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चुनावी डायरी

RJD का हार पर 4 घंटे चला मंथन, चुनाव रिजल्ट को लेकर जा सकते हैं कोर्ट

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चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्वी ने ताबड़तोड़ रैलियां कीं पर रिजल्ट अनुकूल नहीं मिला
चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्वी ने ताबड़तोड़ रैलियां कीं पर रिजल्ट अनुकूल नहीं मिला
  • महागठबंधन के सहगोयी दलों के सहमति के बाद लेंगे अंतिम फैसला

पटना | हमारे संवाददाता

बिहार में महागठबंधन विधानसभा चुनाव के फैसले के खिलाफ कोर्ट जा सकता है।  रिजल्ट के तीन दिन बाद RJD नेताओं ने पटना में तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर 17 नवंबर को हार पर मंथन किया।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 4 घंटे चली इस बैठक में राय ली गई कि क्या चुनाव के रिजल्ट को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है?

हालांकि बैटक में यह बात निकलकर आई है कि अंतिम फैसला महागठबंधन के बाकी सहयोगी कांग्रेस, CPI(M), VIP आदि से सलाह मशवरा के बाद ही लिया जाएगा।

बता दें कि 14 नवंबर को आए चुनाव परिणाम में राजद को सिर्फ 25 सीटें मिली हैं। सभी सहयोगी दलों को मिलाकर महागठबंधन सिर्फ 35 सीटें पा सका है।

जबकि तेजस्वी यादव लगातार दावा कर रहे थे कि वे ही सरकार बनाएंगे।

यह भी गौर करने लायक है कि रिजल्ट आने के बाद से अब तक तेजस्वी यादव ने मीडिया से बात नहीं की है। जबकि उससे पहले वे लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे।

हालांकि उन्होंने रिजल्ट की शाम ट्वीट करके जनता से पूछा था कि ‘क्या ये चुनाव निष्पक्ष हुए हैं?’

दूसरी ओर, उनके सहयोगी राहुल गांधी ने ट्वीट करके कहा था कि ये चुनाव शुरूआत से ही भेदभावपूर्ण था।

ऐसे में समझा जा सकता है कि बिहार में महागठबंधन ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर ही आगे बढ़ने के संकेत दे रहा है।

पटना में हुई बैठक में राजद के सीनियर नेताओं की मौजूदगी में जीते हुए विधायकों ने तेजस्वी यादव को दोबारा नेता प्रतिपक्ष चुन लिया है।

इस मीटिंग में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद, पूर्व सीएम राबड़ी देवी, मीसा भारती, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद, बाहुबली नेता सूरजभान सिंह समेत सभी सीनियर नेता मौजूद थे।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी यादव ने चुनाव में हारने वाले सभी प्रत्याशियों को विशेष रूप से बुलाया। वे हर उम्मीदवार से फीडबैक लेकर यह समझना चाहते हैं कि जमीनी स्तर पर कहां गलती हुई।

RJD नेता रामानुज यादव ने बताया कि मीटिंग में हर नेता से अलग-अलग बात की गई। तेजस्वी आवास पहुंचे विधायक आलोक मेहता ने कहा, ‘चुनाव में गड़बड़ी हुई है, इसलिए इस तरह का रिजल्ट आया है।’

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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