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नेपाल आम चुनाव : Gen Z आंदोलन के नेता बालेन शाह के नए पीएम बनने का रास्ता साफ

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बालेन शाह के रैप ने युवाओं को सरकार से सवाल पूछने को प्रेरित किया और वे जेन जी आंदोलन के दौरान प्रमुख नेतृत्वकर्ता बन गए थे।बालेन शाह के रैप ने युवाओं को सरकार से सवाल पूछने को प्रेरित किया और वे जेन जी आंदोलन के दौरान प्रमुख नेतृत्वकर्ता बन गए थे।
  • बालेन शाह ने पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली को 49,614 वोटों से मात दी है।

नई दिल्ली | नेपाल के वोटरों ने लंबे समय तक हावी रही पुरानी राजनीतिक पार्टियों को खारिज कर दिया है। नेपाल में हुए आम चुनाव में सिर्फ तीन साल पुरानी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) भारी बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। इस जनादेश ने RSP के नेता बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ कर दिया है जो पिछले साल हुए Gen-Z आंदोलन के प्रमुख नेतृत्वकर्ता थे।  

नेपाल चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, RSP ने अब तक 98 सीटें जीत ली हैं, जबकि 27 सीटों पर आगे चल रही है। यह पार्टी सिर्फ 4 साल पहले एक पत्रकार रहे रबि लामिछाने ने बनाई थी।

5 मार्च को हुए आम चुनाव में कुल 122 राजनीतिक दल और स्वतंत्र उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। जे़न जी आंदोलन के बाद हो रहे आम चुनाव में आठ लाख नए वोटर शामिल हुए हैं।

भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने नेपाल की जनता को शांतिपूर्ण आम चुनावों के लिए बधाई दी है और कहा है कि भारत अपने पड़ोसी देश में बनने जा रही नई सरकार के साथ करीबी से मिलकर काम करेगा।

बालेन शाह (फोटो – एक्स)

बालेन ने पूर्व पीएम ओली को बड़े अंतर से हराया

नेपाल में पीएम बनने जा रहे 35 वर्षीय बालेन्द्र उर्फ ‘बालेन’ शाह की बात करें तो वे एक रैपर रह चुके हैं और काठमांडू के पूर्व मेयर हैं। ज़ेन जी आंदोलन के समय उनके रैप के जरिए युवाओं ने सरकार से खूब सवाल पूछे थे।
इस चुनाव में बालेन शाह की सीधी लड़ाई पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से है। झापा-5 सीट पर बालेन शाह को 68,348 वोट मिले जबकि ओली को केवल 18,734 वोट प्राप्त हुए। इस तरह बालेन शाह ने पूर्व पीएम ओली को 49,614 वोटों से मात दी है। जबकि इस सीट से ओली छह बार के सांसद रह चुके हैं। 

नेपाली कांग्रेस कम सीटों पर सिमटी

नेपाली चुनाव आयोग के मुताबिक, नेपाल की सबसे पुरानी पार्टियों में से एक नेपाली कांग्रेस को सिर्फ 14 सीटों पर जीत मिली है और वह तीन सीटों पर आगे चल रही है। वर्तमान मतगणना में यह दूसरे नंबर की पार्टी बनने की ओर है, हालांकि दोनों दलों की सीटों में बहुत अंतर है।
यह नतीजा भारत में भी बारीकी से देखा जा रहा है, जहां नेपाल की राजनीतिक दिशा, क्षेत्रीय विवाद और क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंताएं हैं।
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