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बिहार : गरीबों को पक्का मकान देने की योजना चुनावी साल में बनी चुनौती

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बिहार के एक गांव का दृश्य (फोटो क्रेडिट - Flickr)
बिहार के एक गांव का दृश्य (फोटो क्रेडिट - Flickr)
  • पीएम आवास-शहरी योजना के पहले चरण का काम दिसंबर अंत तक पूरा होने की डेडलाइन।
  • अभी एक लाख आवासों का निर्माण बाकी और दूसरे चरण की शहरी योजना शुरू हो गई।
  • राज्य सरकार ने ग्रामीण इलाके के लिए केंद्र से 13 लाख नए मकान स्वीकृत करा लिए।
  • योजना तेजी से लागू कराने का अभियान जारी, रिश्वत मांगने और किश्त लटकाने के मामले मिल रहे।
(अररिया-मुंगेर से इनपुट के साथ) नई दिल्ली |
गरीबों के पक्के मकान का सपना पूरा करने का वादा बिहार सरकार के लिए चुनावी साल में चुनौती बन गया है। सरकार को पीएम आवास योजना 1.0 के स्वीकृत मकानों को दिसंबर-2025 तक बनाकर देना है जिनमें से अभी एक लाख मकानोें का निर्माण लटका हुआ है। दूसरी ओर, ग्रामीण इलाकों में पक्के मकान बनाकर देने की योजना तेज गति से चल रही है पर इसमें भी भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं जो सरकार के लिए सरदर्दी बने हुए हैं। बीते बुधवार को अररिया में एक ग्रामीण आवास सहायक की सेवा समाप्त कर दी गई क्योंकि उसने दो ग्राम पंचायतों के लाभार्थियों को मकान निर्माण के लिए दूसरी किश्त ही जारी नहीं की। गौरतलब है कि बिहार में गरीबों को पक्का मकान मिलना एक बड़े वोटर वर्ग को प्रभावित कर सकता है, ऐसे में NDA सरकार अपने ‘विकास के वादे’ को समय से पूरा करने के लिए कोई कसर छोड़ना नहीं चाहेगी।
शहरी क्षेत्र : पहले चरण के मकान अब तक लटके, 2.0 योजना शुरू हो गई
बिहार के शहर में रहने वाले गरीबों को पक्का मकान देने की योजना काफी धीमी गति से चल रही है। PMAY-U 1.0 के तहत 50% से कम पूर्णता दर है। यानी पहले चरण में जितने मकान बनाने के लिए स्वीकृत हुए थे, उनसे आधे ही तैयार हो पाए हैं। नगर विकास एवं आवास विभाग के अनुसार, इस योजना के पहले चरण के अंतर्गत प्रदेश में अब तक कुल 264604 आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 156550 आवासों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यानी अभी 108,054 मकानों का निर्माण बाकी हैं। शहरी क्षेत्र में इस देरी के चलते आवास बनाने की डेडलाइन को Dec-2025 कर दिया गया है पर 22 नवंबर से पहले ही राज्य में चुनाव होने हैं, ऐसे में इस लक्ष्य को हासिल करना चुनौती बन गया है। 
पीएम आवास-शहरी योजना 2.0 शुरू हो गईवित्तीय वर्ष 2024-25 में PMAY-U 2.0 के पहले चरण के लिए 100124 लाभुकों के घरों का निर्माण होना है, इसके लिए केंद्र सरकार ने बीती 20 फरवरी को ही स्वीकृति दे दी है। अब इसने निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है पर सरकार को पहले चरण की योजना वाले मकानों की यूनिट का बैकलॉग भी पूरा करना होगा, जिसकी अधिकतम समय सीमा इस साल के अंत तक है। बता दें कि दूसरे चरण की योजना 2029 तक चलेगी।
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:: ग्रामीण क्षेत्र की पीएम आवास योजना में उजागर हो रहा भ्रष्टाचार
NITI Aayog ने 2022-23 में रिपोर्ट किया कि बिहार की आबादी का लगभग 26.59% बहुआयामी गरीबी है। (साभार इंटरनेट)

बिहार की आबादी का लगभग 26.59% बहुआयामी गरीबी है, नीति आयोग(2022-23) की रिपोर्ट के अनुसार। तस्वीर- इंटरनेट 

 

