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चुनावी डायरी

प्रशांत किशोर क्यों बोले- ‘सिर्फ 10 हजार के लिए कोई अपना भविष्य नहीं बेचेगा…’

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प्रशांत किशोर (फाइल फोटो)
प्रशांत किशोर (फाइल फोटो)
  • चुनाव रिजल्ट के चार दिन बाद मीडिया के सामने आए प्रशांत ने पार्टी की हार की जिम्मेदारी ली।

 

पटना | हमारे संवाददाता

प्रशांत किशोेर ने कहा कि कोई बिहारी सिर्फ दस हजार रुपये में अपना भविष्य नहीं बेच देगा। लोगों ने NDA को इसलिए वोट किया क्योंकि नीतीश कुमार ने वादा किया कि जो महिलाएं अपना रोजगार शुरू करेंगी, उन्हें अगले छह महीने में दो-दो लाख रुपये की मदद दी जाएगी।

प्रशांत किशोर ने कहा कि जदयू अगर ये सब चुनाव के लिए नहीं कर रही थी तो इस योजना को लागू कर दें, अगर वो ऐसा कर देते हैं तो मैं जरूर राजनीति छोड़ दूंगा। बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सुर्खियां पाने वाले प्रशांत किशोर ने रिजल्ट आने के चार दिन बाद 18  नवंबर को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

प्रशांत किशोर ने मीडिया से कहा,

“पहली बार बिहार में ऐसा हुआ कि किसी चुनाव में सरकार ने 40 हजार करोड़ रुपए खर्च करने का वादा किया है। पूरा सरकारी तंत्र यह बताने लगा कि अगले 6 महीने में स्वरोजगार के लिए 2 लाख दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आपको समझने की जरूरत है कि 10 हज़ार रुपए के लिए लोग अपना वोट बच्चे का भविष्य नहीं खराब करेंगे।”

चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाने को लेकर जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि वे इस हार की जिम्मेदारी लेते हैं क्योंकि वे जनता को यह समझाने में विफल हुए कि लोगों को किन मुद्दों पर वोट देना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर वे एक दिन का मौन व्रत रखेंगे।

अपने चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा था कि अगर JDU को 25 से ज्यादा सीटें आईं तो वे राजनीति छोड़ देंगे।

जब पत्रकारों ने उनसे यह सवाल किया तो उन्होंने पलटकर पूछा कि वे किसी पद पर तो नहीं हैं जो उससे इस्तीफा दे दें? वे फिर बोले कि मैंने राजनीति तो पहले ही छोड़ दी है, लेकिन ये नहीं कहा कि बिहार की बात करना छोड़ दूंगा। मैं आगे भी यहीं रहूंगा और लोगों के मुद्दे उठाता रहूंगा।

बता दें कि जनसुराज ने बिहार में 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे जिसमें से 236 की जमानत जब्त हो गई। वे कोई सीट नहीं जीत सके पर पूरे बिहार में उन्हें 3.5 प्रतिशत वोट मिला।

 

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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