रिसर्च इंजन
बिहार : गरीबों को पक्का मकान देने की योजना चुनावी साल में बनी चुनौती
- पीएम आवास-शहरी योजना के पहले चरण का काम दिसंबर अंत तक पूरा होने की डेडलाइन।
- अभी एक लाख आवासों का निर्माण बाकी और दूसरे चरण की शहरी योजना शुरू हो गई।
- राज्य सरकार ने ग्रामीण इलाके के लिए केंद्र से 13 लाख नए मकान स्वीकृत करा लिए।
- योजना तेजी से लागू कराने का अभियान जारी, रिश्वत मांगने और किश्त लटकाने के मामले मिल रहे।

बिहार की आबादी का लगभग 26.59% बहुआयामी गरीबी है, नीति आयोग(2022-23) की रिपोर्ट के अनुसार। तस्वीर- इंटरनेट
अररिया | जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के क्रियान्वयन में व्यापक पैमाने पर धांधली के मामले सामने आ रहे हैं। डीडीसी रोजी कुमारी ने एक ग्रामीण आवास सहायक कुमार गौरव की सेवा 24 सितंबर को समाप्त कर दी जिसने बड़ी संख्या में लाभार्थियों की किश्त दबा ली थी।
मामला रानीगंज प्रखंड के खरहट और नन्दनपुर ग्राम पंचायतों में पीएम आवास योजना की जिम्मेदारी संभाल रहे ग्रामीण आवास सहायक कुमार गौरव से जुड़ा है। रानीगंड बीडीओ की जांच में पता लगा कि आवास सहायक गौरव ने 485 ग्रामीण लाभुकों (beneficiary) को पहली किश्त का भुगतान किया था पर दूसरी किश्त सिर्फ 226 लाभुकों को भेजी गई। इस मामले पर जवाबतलब करने पर आरोपी ने जवाब नहीं दिया। साथ ही 22 सितंबर को DRDA कार्यालय पहुंचकर कथिततौर पर नशे में हंगामा करते हुए कर्मचारियों से भिड़ गए।
SC/ST कोटे के लाभुकों को मकान नहीं दिया – इसी जिले में एक अन्य मामला एससी-एसटी कोटे के लाभुकों को पीएम आवास योजना का लाभ न मिलने को लेकर सामने आया है। DDC को शिकायत मिली कि आवास योजना में अति पिछड़े व आदिवासी समुदाय के लोगों को जानबूझकर योजना से वंचित रखा गया, शिकायत पर डीडीसी ने जांच शुरू करा दी है।
लापरवाही करने पर सैलरी काटी – इससे पहले 27 अगस्त को अररिया में दस आवास सहायकों पर कार्रवाई हो चुकी है। डीडीसी स्तर से उनके मानदेय से दस फीसद कटौती एक साल तक करने का आदेश दिया था ।उससे पहले दो आवास पर्यवेक्षक से भी 25 फीसद कटौती के आदेश हुए थे। लेकिन फील्ड में काम करने वाले स्टाफ के कार्य प्रणाली में सुधार होता नहीं दिख रहा है।
2- पटना : मकान दिलाने के नाम पर वसूली, नौकरी गई
बीते अप्रैल में मसौढ़ी प्रखंड के भैंसवा पंचायत में कार्यरत आवास सहायक रागिनी कुमारी पर लाभुकों से 2-2 हजार रुपये वसूली का आरोप लगा, जांच में दोषी पाए जाने के बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
3- वैशाली : 60 ग्रामीणों से दो-दो हजार वसूले
इस साल जनवरी में ओस्ती हरपुर पंचायत के वार्ड नंबर 11 में पंचायत आवास सहायक रामप्रवेश प्रताप को ग्रामीणों ने अवैध वसूली करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि आरोपी आवास सहायक पंचायत में कम से कम 60 लोगों से आवास योजना में मकान दिलवाने के नाम पर दो-ढाई हजार रुपये वसूली कर रहा था। इस पर अधिकारियों ने कहा था कि शिकायत आने पर जांच करेंगे।
4- मुंगेर : जिन्हें ग्रामीण योजना में लाभ मिला, उन्हीं को शहरी में भी मकान दे दिया
यहां की संग्रामपुर नगर पंचायत के तहत जिन्हें पीएम आवास योजना-शहरी के तहत पक्के मकान का लाभ दिया गया है, उन्हें पहले पीएम आवास-ग्रामीण योजना के तहत मकान दिया जा चुका था। ये मामला इसी महीने के पहले सप्ताह में प्रकाश में आया जिसकी जांच की जा रही है। दरअसल, संग्रामपुर नगर पंचायत का गठन लगभग तीन साल पहले कुसमार और झिकुली पंचायत को विघटित करके किया गया था। इसमें कुसमार पंचायत का पूरा हिस्सा व झिकुली पंचायत का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा शामिल था। इन पंचायतों में जिन लोगों को पीएम आवास योजना-ग्रामीण का लाभ मिला था, उन्हीं ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर नई योजना में भी मकान हथिया लिए। इस मामले की जांच चल रही है।