1- अररिया : 485 लाभुकों में से 259 को दूसरी किश्त नहीं भेजी 

अररिया | जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के क्रियान्वयन में व्यापक पैमाने पर धांधली के मामले सामने आ रहे हैं। डीडीसी रोजी कुमारी ने एक ग्रामीण आवास सहायक कुमार गौरव की सेवा 24 सितंबर को समाप्त कर दी जिसने बड़ी संख्या में लाभार्थियों की किश्त दबा ली थी।

मामला रानीगंज प्रखंड के खरहट और नन्दनपुर ग्राम पंचायतों में पीएम आवास योजना की जिम्मेदारी संभाल रहे ग्रामीण आवास सहायक कुमार गौरव से जुड़ा है। रानीगंड बीडीओ की जांच में पता लगा कि आवास सहायक गौरव ने 485 ग्रामीण लाभुकों (beneficiary) को पहली किश्त का भुगतान किया था पर दूसरी किश्त सिर्फ 226 लाभुकों को भेजी गई। इस मामले पर जवाबतलब करने पर आरोपी ने जवाब नहीं दिया। साथ ही 22 सितंबर को DRDA कार्यालय पहुंचकर कथिततौर पर नशे में हंगामा करते हुए कर्मचारियों से भिड़ गए।

SC/ST कोटे के लाभुकों को मकान नहीं दिया – इसी जिले में एक अन्य मामला एससी-एसटी कोटे के लाभुकों को पीएम आवास योजना का लाभ न मिलने को लेकर सामने आया है। DDC को शिकायत मिली कि आवास योजना में अति पिछड़े व आदिवासी समुदाय के लोगों को जानबूझकर योजना से वंचित रखा गया, शिकायत पर डीडीसी ने जांच शुरू करा दी है।

लापरवाही करने पर सैलरी काटी – इससे पहले 27 अगस्त को अररिया में दस आवास सहायकों पर कार्रवाई हो चुकी है। डीडीसी स्तर से उनके मानदेय से दस फीसद कटौती एक साल तक करने का आदेश दिया था ।उससे पहले दो आवास पर्यवेक्षक से भी 25 फीसद कटौती के आदेश हुए थे। लेकिन फील्ड में काम करने वाले स्टाफ के कार्य प्रणाली में सुधार होता नहीं दिख रहा है।

2- पटना : मकान दिलाने के नाम पर वसूली, नौकरी गई

बीते अप्रैल में मसौढ़ी प्रखंड के भैंसवा पंचायत में कार्यरत आवास सहायक रागिनी कुमारी पर लाभुकों से 2-2 हजार रुपये वसूली का आरोप लगा, जांच में दोषी पाए जाने के बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।

3- वैशाली : 60 ग्रामीणों से दो-दो हजार वसूले  

इस साल जनवरी में ओस्ती हरपुर पंचायत के वार्ड नंबर 11 में पंचायत आवास सहायक रामप्रवेश प्रताप को ग्रामीणों ने अवैध वसूली करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि आरोपी आवास सहायक पंचायत में कम से कम 60 लोगों से आवास योजना में मकान दिलवाने के नाम पर दो-ढाई हजार रुपये वसूली कर रहा था। इस पर अधिकारियों ने कहा था कि शिकायत आने पर जांच करेंगे।

4- मुंगेर : जिन्हें ग्रामीण योजना में लाभ मिला, उन्हीं को शहरी में भी मकान दे दिया

यहां की संग्रामपुर नगर पंचायत के तहत जिन्हें पीएम आवास योजना-शहरी के तहत पक्के मकान का लाभ दिया गया है, उन्हें पहले पीएम आवास-ग्रामीण योजना के तहत मकान दिया जा चुका था। ये मामला इसी महीने के पहले सप्ताह में प्रकाश में आया जिसकी जांच की जा रही है। दरअसल, संग्रामपुर नगर पंचायत का गठन लगभग तीन साल पहले कुसमार और झिकुली पंचायत को विघटित करके किया गया था। इसमें कुसमार पंचायत का पूरा हिस्सा व झिकुली पंचायत का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा शामिल था। इन पंचायतों में जिन लोगों को पीएम आवास योजना-ग्रामीण का लाभ मिला था, उन्हीं ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर नई योजना में भी मकान हथिया लिए। इस मामले की जांच चल रही है।

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मकान एलॉटमेंट और किश्त में देरी पर लगता है जुर्माना फिर भी देरी 

