामा प्रसाद को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।

इसके पहले स्कूल व हॉस्टल के संचालक तरुण कुमार उर्फ गांधी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

बता दें कि चार दिन पूर्व सोमवार को निजी स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ने वाले पांच वर्षीय एक मासूम बच्चा खून से लथपथ मिला था।

उसके गर्दन, पेट, आंख के ऊपर और उसके गुप्तांग पर धारदार हथियार से काटे जाने के कई जख्म पाए गए थे । घटना को लेकर काफी हंगामा मचा था। मृत लड़के के पिता के बयान पर उसकी हत्या किए जाने की प्राथमिकी थाने में दर्ज हुई थी।

जहानाबाद सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए मृत बच्चे के शव को लाया गया था। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बेहतर जांच रिपोर्ट के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए पीएमसीएच भेजा था। एफएसएल की टीम ने भी घटनास्थल से कई सैंपल इकट्ठा किए थे।

पीएमसीएच में तीन डॉक्टरों की मेडिकल टीम गठित कर मंगलवार की सुबह बच्चे का पोस्टमॉर्टम कराया गया। गुरुवार को यहां उसकी रिपोर्ट आई जिसमें उसके साथ दुष्कर्म किए जाने की भी पुष्टि हुई। सोडोमी की पुष्टि होने के बाद परिजनों काफी गुस्से में हैं और उन्होंने सख्त से सख्त सज़ा की मांग की है।

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प्रदेश रिपोर्ट

अररिया में सरेआम युवक की गला काटकर हत्या; भीड़ ने आरोपी को पीट-पीटकर मार डाला

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लाल रंग के कपड़े पहने (इनसेट) युवक ने चाकू से हत्या कर दी, जिससे मृतक का सिर व धड़ अलग हो गया। भीड़ ने आरोपी को मार डाला।
लाल रंग के कपड़े पहने (इनसेट) युवक ने चाकू से हत्या कर दी, जिससे मृतक का सिर व धड़ अलग हो गया। भीड़ ने आरोपी को मार डाला।
  • बिहार के अररिया में सड़क पर गला काटकर युवक ने हत्या की।
  • फिर आरोपी युवक को भीड़ ने घेरकर पीट-पीटकर मार डाला।
  • गुस्साई भीड़ ने आगजनी भी की, मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात।

अररिया | हमारे संवाददाता

बिहार के अररिया जिले में गुरुवार सुबह एक व्यक्ति की सरेआम गला काटकर हत्या कर दी गई, जिसमें युवक का सिर व धड़ अलग-अलग हो गया। इस दृश्य को देखकर प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोपी को पकड़ लिया और पीट-पीटकर उसे मार डाला।

इस वीभत्स घटना के बाद गुस्साए लोगों ने फारबिसगंज के सुभाष चौक पर आगजनी भी की। मौके पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात है।

मृतक पिकअप चालक जिसकी गला काटकर हत्या कर दी गई।

मृतक अली हुसैन एक पिकअप चालक थे, जिनकी गला काटकर हत्या कर दी गई।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ठेले पर सत्तू बेचने वाले युवक ने चाकू से एक पिकअप चालक पर हमला किया। फिर उसका गला भी रेत दिया।

यह घटना फारबिसगंज मुख्यालय के मार्केट गेट नंबर-2 के पास की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि झगड़ा ठेले की जगह पर पिकअप लगाने को लेकर हुआ।

ठेले के पास हाथ में चाकू लिए खड़े इस युवक को हत्यारोपी बताया जा रहा है।

ठेले के पास हाथ में चाकू लिए खड़े इस युवक को हत्यारोपी बताया गया, जिसे भीड़ ने मार डाला।

घटना के समय प्रत्यक्षदर्शियों ने जो वीडियो शूट किए हैं, उसमें आरोपी युवक के हाथ में चाकू देखा जा सकता है। खास बात यह भी है कि आरोपी ने मौके से भागने की कोशिश नहीं की।

निर्मम हत्या को देखकर आसपास के लोगों ने आरोपी को घेरकर पीटा, उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया जहां पुलिस ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतक के सिर के पास खड़ा हत्यारोपी युवक।

मृतक के सिर के पास खड़ा हत्यारोपी युवक।

मृतक पिकअप चालक की पहचान जोगबनी के अमोना निवासी अली हुसैन के रूप में हुई है। भीड़ की हिंसा में मारे गए हत्यारोपी युवक की पहचान रवि चौहान के रूप में हुई है। जो मटियारी के चौहान टोला का रहने वाला था।

सरेआम मर्डर में मारे गए अली हुसैन व भीड़ की हिंसा में मारे गए रवि चौहान के मामलों की पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इनके बीच पहले से कई झगड़ा तो नहीं था। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि भीड़ में किसने आरोपी युवक पर जानलेवा हमला किया। फिलहाल इस घटना की चर्चा पूरे बिहार में है।

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प्रदेश रिपोर्ट

आर्थिक अपराध इकाई की जांच के घेरे में लखीसराय के पूर्व DM मिथिलेश मिश्र, जानिए क्या है पूरा मामला?

