आज के अखबार
अंग्रेजी अखबारों ने ‘बंधकों की रिहाई’ को लीड बनाया, हिन्दी अखबार लालू पर सिमटे
नई दिल्ली|
गज़ा में शांति की पहली शर्त यानी हमास की ओर से आखिरी जिंदा बीस बंधकों को इजरायल को सौंपना और बदले में फलस्तीनी बंधकों की वापसी की ऐतिहासिक घटना को सभी अंग्रेजी अखबारों ने पहली खबर बनाया। इसमें टाइम्स ऑफ इंडिया अपवाद था, जिसने इस खबर को फ्लैप पर जगह दी।
पर हिन्दी अखबारों ने हिन्दी पाठकों को इस घटना का महत्व समझाने के बजाय लालू यादव पर कसे अदालती शिकंजे की खबर को लीड स्टोरी बनाया। हालांकि बिहार चुनाव के चलते ये खबर काफी अहम है पर 13 अक्तूबर में पूरी दुनिया के लिए गज़ा का घटनाक्रम महत्वपूर्ण था क्योंकि इस युद्ध में 65000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और इसका असर पूरी दुनिया पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से पड़ रहा है।
द इंडियन एक्सप्रेस ने उस ऐतिहासिक घटना को पहली खबर बनाया है, हमास ने दो साल चले युद्ध के बाद आखिरी जिंदा बचे बंधकों को छोड़ा और बदले में दो हजार फलस्तीनी कैदी इजरायल ने छोड़े।
द हिन्दू ने भी इसी खबर को पहले पेज पर लगाया है।
द हिन्दुस्तान टाइम्स ने भी इसी खबर को पहले पन्ने पर लिया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने पहले पन्ने पर भारत-कनाडा व्यापार संबंध को लेकर खबर दी। दोनों देशों के बीच तल्खी के बाद कनाडा की विदेश मंत्री भारत दौरे पर आईं।
दैनिक जागरण ने लालू यादव के ऊपर land for jab घोटाले में आपराधिक आरोप तय होने की खबर को पहले पेज पर लिया।
दैनिक हिन्दुस्तान ने भी इसी खबर को पहली खबर बनाया।
अमर उजाला ने भी इसी खबर को फ्रंट फेज पर प्रमुखता से लगाया।
दैनिक भास्कर ने भी इसी खबर को प्रमुख खबर बनाया। हालांकि ठीक बराबर में गज़ा में शांति की शुरूआत की खबर लगाई है।
आज के अखबार
जेरुशलम पोस्ट : इजरायली दौरे पर पीएम मोदी को लेकर ऐसा क्या लिखा जो चर्चा बन गया?
आज के अखबार
भारत-EU संयुक्त बयान में ऐसा क्या, जिसे यूक्रेन पर भारत के बदले रुख की तरह देखा जा रहा?
- भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध पर संयुक्त बयान जारी हुआ जो नई दिल्ली के पुराने रूख से अलग।
नई दिल्ली|
भारत और यूरोपीय संघ के बीच 27 जनवरी को हुई शिखर वार्ता के दौरान FTA समझौते पर वार्ता पूरी होने के साथ एक और अहम घटना हुई। भारत-यूरोपीय संघ ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें इस युद्ध को लेकर भारत का बयान अपने पूर्व के बयानों से अलग है। संयुक्त बयान में भारत-यूरोपीय संघ ने कहा है कि “वे ऐसे प्रयासों का समर्थन करेंगे जो स्वतंत्रता, संप्रभु, क्षेत्रीय अखंडता पर आधारित हो।”
द इंडियन एक्सप्रेस ने इस बयान को लेकर लिखा है कि भारत का यह बयान यूक्रेन पर उसके पुराने रूख से बिल्कुल अलग है क्योंकि चार साल से जारी युद्ध को लेकर कभी भारत ने यूक्रेन पर रूसी आक्रामकता का खंडन नहीं किया था। भारत का यह रूख ही पिछले चार साल से यूरोपीय संघ और भारत के बीच बड़ा रोड़ा बना हुआ था। अखबार ने लिखा है कि भारत की नई पोजिशन रूस हित के विपरीत है क्योंकि 2022 में रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण करके उसकी स्वतंत्रता, संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित किया है।
EU ने भारत से रूस पर दवाब डालने को कहा
द हिन्दू ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काज़ा कल्लास के हवाले से लिखा है कि शिखर सम्मेलन के दौरान यूरोपीय संघ ने भारत से कहा कि वह रूस पर यूक्रेन युद्ध को लेकर दवाब बनाए। कल्लास ने शिखर सम्मेलन के तुरंत बाद हुए थिंक टैंक इवेंट में कहा कि रूस ने यूक्रेन के साथ संघर्ष विराम पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है और आम नागरिकों पर बमबारी कर रहा है। इस मामले में हमने अपने भारतीय सहयोगी से कहा है कि वे रूस पर शांति के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए दवाब बनाएं।
बोर्ड ऑफ पीस पर क्या रूख ?
ट्रंप के बनाए Board of Peace को लेकर भी संयुक्त बयान में जिक्र है, अखबार के मुताबिक दोनों ने इसके गज़ा में शांति व पुर्ननिर्माण के उद्देश्य से समर्थन जताया है, हालांकि दोनों ही इसके उद्देश्य को गज़ा तक ही सीमित रखने का संकेत दे रहे हैं। दोनों ने ही अब तक ट्रंप के बनाए इस बोर्ड को ज्वाइन नहीं किया है।
ईरान पर क्या रुख ?
ईरान में हुए प्रदर्शन को लेकर संयुक्त बयान में कहा गया है कि वे चाहते हैं कि इस स्थिति को डिप्लोमेसी व वार्ता के जरिए सुलझाया जाए। अखबार का कहना है कि इस तरह भारत व ईयू ब्लॉक संदेश दे रहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका व यूरोपीय संघ की आक्रामकता के वे पक्षधर नहीं हैं।
आज के अखबार
भारत के ये राज्य 10 साल बाद हो जाएंगे बूढ़े, Aging आबादी पर सरकारी रुख से क्यों चिंतित The Hindu?
- RBI के मुताबिक, भारत के राज्यों में असमान रूप से सांख्यिकी बदलेगी।
क्या है द हिन्दू की चिंता
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