बिहार मेें किश्त जारी करने में देरी व लापरवाही के मामले तब सामने आ रहे हैं जबकि इसको लेकर केंद्र जुर्माना लगाता है। 2022 से केंद्र सरकार किसी आवास की स्वीकृति में एक महीने से ज्यादा की देरी होने पर प्रति आवास 10 रुपये की कटौती करता है। साथ ही, अगर स्वीकृति मेें दो महीने की देरी हुई तो 20 रुपये प्रति आवास की दर से राशि कटौती होती है। इसके अलावा, लाभुकों को पहली किश्त की राशि देने में एक सप्ताह से अधिक की देरी करने पर 10 रुपये प्रति आवास हर सप्ताह की दर से राशि की कटौती की जाएगी।

कैग रिपोर्ट ने बिहार में मकान के बदले रिश्वत की पोल खोली

कैग रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में लगभग ₹450 करोड़ के फंड के दुरुपयोग के मामले सामने आए, जिसके लिए 2023 में 5 अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया, लेकिन कार्रवाई सीमित रही। मुख्य रूप से मकान की स्वीकृति, किश्त जारी करने और निर्माण सामग्री में भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ।

  • 2023 में जारी कैग रिपोर्ट में बिहार के ग्रामीण इलाकों में PMAY-G योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
  • रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पंचायत स्तर पर अधिकारियों ने निर्माण सामग्री और सब्सिडी राशि जारी करने के लिए रिश्वत ली।
  • मुजफ्फरपुर और कटिहार जिलों में पंचायत अधिकारियों ने मकान के लाभार्थियों से रिश्वत वसूली की।
  • मुजफ्फरपुर के सरैया ब्लॉक में एक वार्ड सदस्य ने लाभार्थी को धमकाकर भुगतान करवाया।
  • मकान के ढांचों की जियो-टैगिंग को जानबूझकर टाला गया और अधिकारियों ने जानकारी न होने का बहाना बनाया।
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इस साल के अंत तक शहरी गरीबों को मकान बनाकर देना सीएम नीतीश के लिए चुनौती। (साभार- इंटरनेट)

इस साल के अंत तक शहरी गरीबों को मकान बनाकर देना सीएम नीतीश के लिए चुनौती। (साभार- इंटरनेट)

 

चुनावी साल में सरकार ने 13.5 लाख नए मकान केंद्र से मांगे 
बिहार के ग्रामीण विकास विभाग (RDD) ने पिछले साल अगस्त में जानकारी दी कि PMAY-G के तहत बैकलॉग क्लियर करने के बाद 13.5 लाख नई यूनिट्स की मांग की केंद्र से की गई है। बिहार सरकार के मुताबिक, 2016 से 2024 तक 37 लाख स्वीकृत यूनिट्स में से 36.64 लाख का निर्माण हो चुका है, जिस पर ₹45,049.17 करोड़ खर्च हुए। 98.94% बैकलॉग क्लियर होने के बाद RDD विभाग ने केंद्र को अनुरोध भेजा है। गौरतलब है कि 2018-19, 2022-23 और 2023-24 में केंद्र सरकार ने बिहार को ग्रामीण क्षेत्र के लिए नये आवास अलॉट करने के लिए टारगेट नहीं दिए थे।
बता दें कि हर लाभार्थी को पक्का मकान बनाने के लिए ₹1.30 लाख सब्सिडी मिलती है, जबकि भूमिहीनों को जमीन खरीदने के लिए ₹1 लाख (पहले ₹60,000) रूपये दिए जाते हैं।
चुनावी साल में लक्ष्य पूरा करने के प्रयास तेज
2025 में ग्रामीण विकास विभाग (RDD) ने “Angikaar 2025” कैंपेन शुरू किया, जिसमें मोबाइल वैन और QR-कोड गाइड से योजना को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा रही है। साथ ही विभाग ने “निगरानी अभियान” शुरू किया ताकि योजना में भ्रष्टाचार को रोका जा सके। हालांकि इसके तहत अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है।

बिहार सरकार की घोषणा- अविवाहित वयस्क को पीएम आवास

इस साल जुलाई में राज्य सरकार ने घोषणा की कि अविवाहित वयस्क को भी एकल परिवार मानते हुए इस योजना के तहत पक्का मकान मिल सकता है। ग्रामीण विकास विभाग की ओर से जारी किए गए निर्देश के अनुसार, पति-पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे परिवार हैं जबकि ऐसे अविवाहित वयस्क जिनके माता-पिता जीवित नहीं हैं, उन्हें भी एकल परिवार माना जाएगा।

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बड़े वोटवैंक को साध सकता है पक्का मकान 