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लखीसराय में एक साल से अधिक समय तक जिलाधिकारी पद पर रहे मिथिलेश कुमार मिश्र ने लोकप्रियता हासिल की, अब वे जांच के दायरे में आ गए हैं।
लखीसराय में एक साल से अधिक समय तक जिलाधिकारी पद पर रहे मिथिलेश कुमार मिश्र ने लोकप्रियता हासिल की, अब वे जांच के दायरे में आ गए हैं।
  • 7 अप्रैल को जिलाधिकारी मिथिलेश कुमार मिश्र का हुआ था तबादला।

लखीसराय | गोपाल प्रसाद आर्य

बिहार के लखीसराय के जिलाधिकारी मिथिलेश कुमार मिश्र का तबादला किए जाने के अगले दिन आर्थिक अपराध शाखा उनके कार्यालय पर पहुंची और उनके कार्यकाल की फाइलें खंगाली गईं।

प्रशासनिक सूत्रों से पता लगा है कि पटना मुख्यालय में मिली लिखित शिकायतों के बाद ईओयू ने यह बड़ी कार्रवाई शुरू की है। ईओयू की टीम बुधवार की शाम को लखीसराय पहुंची।

EOU की रडार पर 16 महीने का कार्यकाल

मिथिलेश मिश्र का लखीसराय में कार्यकाल लगभग एक साल चार महीने का रहा। वे 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।  सूत्रों के अनुसार, ईओयू की टीम आज सुबह जिला कार्यालय पहुंचकर जांच आगे बढ़ाएगी। सूत्रों के मुताबिक, आर्थिक अपराध शाखा की जांच के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं-

शस्त्र लाइसेंस की जांच – पिछले एक साल में जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों की फाइलों की गहनता से पड़ताल की जाएगी। इसके लिए डिप्टी कलेक्टर शशि भूषण कुमार से रिकॉर्ड तलब किए जा सकते हैं।

कला-संस्कृति और खेल विभाग-  खेल पदाधिकारी मृणाल रंजन के विभाग से जुड़े दस्तावेजों, सांस्कृतिक आयोजनों और खिलाड़ियों को दिए गए फंड की कार्यप्रणाली की जांच होगी।

धान अधिप्राप्ति- धान खरीद से जुड़े अहम दस्तावेजों और विकास कार्यों की फाइलों को भी बारीकी से देखा जाएगा।

यह जांच अभियान अगले दो से तीन दिनों तक चलने की संभावना है। इस दौरान वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

तबादले के पीछे की कूटनीति और विवाद

मिथिलेश मिश्र के तबादले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सरकार बनने के महज पांच महीने बाद ही उनका तबादला कर उन्हें पटना सचिवालय की सामान्य शाखा में तैनात कर दिया गया है। इसके पीछे दो प्रमुख कारण माने जा रहे हैं-

डिप्टी सीएम से टकराव: चर्चा है कि लखीसराय के डीएम का स्थानीय मंत्रियों और रसूखदारों के साथ तालमेल सही नहीं था। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने भी नवंबर-25 में वोटिंग के दौरान उन पर अनसुनी करने के आरोप लगाए थे।

नीतीश कुमार का दौरा: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लखीसराय आगमन के दौरान हुई कुछ तकनीकी चूकों को भी उनके तबादले की एक वजह माना जा रहा है।

जनता में लोकप्रिय, लेकिन विवादों ने घेरा

एक तरफ जहां उन पर जांच की तलवार लटकी है, वहीं लखीसराय की जनता के बीच उनकी छवि एक ‘काम करने वाले अधिकारी’ की रही है। उनके कार्यकाल में बालगुदर गांव का 30 साल पुराना हिंदू-मुस्लिम जल विवाद सुलझाया गया।

उनके कार्यकाल में लाल पहाड़ी के ऐतिहासिक धरोहर को पहचान दिलाई गई। केंद्रीय विद्यालय के पास बाईपास सड़क का निर्माण शुरू हुआ। शहर के सौंदर्यकरण और म्यूजियम को आधुनिक रूप देने में उनकी अहम भूमिका रही।

इसके अलावा उनके कार्यकाल में फिल्म फेस्टिवल, लखीसराय फेस्टिवल, महिला फुटबॉल खेल आदि उल्लेखनीय कार्यक्रम हुए। इसमें लखीसराय फेस्टिवल का नाम ‘लक्खीसराय फेस्टिवल’ किए जाने को लेकर भी विवाद उपजा था।

फिलहाल लखीसराय का प्रभार पड़ोसी जिले के जिलाधिकारी को सौंपे जाने की चर्चा है।

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