दुनिया गोल
Crude Oil Price: चार साल में सबसे महंगा हुआ कच्चा तेल, ट्रंप बोले- ‘सुरक्षा के लिए यह छोटी सी कीमत’
नई दिल्ली| ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले और ईरान के पश्चिम एशिया में किए जा रहे जवाबी हमले के चलते कच्चे तेल की कीमतों मेें भारी उछाल दर्ज किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क्रूड की क़ीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। इससे पहले साल 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद कच्चे तेल का दाम सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचकर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया था। इसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि “यह ग्लोबल सिक्योरिटी के लिए चुकाने लायक एक ‘छोटी क़ीमत’ है।”
हालिया उछाल की मुख्य वजह वैश्विक तेल आवाजाही के प्रमुख रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का प्रभावित होना है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी में शिपिंग संकट और गहरा गया है क्योंकि टैंकर फंसे हुए हैं और समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की क़ीमतों में 18 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 108.68 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। वहीं, अमेरिकी तेल WTI क़रीब 20 फ़ीसदी बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
ट्रंप ने कच्चे तेल की कीमतों में आए ताजा उछाल को ट्रुथ सोशल पर लिखा,
“कम समय के लिए तेल की क़ीमतें बढ़ी हैं, जो ईरान के परमाणु ख़तरे के ख़त्म होते ही तेज़ी से नीचे आ जाएंगी। अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा और शांति के लिए यह बहुत छोटी क़ीमत है। सिर्फ़ मूर्ख ही इससे अलग सोचेंगे।”
दुनिया गोल
अमेरिका-इजरायल के हमले में मारे गए ईरानी सुप्रीम लीडर के बेटे बने नए सर्वोच्च नेता
- दिवंगत सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा ख़ामेनेई को मिली जिम्मेदारी।
नई दिल्ली | अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या हो जाने के एक सप्ताह बाद नए सुप्रीम लीडर चुन लिए गए हैं।
दिवंगत ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा ख़ामेनेई को यह जिम्मेदारी दी गई है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब युद्ध अपने 10वें दिन में प्रवेश कर चुका है और मध्य पूर्व में नए मिसाइल व ड्रोन हमलों की गूंज सुनाई दे रही है।
बीते रविवार (8 march) को ईरान के एक विशेष धार्मिक निकाय के 88 सदस्यों ने सर्वोच्च नेता का चयन किया, फिर सरकारी मीडिया की ओर से इसकी घोषणा की गई।
इस घोषणा के बाद सांसदों से लेकर विदेश मंत्रालय तक ईरान के विभिन्न संस्थानों और राजनेताओं ने बयान जारी करके नए सुप्रीम लीडर के प्रति निष्ठा जताई, जिसे वहां रहवर नाम से पुकारा जाता है।
रक्षा परिषद के बयान में कहा गया- “हम अंतिम खून की बूंद तक कमांडर-इन-चीफ के आज्ञाकारी रहेंगे।”
ट्रंप बोले- हमारी राय बिना सुप्रीम नेता चुना तो जिंदा नहीं रहेगा
रविवार को ईरान की ओर से नए सुप्रीम लीडर की घोषणा से कुछ घंटे पहले अमेरिकी समाचार मीडिया ABC News को दिए इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था- “अगर ईरान उनकी मंजूरी नहीं लेता है तो ईरान का अगला सुप्रीम लीडर लंबे समय तक नहीं टिकेगा।”
फिर ईरान की ओर से घोषणा होने के बाद इजरायली मीडिया “टाइम्स ऑफ इजरायल” को दिए फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कुछ नहीं कहा, वे बस इतना बोले कि “हम देखेंगे कि क्या होता है।”
जंग रोकने का फैसला इजरायल की सहमति से लेंगे
टाइम्स ऑफ इजरायल के इसी इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि युद्ध समाप्त करने का फैसला लेने में वे इजरायल के इनपुट को शामिल करेंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ उनका नहीं होगा बल्कि परस्पर होगा।
दुनिया गोल
नेपाल आम चुनाव : Gen Z आंदोलन के नेता बालेन शाह के नए पीएम बनने का रास्ता साफ