  • बिहार में आवंटित 84 लाख यूनिट मकानों में से 2025 तक 36.64 लाख मकान बन गए जो करीब दो करोड़ लोगों को प्रभावित करता है।
  • ग्रामीण इलाके में बने आवासों से 35% EBC, 20% SC/ST, 25% OBC परिवारों को लाभ मिला जो सरकार के लिए वोट में बदल सकता है।
  • शहरी गरीबों के लिए मकान बनाने में देरी से झुग्गियों में रहने वाले मजदूर प्रभावित जो एक बड़ा शहरी वोटर वर्ग हैं।

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🏠 पीएम आवास योजना (बिहार) : टाइमलाइन व प्रमुख घटनाएँ

📌 2016–2022

  • बिहार में 37 लाख मकान स्वीकृत, जिनमें से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र के लिए।

  • केंद्र ने देरी पर जुर्माना नियम लागू किया (10–20 रु. प्रति आवास कटौती, किश्त देर पर साप्ताहिक जुर्माना)।

📌 मार्च 2023

  • शहरी योजना (PMAY-U 1.0): 2.64 लाख मकान स्वीकृत, पर आधे ही पूरे (1.56 लाख)।

  • बैकलॉग → 1.08 लाख मकान अधूरे

📌 अगस्त 2023

  • CAG रिपोर्ट: ₹450 करोड़ फंड दुरुपयोग, रिश्वत व गड़बड़ी उजागर।

  • 5 अधिकारियों को नोटिस, कार्रवाई सीमित रही।

📌 सितंबर 2023

  • अररिया: आवास सहायक पर 259 लाभुकों की किश्त रोकने का आरोप, नौकरी गई।

  • इसी महीने SC/ST कोटे में आवास न देने के आरोप में जांच शुरू।

📌 अप्रैल 2024

  • पटना (मसौढ़ी): आवास सहायक पर ₹2-2 हजार वसूली का आरोप, सेवा समाप्त।

📌 जनवरी 2024

  • वैशाली: आवास सहायक ने 60 ग्रामीणों से अवैध वसूली की, ग्रामीणों ने पकड़ा।

📌 2024 (पहला सप्ताह)

  • मुंगेर: जिन परिवारों को PMAY-G में घर मिला था, उन्हें PMAY-U में भी आवास स्वीकृत। जांच शुरू

📌 अगस्त 2024

  • RDD: बैकलॉग क्लियर करने के बाद 13.5 लाख नई यूनिट्स की मांग केंद्र से की।

  • अब तक 36.64 लाख मकान बनकर तैयार (98.94% बैकलॉग पूरा)।

📌 जुलाई 2025

  • बिहार सरकार ने घोषणा की:

    • अविवाहित वयस्क को भी एकल परिवार मानकर आवास मिलेगा।

📌 फरवरी 2025

  • केंद्र ने PMAY-U 2.0 को मंज़ूरी दी → पहले चरण में 1 लाख मकान।

  • डेडलाइन: दिसंबर 2025 तक पहले चरण का बैकलॉग पूरा करना।

📌 2025 (चुनावी साल)

  • RDD ने “Angikaar 2025” और “निगरानी अभियान” शुरू किए।

  • लक्ष्य: बैकलॉग खत्म कर ग्रामीण व शहरी दोनों योजनाओं की रफ्तार बढ़ाना।

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बिहार में धान की अच्छी पैदावार के बाद भी खरीद के सीजन में क्यों परेशान हैं किसान 

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बिहार में धान की खरीद कम और धीमी होने से किसान अपनी फसल कम दाम पर खुले बाजार में बेचने को मजबूर हैं।
बिहार में धान की खरीद कम और धीमी होने से किसान अपनी फसल कम दाम पर खुले बाजार में बेचने को मजबूर हैं।
  • 28 फरवरी तक राज्य में होनी है धान की खरीद या अधिप्राप्ति।
  • केंद्र की ओर से राज्य में खरीद का कोटा घटाने से खेतों में पड़ी फसल।
नई दिल्ली|
बिहार में धान की इस साल अच्छी पैदावार हुई है, लेकिन इसके बावजूद किसान अपने धान को खेतों में छोड़ने और खुले बाजार में औने-पौने दाम पर बेचने के लिए बेबस हैं। केंद्र सरकार ने इस बार बिहार में धान की खरीद का लक्ष्य 20% घटा दिया है, जिसका असर यह है कि हर जिले में धान खरीद लक्ष्य घटा दिया गया है।
इस पर भी जिलों में धान खरीद की गति बेहद धीमी है, जिससे किसान अपनी फसल की बिक्री को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। कई जिलों में किसानों ने लक्ष्य बढ़ाने और तेजी से खरीद करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए हैं। फसल का पूरा दाम न मिलते दिखने से कई धान किसानों ने इसे खुले बाजार में बेचना शुरू कर दिया है ताकि यह समय से बिक जाए और वे खेत में नई फसल लगा सके। 