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मकान एलॉटमेंट और किश्त में देरी पर लगता है जुर्माना फिर भी देरी
बिहार मेें किश्त जारी करने में देरी व लापरवाही के मामले तब सामने आ रहे हैं जबकि इसको लेकर केंद्र जुर्माना लगाता है। 2022 से केंद्र सरकार किसी आवास की स्वीकृति में एक महीने से ज्यादा की देरी होने पर प्रति आवास 10 रुपये की कटौती करता है। साथ ही, अगर स्वीकृति मेें दो महीने की देरी हुई तो 20 रुपये प्रति आवास की दर से राशि कटौती होती है। इसके अलावा, लाभुकों को पहली किश्त की राशि देने में एक सप्ताह से अधिक की देरी करने पर 10 रुपये प्रति आवास हर सप्ताह की दर से राशि की कटौती की जाएगी।
कैग रिपोर्ट ने बिहार में मकान के बदले रिश्वत की पोल खोली
कैग रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में लगभग ₹450 करोड़ के फंड के दुरुपयोग के मामले सामने आए, जिसके लिए 2023 में 5 अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया, लेकिन कार्रवाई सीमित रही। मुख्य रूप से मकान की स्वीकृति, किश्त जारी करने और निर्माण सामग्री में भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ।
- 2023 में जारी कैग रिपोर्ट में बिहार के ग्रामीण इलाकों में PMAY-G योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
- रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पंचायत स्तर पर अधिकारियों ने निर्माण सामग्री और सब्सिडी राशि जारी करने के लिए रिश्वत ली।
- मुजफ्फरपुर और कटिहार जिलों में पंचायत अधिकारियों ने मकान के लाभार्थियों से रिश्वत वसूली की।
- मुजफ्फरपुर के सरैया ब्लॉक में एक वार्ड सदस्य ने लाभार्थी को धमकाकर भुगतान करवाया।
- मकान के ढांचों की जियो-टैगिंग को जानबूझकर टाला गया और अधिकारियों ने जानकारी न होने का बहाना बनाया।

इस साल के अंत तक शहरी गरीबों को मकान बनाकर देना सीएम नीतीश के लिए चुनौती। (साभार- इंटरनेट)
बिहार सरकार की घोषणा- अविवाहित वयस्क को पीएम आवास
इस साल जुलाई में राज्य सरकार ने घोषणा की कि अविवाहित वयस्क को भी एकल परिवार मानते हुए इस योजना के तहत पक्का मकान मिल सकता है। ग्रामीण विकास विभाग की ओर से जारी किए गए निर्देश के अनुसार, पति-पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे परिवार हैं जबकि ऐसे अविवाहित वयस्क जिनके माता-पिता जीवित नहीं हैं, उन्हें भी एकल परिवार माना जाएगा।
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बड़े वोटवैंक को साध सकता है पक्का मकान
- बिहार में आवंटित 84 लाख यूनिट मकानों में से 2025 तक 36.64 लाख मकान बन गए जो करीब दो करोड़ लोगों को प्रभावित करता है।
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ग्रामीण इलाके में बने आवासों से 35% EBC, 20% SC/ST, 25% OBC परिवारों को लाभ मिला जो सरकार के लिए वोट में बदल सकता है।
- शहरी गरीबों के लिए मकान बनाने में देरी से झुग्गियों में रहने वाले मजदूर प्रभावित जो एक बड़ा शहरी वोटर वर्ग हैं।
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🏠 पीएम आवास योजना (बिहार) : टाइमलाइन व प्रमुख घटनाएँ
📌 2016–2022
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बिहार में 37 लाख मकान स्वीकृत, जिनमें से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र के लिए।