- बालेन शाह ने पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली को 49,614 वोटों से मात दी है।
नई दिल्ली | नेपाल के वोटरों ने लंबे समय तक हावी रही पुरानी राजनीतिक पार्टियों को खारिज कर दिया है। नेपाल में हुए आम चुनाव में सिर्फ तीन साल पुरानी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) भारी बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। इस जनादेश ने RSP के नेता बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ कर दिया है जो पिछले साल हुए Gen-Z आंदोलन के प्रमुख नेतृत्वकर्ता थे।
नेपाल चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, RSP ने अब तक 98 सीटें जीत ली हैं, जबकि 27 सीटों पर आगे चल रही है। यह पार्टी सिर्फ 4 साल पहले एक पत्रकार रहे रबि लामिछाने ने बनाई थी।
5 मार्च को हुए आम चुनाव में कुल 122 राजनीतिक दल और स्वतंत्र उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। जे़न जी आंदोलन के बाद हो रहे आम चुनाव में आठ लाख नए वोटर शामिल हुए हैं।
बालेन ने पूर्व पीएम ओली को बड़े अंतर से हराया
नेपाली कांग्रेस कम सीटों पर सिमटी
आज के अखबार
अमेरिकी मीडिया का दावा- ‘ईरान को खुफिया मदद दे रहा रूस’
- दावा है कि रूसी खुफिया मदद से ईरान अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना पा रहा है।
नई दिल्ली| अमेरिकी मीडिया ने 7 मार्च को दावा किया है कि रूस ईरान को ऐसी खुफिया जानकारी उपलब्ध करवा रहा है, जिसके जरिए वह पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, अमेरिकी लड़ाकू विमानों व अन्य अमेरिकी संपत्तियों पर हमला कर पा रहा है। रूसी मीडिया ने लिखा है कि अमेरिकी मीडिया के इस दावे पर रूस सरकार ने सीधे कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
लेकिन रूसी राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने 5 मार्च को बयान दिया था कि ईरान ने उससे कोई सैन्य मदद नहीं मांगी है।
दावा- ‘हमले से ईरानी क्षमता घटी इसलिए मदद मांगी’
अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट व अमेरिकी समाचार एजेंसी एसोसिएट प्रेस (AP) ने अपनी रिपोर्ट में ऐसा दावा किया है। दोनों मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले हफ्ते अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हुए हमलों के बाद ईरानी सेना की अमेरिकी ठिकानों का पता लगाने की क्षमता कमजोर हो गई है। इसके बाद ईरान इसका पता लगाने के लिए रूस की मदद ले रहा है।
‘रूस की खुफिया जानकारी से हमले कर पा रहा’
वॉशिंगटन पोस्ट ने तीन अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा है कि रूस ईरान को ऐसी टारगेटिंग इंटेलिजेंस दे रहा है, जिससे वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सके।
एसोसिएट प्रेस की रिपोर्ट में अमेरिकी खुफिया विभाग के दो अधिकारियों के हवाले से यही दावा किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों के अलावा, अमेरिकी हवाई जहाज व अन्य संपत्तियों पर भी ईरान इसलिए हमला कर पा रहा है क्योंकि उनकी लोकेशन पता करने में रूस मदद कर रहा है।
व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया जानिए
एपी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति आवास ने इन दावों को कमतर आंका है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने शुक्रवार (6 march) को इन रिपोर्टों पर कहा, “इससे साफ तौर पर ईरान में चल रहे हमारे सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि हम उन्हें पूरी तरह तबाह कर रहे हैं।”
साथ ही, व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी लेविट ने पत्रकारों को यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कथित खुफिया जानकारी साझा करने के बारे में बात की या नहीं? उन्होंने कहा कि वे चाहती हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप खुद ही इस पर बोलें।
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