धान खरीद के आंकड़े

  • 36.85 लाख मीट्रिक टन धान की होनी है खरीद।
  • 45 लाख मीट्रिक टन था पिछले साल का लक्ष्य।
  •  8.52 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीद होगी।

अब तक सिर्फ 5100 किसानों से हुई खरीद

सहकारिता विभाग की वेबसाइट के मुताबिक, 11 जनवरी तक सिर्फ 5176 किसानों से धान की खरीद हुई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि बिहार में धान खरीद के लिए कितने किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। पर पिछले साल धान खरीद का लाभ करीब पांच लाख किसानों को हुआ था। इस हिसाब से देखे तो किसान जिस धीमी खरीद की शिकायत कर रहे हैं, सरकारी आंकड़ों से उसकी तस्दीक हो रही है।

खुले बाजार में धान बेचने को मजबूर

धान की MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) ₹2,183 प्रति क्विंटल है, अगर सरकार धान खरीदती है तो किसान को इसी भाव पर फसल का दाम मिलेगा। पर चूंकि लक्ष्य घटा दिया गया है और अब तक धीमी गति से खरीद हो रही है तो परेशान किसान खुले बाजार में धान बेचने को मजबूर है, जहां धान ₹1,800-₹2,000/क्विंटल पर बिक रहा है। यानी प्रति क्विंटल ₹200-₹300 का नुकसान किसान को उठाना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में 5-10 क्विंटल उपज वाले छोटे किसानों को सबसे ज्यादा मार सहनी पड़ेगी क्योंकि वे फसल करने के लिए कर्ज पर निर्भर होते हैं। 

धान जलाकर गुस्सा दिखा रहे किसान

रोहतास जिला मुख्यालय में किसानों ने इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया, उन्होंने मांग की कि धान खरीद का लक्ष्य बढ़ाया जाए और पैक्स के जरिए हो रही खरीद को पारदर्शी बनाया जाए। किसानों का यह तक कहना था कि जिला पंचायत अध्यक्ष यह देखकर खरीद कर रहे हैं कि किस किसान ने उन्हें चुनाव में वोट दिया।

बेगूसराय में कई जिला पंचायतों और व्यापार मंडलों ने धरना दिया, इनका कहना है कि जिला प्रशासन खरीद करने को कह रहा है पर लक्ष्य स्पष्ट नहीं किया गया है।

किसानों की मांगें

  • धान खरीद लक्ष्य बढ़ाया जाए।
  • पैक्स में भेदभाव और गड़बड़ियां बंद हों।
  • खरीद केंद्रों पर गति बढ़ाई जाए।
  • MSP पर पूरी फसल खरीदी जाए, ताकि खुले बाजार में कम दाम न बेचना पड़े।

 जिलों में धान खरीद का लक्ष्य इतना घटा

  • रोहतास: उपज 13 लाख एमटी, लक्ष्य 3.14 लाख एमटी (पिछले साल से 90 हजार एमटी कम)। 
  • भागलपुर: लक्ष्य 37,285 एमटी (पिछले साल 40,000 एमटी था)।
  • नालंदा: लक्ष्य 1.22 लाख एमटी (पिछले साल 1.92 लाख एमटी)।
  • बेगूसराय: उपज 54,548 एमटी, लक्ष्य स्पष्ट नहीं। पैक्स और व्यापार मंडल धरना दे रहे हैं।
  • बांका: उपज 5.4 लाख एमटी, लक्ष्य 1.31 लाख एमटी (पिछले साल 1.39 लाख एमटी)।

राज्य सरकार की मांग- केंद्र कोटा बढ़ाए 

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग मंत्री लेशी सिंह ने केंद्र से कोटा बढ़ाने की मांग की है। केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री निमुबाई जयंतीभाई बांभणिया के पटना दौरे पर शुक्रवार को मंत्री लेशी सिंह ने इस मामले से जुड़ा ज्ञापन सौंपा। केंद्रीय मंत्री ने इस पर कहा कि केन्द्र सरकार किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्यों के साथ समन्वय के आधार पर निर्णय लेगी। लेशी सिंह ने कहा है कि उन्होंने खाद्य अनुदान मद में लंबित 6,370 करोड़ की राशि भी जल्द जारी करने की मांग की।