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केंद्र ने देरी पर जुर्माना नियम लागू किया (10–20 रु. प्रति आवास कटौती, किश्त देर पर साप्ताहिक जुर्माना)।
📌 मार्च 2023
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शहरी योजना (PMAY-U 1.0): 2.64 लाख मकान स्वीकृत, पर आधे ही पूरे (1.56 लाख)।
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बैकलॉग → 1.08 लाख मकान अधूरे।
📌 अगस्त 2023
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CAG रिपोर्ट: ₹450 करोड़ फंड दुरुपयोग, रिश्वत व गड़बड़ी उजागर।
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5 अधिकारियों को नोटिस, कार्रवाई सीमित रही।
📌 सितंबर 2023
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अररिया: आवास सहायक पर 259 लाभुकों की किश्त रोकने का आरोप, नौकरी गई।
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इसी महीने SC/ST कोटे में आवास न देने के आरोप में जांच शुरू।
📌 अप्रैल 2024
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पटना (मसौढ़ी): आवास सहायक पर ₹2-2 हजार वसूली का आरोप, सेवा समाप्त।
📌 जनवरी 2024
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वैशाली: आवास सहायक ने 60 ग्रामीणों से अवैध वसूली की, ग्रामीणों ने पकड़ा।
📌 2024 (पहला सप्ताह)
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मुंगेर: जिन परिवारों को PMAY-G में घर मिला था, उन्हें PMAY-U में भी आवास स्वीकृत। जांच शुरू
📌 अगस्त 2024
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RDD: बैकलॉग क्लियर करने के बाद 13.5 लाख नई यूनिट्स की मांग केंद्र से की।
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अब तक 36.64 लाख मकान बनकर तैयार (98.94% बैकलॉग पूरा)।
📌 जुलाई 2025
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बिहार सरकार ने घोषणा की:
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अविवाहित वयस्क को भी एकल परिवार मानकर आवास मिलेगा।
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📌 फरवरी 2025
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केंद्र ने PMAY-U 2.0 को मंज़ूरी दी → पहले चरण में 1 लाख मकान।
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डेडलाइन: दिसंबर 2025 तक पहले चरण का बैकलॉग पूरा करना।
📌 2025 (चुनावी साल)
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RDD ने “Angikaar 2025” और “निगरानी अभियान” शुरू किए।
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लक्ष्य: बैकलॉग खत्म कर ग्रामीण व शहरी दोनों योजनाओं की रफ्तार बढ़ाना।
रिसर्च इंजन
कैसे समृद्ध बनेगा बिहार? हर 100 में से 72 रुपये के लिए हम केंद्र के भरोसे, CAG Report में खुलासा
- बिहार में साल 2022-23 के लेखे-जोखे से जुड़ी कैग रिपोर्ट विधानसभा में पेश हुई।
- नीतीश सरकार ने ₹70,877 करोड़ के खर्च का कोई हिसाब नहीं सौंपा।
1- 72.12% बजट के लिए केंद्र पर निर्भर
2. भारी-भरकम खर्च का हिसाब नहीं
3. राजस्व वसूली में सुस्ती से कमाई घटी
4. आधी सरकारी कंपनियां ‘सफेद हाथी’
5. बिहार पर GSDP के 39% हिस्से का कर्ज
कैग रिपोर्ट से पता लगा है कि साल 2022-23 में बिहार की कुल देनदारियां (कर्ज) ₹2.88 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान था। यह बिहार की कुल सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 38.66% था।
धीमी गति से सुधार : मात्र ₹5 रुपये की निर्भरता घटी
कैसे बदलेगी तस्वीर?