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Deputy CM Vijay Sinha : बिहार में भूमि सुधार के जरिए खूब चर्चा पा रहे डिप्टी सीएम, जानिए क्या है अंदर की कहानी

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प्रेसवार्ता को संबोधित करते उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा

नई दिल्ली |

बिहार में नई NDA सरकार बनने के बाद जमीनी विवाद के मामलों और इनकी सुनवाई को लेकर खूब चर्चा हो रही है। नई सरकार में यह विभाग डिप्टी सीएम और बीजेपी के सीनियर नेता विजय कुमार सिन्हा को मिला है। हाल के दिनों में उनकी ओर से कुछ जिलों में जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित हुए, जिसमें राजस्व अफसरों के लिए कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिसको खूब मीडिया कवरेज मिला। अपने पिछले डिप्टी सीएम कार्यकाल में सधी हुई छवि से उलट इस बार विजय सिन्हा तेज-तर्रार मंत्री के तौर पर छवि गढ़ रहे हैं, जानिए इसके राजनीतिक मायने क्या हैं?

जनसुनवाई में राजस्व अफसरों पर तीखा हमला

डिप्टी सीएम के साथ बिहार के ‘राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग’ की जिम्मेदारी मिलने के बाद विजय कुमार सिन्हा ने जनसुनवाई करना शुरू किया। हाल के दिनों में लखीसराय, रोहतास, बक्सर, गया और अन्य जिलों में डिप्टी सीएम ने जनसुनवाई के दौरान शिकायतें और अफसरों की लापरवाहियां सुनकर राजस्व अफसरों को जमकर लताड़ा।
उनके कहे कुछ वाक्य मीडिया में सुर्खी बन गए, जैसे- ‘खड़े-खड़े सस्पेंड कर दूंगा‘, ‘यही जनता के सामने जवाब दो‘, ‘स्पष्टीकरण लो और तुरंत कार्रवाई करो’, ‘ऑन द स्पॉट फैसला होगा‘। इन वीडियो क्लिप्स को सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया। बिहार राजस्व सेवा संघ ने मंत्री के इन बयानों को लेकर कहा कि ऐसा करके वे विभाग की छवि को जानबूझकर सार्वजनिक उपहास का विषय बना रहे हैं। 

नाराज राजस्व संघ ने सीएम को लेटर लिखा 

बिरसा की ओर से सीएम को लिखा गया लेटर।

बिरसा की ओर से सीएम को लिखा गया लेटर।

पब्लिक मीटिंग में अपने साथ हो रहे व्यवहार के खिलाफ राजस्व अफसरों में खासा नाराजगी है। इसको लेकर बीती 24 दिसंबर को राजस्व विभाग के अफसरों के संगठन ‘बिहार राजस्व सेवा संघ’ (Bihar Revenue Service Association) ने बाकायदा सीएम नीतीश कुमार को पत्र लिखकर कहा-
“वर्तमान मंत्री पब्लिक मीटिंग में यह भूल जाते हैं कि पिछले 20 साल से अधिकांश समय NDA की सरकार रही है, वे अपने पूर्ववर्ती मंत्रियों और विभागीय प्रमुखों के योगदान को नकारते हुए ऐसा आभास कराते हैं कि जैसे विभाग में कोई काम ही नहीं हुआ। जैसे बीते सौ साल का प्रशासनिक बोझ उनके कंघों पर आ गया हो।”

लेटर में लिखा गया है कि मंत्री लोकप्रियता और तात्कालिक तालियों की अपेक्षा में राजस्व कर्मियों को जनता के सामने अपमानित कर रहे हैं। लेटर में चेतावनी दी गई है कि अगर इसमें सुधार नहीं हुआ तो संघ ऐसे आयोजनों व गतिविधियों का सामूहिक बहिष्कार करेगा। 

बिहार DGP बोले- “भूमि विवाद में हम नहीं पड़ेंगे”

भूमि विवाद के मामलों पर डिप्टी सीएम सिन्हा की ‘सक्रियता’ के बीच बिहार DGP का एक बयान जानने योग्य है। 9 जनवरी को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने कहा कि- बिहार में 60% अपराध की वजह भूमि विवाद है जो समय पर हल न होने से अक्सर आपराधिक घटनाओं में बदल जाते हैं। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत जमीन विवादों का निपटारा किया जाएगा, हम इसमें सीधे हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
उनका कहना है कि पुलिस के पास खतियान, नक्शा या अद्यतन राजस्व रिकॉर्ड जैसे दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते, जिससे उनके लिए विवाद का निष्पक्ष समाधान कर पाना मुश्किल होता है।

डिप्टी सीएम सिन्हा के तेबर को कैसे देखते विशेषज्ञ

बिहार में नीतीश जैसा नेता बनाने की चाह –

इस विधानसभा चुनाव में भाजपा को जदयू से ज्यादा सीटें मिलीं, पर अब भी उनके पास नीतीश कुमार जैसी एक मास अपील वाला कोई नेता राज्य में नहीं है। ऐसे में डिप्टी सीएम सिन्हा अपनी जनसुनवाई के जरिए जमीन मालिक व गरीब किसानों को साधने की कोशिश करते नज़र आते हैं, जो भाजपा का वोटबैंक भी है।

बीजेपी है बिग ब्रदर

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में भूमि सुधार एक बड़ी समस्या है, इसे नई सरकार में तुरंत उठाकर भाजपा यह दर्शाना चाहती है कि सरकार में उनका ‘अपरहैंड’ है। कई मौकों पर जदयू कहती रही है कि NDA में वह बड़े भाई की भूमिका में है पर हालिया चुनावों में ज्यादा सीटें पाने के बाद भाजपा ने यह भूमिका अख्तियार कर ली है।


जमीन पर क्या होगा असर ?

  • पुरानी फाइलें खुलने और मौके पर मंत्री से भरोसा मिलने से आम जनता को कुछ उम्मीद तो बंधी है। हालांकि इसका असर लॉन्ग टर्म में सामने आएगा।
  • पुलिस महानिदेशक ने जिस तरह कहा है कि जमीन मामलों में पुलिस सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगी, इससे किसी आदेश को लागू करवाने में समस्या पैदा हो सकती है।

बिहार में कितनी बड़ी है भूमि विवाद समस्या ?

बिहार में भूमि विवाद के कितने मामले लंबित हैं, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। पर विशेष मानते हैं कि यह संख्या लाखों में है। इसमें वे केस शामिल हैं जो अदालत में लटके हुए हैं, इसके अलावा जमीन विवाद के चलते हत्या व अन्य अपराध के केस और हाल तक जारी भूमि सर्वे के चलते पैदा हुए नए भूमि विवादों ने इनकी संख्या काफी बढ़ा दी है।

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चुनावी डायरी

बिहार में किसके वोट कहां शिफ्ट हुए? महिला, मुस्लिम, SC–EBC के वोटिंग पैटर्न ने कैसे बदल दिया नतीजा?

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नीतीश कुमार 9 बार सीएम बन चुके हैं और इस बार भी उनके ही चेहरे पर चुनाव लड़ा गया और अप्रत्याशित जीत मिली।
नीतीश कुमार 9 बार सीएम बन चुके हैं और इस बार भी उनके ही चेहरे पर चुनाव लड़ा गया और अप्रत्याशित जीत मिली।
  • महागठबंधन का वोट शेयर प्रभावित नहीं हुआ पर अति पिछड़ा, महिला व युवा वोटर उन पर विश्वास नहीं दिखा सके।

नई दिल्ली| महक अरोड़ा

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने साफ कर दिया है कि इस बार की लड़ाई सिर्फ सीटों की नहीं थी—बल्कि वोटिंग पैटर्न, नए सामाजिक समीकरण, और वोट के सूक्ष्म बदलावों की थी।

कई इलाकों में वोट शेयर में बड़ा बदलाव नहीं दिखा, लेकिन सीटें बहुत ज्यादा पलट गईं। यही वजह रही कि महागठबंधन (MGB) का वोट शेयर सिर्फ 1.5% गिरा, लेकिन उसकी सीटें 110 से घटकर 35 पर आ गईं।

दूसरी ओर, NDA की रणनीति ने महिलाओं, SC-EBC और Seemanchal के वोट पैटर्न में बड़ा सेंध लगाई, जो इस प्रचंड बहुमत (massive mandate) की असली वजह माना जा रहा है।

 

महिला वोटर बनीं Kingmaker, NDA का वोट शेयर बढ़ाया

बिहार में इस बार महिलाओं ने 8.8% ज्यादा रिकॉर्ड मतदान किया:

  • महिला वोटिंग: 71.78%
  • पुरुष वोटिंग: 62.98%

(स्रोत- चुनाव आयोग)