- बुनियादी ढांचे पर जोर : सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाने से उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
- उद्योगों को बढ़ावा: जब तक राज्य में निजी निवेश नहीं आएगा, राज्य का अपना टैक्स (SGST) नहीं बढ़ेगा।
- टैक्स चोरी पर लगाम: परिवहन और खनन जैसे क्षेत्रों में लीकेज रोककर राजस्व बढ़ाया जा सकता है।
- सरकारी कंपनियों का कायाकल्प: घाटे में चल रही कंपनियों को बंद करना या उनमें सुधार करना अनिवार्य।
- नॉन-टैक्स राजस्व बढ़ाना: बालू खनन और पर्यटन की आय को व्यवस्थित व पारदर्शी बनाना होगा।
- वित्तीय पारदर्शिता : सरकारी विभाग अपने हर खर्च के हिसाब को पारदर्शी बनाएं, वरना केंद्र से मदद में देरी होगी।
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दुनिया गोल
Critical Minerals Deal: भारत-ब्राजील के बीच हुआ समझौता, कितनी घटाएगा चीन पर निर्भरता?
- ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत दौरे पर महत्वपूर्ण समझौता किया।
- महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा को लेकर हुआ एमओयू।
- अभी इस क्षेत्र में भारत 95% खनिजों का आयात करता है।
नई दिल्ली |
रिसर्च इंजन
AI Impact Summit-2026 : 88 देश जिस घोषणा पत्र पर सहमत हुए, उसे जानिए
- एआई तकनीक को लेकर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 16 से 21 फरवरी के बीच हुआ।
नई दिल्ली|
भारत में आयोजित हुए पहले एआई इम्पैक्ट समिट- 2026 (India AI Impact Summit 2026) का समापन शनिवार (21 feb) को हो गया। दिल्ली के भारत मंडपम में चली इस सम्मेलन में 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस बात की जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर दी।
मानव केंद्रित AI का दिया संदेश
इस घोषणा पत्र की प्रस्तावना (Preamble) में स्पष्ट किया गया है कि एआई के वादे को तभी साकार किया जा सकता है जब उसके लाभ मानवतावादी हों। इसी घोषणापत्र को लेकर IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर लिखा – “पूरी दुनिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ह्यूमन सेंट्रिक एआई सोच को समर्थन दिया है। यह डिक्लेरेशन ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत से प्रेरित है, ताकि एआई संसाधन पूरी दुनिया के लोगों के लिए उपलब्ध हो सकें।”
इन घोषणाओं पर बनी सहमति
- एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण किया जाए, जिसमें मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्ती कनेक्टिविटी हो।
- “वसुधैव कुटुम्बकम” से प्रेरित होकर सभी देशों तक एआई संसाधनों की पहुंच बढ़ानी चाहिए।
- डेमोक्रेटिक डिफ्यूजन ऑफ एआई चार्टर को एक स्वैच्छिक फ्रेमवर्क के रूप में नोट किया गया, जो फाउंडेशनल एआई संसाधनों तक पहुंच बढ़ाएगा।
- आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई के लिए एआई की व्यापक स्वीकृति हो।
- सुरक्षित और मजबूत एआई विश्वास बनाने और सामाजिक–आर्थिक लाभों को अधिकतम करने के लिए बुनियादी है।
- एआई सिस्टम में सुरक्षा महत्वपूर्ण है, उद्योग–प्रेरित स्वैच्छिक उपायों, तकनीकी समाधानों और नीतिगत फ्रेमवर्क को अपनाने पर जोर।
गौरतलब है कि यह घोषणापत्र बाध्यकारी नहीं है, यह देशों व संगठनों के लिए स्वैच्छिक है।
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