महिला वोटर वर्ग के बढ़े हुए मतदान का सीधा फायदा NDA विशेषकर जदयू को हुआ, जिसने पिछली बार 43 सीटें जीती और इस बार 85 सीटों से दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी।


 

वोट शेयर का गणित — MGB का वोट कम नहीं हुआ, पर सीटें ढह गईं

  • NDA Vote share: 46.5%
    MGB Vote share: 37.6%

2020 की तुलना में: 9.26% ज्यादा वोट NDA को पड़ा

  •  NDA के वोट share में बड़ी बढ़त – 37.26%
  •  MGB का वोट share सिर्फ 1.5% गिरा – 38.75%
  •  पर महागठबंधन की सीटें 110 → 35 हो गईं

(स्रोत- चुनाव आयोग)

यानी इस चुनाव में महागठबंधन का वोट प्रतिशत लगभग बराबर रहा पर वे वोट शेयर को सीटों में नहीं बदल सके।

यह चुनाव vote consolidation + social engineering + seat-level micro strategy का चुनाव था।


 

SC वोटर ने NDA का रुख किया — 40 SC/ST सीटों में 34 NDA के खाते में

बिहार की 40 आरक्षित सीटों (38 SC + 2 ST) में NDA ने लगभग क्लीन स्वीप किया:

  •  NDA: 34 सीट
  •  MGB: 4 सीट (2020 में NDA = 21 सीट)

(स्रोत- द इंडियन एक्सप्रेस)

सबसे मजबूत प्रदर्शन JDU ने किया—16 में से 13 SC सीटें जीतीं। BJP ने 12 में से सभी 12 सीटें जीत लीं।

वहीं महागठबंधन के लिए यह सबसे खराब प्रदर्शन रहा — RJD 20 SC सीटों पर लड़कर भी सिर्फ 4 ला सकी।

RJD का वोट शेयर SC सीटों में सबसे ज्यादा (21.75%) रहा, लेकिन सीटें नहीं मिल सकीं।

वोट share और seat conversion में यह सबसे बड़ा असंतुलन रहा।


 

मुस्लिम वोट MGB और AIMIM के चलते बंटा, NDA को फायदा हुआ

सीमांचल – NDA ने 24 में से 14 सीटें जीत लीं

सीमांचल (Purnia, Araria, Katihar, Kishanganj) की 24 सीटों पर इस बार सबसे दिलचस्प तस्वीर दिखी।

मुस्लिम वोट महागठबंधन और AIMIM में बंट गए, और इसका सीधा फायदा NDA को मिला।

  • NDA: 14 सीट
  • JDU: 5
  • AIMIM: 5
  • INC: 4
  • RJD: सिर्फ 1
  • LJP(RV): 1

 

सबसे कम मुस्लिम विधायक विधानसभा पहुंचेंगे – सूबे में 17.7% मुस्लिम आबादी के बावजूद इस बार सिर्फ 10 मुस्लिम विधायक विधानसभा पहुंचे — 1990 के बाद सबसे कम।

  • यह NDA की सामाजिक इंजीनियरिंग, EBC–Hindu consolidation और मुस्लिम वोटों के बंटवारे का संयुक्त परिणाम है।
  • EBC–अति पिछड़ा वोट NDA के साथ गया — MGB की सबसे बड़ी हार की वजह
  • अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) बिहार में सबसे बड़ा वोट बैंक है। इस बार ये पूरा वोट NDA के पक्ष में चला गया।
  • JDU की परंपरागत पकड़ + BJP का Welfare Model मिलकर EBC वर्ग में मजबूत प्रभाव डाल गए।
  • यही वोट EBC बेल्ट (मिथिला, मगध, कोसी) में NDA को करारी बढ़त देने का कारण बना।

 


 

रिकॉर्ड संख्या में निर्दलीय लड़े पर नहीं जीत सके

Independent उम्मीदवारों की रिकॉर्ड संख्या — 925 में से 915 की जमानत जब्त

इस चुनाव में:

  •  कुल उम्मीदवार: 2616
  •  Independent: 925
  •  जमानत ज़ब्त: 915 (98.9%)

ECI ने ज़ब्त हुई जमानतों से 2.12 करोड़ रुपये कमाए

 

क्यों इतने Independent मैदान में उतरे?
1. पार्टियों ने पुराने नेताओं के टिकट काटे
2. कई स्थानीय नेताओं ने बगावत कर दी
3. कई सीटों पर बिखराव की वजह बने

VIP, CPI, AIMIM, RJD, INC – हर पार्टी के बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई।

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